करियर की सांझ में अश्विन के पास एक और वर्ल्ड कप जीतने का मौक़ा

 रविचंद्रन अश्विन

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

रविचंद्रन अश्विन का वनडे में विकेट नंबर 154. सामने हैं ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर.

अश्विन और वॉर्नर दोनों ही अपने करियर के आख़िरी पड़ाव पर हैं. लेकिन कंपीटिशन के मामले में दोनों किसी से पीछे नहीं और दोनों ही खेल में नई तरकीब आज़माने में माहिर हैं.

वॉर्नर जानते हैं कि बाएं हाथ के बल्लेबाज़ के ख़िलाफ़ अश्विन का औसत और स्ट्राइक रेट दाएं हाथ के बल्लेबाज़ के मुक़ाबले बेहतर है. इसलिए वॉर्नर अश्विन का सामना दाएं हाथ से करने के लिए मुड़ गए. एक गेंद पर उन्होंने स्वीप भी किया और रन भी चुराए. लेकिन तब तक अश्विन अपने दिमाग में नई चाल बुन चुके थे.

इस बार वॉर्नर को विकेट पर तेज़ी से फेंकी गई कैरम बॉल का सामना करना पड़ा. गेंद इतनी सफाई से फेंकी गई थी कि अगर वॉर्नर अश्विन के एक्शन को देख बॉल पकड़ने की कोशिश करते तो बॉल को मिस कर जाते और अगर वो बॉल देख रहे थे तो उन्होंने उनका एक्शन मिस कर दिया.

नतीजा गेंद उनके पैड पर लगी, अश्विन की ज़ोरदार अपील हुई और वॉर्नर वापस पवेलियन में आ गए.

आर अश्विन की गेंदबाज़ी

रविचंद्रन अश्विन

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टेस्ट, वनडे और टी20आई में मिलाकर 700 से ज़्यादा विकेट लेने वाले अश्विन के लिए किसी बल्लेबाज़ को पवैलियन वापस भेजना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस विकेट में कुछ खास था.

मैदान पर कभी भी अपनी भावना व्यक्त ना करने वाले भारतीय कोच राहुल द्रविड़ के होंठों पर भी हल्की-सी संतोष भरी मुस्कान दिखाई दे रही थी.

इंदौर की उस शाम अश्विन ने वॉर्नर के अलावा मार्नस लाबुशान और जॉश इंग्लिस के विकेट भी लिए. भारत के 399 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 29वें ओवर में 217 रनों पर ही सिमट गई जिसमें अश्विन ने 41 रन देकर 3 विकेट का योगदान दिया. आख़िरी बार अश्विन ने जब वनडे में तीन विकेट लिए थे तब साल 2017 का था.

वहीं इंदौर में अगर वॉर्नर का विकेट नायाब था तो लाबुशान को छकाने में भी अश्विन ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी. उन्हें भी अश्विन ने कैरम बॉल से ही आउट किया था, लेकिन बकौल अश्विन ये तीसरी तरह की कैरम बॉल थी जिसे उन्होंने मिडिल फिंगर से ग्रिप किया था और उसे रिलीज़ भी स्लाइडर की तरह खास एंगल पर किया गया था जिसने लाबुशान के स्टंप्स को बिखेर दिया.

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में भी अश्विन की कलात्मकता की तारीफ़ की जा रही थी और अश्विन अपने अगले मिशन के लिए रास्ता बनाते जा रहे थे.

मिशन था – विश्व कप की टीम में जगह बनाना.

इससे पहले मैच में भी अश्विन ने टाईट बॉलिंग की थी और सफलता हासिल की थी. इस सिरीज़ से पहले अश्विन ने पिछले छह साल में सिर्फ दो वनडे मैच खेले थे.

2017 में सेलेक्टर्स ने ये कहना शुरु कर दिया था कि भारतीय वनडे क्रिकेट अश्विन और जडेजा से आगे निकल चुकी है. लेकिन बाद में जडेजा ने तो वनडे में वापसी कर ली थी लेकिन अश्विन के लिए दरवाज़े बंद हो गए थे. वो 2019 की वर्ल्ड कप टीम में भी नहीं थे.

दिन-रात की मेहनत का परिणाम

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लेकिन अश्विन ने कभी हार नहीं मानी. वो लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में अपनी बॉलिंग में वेरिएशंस लाने के लिए दिन-रात एनसीए या दूसरी जगहों पर मेहनत करते रहते थे. उन्होंने तमिलनाडु क्रिकेट संघ के कई-कई मैचों में शिरकत की और बैटिंग और बॉलिंग दोनों पर काम किया. एनसीए में उन्होंने पूर्व भारतीय स्पिनर और कोच साईराज बहुतुले के साथ अपनी स्पिन गेंदबाज़ी को निखारा.

लाबुशान का विकेट लेने के बाद उन्होंने बीसीसीआई को एक इंटरव्यू में बताया किस तरह उन्होंने अपने वेरिएशंस पर काम किया है.

अपनी प्रैक्टिस पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा, "मैंने साईराज के साथ बॉल की ग्रिप और अलग-अलग एंगल्स पर थोड़ा काम किया. मुझे इस बात की सबसे ज़्यादा खुशी है कि मैं बल्लेबाज़ के ज़हन में कन्फ़्यूज़न डालने में कामयाब हो रहा हूं कि गेंद किस तरफ़ मुड़ेगी. इस तरह के स्लाइडर कैरम बॉल में एंगल और रिलीज़ प्वाइंट लगभग पहले जैसा ही रहता है जिससे मैं बल्लेबाज़ को संशय में डाल सकता हूं कि उनके बल्ले से बाहरी किनारा निकलेगा या अंदरूनी किनारा लगेगा. काफी समय से मैं इसपर काम कर रहा था और अब इसे डालने में मैं सफल हो गया हूं.

अश्विन की दिन-रात की मेहनत रंग लाई और बीसीसीई ने गुरुवार शाम घोषणा कर दी कि चोटिल अक्षर पटेल की जगह रविचंद्रन अश्विन को टीम में शामिल कर लिया गया है.

टीम में चयन पर पूर्व खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया

इंडियन क्रिकेट टीम के सदस्य.

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जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा, "ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उन दो मैचों के बाद अश्विन को चुना जाना तय ही था. अक्षर पटेल के लिए दुख हो रहा है लेकिन उन्हें और मौक़े मिलेंगे. भारत ने ऑलराउंड स्किल्स की बजाए बेहतर गेंदबाज़ी को चुना है. अगर हार्दिक अच्छी बॉलिंग कर रहे होंगे तो अश्विन को भी आप पहले इलेवन में देखेंगे."

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले दो मैचों में अश्विन की गेंदबाज़ी देखकर सुनील गावस्कर ने टीम में उनके चुने जाने की वकालत की थी. उन्होंने कहा था, "जिस तरह उन्होंने पहले दो मैचों में बॉलिंग की है, मुझे लगता है कि उन्होंने वर्ल्ड कप का टिकट कटा लिया है."

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने इससे पहले ये सवाल उठाया था कि बोर्ड को वर्ल्ड कप के वक्त ही क्यों अश्विन की याद आती है. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "ये रोचक है कि हर साल वर्ल्ड कप से पहले ऐसा होता है. अगर आप पिछले टी20 विश्व कप को भी देखेंगे तो पाएंगे कि वो वर्ल्ड कप से साल भर पहले से चुने नहीं जाते लेकिन जैसे ही वर्ल्ड कप आता है भारतीय क्रिकेट को अश्विन की याद आ जाती है."

और याद आए भी तो क्यों नहीं?

इस सिरीज़ से पहले एशिया कप में अक्षर पटेल की साधारण बॉलिंग ने भी टीम में अश्विन की जगह पर बहस छेड़ दी थी. श्रीलंका की स्पिन को मददगार पिच पर भी पटेल विकेट लेने में नाकामयाब रहे थे ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि बल्लेबाज़ी को मज़बूत कर कहीं टीम गेंदबाज़ी तो कमज़ोर नहीं कर रही है.

वहीं वर्ल्ड कप की बात करें तो इस बार भारतीय सिलेकटर्स ने टीम में किसी ऑफ़ स्पिनर को चुना ही नहीं था और पटेल के चोटिल होने के बाद टीम में जगह बनी तो अश्विन उसमें फिट आ गए. हालांकि अश्विन के साथ-साथ सिलेक्शन मीटिंग में वॉशिंग्टन सुंदर के नाम पर भी चर्चा हुई. लेकिन जिस तरह अश्विन ने हालिया सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ों को नचाया था, चयनकर्ताओं ने उसे तरजीह दी और बेहतर गेंदबाज़ को टीम में चुना गया.

वैसे बल्ले से भी अश्विन समय-समय पर कारनामे दिखाते आए हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ओपनिंग बल्लेबाज़ के तौर पर की थी और टेस्ट मैच में उनके नाम पांच शतक हैं.

उन्होंने कुछ महीने पहले ये मंशा ज़ाहिर की थी कि वो वर्ल्ड कप की टीम में आना चाहेंगे लेकिन इसके लिए वो उन्हीं चीज़ों पर ध्यान दे रहे हैं जिनपर उनका कंट्रोल है – यानी अश्विन सिर्फ और सिर्फ मेहनत करने की बात कर रहे थे. उन्होंने पिछले दिनों अपनी बैटिंग पर भी बहुत काम किया है और वनडे में हालात के हिसाब से तेज़ और लंबे शॉट्स लगाने की भी खूब प्रैक्टिस की है.

वर्ल्ड कप में स्पिनर की अहमियत

कुलदीप यादव (दाएं) और रवींद्र जडेजा.

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भारतीय पिच और यहां की कंडीशंस में स्पिनर का रोल बेहद अहम हो जाता है. याद कीजिए 2011 का वर्ल्ड कप जो भारत ने जीता था. उस टीम में स्पिनर के रूप में भारत के पास हरभजन और अश्विन के अलावा युवराज सिंह, युसुफ़ पठान, सुरेश रैना, विरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर भी थे.

कई मैचों में तो भारतीय स्पिनर्स ने 30 से भी ज़्यादा ओवर्स की बॉलिंग की थी. ऐसा ही कुछ हमें इस वर्ल्ड कप में देखने को मिल सकता है ख़ासकर पहले हाफ़ में.

2011 का विश्व कप फरवरी-मार्च में खेला गया था. उस वक्त गर्मी बढ़ रही थी जबकि इस बार जैसे वर्ल्ड कप के दिन बढ़ेंगे वैसे ही सर्दी भी क़रीब आती जाएगी. वैसे कम से कम अक्टूबर के महीने में कंडीशंस स्लो गेंदबाज़ी का पक्ष लेगी. अगर हार्दिक पांड्या तीसरे तेज़ गेंदबाज़ की भूमिका निभा लेते हैं तो भारतीय टीम के पास भी तीन स्पिनर्स खिलाने का मौक़ा हासिल होगा. इस टीम के मुख्य स्पिनर कुलदीप यादव हैं, उनका चुना जाना तय है.

वहीं रविंद्र जडेजा भी अपनी बल्लेबाज़ी और फील्डिंग की वजह से टीम में आ जाते हैं. हार्दिक की गेंदबाज़ से रास्ता खुल जाता है रविचंद्रन अश्विन का और वो अपने करियर की इस पड़ाव पर कोई भी मौक़ा हाथ से जाने देना नहीं चाहेंगे.

अश्निन की खासियत

विकेट लेने की खुशी मनाते आर अश्विन.

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अश्विन की खासियत ये है कि वो जितनी तरह से गेंद डाल सकते हैं शायद ही कोई मॉडर्न क्रिकेटर ऐसा कर पाए. ‘दूसरा’ डालने में उन्हें महारत हासिल है, कैरम बॉल के तीन वेरिएशंस वो करा सकते हैं, क्रीज़ के कोने से या स्टंप्स के क़रीब आकर गेंद डालने में वो सक्षम हैं, उनके पास धीमी गेंद भी है और वो तेज़ी से भी बॉल डाल सकते हैं, अगर ऑफ़ स्पिन उनका स्टॉक बॉल है तो लेग ब्रेक डाल कर भी वो बल्लेबाज़ों को छका सकते हैं.

अनेक तरह से गेंद डालने में सफल अश्विन कोशिश करते हैं कि जितना संभव हो वो एक ही अंदाज़ से गेंदबाज़ी करें जिससे बैटर्स ये फ़ैसला ना कर पाए कि गेंद अंदर आएगी या बाहर जाएगी. इसी खासियत का मुजाहिरा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ में किया जिसके सामने नामी-गिरामी बल्लेबाज़ भी नतमस्तक हो गए.

अब बारी वर्ल्ड कप की है. अश्विन भारत के पहले वार्म-अप मैच के लिए गुवाहाटी पंहुच चुके हैं जहां भारत का सामना इंग्लैंड से होगा. अश्विन ने इच्छा ज़ाहिर की थी कि वो एक बार और वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने अपना पहला कदम उठा लिया है.

वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम- रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या (उप-कप्तान), रवींद्र जड़ेजा, रविचंद्रन अश्विन, कुलदीप यादव, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी , मोहम्मद सिराज, जसप्रित बुमराह.

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