कुलदीप यादव को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट से बाहर करने पर सवाल

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बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में कुलदीप यादव को जगह नहीं मिल पाई है.
उनकी जगह जयदेव उनादकट को टीम में शामिल किया गया है.
भारत दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ में 1-0 से आगे है.
पहले टेस्ट में भारत ने बांग्लादेश को 188 रनों के बड़े अंतर से हराया था.
भारत की इस बड़ी जीत के हीरो थे स्पिनर कुलदीप यादव.
कुलदीप यादव ने पहली पारी में पाँच और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए थे.
पहले टेस्ट में कुल आठ विकेट लेने और भारत की जीत में अहम भूमिका के कारण उन्हें 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' भी चुना गया था.
बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट के लिए टीम में दो स्पिनर हैं और वे हैं- आर अश्विन और अक्षर पटेल.
इसके अलावा इस टेस्ट के लिए टीम में जयदेव उनादकट, उमेश यादव और मोहम्मद सिराज जैसे तेज़ गेंदबाज़ भी शामिल हैं.
कुलदीप यादव को टीम में जगह न दिए जाने पर कप्तान केएल राहुल का कहना है कि कुलदीप यादव को टीम से बाहर रखना एक मुश्किल फ़ैसला था.
टॉस के बाद बातचीत में केएल राहुल ने कहा- हमारे पास स्पिनर के रूप में अश्विन और अक्षर हैं.
उन्होंने कहा कि उन्हें ये पता नहीं चल पा रहा है कि इस पिच को लेकर क्या उम्मीद की जाए क्योंकि विकेट को लेकर काफ़ी कन्फ़्यूजन है. इसलिए उन्होंने कोचिंग स्टाफ़ और सीनियर्स से बात की है.
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कुलदीप को टीम से बाहर रखने पर सवाल
लेकिन दूसरे टेस्ट में कुलदीप यादव को टीम से बाहर रखने की काफ़ी आलोचना हो रही है.
क्रिकेट के आँकड़ों पर नज़र रखने वाले रजनीश गुप्ता ने लिखा है- पहले टेस्ट में मैच जिताने वाला प्रदर्शन करने के बावजूद कुलदीप यादव को टीम से बाहर रखा गया है. 2010 में अमित मिश्रा ने एक टेस्ट में सात विकेट लिए थे और 50 रन बनाए थे. लेकिन मीरपुर के अगले टेस्ट में उन्हें टीम से बाहर रखा गया था.
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पूर्व महिला क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा ने ट्वीट कर लिखा है कि कुलदीप को टीम से बाहर रखना आश्चर्यजनक है, लेकिन ये टैक्टिकल हो सकता है. उन्होंने लिखा है कि तीन दिन पहले ही कुलदीप यादव को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' चुना गया था.
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इसके अलावा भी कई लोगों ने कुलदीप यादव को टीम से बाहर रखने पर अपनी राय व्यक्त की है.
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कुलदीप यादव का सफ़र
14 दिसंबर 1994 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे कुलदीप यादव पहले तेज़ गेंदबाज़ी करते थे. लेकिन उनके कोच ने उन्हें स्पिन गेंदबाज़ी करने की सलाह दी.
हालाँकि उनके लिए ये आसान नहीं था. लेकिन धीरे-धीरे अपनी गेंदबाज़ी से उन्होंने अपनी जगह बनाई.
पहली बार 2012 में उन्हें अंडर-19 टीम के लिए खेलने का मौक़ा मिला.
लेकिन विकेट लेने के बावजूद उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा था.
वर्ष 2014 में अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान कुलदीप यादव ने बेहतरीन प्रदर्शन किया.
इसके बाद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कुलदीप को जगह मिली.
वर्ष 2014 के अक्तूबर में उन्हें भारत की वनडे टीम में जगह मिली.
हालाँकि उन्हें पहला वनडे खेलने का मौक़ा 2017 में मिला.
जबकि वर्ष 2017 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट टीम में शामिल किया गया.
कुलदीप यादव ने अभी तक आठ टेस्ट मैच खेले हैं और 34 विकेट लिए हैं.
कुलदीप ने भारत की ओर से 73 एक दिवसीय मैच खेले हैं और 119 विकेट लिए हैं.
उन्होंने 25 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं और 44 विकेट लिए हैं.
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कुलदीप यादव के करियर में अब तक की सबसे मुश्किल यही है कि उन्हें टीम में तब चुना जाता है जब टीम को एक्स्ट्रा स्पिनर यानी तीसरे स्पिनर की ज़रूरत होती है.
ऐसे में कुलदीप को टीम प्रबंधन से निराशा हो सकती है और वे ये भी मान सकते हैं कि उन्हें उपयुक्त मौक़े नहीं मिल रहे हैं.
लेकिन मौजूदा समय में टेस्ट कप्तान या टीम प्रबंधन के सामने रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा के रहते हुए उन्हें तरजीह देना संभव नहीं दिख रहा है. लेकिन कुलदीप की ख़ासियत ये है कि वे एक सामान्य स्पिनर नहीं हैं. उनकी चाइनामैन शैली उन्हें ख़ास बनाती है.
टी-20 क्रिकेट और सफ़ेद गेंद के दौर में इस कला को सीखना किसी भी गेंदबाज़ के लिए मुश्किल है.
कुलदीप यादव की इस ख़ासियत के मायने क्या हैं, इसे समझने के लिए स्पिन गेंदबाज़ी के जादूगर शेन वॉर्न के उस बयान को याद करना होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें कुलदीप की गेंदबाज़ी देखना पसंद है. कुलदीप यादव ने टेस्ट में शानदार डेब्यू किया था. 2017 में धर्मशाला में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने चार विकेट चटकाए थे.
इसके बाद अगले छह टेस्ट के लिए उन्हें चार साल लगे. इस दौरान सिडनी टेस्ट में पाँच विकेट झटकने का कारनामा भी शामिल था, 2019 की इस सिरीज़ में भारत ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सिरीज़ जीतने में कायमाब हुआ था.
इसके कुछ साल बाद यही टीम जब बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी पर क़ब्ज़ा बरक़रार रखने के लिए ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर पहुंची तो 2019 की टीम के सभी खिलाड़ियों को मैच में खेलने का मौक़ा मिला, सिवाए कुलदीप यादव के. वनडे क्रिकेट में भी अब तक उनकी क़िस्मत कुछ ऐसी ही रही है.
यक़ीन करना भले मुश्किल हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में दो-दो हैट्रिक जमाने के बाद भी वनडे टीम में उनकी जगह पक्की नहीं है.
यह स्थिति तब है जब युजवेंद्र चहल के साथ उनकी जोड़ी के सामने विपक्षी बल्लेबाज़ टिक नहीं पाते हैं. लेकिन मौजूदा स्थिति में इन दोनों का टीम में एक साथ खेलना लगभग नामुमकिन ही है.
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