वर्ल्ड कप क्रिकेट: रोहित शर्मा की टीम से क्यों पूछा जा रहा है अब नहीं तो कब?

रोहित शर्मा

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    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

क्या आपने ग़ौर किया है कि पिछले तीन बार से आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप का ख़िताब मेज़बान टीम जीत रही है.

13वाँ क्रिकेट विश्व कप पाँच अक्तूबर से भारत में शुरू हो रहा है. कप्तान रोहित शर्मा पर उम्मीदों का अतिरिक्त दबाव तो होगा.

महेंद्र सिंह धोनी ने अपने कई इंटरव्यू में इस बात का ज़िक्र किया कि कैसे लोग 2011 में हर जगह पूछते थे-अब नहीं तो कब?

जबकि तब सिर्फ़ एक ही मेज़बान टीम वर्ल्ड चैम्पियन बन पाई थी. 1996 में चैम्पियन बनी श्रीलंका मेज़बान देश तो थी, लेकिन तब क्वार्टर फ़ाइनल , सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल मेज़बान देश के शहर में नहीं खेला गया था.

उस लिहाज़ से कह सकते हैं कि विश्व कप जीतने वाला भारत पहला वास्तविक मेज़बान देश बना था.

12 साल पहले साल 2011 में धोनी और उनकी टीम ने मानो 'होस्ट' के 'घोस्ट' को बोतल में डाल कर ढक्कन लगा दिया.

तब से दो विश्व कप खेले गए हैं और हर बार मेज़बान टीम विजयी रही है.

चलते हैं थोड़ा फ़्लैश बैक में.

2011 के विश्व कप का फाइनल

2011 का विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम.

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दो अप्रैल साल 2011. दिन रविवार. मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप का फ़ाइनल.

कुमार संगकारा की श्रीलंकाई टीम ने मेज़बान भारत के सामने 275 रनों का लक्ष्य रखा था.

31 रन बनते-बनते वीरेंदर सहवाग और सचिन तेंदुलकर पवेलियन में थे. 114 के स्कोर पर विराट कोहली भी आउट हो चुके थे.

फिर नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करने आए गौतम गंभीर ने अंगद की तरह क्रीज़ पर अपना पाँव जमा दिए.

बाएँ हाथ का ये बल्लेबाज़ 41.2 ओवर तक टिका रहा. उनके 97 रनों की बदौलत भारत हार के मुहाने से जीत की दहलीज़ पर पहुँच गया.

49वें ओवर की दूसरी गेंद पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जीत का वो यादगार छक्का लगा दिया, जिसकी गूँज आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलोदिमाग़ में ताज़ा हैं.

भारत की जीत पर क्या बोले थे कमेंटेटर रवि शास्त्री

रवि शास्त्री.

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कमेंटेटर रवि शास्त्री की वो आवाज़ आज भी गूँजती है.

“एमएस धोनी फ़िनिशेज ऑफ़ इन स्टाइल! अ मैगनिफ़िसेंट स्ट्राइक इनटू द क्राउड. इंडिया लिफ़्ट द वर्ल्ड कप आफ़्टर 28 इयर्स.”

भारत 28 साल बाद दूसरी बार वर्ल्ड चैम्पियन बना. मेज़बान के रूप में वर्ल्ड चैम्पियन बनने वाली भारतीय टीम श्रीलंका के बाद दूसरी टीम थी.

अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में श्रीलंका की टीम 1996 में ऑस्ट्रेलिया को हराकर वर्ल्ड चैम्पियन बनी थी.

अरविंद डी सिल्वा ने पहले तीन विकेट लिए और फिर 107 और रणतुंगा ने 67 रनों की पारी खेली थी. दोनों नॉट आउट रहे थे.

लेकिन क्या श्रीलंका को सचमुच वर्ल्ड चैम्पियन बनने वाली पहली मेज़बान टीम माना जाना चाहिए. दरअसल श्रीलंका के अलावा भारत और पाकिस्तान उस वर्ल्ड कप के सह-मेज़बान थे.

फ़ाइनल मैच 17 मार्च 1996 को लाहौर में खेला गया था. आठ में से चार मैच श्रीलंका ने अपनी ज़मीन पर खेला लेकिन क्वार्टर फ़ाइनल फ़ैसलाबाद में इंग्लैंड के विरुद्ध खेला.

सेमीफ़ाइनल मैच भी श्रीलंका ने कोलकाता में खेला था.

ईडन गार्डन्स पर दर्शकों का उत्पात

ईडन गार्डन्स में हंगामा करते दर्शक.

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252 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही मोहम्मद अज़हरुद्दीन की भारतीय टीम ने 120 रन पर आठ विकेट गँवा दिए तो ईडन गार्डन्स के दर्शकों ने आगज़नी और हुड़दंग शुरू कर दिया. मैच पूरा नहीं खेला जा सका और श्रीलंका को विजयी घोषित कर दिया गया.

जब श्रीलंका की टीम क्वार्टर फ़ाइनल, सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल दो अलग-अलग देशों में खेलकर वर्ल्ड चैम्पियन बनी, तो वे ये दावा नहीं कर सकते कि अपनी ज़मीन पर वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम है.

तो भारतीय क्रिकेट टीम सही मायने में वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली मेज़बान टीम है. हालाँकि 2011 में भी श्रीलंका और बांग्लादेश सह-मेज़बान थे, लेकिन भारत ने सिर्फ़ पहला मैच ढाका में खेला था बाक़ी सभी आठ मैच भारतीय पिचों पर खेले जिनमें क्वॉर्टर फ़ाइनल़, सेमी फ़ाइनल और फ़ाइनल शामिल थे.

टीम इंडिया ने तोड़ा यह मिथक

विश्व कप जीतने के बाद टीम इंडिया.

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2011 में महेंद्र सिंह धोनी की भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बड़ा मिथक तोड़ा.

वर्ल्ड कप को होस्ट करने वाली टीम कभी भी विश्व चैंपियन नहीं बन पाती थी. 1975, 1979 और 1983 पहले तीन वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेले गए.

ये तीनों विश्व कप 60-60 ओवर के थे क्योंकि इंग्लैंड में दिन लंबा होता था. क्लाइव लॉयड की कप्तानी में वेस्टइंडीज़ ने ऑस्ट्रेलिया को फ़ाइनल में 17 रनों से हराकर पहला विश्व कप जीता. दूसरे विश्व कप में भी क्लाइव लॉयड ही कैरिबियन टीम के कप्तान थे. इस बार फ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ ने इंग्लैंड को 92 रनों से हराया.

1983 में जो हुआ उससे भारत के साथ-साथ विश्व क्रिकेट भी बदलता चला गया. भारत ने क्लाइव लॉयड की धाकड़ टीम की बादशाहत ख़त्म कर दी. कपिल देव की कप्तानी में भारत ने फ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ को 43 रनों से हराकर तहलका मचा दिया.

कहा जाता था कि इंग्लैंड वर्ल्ड कप की मेज़बानी इसलिए भी छोड़ने पर राज़ी हुआ, क्योंकि तीन बार होस्ट रहने के बावजूद वे ख़िताब नहीं जीत पाए थे. लेकिन इस जिंक्स को टूटने में 36 साल लग गए.

1987 में भारत मेज़बान था, चैम्पियन रही एलन बॉर्डर की टीम ऑस्ट्रेलिया. 1992 में वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया में खेला गया, जीता इमरान ख़ान की टीम पाकिस्तान ने. 1996 की बात हम पहले कर चुके हैं. भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका सह मेज़बान थे. चैम्पियन रही श्रीलंका की टीम.

1999 में इंग्लैंड और 2003 में दक्षिण अफ़्रीका मेज़बान था. दोनों बार कंगारुओं ने ख़िताब जीता. इंग्लैंड में स्टीव वॉ और दक्षिण अफ़्रीका में रिकी पोंटिंग कप्तान थे.

वेस्टइंडीज़ में खेला गया 2007 वर्ल्ड कप काफ़ी विवादों भरा रहा. पाकिस्तान के कोच वॉब वूल्मर रहस्यमय हालात में अपने कमरे में मृत पाए गए. राहुल द्रविड़ की टीम बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर पहले ही दौर में बाहर हो गई. रिकी पोंटिंग की टीम तीसरी बार वर्ल्ड चैम्पियन बनी.

विश्व कप क्रिकेट में नई परंपरा की शुरुआत

विश्व कप के फाइनल में शॉट लगाता एक श्रीलंकाई क्रिकेटर.

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2011 में धोनी की टीम इंडिया न सिर्फ़ वर्ल्ड चैम्पियन बनी, बल्कि एक नए परंपरा की शुरुआत कर दी. 2011 के बाद से दो विश्व कप खेले गए हैं और दोनों बार मेज़बान टीम विजयी रही है.

2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड सह मेज़बान थे. फ़ाइनल माइकल क्लार्क की टीम ने न्यूज़ीलैंड को सात विकेट से हराया जबकि पिछली बार यानी 2019 में इंग्लैंड लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर चैम्पियन बनी.

वर्ल्ड चैम्पियन बनने के लिए 1987 में इंग्लैंड ने मेज़बानी छोड़ी थी लेकिन विडंबना देखिए कि 32 साल बाद ख़िताब जीत पाए जब दोबारा होस्ट बने.

वैसे तो 1975 से जोड़ें तो उन्हें वर्ल्ड चैम्पियन बनने में 48 साल लग गए.

इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के बीच फ़ाइनल काफ़ी विवादास्पद रहा था. निर्धारित 50 ओवरों में दोनों टीमों ने 241 रन बनाए.

सुपर ओवर भी टाई रहा तो बाउंड्री को आधार बनाकर आईसीसी ने इंग्लैंड को चैम्पियन घोषित किया.

चैंपियन क्यों बन रहे हैं मेजबान

विश्व कप की ट्रॉफी के साथ भारत और श्रीलंका के कप्तान.

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तो ऐसे कौन-कौन से तथ्य हैं जो मेज़बान टीम को चैम्पियन बना रहे हैं.

सबसे बड़ी बात होस्ट टीम अपने मैदान और अपनी पिच को दूसरों से बेहतर समझती है.

अपने मौसम, अपनी आबोहवा और अपने वातावरण में एथलीट अपना बेहतर दे सकता है और इसके बाद दर्शकों का शोर और हौसला अफ़जाई.

वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों पर बड़ा दबाव होता है. दर्शकों की तालियाँ खिलाड़ियों में ऊर्जा भरती रहती हैं.

अब देखिए न, आँकड़े भी इस बात की तस्दीक़ कर रहे हैं कि भारतीय टीम अपनी पिच पर शेर है.

2019 वर्ल्ड कप के बाद से भारत ने अपनी ज़मीन पर सात वनडे सिरीज़ जीती है.

सिर्फ़ एक में ऑस्ट्रेलिया से 1-2 से मात खानी पड़ी है. भारत ने पहले तो वेस्टइंडीज़, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को वनडे सिरीज़ में 2-1 से हराया.

वेस्टइंडीज़ को 3-0 से, दक्षिण अफ़्रीका को 2-1, श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड को 3-0 से शिकस्त दी. अंतिम द्विपक्षीय मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के 2-1 से हरा दिया.

बुलंद हौसले से उतरेगी टीम इंडिया

एशिया कप में खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम.

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वहीं विदेशी ज़मीन पर इस दौरान 11 वनडे सिरीज़ खेली गईं. जिसमें भारत ने वेस्टइंडीज़ को तीन सिरीज़ में हराया. इसके अलावा श्रीलंका, इंग्लैंड और ज़िम्बाब्वे को हरा पाए.

न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और बांग्लादेश में सिरीज़ हारे.

विश्व कप जैसे बड़े मंच पर सिर्फ़ अपनी पिच और मैदान काम नहीं आता. टीम के आधे सदस्यों को विश्व कप में खेलने का अनुभव नहीं है.

रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों संभवतः अपना आख़िरी वर्ल्ड कप खेल रहे हैं.

दोनों अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे. 2015 और 2019 में टीम सेमी फ़ाइनल में हार कर बाहर हो गई थी.

लेकिन इस बार टीम बेहद संतुलित और फ़ॉर्म में नज़र आ रही है. टीम में सभी की भूमिका लगभग तय हो गई है. एशिया कप जीतने से टीम के हौसले बुलंद हैं.

रोहित शर्मा एंड कंपनी के सामने ‘अब नहीं तो कब’ सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है क्योंकि भारत 10 साल से आईसीसी का कोई ख़िताब नहीं जीत पाया है.

19 नवंबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में तय होगा कि रोहित शर्मा कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी की तरह अपना नाम विश्व चैम्पियन कप्तानों की सूची में लिखवा कर एक समृद्ध विरासत छोड़ जाते हैं या नहीं.

लगातार चौथी बार मेज़बान टीम वर्ल्ड कप जीत पाती है या नहीं, ये देखना भी दिलचस्प रहेगा.

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