प्रिया मलिक: हरियाणा की एक और महिला खिलाड़ी ने कुश्ती में दिखाया दम

प्रिया मलिक

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय पहलवान प्रिया मलिक ने नई बुलंदियों को छू लिया है. वे अम्मान में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं.

ये गौरव पाने वाली वे सिर्फ़ दूसरी भारतीय महिला पहलवान हैं. इससे पहले अंतिम पंघाल स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहीं थीं.

प्रिया की इस उपलब्धि के मायने इसलिए और बढ़ जाते हैं, क्योंकि उनकी बाईं आँख के ऊपर कट लगने की वजह से दो बार मुक़ाबला रोका गया, क्योंकि इस कट से ख़ून बह रहा था.

लेकिन ख़ून का बहना भी प्रिया को मकसद से डिगा नहीं पाया और वे आख़िर में जर्मन पहलवान लौरा सेलिव कुहेन को 5-0 अंकों से फ़तह करने में सफल हो गईं.

इस तरह उन्होंने 76 किलो वर्ग के स्वर्ण पर क़ब्ज़ा जमा लिया.

प्रिया को बिजली की तेज़ी से दांव लगाने वाली पहलवान के रूप में जाना जाता है.

इसका उनकी जर्मन प्रतिद्वंद्वी के पास कोई जवाब नहीं था. प्रिया मुक़ाबले में आँख के ऊपर कट लगने के कारण ख़ून निकलने से भी विचलित नहीं हुईं और मुक़ाबले में पूरा दबदबा बनाए रखा और जर्मन पहलवान को एक अंक तक बनाने का मौक़ा नहीं दिया.

प्रिया मलिक

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बाबा की प्रेरणा से बनी हैं पहलवान

प्रिया मलिक का वैसे तो पूरा घर पहलवानी से ताल्लुक़ रखता है. पिता जयभगवान ख़ुद पहलवान हैं और वो सर्विसेज टीम में शामिल रहे हैं.

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वहीं चाचा सेना टीम के क्वालिफ़ाइड कोच हैं, लेकिन प्रिया को पहलवान बनाने में बाबा पृथ्वी सिंह की अहम भूमिका है.

बाबा चाहते थे कि प्रिया कुश्ती को अपनाएँ और शुरुआत में उन्होंने ही उन्हें प्रशिक्षित भी किया.

सेना में हवलदार के पद से रिटायर होने वाले पिता जयभगवान कहते हैं, "प्रिया पढ़ाई में भी अच्छी रही है, इसलिए शुरुआत में मैं चाहता था कि वह पढ़ाई पर ही फ़ोकस करे. लेकिन मेरे पिता चाहते थे कि वे कुश्ती को अपनाएँ. बाबा की इच्छा की वजह से वे पहलवानी में आ गई."

प्रिया ने जब 2017 में कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की और इस साल ही अपने जौहर दिखाने शुरू कर दिए. उन्होंने जब पहली बार राष्ट्रीय आयु वर्ग चैंपियनशिप में पदक जीता तो बाबा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

बाबा ने अपनी नातिन को जिस तरह का पहलवान बनाने की सोची थी, वैसी पहलवान जब वह बनीं, तो बाबा इस उपलब्धि को देखने के लिए नहीं थे.

क्योंकि तब तक उनका निधन हो चुका था.

प्रिया ने अपने करियर की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता कैडेट विश्व चैंपियनशिप में हासिल की.

प्रिया ने विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप के 73 किग्रा वर्ग में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीतकर बाबा का सपना तो साकार कर दिया, लेकिन इस सफलता को देखने के लिए बाबा मौजूद नहीं थे, क्योंकि उनका एक साल पहले ही दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.

प्रिया मलिक का परिवार
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प्रिया को गाँव की अंशु से मिली प्रेरणा

हरियाणा के गाँवों में कुश्ती ख़ासी लोकप्रिय है और जींद ज़िले का निदानी गाँव भी इससे अछूता नहीं है.

इस गाँव की अंशु ने कुश्ती में ख़ासा नाम कमाया है. उसे देखकर ही पृथ्वी सिंह चाहते थे कि प्रिया भी कुश्ती को अपनाएं.

शुरुआत में पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई में अच्छी होने की वजह से इसे ही अपनाएँ. लेकिन उन्होंने अपने पिता की इच्छा का आदर करके प्रिया को पहलवान बनाने में भरपूर मेहनत की.

आमतौर पर पहलवानी करने वालों का शिक्षा से ख़ास नाता कम ही रहता है. लेकिन अब माहौल बदला है और प्रिया भी इस बदले माहौल का उदाहरण है.

उन्होंने चौधरी भरत सिंह स्कूल से शुरुआती शिक्षा पाने के बाद स्नातक की शिक्षा हासिल की है. पिता तो चाहते थे कि वे शिक्षा के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाएँ.

इसकी वजह उनका पढ़ाई में बहुत अच्छा होना था. लेकिन वे अपने पिता पृथ्वी सिंह की इच्छा के आगे इस इरादे से हट गए.

जय भगवान ने प्रिया को कुश्ती में सही दिशा देने के इरादे से अपने गाँव निदानी के चौधरी भरत सिंह स्कूल में भर्ती करा दिया.

असल में बाबा पृथ्वी सिंह और पिता जय भगवान दोनों ने अंशु को देखकर ही प्रिया को पहलवान बनाने का इरादा बनाया.

इस स्कूल में भर्ती होने के बाद उनके कुश्ती के करियर को सही शेप मिलनी शुरू हो गई. अंशु मलिक शुरुआती कोच भी रहीं.

वे ख़ुद भी 2017 की विश्व कैडेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं.

भारतीय पहलवान प्रिया मलिक ने विश्व कैडेट कुश्ती चैम्पियनशिप 2021 में स्वर्ण पदक जीता

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जब ओलंपिक पदक के लिए मिलने लगी बधाइयाँ

साल 2021 में आयोजित टोक्यो ओलंपिक के दौरान ही बुडापेस्ट में विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप का आयोजन हुआ.

टोक्यो में वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू के रजत पदक जीतने के अगले ही दिन प्रिया के कैडेट कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने की ख़बर आई.

देश के खेल प्रेमियों ने बिना यह समझे कि प्रिया की सफलता कैडेट चैंपियनशिप में है, उन्हें ओलंपिक में सफलता पाने के लिए सोशल मीडिया पर बधाइयाँ देना शुरू कर दिया.

इस पर प्रिया ने कहा था- मैं चाहती हूँ कि देश के खेल प्रेमियों की इन उम्मीदों को वह अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में साकार कर दे.

सीनियर स्तर पर परचम लहराने की शुरुआत ऐसे हुई

प्रिया मलिक के सीनियर वर्ग में ग्रेजुएशन का ये साल है.

उन्होंने कज़ाख़्तान के अस्तान में हुई एशियाई चैंपियनशिप के 76 किग्रा वर्ग में भाग लेकर सीनियर स्तर पर अपनी किस्मत आज़माना शुरू किया.

वे पहले ही प्रयास में कांस्य पदक जीतकर अपनी छाप छोड़ने में सफल हो गई. इसके बाद अब अंडर-20 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने से यह तो साफ़ हो गया है कि वे अब अगले साल होने वाले पेरिस ओलंपिक में भाग लेने की प्रबल दावेदार बन गई हैं.

पिता ने इन सफलताओं के बाद कहा कि ये ओलंपिक क्वालिफाइंग वाला साल है और इस साल इन सफलताओं के मिलने से मनोबल ऊँचा होना लाजिमी है.

अब उनकी निगाह सितंबर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने पर रहेगी.

असल में इस बार की विश्व चैंपियनशिप का ओलंपिक क्वालिफायर के रूप में आयोजन होगा.

सही मायनों में प्रिया ने साल 2021 से ही अपनी प्रतिभा के दर्शन कराने शुरू कर दिए थे.

इस साल वे कुछ आयु वर्ग चैंपियनशिपों में पदक जीतने में सफल रहीं.

लेकिन साल 2022 ने उनकी किस्मत तय करनी शुरू कर दी. उन्होंने साल की शुरुआत अंडर-17 विश्व और एशियाई चैंपियनशिपों में स्वर्ण पदक जीतने से शुरुआत की और फिर अंडर-20 विश्व और एशियाई चैंपियनशिपों में रजत पदक जीतकर यह संकेत दे दिया कि आने वाला समय उनका है.

इसके बाद सीनियर वर्ग में ग्रेजुएशन होने पर अपने शानदार प्रदर्शन से वे यह अहसास दिलाने में सफल रहीं हैं कि वे अगर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर सकीं, तो वे पोडियम पर चढ़ने का माद्दा रखती हैं.

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