टोक्यो ओलंपिक डायरी: जापान से क्या सीख सकती है दुनिया?

ओरिगामी

इमेज स्रोत, Getty Images / Catherine Falls Commercial

    • Author, जाह्नवी मूले
    • पदनाम, बीबीसी मराठी

बचपन में क्या कभी आपने काग़ज़ की नाव बनाकर बारिश में उसे चलाया है? या फिर अपनी नोटबुक से पेज निकालकर आपने काग़ज़ का हवाई जहाज़ बनाकर उसे अपने सहपाठियों की तरफ़ फेंकते हुए उड़ाया है?

अगर आपने ऐसा किया है तो निश्चित तौर पर ओरिगामी के बारे में जानते होंगे. यह एक ऐसी कला है जिसमें काग़ज़ को मोड़कर अलग-अलग चीज़ें बनाई जाती हैं.

टोक्यो में मुझे कई जगह ओरिगामी की झलक मिल जाती है. कभी स्वागत करने वाले बोर्ड पर, तो कभी ऑनलाइन मंगाए गए खाने के साथ, तो कभी प्रेस सेंटर के कैफ़े में, जहां कई बार हम अपनी चॉपस्टिक ओरिगामी से बनी चीज़ पर रखते हैं.

एक दिन मैं होटल की लॉबी से कुछ सामान ले रही थी, तब वहां डेस्क के पीछे एक लड़के को मैंने ओरिगामी के ज़रिए फूल बनाते देखा.

ओरिगामी

इमेज स्रोत, Janhavee Moole

जब उसने मुझे देखा तो जल्दी से उठा और जापानी परंपरागत तरीके से अभिवादन किया.

मंगलवार को मैं अपनी रोज़ाना वाली कोविड टेस्ट के लिए गई तो जहां मुझे सैंपल रखना था वहां मैंने काग़ज़ से बने पक्षी, पंखे, कछुए और नावों को देखा. वहां दो लड़कियां बैठी हुई थीं जो रद्दी जैसे काग़जों का इस्तेमाल करते हुए ये सब बना रही थीं.

मैंने काग़ज से बनी उन कलाकृतियों को ग़ौर से देखा और पक्षियों को क्यूट बताया. दोनों लड़कियों ने शीशे के उस पार से मास्क के अंदर से ही कहा- अरिगातो यानी थैंक्यू.

टोक्यो ओलंपिक

मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने ये चिड़ियां क्यों बनाई तो उनमें से एक ने कहा, "नहीं बनाते तो हमें ये काग़ज़ फेंकना पड़ता."

ये कितना शानदार है, नहीं? यहां कचरे का भी बेहतर इस्तेमाल करने पर ज़ोर है. यहां यह केवल नारा भर नहीं है, बल्कि जापानी संस्कृति में इसे मंत्र की तरह अपनाया गया है. मैंने पहले इसके बारे में पढ़ा था, अब मैंने ख़ुद से इस संस्कृति को देखा.

जापान मूल रूप में एक प्रायद्वीपीय देश है. यहां बेहद सीमित संसाधन उपलब्ध हैं लिहाज़ा यहां यूज़ एंड थ्रो वाली जीवनशैली नहीं है. यहां लोग हर सामान का लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं और इसके लिए यहां एक ख़ास शब्द है - मौत्तेनाई.

टोक्यो ओलंपिक

इमेज स्रोत, Wu Shí Lán Bang Hé / EyeEm

रिसाइक्लिंग को बढ़ावा

कीनिया की पर्यावरणविद और नोबल पुरस्कार विजेता वांगारी माथाई इस शब्द से जुड़े विचार को हमेशा प्रमोट करती रही हैं. उनका मानना है कि इस विचार को दुनिया भर में अपनाया जाना चाहिए और सामानों के फिर से इस्तेमाल और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए.

टोक्यो ओलंपिक के आयोजकों ने भी इस विचार को बढ़ावा देने का वादा किया था, इसलिए यहां कई चीज़ें ऐसी नज़र आती हैं जो या तो रिसाइक्लिंग से बनी हैं या फिर उसकी रिसाइक्लिंग हो सकती है.

यहां पार्टिशन की दीवारें कार्डबोर्ड की बनी हैं, एथलीट विलेज में खिलाड़ियों के बेड भी कार्डबोर्ड के बने हुए हैं. यहां लोग प्लास्टिक के कप के बदले काग़ज़ के बने कपों का इस्तेमाल करते हैं.

ओरिगामी

इमेज स्रोत, Janhavee Moole

सासाकि की कहानी

इस ओलंपिक में विजेताओं को मिलने वाला मेडल भी धातुओं की रिसाइक्लिंग से तैयार किया गया है.

मैं कहीं भी जाती हूं, अपना स्टील का बोतल साथ रखती हूं ताकि प्लास्टिक के कप और बोतल ख़रीदना ना पड़े. ऐसे में जापान, एकदम अपनी तरह का महसूस होता है.

हालांकि कोविड के संकट के समय में जापान में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ा है. ऐसे में मुझे लगता है कि क्या जापान इन प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग कर पाएगा, इसका जवाब हमें ओलंपिक के आयोजन के बाद ही मिल पाएगा.

ओरिगामी

इमेज स्रोत, Getty Images

ओरिगामी की बात करते हुए, मुझे साडाको सासाकि की कहानी याद आ गयी. साडाको जब महज दो साल की थी तब अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था.

इसके दस साल बाद सासाकि की मौत ल्यूकिमिया से हो गयी. जब वह अस्पताल में थी तब उसने ओरिगामी से एक हज़ार सारस बनाना तय किया.

सासाकि को भरोसा था कि अगर कोई ओरिगामी से एक हज़ार सारस बना ले, तो उसकी जो भी इच्छा होगी वह पूरी होगी. लेकिन एक हज़ार सारस बनाने से पहले उसकी मौत हो गई. उसकी मौत के बाद उसके दोस्तों ने मिलकर उसका अधूरा काम पूरा किया.

इसके बाद ही, जापान में ओरिगामी सारस को शांति का प्रतीक माना जाने लगा. वैसे ही जैसे ओलंपिक खेलों को शांति का प्रतीक माना जाता है.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)