धोनी की तारीफ़ पर हरभजन सिंह ने क्यों किया ऐसा तंज़

हरभजन सिंह और धोनी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, हरभजन सिंह और महेंद्र सिंह धोनी के रिश्तों में कड़वाहट की ख़बरें आती रही हैं.

इंग्लैंड के द ओवल में खेले गए आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार के बाद भारत के फ़ैंस में ग़ुस्सा है.

ऑस्ट्रेलिया के सामने भारतीय बल्लेबाज़ी धराशाई हो गई और टीम ये मुक़ाबला 209 रन से हार गई.

सितारों से सजी भारतीय टीम के लिए इस हार को शर्मनाक माना जा रहा है. सोशल मीडिया पर बहुत से लोग कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा की आलोचना कर रहे हैं.

भावनात्मक अभिव्यक्ति के इस समय में कई फ़ैंस ऐसे भी हैं, जो महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के उस दौर को याद कर रहे हैं, जब टीम लगातार आईसीसी टूर्नामेंटों में जीत रही थी.

ऐसे ही एक फैन ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी को याद किया और उनकी दिल खोलकर तारीफ़ की.

लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय टीम के स्पिनर गेंदबाज़ रहे हरभजन सिंह को ये तारीफ़ इस हार से संदर्भ में उचित नहीं लगी.

धोनी के प्रशंसक के ट्वीट का जवाब देते हुए हरभजन सिंह ने याद दिलाया कि क्रिकेट एक टीम स्पोर्ट्स है.

धोनी के प्रशंसक ने ट्विटर पर लिखा था, “ना कोच, ना मेंटर, युवा खिलाड़ी, अधिकतर वरिष्ठ खिलाड़ियों ने खेलने से ही मना कर दिया था. इस मैच से पहले कभी किसी मैच की कप्तानी नहीं की. इस लड़के ने ऑस्ट्रेलिया को उसके प्राइमटाइम में सेमीफ़ाइनल में हराया और कप्तान बनने के 48 दिनों के भीतर टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया.”

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए हरभजन सिंह ने लिखा, “हाँ, जब ये मैच खेले जा रहे थे तब ये युवा लड़का भारत के लिए अकेला खेल रहा था…बाक़ी दस तो खेल ही नहीं रहे थे…इसलिए अकेले ही इसने क्रिकेट वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ियां जीतीं. बिडंबना ये है कि जब ऑस्ट्रेलिया या कोई दूसरा देश वर्ल्ड कप या कोई और ट्रॉफी जीतता है तो हेडलाइन होती है- ऑस्ट्रेलिया जीता, देश जीता आदि. लेकिन जब भारत जीतता है तब कहा जाता है कि कप्तान जीता. ये एक टीम स्पोर्ट्स है. यहां साथ में हारते हैं और साथ में जीतते हैं.”

वहीं इसके जवाब में एक अन्य यूज़र ने एक तस्वीर के साथ आंकड़े पोस्ट करते हुए लिखा, “आईसीसी फ़ाइनल मुक़ाबलों में भारत ने धोनी की कप्तानी में चार खेले और तीन जीते. बाक़ी सभी कप्तानों ने मिलकर सात फ़ाइनल मुक़ाबले खेले और सिर्फ़ एक जीता.”

वहीं एक अन्य यूज़र ने सवाल किया, “उन अन्य 10 खिलाड़ियों के साथ दादा (सौरव गांगुली) ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कितने आईसीसी नॉकआउट मुक़ाबले जीते थे?”

क्या हरभजन और धोनी के बीच है विवाद?

हरभजन सिंह और महेंद्र सिंह धोनी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, हालांकि हरभजन सिंह ने ये कहा है कि धोनी से उनकी अच्छी दोस्ती है.

हरभजन सिंह साल 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. इस टीम की कप्तानी धोनी ही कर रहे थे.

हरभजन सिंह और धोनी के बीच अनबन की ख़बरें आती रहती हैं. हालांकि धोनी या हरभजन ने सार्वजनिक रूप से इस पर कभी बात नहीं की थी.

हरभजन सिंह ने संकेत ज़रूर दिए थे. दिसंबर 2021 में अपने 18 साल लंबे करियर पर विराम लगाते हुए हरभजन सिंह ने कहा था, “जब कोई 400 से अधिक विकेट ले चुका हो और उसे टीम में मौक़ा ना मिले या उसे बिना कोई कारण बताये ड्रॉप कर दिया जाए, तब दिमाग़ में कई सवाल उठते हैं. मैंने ख़ुद को टीम से ड्रॉप किये जाने को लेकर कई लोगों से पूछा था लेकिन किसी ने मुझे कोई जवाब नहीं दिया.”

हालांकि जनवरी 2022 में अपने बयान पर सफ़ाई देते हुए हरभजन सिंह ने ये ज़रूर कहा था कि उनका इशारा बीसीसीआई की तरफ़ था.

न्यूज़ 18 को दिए एक साक्षात्कार में हरभजन सिंह ने कहा था, “मुझे धोनी से कोई शिकायत नहीं है. वास्तव में इन सालों के दौरान वो एक अच्छे मित्र रहे हैं. मैंने उस समय की सरकार बीसीसीआई से शिकायत की थी. मैं बीसीसीआई को सरकार ही कहता था. उस समय के चयनकर्ताओं ने अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं किया. उन्होंने टीम को एकजुट नहीं होने दिया.”

लेकिन इसी साल मार्च में हरभजन सिंह ने फिर से दोहराया था कि वो और धोनी अच्छे मित्र हैं.

दोहा में लीजेंड्स लीग्स क्रिकेट के दौरान बोलते हुए हरभजन सिंह ने कहा था, “मुझे धोनी से कोई समस्या क्यों होनी चाहिए, हमने भारत के लिए बहुत क्रिकेट खेला और हम बहुत बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं और अब भी हैं. वो अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हो गए और मैं अपनी ज़िंदगी में और हमारी अब मुलाक़ात नहीं होती है. लेकिन हमारे बीच किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है.”

2007 का वो फ़ाइनल और अंतिम ओवर

वर्ल्ड कप फ़ाइनल जीतने के बाद जश्न मनाती भारतीय टीम

इमेज स्रोत, Getty Images

भारत ने साल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप फ़ाइनल मुक़ाबले में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया था.

मैच के बाद रवि शास्त्री ने अंतिम दो ओवरों के बारे में सवाल करते हुए धोनी से पूछा था कि हरभजन की जगह उन्होंने अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा को क्यों दिया था.

इसके जवाब में धोनी ने कहा था, “मुझे लगता है कि भज्जी सौ प्रतिशत निश्चिंत नहीं थे, वो सही यॉर्कर नहीं डाल पा रहे थे, मैंने सोचा कि ऐसे गेंदबाज़ को गेंद देने के बजाये जो सौ प्रतिशत निश्चिंत ना हो, मैं ऐसे गेंदबाज़ को गेंद थमाता हूं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा करने की कोशिश कर रहा है. अगर हम मैच हार भी गए होते तो इससे मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता. मुझे लगता है कि जिस तरह से जोगी ने गेंदबाज़ी की, वो शानदार था.”

सचिन ने उठाया सवाल

हरभजन

भारत के पूर्व खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने भी ऑस्ट्रेलिया की जीत पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को बधाई देते हुए भारतीय स्पिनर गेंदबाज़ रविचंद्रन अश्विन को टीम से बाहर रखने पर सवाल उठाया है.

सचिन ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल जीतने की बधाई.”

सचिन ने स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड को टैग करते हुए लिखा, “इन दोनों ने पहले दिन ही ऑस्ट्रेलिया को मज़बूत आधार दिया. भारत को मैच में बने रहने के लिए पहली पारी में लंबा खेलना था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सका. भारत के लिए कुछ अच्छे पल भी थे, लेकिन मैं ये समझ नहीं पा रहा हूं कि रविचंद्रन अश्विन को क्यों बाहर रखा गया, जो कि इस समय दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज़ हैं.”

सचिन ने लिखा, “जैसा कि मैंने मैच से पहले कहा था, एक दक्ष स्पिनर टर्न के लिए हमेशा ट्रैक पर निर्भर नहीं रहता है. वो हवा की रफ़्तार और बाउंस का इस्तेमाल करके अपनी गेंदों में विविधता ले आते हैं. ये नहीं भूलना चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया की शीर्ष 8 बल्लेबाज़ों में 5 बायें हाथ के बल्लेबाज़ थे.”

गावस्कर ने की कोहली की आलोचना

चौथी पारी में आउट होने के बाद निराश खड़े विराट कोहली

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, चौथी पारी में आउट होने के बाद निराश खड़े विराट कोहली

ऑस्ट्रेलिया के सामने भारतीय बल्लेबाज़ी का ढेर होना प्रशंसकों के लिए सबसे ज़्यादा निराशाजनक रहा है.

चौथे दिन खेल ख़त्म होने तक विराट कोहली और अंजिक्य रहाणे पिच पर डटे थे.

दोनों से बहुत उम्मीदें लगाई गईं थीं. लेकिन पांचवे दिन के पहले आधे घंटे के भीतर ही भारत के विकेट गिरने शूरू हो गए.

सेट दिख रहे विराट कोहली बोलांड की बाहर जाती गेंद का पीछा करने की कोशिश में 49 रन के निजी स्कोर पर स्लिप में कैच थमा बैठे.

कोहली तो निराश थे ही लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर कुछ ज़्यादा ही निराश दिखे.

मैच समाप्त होने के बाद कोहली के शॉट सिलेक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए गावस्कर ने कहा, “ये ख़राब शॉट था. ये सामान्य शॉट था. आप मुझसे इसके बारे में पूछ रहे हैं, आपको कोहली से पूछना चाहिए. कि ये शॉट था क्या? ये ऑफसाइड स्टंप के बाहर लिया गया शॉट था. हम कितनी ही बार इस बात पर चर्चा कर चुके थे कि मैच जीतने के लिए आपको लंबी पारी चाहिए होती है. आपको शतक से लंबी पारी चाहिए होती है. आप शतक और उससे बड़ी पारी कैसे खेलेंगे जब आप ऑफ़ स्टंप के इतना बाहर जाकर शॉट खेलेंगे?”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)