टीम में अंदर-बाहर होने वाले अश्विन वर्ल्ड कप में जगह बना पाएंगे?

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
इसी साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले आईसीसी क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का क्या स्वरूप बनेगा इस पर बहस अभी भी जारी है.
भारत ने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सिरीज़ में मिला-जुला प्रदर्शन किया है जिससे टीम की संभावनाओं पर विश्वास मज़बूत नहीं होता दिख रहा है.
टीम के कोच राहुल द्रविड़ समेत कई पूर्व क्रिकेटर कह चुके हैं कि भारतीय टीम में बैलेंस की कमी नज़र आ रही है और कई बार आख़िरी के 3-4 बल्लेबाज़ बैटिंग में फ़िसड्डी मालूम पड़ते हैं.
टीम की कई कमज़ोरियों में एक ये भी है कि बैटिंग क्रम में आख़िरी क्रम के खिलाड़ी बल्ले से भी योगदान नहीं दे पाए हैं.
अगर टीम को ऐसे गेंदबाज़ों की ज़रूरत है जो बैटिंग भी कर पाएं तो एक नाम पर चयनकर्ता ज़रूर चर्चा करेंगे और वो हैं रविचंद्रन अश्विन.
सवाल ये है कि क्या सदाबहार गेंदबाज़ रविचंद्रन अश्विन, जिनके नाम टेस्ट में शतक भी है, वनडे टीम के लिए ज़रूरी हो गए हैं?
विश्व कप शुरू होने में अभी कुछ महीने बाकी हैं, ऐसे में रविचंद्रन अश्विन की टीम में मौजूदगी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

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डेढ़ दशक का शानदार करियर
याद कीजिए 2011 का वर्ल्ड कप जो भारत में ही खेला गया था और जिसे महेंद्र सिंह धोनी की टीम ने जीता था.
उस वर्ल्ड कप में धोनी के छक्के लगाकर जीतने का दृश्य तो अभी भी ताज़ा है, लेकिन उससे कम अहम नहीं हैं नई सफेद गेंद के साथ अश्विन का कई मैचों में भारतीय बॉलिंग की शुरुआत करना.
अश्विन एक बार फिर खबरों की स्पॉटलाइट में हैं – उनके हालिया प्रदर्शन, खुद पर की गई टिप्पणियां और पूर्व खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं के विचारों ने सीमित ओवरों के फॉर्मैट में भी उन्हें शामिल किए जाने को लेकर चल रही बहस को और बढ़ा दिया है.
टेस्ट क्रिकेट में अक्सर अपने कौशल के लिए मशहूर रहे अश्विन ने भारत के विश्व कप अभियान में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन ये भी माना है कि चयन उनके हाथों में नहीं है.
हाल ही में टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "मैंने बहुत पहले ये फ़ैसला कर लिया था कि मुझें ऐसे चीज़ों के बारे मे नहीं सोचना है जिसका होना मेरे हाथों में नहीं है."
"मेरे पास कोई भी अधूरा काम नहीं पड़ा है लेकिन हां मैं एक बार और भारत को वर्ल्ड कप जीतते देखना चाहता हूं, चाहे मैं टीम में रहूं या नहीं."
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार अपनी काबिलियत साबित करने वाले ऑफ स्पिनर ने हाल के दिनों में उम्मीद से ज़्यादा बार खुद को किनारे पाया है.
पिछले लगभग डेढ़ दशक के करियर में अश्विन को कई बार टीम से अचानक ड्रॉप कर दिया जाता है और उसकी एक ही वजह बताई जाती है – टीम का बैलेंस बनाने के लिए उनकी जगह किसी और को चुना गया.

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अश्विन का कॉम्पटीशन
इसी साल जून में जब टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में उन्हें नहीं खिलाया गया तो कई एक्सपर्ट्स को हैरानी हुई.
इसी विरोधी टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने कुछ महीनों पहले बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में सिरीज़ जिताने वाला खेल दिखाया तो और अब इंग्लैंड में उनकी जगह ही नहीं बनी?
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टिप्पणी की, "पिछले कुछ साल में चार पेसर्स ने विदेशी ज़मीन पर भारत को कई जीत दिलाई है. लेकिन हर कप्तान अलग सोचता है – रोहित की अलग सोच है, मैं अलग सोचता हूं. अगर मैं कप्तान होता तो मुझे अश्विन जैसे स्पिनर को टीम से बाहर रखने में बहुत दिक्कत होती.”
उन्होंने उसी मैच में नेथन लॉयन की बॉलिंग को देखते हुए कहा कि 'कौन कहता है कि हरे विकेट पर ऑफ स्पिनर विकेट नहीं ले सकता?'
अश्विन की टीम में किससे प्रतिस्पर्धा है इस बारे में बात करें तो स्पॉटलाइट रवींद्र जडेजा पर ही पड़ती है.
ऑलराउंडर जडेजा ने सभी फॉर्मेटों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और अगर वर्ल्ड कप की टीम के बारे में बात करें तो वो पहले ही अपनी जगह पक्की कर चुके हैं.
जडेजा का हरफनमौला कौशल भारतीय टीम को मज़बूती देता है. वो एक शानदार क्षेत्ररक्षक, एक विश्वसनीय मध्य-क्रम बल्लेबाज़ और विकेट गिराने वाले शक्तिशाली स्पिनर हैं – इन्हीं वजहों से उन्हें टीम में शामिल किया जाता है.
लेकिन अश्विन का कॉम्पटीशन जडेजा से नहीं बल्कि टीम के दूसरे और तीसरे स्पिनर से है.
क्या वो वनडे में अक्षर पटेल से बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं क्योंकि पटेल एक तरह से जडेजा की तरह ही खेलते हैं और उनका विकल्प हो सकते हैं.
वर्ल्ट कप की टीम में वॉशिंगटन सुंदर का होना मुश्किल लग रहा है क्योंकि उन्हें एशियन गेम्स की टीम में शामिल कर लिया गया है और उसे बाद वर्ल्ड कप के मैचों में बहुत कम गैप रहता है.

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चयनकर्ताओं के सामने चुनौती
वहीं युज़वेंद्र चहल और कुलदीप यादव में किसी एक की जगह क्या वो आ सकते हैं क्योंकि वो इन दोनों से बेहतर बैटिंग करते हैं और उन्हें चुनकर टीम की पूंछ छोटी की जा सकती हैं.
अश्विन के साथ दूसरी खासियत ये है कि वो मैच में बॉलिंग की शुरुआत भी कर सकते हैं.
भारत में खेले जा रहे वर्ल्ड कप में धर्मशाला को छोड़कर लगभग सभी पिचों पर तीन स्पिनर खिलाए जा सकते हैं और उनमें एक अश्विन हो यो बिल्कुल संभव हो सकता है.
भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ता अपनी योजनाओं को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं.
कुछ दिनों बाद बेंगलुरु के एनसीए में भारतीय टीम का कैंप लगेगा और यहीं कुछ खिलाड़ियों पर आखिरी फैसला हो सकता है.
माना जाता है कि बीसीसीआई के नए मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर टीम में अश्विन की जगह अहम मानते हैं.
हालांकि विश्व कप की टीम का चयन हमेशा एक चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसमें अनुभव और युवा प्रतिभा का सही मिश्रण खोजने का चैलेंज होता है.
अश्विन टीम में होंगे या नहीं ये उनकी फॉर्म, फिटनेस और टीम के बैलेंस पर चयनकर्ताओं का विचार तय करेगा.
एक ओर जहां चयनकर्ता टीम की अंतिम संरचना पर विचार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फैंस और कई पूर्व क्रिकेटर्स अश्विन को लिए जाने की वकालत कर रहे हैं.
प्रशंसकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी राय व्यक्त की है, जिसमें #AshwinInWorldCup जैसे हैशटैग जोर पकड़ रहे हैं.

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हाल के समय में अश्विन का प्रदर्शन
बीसीसीआई के पूर्व चीफ़ सेलेक्टर एसएसके प्रसाद भी आजकल अश्विन की वकालत कर रहे हैं.
स्टार स्पोर्ट्स टीवी को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि एशिया के कंडीशंस में अश्विन की ज़रूरत टीम को पड़ेगी.
उन्होंने कहा, “वो एक ऐसे गेंदबाज़ हैं जो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ कामयाब हो सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उनकी ज़रूरत पड़ेगी, श्रीलंका के खिलाफ वो घातक हो सकते हैं.”
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अभी तक अश्विन को बाहर किए जाने के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
हाल ही में अश्विन वेस्टइंडीज़ में 2 टेस्ट मैचों में 15 विकेट लेकर सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज़ों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर आ गए है.
वो आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में भी पहले नंबर पर आ गए हैं. लेकिन उन्होंने अपना आखिरी वनडे मैच 21 जनवरी 2022 को खेला था और इस फॉर्मैट में अगर उन्हें चुना जाना है तो वर्ल्ड कप से पहले एशिया कप की टीम में उनका होना ज़रूरी है.
जहां तक अश्विन का सवाल है, उनकी सोच साफ़ है और वो उन बातों पर ध्यान नहीं लगा रहे जिनपर उनका कंट्रोल नहीं है.
अश्विन ने कहा है कि वो अभी सिर्फ़ दिसंबर में होने वाले साउथ अफ्रीका के विरुद्ध सिरीज़ पर ध्यान लगा रहे हैं.
लेकिन पढ़ाई से इंजीनियर और टीम में एक फिलॉस्फ़र की भूमिका निभाने वाले अश्विन को अगर अचानक ही वनडे वर्ल्ड कप में बुला लिया गया तो एक बात तय है – उनकी तैयारी में कोई कमी नज़र नहीं आएगी.
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