विमेंस वर्ल्ड कपः फ़ुटबॉल की दुनिया में बराबरी का परचम लहराने वाली औरतें

कैटरीना गोरी

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इमेज कैप्शन, अपनी दो साल की बेटी हार्पर को गोद में लिए कैटरीना गोरी दर्शकों का अभिवादन करती हुईंं.
    • Author, रेबेका थॉर्न
    • पदनाम, बीबीसी 100 वीमेन

फुटबॉल के महिला वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बीच मैच खत्म होने के बाद कैटरीना गोरी दर्शकों का हाथ हिला कर अभिवादन कर रही थीं. जिस वक़्त वो ऐसा कर रही थीं उस वक्त उनके साथ उनकी दो साल की बेटी हार्पर भी मौजूद थीं.

मैच में पेनाल्टी शूटआउट के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी गोरी ने गोल करने के बाद दर्शकों की ओर देखा और अपने हाथ को झूला झुलाने की तरह घुमाया. ये उनकी दो साल की बेटी हार्पर को किया जाने वाला अभिवादन था.

इसके बाद वो हार्पर को मैदान में ले आईं. दोनों ने एक जैसे जूते पहन रखे थे और दर्शकों का अभिवादन कर रहे थे. दूसरी ओर दर्शक भी फ्रांस पर जीत की खुशी में उनकी ओर देख कर झूम रहे थे.

इस बार के वर्ल्ड कप में कई ऐसी खिलाड़ी खेल रही हैं जिनके बच्चे हैं. इन खिलाड़ियों का मैदान में उतरना ये बताता है कि कैसे शीर्ष स्तर का फुटबॉल खेलते हुई ये खिलाड़ी पैरेंटिंग और खेल के बीच संतुलन बनाए हुए हैं.

ये खिलाड़ी सफल और मज़बूत महिलाओं की छवि पेश कर रही हैं.

ब्राज़ील की लीजेंडरी खिलाड़ी मार्ता ने इन नई रोल मॉडलों की ओर ध्यान खींचा. जब उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हुई तो उन्होंने भावुक विदाई भाषण दिया.

उन्होंने कहा, ’’जब हमने फुटबॉल खेलना शुरू किया तो महिला फुटबॉल में उनका कोई आदर्श नहीं था. लेकिन आज 20 साल बाद हम लोग दुनिया भर की महिलाओं के लिए नज़ीर बन चुके हैं. ये सिर्फ फुटबॉल को लेकर नहीं है.’’

दुनिया भर में लगभग दो अरब लोग महिलाओं का फुटबॉल वर्ल्ड कप देख रहे हैं.

इस टूर्नामेंट के दौरान महिला खिलाड़ियों ने उन मुद्दों को रेखांकित किया है, जो महिलाओं को प्रभावित करते हैं, उन महिलाओं को जो दुनिया भर में अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं.

ब्रिटेन में नॉटिंघन ट्रेंट यूनिवर्सिटी में महिला खेलों के समाज विज्ञान विषय की लेक्चरर अली बोवेस के अनुसार, “खेल समाज का एक छोटा हिस्सा होता है.”

वो कहती हैं, “अगर आप खेल से लैंगिक असमानता दूर कर ले गए तो आप बाकी दुनिया में लैंगिक असमानता की समस्या को ख़त्म करने की ओर कुछ कदम आगे बढ़ा रहे हैं.”

वो मानती हैं कि महिला फ़ुटबॉल में बदलाव समाज के दूसरे हिस्सों में भी दिखेगा.

वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में 17 गोल करने वाली मार्ता.

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इमेज कैप्शन, मार्ता 17 गोल के साथ वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे बड़ी स्कोरर हैं.

महिला फ़ुटबॉलरों की सफलता

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दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें महिला फ़ुटबॉलरों ने कुछ प्रगति की है. वो है मातृत्व लाभ और समान वेतन.

ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ़ डरहम में जेंडर, स्पोर्ट और ग़ैरबराबरी पर शोधकर्ता स्टैसी पोप के अनुसार, “खिलाड़ियों से भी उम्मीद की जाती है कि वो या तो मातृत्व चुनें या अपना खेल कैरियर.”

“ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खेल को कैरियर के विकल्प के रूप में चुनना असल में पुरुष मॉडल पर आधारित होता है और लैंगिक भूमिकाएं अभी भी पुरुषों को आजीविका कमाने वाले या सुविधाएं मुहैया कराने वाले और महिलाओं को बच्चे पालने और मातृत्व से जोड़ती हैं.”

लेकिन आज शीर्ष महिला खिलाड़ी नए नियम की इबारत लिख रही हैं. इस साल के विश्व कप में एक और यादगार पल आया जब अमेरिकी स्टार एलेक्स मार्गन ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें अपनी तीन साल की बेटी से वीडियो कॉल पर बात करनी थी.

स्पेन की इरेनी पैरेडिस अपने साथ अपने बेटे को ऑस्ट्रेलिया लेकर आई थीं. फ़ीफ़ा के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “जब आपका बच्चा बहुत छोटा हो तो आपको उसकी ज़रूरत होती है, लेकिन वो भी आपके पास रहना चाहता है.”

आयरलैंड की आइने ओ’गोर्मैन, चीन की झांग ज़िन और जमैका की तीन बच्चों की मां छेयना मैथ्यूज़ जैसे बड़े नामों के साथ पैरेडिस ने खुले तौर पर इस करियर से जुड़ी चुनौतियों और विकल्पों पर बात की.

आइसलैंड कैप्टन सारा बियर्क गुनार्सडॉटिर मातृत्व अधिकार का संघर्ष करने वाली अगुवा खिलाड़ी रही हैं.

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इमेज कैप्शन, आइसलैंड कैप्टन सारा बियर्क गुनार्सडॉटिर मातृत्व अधिकार का संघर्ष करने वाली अगुवा खिलाड़ी रही हैं.

बोवेस के मुताबिक, अतीत में महिला खिलाड़ियों को आमतौर पर मातृत्व के अधिकार नहीं होते थे क्योंकि फ़ुटबॉल ऐतिहासिक रूप से पुरुष केंद्रित खेल रहा है.

वो पूछती हैं, “पुरुषों ने क्यों सोचा होगा कि महिलाएं, जो अनुबंध में हैं, उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान रोज़गार की सुरक्षा मिलनी चाहिए?”

जनवरी 2021 से पहले ऐसा नहीं था. लेकिन इंटरनेशनल फ़ुटबॉल नियामक निकाय फ़ीफ़ा ने फ़ेडरेशनों के लिए एक बाध्यकारी मातृत्व क़ानून लागू किया, जिसके तहत प्रेग्नेंसी के दौरान खिलाड़ियों को पूरी सैलरी और 14 हफ़्ते की छुट्टी देने का प्रावधान किया गया. मातृत्व अवकाश के दौरान उन्हें सैलरी का कम से कम दो तिहाई भुगतान करना अनिवार्य होगा.

इस कदम के बावजूद, कुछ खिलाड़ियों को इस बात के लिए संघर्ष जारी रखना पड़ा कि क्लब इन नियमों को मानें.

एक ऐतिहासिक मामले में, फ़ीफ़ा मातृत्व नियमों के तहत आइसलैंड की कैप्टन सारा बियर्क गुनार्सडॉटिर दावा जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं. प्रेग्नेंसी के दौरान उनके पूर्व क्लब लियोन ने उनकी पूरी सैलरी नहीं दी थी.

जब 2022 में फैसला आया तो उन्होंने कहा, “एक वर्कर, एक महिला और एक इंसान होने के नाते ये मेरा अधिकार है.”

प्लेयर्स ट्रिब्यून में उन्होंने लिखा, “जीत मुझसे भी बड़ी लगी. ऐसा लगा कि उन सभी खिलाड़ियों के लिए ये एक वित्तीय सुरक्षा की गारंटी है जो अपने करियर के दौरान बच्चा करना चाहती हैं.”

(छेयना मैथ्यूज़ कहती हैं कि जमैका की टीम को वर्ल्ड कप में जाने के लिए खुद ही पैसों का इंतज़ाम करना होता था.

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इमेज कैप्शन, छेयना मैथ्यूज़ कहती हैं कि जमैका की टीम को वर्ल्ड कप में जाने के लिए खुद ही पैसों का इंतज़ाम करना होता था.

समान वेतन

एक और बात में प्रगति हुई, और वो है- भुगतान. हालांकि अभी भी समान मेहनताना दूर की कौड़ी बनी हुई है.

इस साल पहली बार महिला खिलाड़ियों को, टीम की सफलता के आधार पर पुरस्कार राशि का एक हिस्सा देने की गारंटी दी गई.

हर खिलाड़ी के लिए यह राशि 30,000 डॉलर से लेकर 2,70,000 डॉलर तक के बीच हो सकती है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतियोगिता में वे कहां तक पहुंचते हैं.

संयुक्त राष्ट्र वुमन ने फ़ीफ़ा से कहा है कि वो और आगे बढ़े और अगले वर्ल्ड कप तक पुरस्कार राशि को बराबर करे.

महिलाओं की टीम के लिए पुरस्कार राशि 10.9 करोड़ डॉलर है जबकि क़तर 2022 में पुरुष टीम को 43.7 करोड़ डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई थी.

फ़ीफ़ा के अध्यक्ष जियानी इनफ़ंटीनो ने कहा था कि ‘हम चाहते हैं कि 2027 तक समान वेतन की गारंटी दे दी जाए.’

संयुक्त राष्ट्र वुमंस की स्पोर्ट्स मामलों की मुखिया जेनिफ़र कूपर के अनुसार, “प्रायोजकों और प्रसारकों को भी आगे बढ़ने की ज़रूरत होगी. महिला फ़ुटबॉलरों के लिए समान वेतन को हक़ीक़त में बदलने में राष्ट्रीय फ़ेडरेशनों की भी एक बड़ी भूमिका है.”

हाल ही में दुनिया के प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉलरों की यूनियन फ़िफ़प्रो की ओर से आई एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेहनताने, मेडिकल निगरानी और उपयुक्त ट्रेनिंग सेंटर में कमी दुनिया की शीर्ष महिला फ़ुटबॉलरों को ख़तरे में डाल रहा है.

जमैका की खिलाड़ी छेयना मैथ्यूज़ ने खुलासा किया कि उनके क्लब की टीम की एक सदस्य की मां ने एक लाख डॉलर इकट्ठा करने के लिए क्राउड फंडिंग शुरू की थी ताकि ‘रीगेज गर्ल्ज़’ इस साल के टूर्नामेंट में हिस्सा ले सके.

एक खुली चिट्ठी में खिलाड़ियों ने कहा कि फ़ेडरेशन से उन्हें कोई ख़ास मदद नहीं मिली और पोषण और पर्याप्त संसाधन न मिलने की चिंता ज़ाहिर की. उन्होंने ‘सिस्टम में तत्काल बदलाव’ की गुहार लगाई.

इसके जवाब में जमैका के फ़ेडरेशन ने कहा कि वो मानता है कि चीज़ें व्यवस्थित तरीक़े से नहीं की गईं और वो “इसे हल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.”

नॉर्वे की खिलाड़ी एडा हेगरबर्ग ने काम के ख़राब हालात को लेकर कार्यवाही करने का मन बनाया.

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इमेज कैप्शन, नॉर्वे की खिलाड़ी एडा हेगरबर्ग ने काम के ख़राब हालात को लेकर कार्यवाही करने का फैसला किया.

आवाज़ उठाने वाली महिला खिलाड़ी

2016 में बकाया भत्ता और बोनस के भुगतान की मांग को लेकर नाइजीरिया की टीम होटल के सामने ही धरने पर बैठ गई थी.

इसके बाद 2017 में नॉर्वे की खिलाड़ी एडा हेगरबर्ग ने वर्ल्ड कप का बहिष्कार किया था. उनका आरोप था कि महिला खिलाड़ियों को ‘उचित सम्मान’ नहीं दिया गया और उन्होंने ‘सूट बूट वाले पुरुषों’ की आलोचना की.

अमेरिकी फ़ुटबॉलरों ने 2019 में अपनी टीम के मैनेजमेंट के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की. उन्होंने आरोप लगाया कि बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद महिला टीम को ‘लगातार पुरुष टीम के मुकाबले कम मेहनताना’ दिया जाता रहा था.

अमेरिका ने चार बार वुमंस वर्ल्ड कप जीता है, जबकि पुरुषों की टीम का 1930 के बाद से सबसे उम्दा प्रदर्शन तीसरा स्थान रहा है.

आखिरकार अमेरिका की नेशनल खिलाड़ियों को पिछले साल फ़रवरी में 2.4 करोड़ डॉलर का भुगतान किया गया और साथ ही पुरुषों और महिला खिलाड़ियों के वेतन समान करने का वादा भी किया गया.

फ़िफ़प्रो यूनियन में स्ट्रेटजी एंड रिसर्च के प्रमुख एलेक्स कल्विन के अनुसार, ये सिर्फ समान वेतन की मांग का मामला नहीं है.

वो कहती हैं, “समान वेतन अक्सर अन्य भेदभाव को छिपा देता है. महिला खिलाड़ियों को मेहनताने वाले छोटे अनुबंध दिए जाते हैं जो कि उनके जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं होता.”

बोवेस का कहना है, “बेहतर हालात के लिए खिलाड़ियों का संघर्ष अन्य महिलाओं को अपनी आवाज़ बुलंद करने या खुल कर बोलने का साहस देता है.”

फ़ुटबॉल खिलाड़ियों के अनुभव से अन्य महिलाओं को भावनात्मक और यौन उत्पीड़न जैसे अन्य मुद्दों पर बोलने का आत्मविश्वास भी मिलता है.

यूएस नेशनल लीग के मामले में एक जांच ने उदाहरण पेश किया कि कैसे महिलाओं ने एक बड़ी संस्था और अधिकारों के दुरुपयोग के ख़िलाफ सफल लड़ाई लड़ी.

(समान मेहनताने को लेकर अमेरिकी खिलाड़ी मेगान (सबसे दाएं) सबसे मुखर खिलाड़ी रही हैं और इसके बदले उन्हें अपमान सहने पड़े.

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इमेज कैप्शन, समान मेहनताने को लेकर अमेरिकी खिलाड़ी मेगान (सबसे दाएं) सबसे मुखर खिलाड़ी रही हैं और इसके बदले उन्हें अपमान सहने पड़े.

अमेरिकी खिलाड़ी मेगान

यूनिवर्सिटी ऑफ़ डरहम की एक रिसर्च दिखाती है कि पिच के बाहर संघर्षों में प्रशंसक खिलाड़ियों के पक्ष में खड़े रहे.

2019 वर्ल्ड कप के दौरान प्रशंसकों ने कहा कि उन्होंने खुद को समाज में बराबरी के लिए संघर्ष करने वालों में शामिल पाया है.

इस अध्ययन की सह लेखिका स्टैसी पोप ने बीबीसी 100 वुमन को बताया, “हमारे अध्ययन में शामिल प्रशंसकों का तर्क था कि समस्याओं का सामना कर रहे खिलाड़ियों के बोलने का मतलब है कि इसका लैंगिक समानता पर असर होगा और ये व्यापक तौर पर समाज में मौजूद सेक्सिज़्म को कम करने और अन्य बाधाओं को ख़त्म करने में मददगार होगा.”

लेकिन बोवेस का मानना है कि जब शीर्ष खिलाड़ी बोलते हैं तो इसकी उन्हें निजी तौर पर क़ीमत चुकानी पड़ती है.

वो कहती हैं, “उन पर बलि का बकरा बनाए जाने या मज़ाक उड़ाए जाने का ख़तरा होता है.”

स्टार मेरिकी खिलाड़ी मेगन रैपिनॉय और डोनॉल्ड ट्रंप के बीच चले लंबे विवाद में एक नया ट्विस्ट तब आया जब वर्ल्ड कप में टीम की जल्दी विदाई के बाद पूर्व राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, “समान असफलता. नाइस शॉट मेगन, अमेरिका नर्क में जा रहा है.”

वोबेस कहती हैं, “खिलाड़ियों के लिए ये बहुत संभल कर चलने जैसा होता है. रोल मॉडल होना एक बड़ी ज़िम्मेदारी होती है.”

“इन महिलाओं से उम्मीद करना कि हर समय वो हर भूमिका निभाएं और अगली पीढ़ी को प्रेरित करें, लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करें और फ़ुटबॉल खेलें और संभवतया दूसरी नौकरी भी करें क्योंकि उन्हें इतना पैसा तो मिलता नहीं....इन खिलाड़ियों से इतनी उम्मीद करना ठीक नहीं. लेकिन कोई इसे कोई और भी करने नहीं जा रहा.”

(माई कनाने का अतिरिक्त शोध)

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