बुमराह की वापसी से क्या वर्ल्ड कप में भारत की उम्मीद बढ़ गई है?

जसप्रीत बुमराह

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

पिछले एक साल में भारतीय टीम को जिस खिलाड़ी की कमी सबसे अधिक महसूस हुई है वो हैं जसप्रीत बुमराह.

तेज़ गेंदबाज़ बुमराह ने अपना आख़िरी अंतरराष्ट्रीय मैच पिछले साल 22 सितंबर को खेला था, जिसमें उन्होंने बिना कोई विकेट लिए 50 रन ख़र्च किए थे.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उस टी20 सिरीज़ के बाद बुमराह चोट की वजह से टीम से बाहर हो गए थे.

11 महीने के इस अंतराल में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी सबसे ज़्यादा दबाव में नज़र आई. यहाँ तक की भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट मैच से पहले ये तक कह डाला कि भारतीय पेस अटैक में दिक़्क़तें हैं.

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “पिछले कई महीनों से हम बुमराह के बिना खेल रहे हैं और हमें तेज़ गेंदबाज़ों को रोटेट करना पड़ा रहा है लेकिन हमारे पास फ़ास्ट बोलर्स की लाइन नहीं लगी हुई है.”

इस वक़्त भारतीय टीम को पेस अटैक बैलेंस करने में जो मुश्किलें आ रहीं है वो बुमराह की वापसी से सुलझ सकती है.

29 साल के बुमराह के पास अभी कई साल और क्रिकेट के लिए बाक़ी है इसलिए आने वाली आयरलैंड के ख़िलाफ़ टी20 सिरीज़ में उनकी वापसी का भारतीय टीम ने स्वागत किया है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआई ने अपनी प्रेस रिलीज़ में बताया कि जसप्रीत बुमराह आयरलैंड के ख़िलाफ़ होने वाली टी20 सिरीज़ में ना सिर्फ़ भारतीय टीम में वापसी करेंगे बल्कि वो टीम की अगुवाई भी करेंगे.

जसप्रीत बुमराह

फ़िटनेस जूझते रहे बुमराह

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बुमराह 11 महीने बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे हैं. इस दौरान मार्च में उन्होंने अपनी पीठ की सर्जरी करवाई और लंबे वक़्त तक बेंगलुरु में स्थित नेशनल क्रिकेट ऐकडेमी में अपनी फ़िटनेस वापस लाने के लिए अभ्यास किया है.

भारतीय टीम को उम्मीद है कि बुमराह फ़ुल फिटनेस के साथ टीम में वापस आएंगे, लेकिन सच्चाई ये भी है कि बुमराह की ये चोट कोई नई नहीं है और पिछले चार साल से वो फ़िटनेस की समस्याओं से जूझ रहे हैं.

2018 के इंग्लैंड दौरे पर उन्हें अंगूठे में लगी चोट की वजह से तीन हफ़्तों तक टीम से दूर रहना पड़ा था.

टी20, वनडे और टेस्ट मैच – सभी फॉर्मेट खेलेने वाले खिलाड़ी बुमराह साल 2019 के वेस्ट इंडीज़ दौरे के बाद उनकी पीठ में दर्द महसूस हआ और जांच के बाद पाया गया कि उनकी पीठ के निचले हिस्से में स्ट्रेस फ्रैक्चर है, जिसके बाद उन्हें भारत में अपना पहला टेस्ट मैच खेलने से रोक दिया गया.

वो लगभग तीन महीनों तक भारतीय टीम से बाहर रहे और फिर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 2020 की सिरीज़ में उनकी वापसी हुई.

तीसरी बार टीम से बाहर होने की बदकिस्मती उनके सामने ऑस्ट्रेलिया में पेश आई, जब 2021 सिडनी टेस्ट में उन्हें फ़ील्डिंग के दौरान उन्हें पेट में चोट लग गई. उन्हें ब्रिसबेन में खेले गए आख़िरी टेस्ट मैच में चोट से बचाव के लिए बिठाया गया.

ये वही टेस्ट मैच था, जिसमें भारत के कई गेंदबाज़ चोट की वजह से बाहर थे और एक ग़ैरअनुभवी बोलिंग यूनिट ने कंगारुओं को मात दी थी. ख़ैर तीन हफ़्ते बाद इंग्लैंड के विरुद्ध सिरीज़ में बुमराह की वापसी हो गई थी.

बुमराह की सबसे बड़ी मुश्किल 2022 अगस्त में आई जब पीठ में दर्द को पहले मामूली दर्द माना गया और उन्हें एशिया कप की टीम से बाहर रखते हुए चार हफ्तों का आराम दिया गया.

वापसी के बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 सिरीज़ के दो मैचों में खेलने के बाद उन्हें फिर चोट की वजह से टीम से बाहर किया गया और लंबे टेस्ट के बाद उन्हें सर्जरी की सलाह दी गई जिसकी वजह से वो 11 महीने टीम से बाहर रहे.

कपिल देव

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कपिल देव का ग़ुस्सा फूटा

आख़िर क्या वजह है कि बुमराह और कई भारतीय गेंदबाज़ लगातार फ़िटनेस की समस्या से जूझते आ रहे हैं. क्या लगातार साल भर क्रिकेट खेलने का भार उनपर भारी पड़ रहा है और बोर्ड उन्हें ठीक से रोटेट नहीं कर पा रही है?

1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव ने माना कि लगातार क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों पर दबाव पड़ रहा है लेकिन देश के बजाए आईपीएल को चुनना भी ठीक नहीं है.

द वीक को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “आजकल खिलाड़ी साल में 10 महीने खेल रहे हैं इसलिए उन्होंने थोड़ी छूट दी जा सकती है लेकिन खिलाड़ियों को अपना देखभाल भी ख़ुद ही करना है. आईपीएल महान है लेकिन वो आपको ख़राब भी कर सकता है क्योंकि थोड़ी चोट आ जाए तो भी आप वहां खेलते हैं लेकिन थोड़ी चोट में आप भारतीय टीम से बाहर बैठ जाते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए और आपको ब्रेक लेना चाहिए.”

जसप्रीत बुमराह के ऊपर उन्होंने ये भी कहा कि अगर वो आगामी वर्ल्ड कप में भारत के लिए उपलब्ध नहीं रहते हैं तो हमें लगेगा कि उनपर समय बर्बाद किया गया है.

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बुमराह की अनुपस्थिति में प्रदर्शन

बुमराह की ग़ैर मौजूदगी में पेस बोलिंग का नेतृत्व कौन करेगा इस पर एक संदेह की स्थिति बनी रही है, मोहम्मद शमी इसकी सलाहियत रखते हैं लेकिन वो ख़ुद भी चोट की वजह से टीम से अंदर बाहर होते रहे हैं.

मोहम्मद सिराज इस दौरान सबसे निखर कर उभरे हैं और उन्होंने टी20 के साथ साथ टेस्ट में भी अपनी बोलिंग का लोहा मनवाया है. सीनियर पेसर उमेश यादव के पास मौक़ा था कि वो बुमराह की अनुपस्थिति में वो टीम की बोलिंग की कमान संभाल सकते थे. लेकिन उन्होंने इस मौके का फ़ायदा नहीं उठाया और अब वो टीम से भी बाहर हो चुके हैं.

इस दौरान भारतीय टीम में जयदेव उनादकट, शार्दुल ठाकुर उमेश यादव और मुकेश कुमार जैसे गेंदबाज़ों को मौका मिलता रहा है.

लेकिन क्या इस लाइनअप से फ़िलहाल ऐसा भरोसा किया जा सकता है कि वो विरोधी टीम के 20 विकेट आसानी से निकाल ले जाएंगे?

इसी चुनौती का ज़िक्र कप्तान रोहित शर्मा ने विंडीज़ दौरे पर किया जब उन्होंने कहा कि उनके पास पेसर्स की लाइन नहीं लगी हुई है.

ख़ासकर टेस्ट मैचों में अगर इस दौरान हम अश्विन और जडेजा के विकेट्स हटा दें तो भारतीय बोलिंग बेहद कमज़ोर नज़र आती है.

जसप्रीत बुमराह

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बुमराह की वापसी से बढ़ी उम्मीदें

ऐसे हालात में टीम इंडिया को जसप्रीत बुमराह की वापसी से बेहतर ख़बर नहीं मिल सकती. पूरी टीम और करोड़ों फ़ैंस उनसे आस लगाए हुए हैं. उनके साथ साथ बीसीसीआई चोट से वापसी कर रहे प्रसिद्ध कृष्णा पर भी नज़र रखे हुए हैं.

एनसीए में बुमराह पिछले एक महीने से बोलिंग कर रहे हैं और उन पर कड़ी नज़र रखी पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने.

बुमराह धीरे-धीरे अपना वर्क लोड बढ़ाते हुए रोज़ाना पूरी स्पीड में 8-10 ओवर बोलिंग करने लगे हैं. पिछले दिनों उनका सोशल मीडिया पर वीडियो भी आया जिसमें वो तेज़ गेंदबाज़ी करते नजर आ रहे हैं.

हालांकि कुछ फ़ैंस ने ये भी कॉमेंट किया कि वो उन प्रैक्टिस मैचों में आसान विपक्षियों के ख़िलाफ़ कम स्पीड में बोलिंग कर रहे हैं लेकिन शायद ये चोट से वापसी कर रहे खिलाड़ी की रणनीति भी हो सकती है.

इसमें कोई शक नहीं कि बुमराह के पास मैच-फ़िटनेस आ गई हो लेकिन मैच प्रैक्टिस से वो अभी दूर है. भारतीय टीम उम्मीद कर रही है कि वो पूरी तरह से फ़िट होंगे और जल्द ही होने वाले 50 ओवर के वर्ल्ड कप में भारतीय बोलिंग को लीड करेंगे.

हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं कि जब वो इतने समय बाद वापसी कर रहे हैं तो उन्हें सिर्फ़ बोलिंग की ज़िम्मेदारी देनी चाहिए थी और कप्तानी से उन्हें अभी दूर रखा जा सकता था.

बीसीसीआई जानती है कि इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमज़ोरी तेज़ गेंदबाज़ी ही होने वाली है. पूरी तरह से फ़िट बुमराह इस कमी को पूरा कर सकते हैं.

उनकी सटीक लाइन और लेंथ, ज़बरदस्त बाउंसर्स और निशाने पर लगने वाले यॉर्कर्स बुमराह को मौजूदा क्रिकेट के सबसे ख़तरनाक गेंदबाज़ों में एक बनाती है.

टेस्ट क्रिकेट में भी हैट्रिक लेने वाले खिलाड़ी जसप्रीत बुमराह एक ऐसे गेंदबाज़ हैं जो एक ही ओवर में मैच का रुख़ बदलने की काबिलियत रखते हैं. टीम इंडिया को उसी पुराने ‘बूम बूम’ बुमराह का इंतज़ार हैं.

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