लखनऊ के पंतनगर में क्यों रुक गया बुलडोज़र, योगी को आना पड़ा सामने

60 वर्षीय कमलेश कश्यप अपनी दुकान के बगल में दीवार पर लगे लाल रंग के निशान को उस दिन बर्दाश्त नहीं कर पाई थीं. जिस दिन निशान लगे उसी दिन उनको अस्पताल में भर्ती होना पड़ गया.

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इमेज कैप्शन, 60 वर्षीय किरन कश्यप अपनी दुकान के बगल में दीवार पर लगे लाल रंग के निशान को उस दिन बर्दाश्त नहीं कर पाई थीं
    • Author, नीतू सिंह
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, लखनऊ से

लखनऊ के पंतनगर में 5वीं क्लास में पढ़ने वाली अनम का वीडियो बीते दिनों सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल रहा.

वीडियो में अनम रोते हुए अपने घर को बचाने की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर रही थीं.

16 जुलाई को मांग पूरी होने के बाद अनम मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें धन्यवाद कहना चाहती हैं.

वीडियो कैप्शन, लखनऊ में करीब 2000 मकानों के तोड़े जाने की थी चर्चा

अनम अभी बच्ची हैं लेकिन बातें बड़ों जैसी करती हैं. अनम कहती हैं, "जिन घरों को अधिकारियों ने अवैध बताकर लाल रंग के क्रॉस निशान लगाए थे, वही घर मुख्यमंत्री ने वैध घोषित कर दिए. मैं उनसे मिलकर धन्यवाद कहना चाहती हूं क्योंकि उन्होंने हमारे घर टूटने से बचा दिए."

16 जुलाई को जिस वक़्त मुख्यमंत्री ने यहां के लोगों के साथ मीटिंग करके घर न टूटने का आश्वासन दिया, उस वक़्त से यहां उत्सव जैसा माहौल हो गया. लोगों ने मिठाइयां बाँटीं, एक दूसरे के गले लगे.

अनम काफ़ी मुखर हैं. वो मीडिया को चौथा मज़बूत स्तंभ बताते हुए कहती हैं, "हमारे घर तो सिर्फ़ मीडिया की वजह से बचे. अगर मीडिया नहीं होता तो हमारी बात कभी मुख्यमंत्री जी तक नहीं पहुंच पाती."

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लाल निशान

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इमेज कैप्शन, पंत नगर में घरों के बाहर ऐसे लाल निशान लगाए गए थे.

'लाल निशान' से बेचैनी

लखनऊ के अकबरनगर में क़रीब 1200 मकानों पर बुलडोज़र चलने के बाद कहा जा रहा था कि इसके बाद अबरार नगर, रहीम नगर, पंतनगर और इंद्रप्रस्थ नगर के 2000 से ज़्यादा मकान तोड़े जाएंगे.

जब इन इलाक़े के मकानों पर सिंचाई विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, डूडा, नगर निगम और ज़िला प्रशासन की निगरानी में लाल निशान लगाए तो यहां के लोगों की बेचैनियां और बढ़ गईं.

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अपने मकानों को बचाने के लिए यहां के लोग न केवल एकजुट हुए बल्कि गांधीवादी तरीक़े से महिलाओं और बच्चों ने धरना भी दिया.

16 जुलाई को 14 लोगों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क़रीब आधा घंटे की बातचीत कर इन्हें आश्वासन दिया कि इनके घर नहीं तोड़े जाएंगे.

60 वर्षीय कमलेश कश्यप अपनी दुकान के बगल में दीवार पर लगे लाल रंग के निशान को उस दिन बर्दाश्त नहीं कर पाई थीं. जिस दिन निशान लगे उसी दिन उनको अस्पताल में भर्ती होना पड़ गया.

लेकिन आज कमलेश के चेहरे पर मुस्कान भी थी और तसल्ली भी.

कमलेश उस दिन को याद करते हुए कहती हैं, "हमने तो अपनी सुध-बुध ही खो दी थी. अगर इस बार गिर जाता तो जीवन में दोबारा घर नहीं बनवा पाते. 15 दिन तक पूरे मोहल्ले में मातम पसरा रहा. किसी ने पेटभर खाना नहीं खाया. पति चाय का ठेला लगाते हैं. घर बनवाने के चक्कर में चाय की दुकान नहीं बनवा पाए. अबरारनगर, इन्द्रप्रस्थ नगर, रहीम नगर और पंतनगर के सभी लोग एकजुट हुए तब हमारी जीत हुई."

पंतनगर के एक युवा नदीम ख़ान ने मकानों पर लगे लाल निशानों के बारे में बताया, "एक महीने का यह पूरा घटनाक्रम है. 14 जून को नोटिफिकेशन जारी होता है. 20 जून को टीम सर्वे करने आती है और 10 जुलाई को मकानों पर लाल निशान लगाकर चली जाती है. हमारे पास लीगल डॉक्यूमेंट थे, इसीलिए प्रशासन को पीछे हटना पड़ा. यहाँ के लोगों ने अपने हक़ के लिए ख़ासकर बच्चों और महिलाओं ने मुखर होकर आवाज़ उठाई."

जिस दिन से इन इलाकों में मकानों पर लाल निशान लगाए गए, उस दिन से यहां के लोग लगातार मीडिया में आवाज़ उठा रहे थे. बीजेपी समर्थक भी सरकार का विरोध कर रहे थे.

जगह-जगह लोगों ने मोहल्लों में मीटिंग की. इस दौरान यहां एक ट्रांस गोमती संघर्ष समिति भी गठित की गई जो इस मामले की पैरवी कर रही थी.

मकान में लाल निशान किसके आदेश पर लगाए गए, इस सवाल का जवाब न तो यहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों के पास है और न ही मुख्यमंत्री के पास.

यहाँ के स्थानीय लोगों के अनुसार- मुख्यमंत्री ने कमिश्नर और ज़िलाधिकारी से इसका जवाब मांगा है और कार्रवाई करने के आदेश भी दिए हैं.

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ये रिपोर्ट्स भी पढ़ें:-

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आशुतोष पाठक

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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री से जो 14 लोग मिलने गए थे उसमें इंद्रप्रस्थ नगर के आशुतोष पाठक भी थे. वो निशान लगाने की प्रक्रिया को ही सही नहीं मानते

क्यों लगाए गये मकानों पर लाल निशान?

सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमें एनजीटी की ओर से निर्देशित किया गया है कि सारी नदियां जो गंगा फ्लड प्लेन में आती हैं, उनके फ्लड प्लेन को मार्क किया जाए. लाल निशान ग़लत तरीक़े से नहीं लगाए गए. लोगों के मकान में नहीं लगने चाहिए थे, ये ग़लत था."

लोगों के मकान में फिर निशान क्यों लगे?

इस पर उन्होंने कहा, "नदी किनारे से हमें फ्लड प्लेन को मार्क करना था. जो-जो जगह नदी से संभावित दूरी पर लगी, जहाँ आगामी 100 साल में एक बार भी बाढ़ आने का अंदेशा हो सकता है, उन्हें चिह्नित कर लाइन खींचनी थी."

"नदी से बाढ़ कितनी दूर तक जा सकती है इसलिए 20 मीटर, 10 मीटर जो भी लगा लिखा गया. ये मार्क वैसे तो प्लेन जगह में खींचने थे पर यहाँ प्लेन जगह नहीं है क्योंकि सब मकान बने हैं. इसलिए मकानों पर, सड़क पर, पोल पर जहाँ भी जगह मिली, लगा दिए."

अगर यही वजह थी तो फिर लोगों में यह अफ़वाह कहाँ से आई कि उनके मकान गिरने वाले हैं?

इस सवाल के जवाब में सिंचाई विभाग के अधिकारी ने कहा, "इसकी सटीक जानकारी तो मेरे भी पास नहीं है पर एक कारण यह भी हो सकता है कि हाल ही में अकबरनगर में मकान गिराए गए थे, जिसमें लाल निशान मकानों में लगे थे. हो सकता है लोगों में इस बात का डर रहा हो कि उधर के मकान गिरे तो इधर के भी गिर सकते हैं. अकबरनगर फ्लड प्लेन ज़ोन में था इसलिए अकबरनगर को गिराया गया. यहां किसी भी सरकारी अधिकारी ने यह नहीं कहा कि ये लाल चिह्न इसलिए लगाए जा रहे ताकि आपका मकान गिराया जा सके."

लोगों को यह जानकारी भी नहीं दी गई थी कि उनके मकान में लाल निशान क्यों लगे?

सिंचाई विभाग के अधिकारी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहते हैं, "एक-एक व्यक्ति को तो बताना मुश्किल है पर जिन लोगों ने भी पूछा उन्हें बताया ज़रूर गया कि ये निशान क्यों लगाए जा रहे हैं. मैं ऐसे 100 लोगों को खड़ा कर सकता हूँ जो यह बताएंगे कि वहां निशान क्यों लगाए गए हैं और उन्हें इस बात की पूरी जानकारी है."

सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार- जितनी भी नदियां हैं, पूरी गंगा नदी और गोमती नदी के किनारे उन सभी इलाकों को एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार चिह्नित करना है जहाँ आगामी 100 साल में एक बार भी बाढ़ आने की आशंका है.

चिह्नित फ्लड प्लेन जोन को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करना है. इन इलाकों में किसी भी तरह का नया कंस्ट्रक्शन नहीं किया जाएगा.

सिंचाई विभाग के अधिकारी ने मीडिया से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, "बिना मामले की पड़ताल किए कुछ भी ख़बर बनाकर चला देना भी ठीक नहीं है. मीडिया में स्थानीय लोगों की वीडियो क्लिप चलाई गई. प्रिंट मीडिया में भी ऐसी ही ख़बरें चलीं, जिससे एक माहौल बन गया कि यहां बुलडोजर चलेगा."

सिंचाई विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से 15 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि फ्लड जोन एरिया को चिह्नित किया गया था.

संदेश

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इमेज कैप्शन, सिंचाई विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से 15 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि फ्लड ज़ोन एरिया को चिह्नित किया गया था

स्थानीय लोग क्यों हुए भयभीत?

सिंचाई विभाग की ओर से लाल निशान लगाने की वजह का यहां के स्थानीय लोग खंडन करते हैं.

किरन कश्यप कहती हैं, "लाल निशान लगाने बहुत सारे अधिकारी आए थे. पूछने पर बस एक ही बात बताई कि ऊपर से आदेश आया है. अब इससे हम क्या समझेंगे कि क्या आदेश आया है? हम लोग एक हफ्ते कितनी पीड़ा में रहे, कैसे बताएं?"

उन्होंने कहा, "योगी जी के कहने के बाद भी ये यक़ीन नहीं हो रहा है कि कितने दिन तक घर बचेगा. न हमें कोई लिखित कागज मिला और न ही किसी अधिकारी ने ये लाल रंग के निशान मिटाए."

यहां के स्थानीय लोगों के अनुसार- जिस दिन निशान लगे उस दिन 100-150 अधिकारी थे. लाल निशान क्यों लगाए जा रहे? अधिकारियों के पास इस सवाल का एक ही जवाब था कि ऊपर से आदेश है.

सही जवाब न मिलने की वजह से लोगों में घबराहट बढ़ गई. इस वजह से यहां के लोगों ने अपने घर के बाहर खतौनी, रजिस्ट्री की कॉपी और भी कई ज़रूरी डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी चस्पा कर दी, जिससे यह साबित हो सके कि ये इनका ही घर है और वैध है.

मुख्यमंत्री से जो 14 लोग मिलने गए थे, उसमें इंद्रप्रस्थ नगर के आशुतोष पाठक भी थे.

आशुतोष पाठक निशान लगाने की प्रक्रिया को ही सही नहीं मानते.

वो कहते हैं, "लाल निशान लगाने की जो प्रक्रिया है, उसे पूरा नहीं किया गया. जब किसी इलाक़े में लाल निशान लगाने होते हैं तो सबसे पहले उस इलाक़े का सीमांकन किया जाता है, फिर मापांकन. इसके बाद चिह्नित कर लोगों की रजिस्ट्री देखी जाती है."

"इतना काम पूरा होने के बाद अगर लोग फ्लड एरिया में पाए जाते हैं, तब निशान लगते हैं. इन लोगों ने तो जीपीएस देखकर जहां समझ आया निशान लगा दिए."

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री ने बैठक में और एक्स पर लोगों को घर ना टूटने का भरोसा दिया

सीएम योगी ने क्या कहा?

ये चारों संपन्न इलाक़े हैं. यहां भव्य इमारतें और कई बहुमंजिला फ्लैट भी बने हैं. ये लोग अब भी चिंतित हैं कि जब तक उन्हें कोई लिखित डॉक्यूमेंट नहीं मिलेगा तब तक वो पूरी तरह से आश्वस्त नहीं होंगे.

ट्रांस गोमती संघर्ष समिति की तरफ़ से पूरी बात मुख्यमंत्री के सामने आशुतोष पाठक ने रखी.

उन्होंने बताया, "मुख्यमंत्री ने सबके कागज देखे. फिर बोले कि जिन अधिकारियों ने ये निशान लगाए हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी. जांच की ज़िम्मेदारी उन्होंने कमिश्नर और ज़िलाधिकारी को सौंपी है. हम लोगों से मुख्यमंत्री ने बोला कि हम जनता की तरफ़ हैं, अफसरशाही की तरफ़ नहीं. नदी से 35 मीटर तक का दायरा लिया जाएगा. अगर किसी का मकान गिरा भी तो उन्हें मुआवज़ा भी मिलेगा."

आशुतोष पाठक के अनुसार- ये निशान 35 मीटर की बजाय 50 और 87 मीटर तक लगाए गए. जिस तरफ़ से नक्शा दिखाकर निशान लगाए गए वहां नाला था, नदी थी ही नहीं. नदी दूसरी तरफ़ है.

मुख्यमंत्री ने बैठक में और एक्स पर लोगों को घर ना टूटने का भरोसा दिया.

एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि निजी मकानों पर चिह्नीकरण का कोई औचित्य नहीं था, ऐसा करने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी.

हालांकि ख़बर लिखे जाने तक निशान मिटाए नहीं गए हैं.

पंतनगर

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इमेज कैप्शन, किरन कश्यप अपने घर के बाहर

सरकार ने इतनी आसानी से फ़ैसला जनता के पक्ष में क्यों दिया?

यहां के स्थानीय लोगों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़- सरकार के इस फ़ैसले की वजह कुछ लोग इस इलाक़े का सम्पन्न और वर्चस्व वाला होना मानते हैं तो कुछ लोग हिन्दू बाहुल्य होना भी एक वजह मानते हैं.

इंद्रप्रस्थ नगर में रहने वाले अमित कुमार गौढ़ लखनऊ हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं.

वो कहते हैं, "पहला तो यह तरीक़ा ग़लत है कि आप बिना किसी सूचना के मकानों पर लाल निशान लगाकर चले गए. दूसरा क़रीब एक महीने यहां के लोग मानसिक प्रताड़ना से गुज़रे हैं, उसका हर्जाना कौन भरेगा? "

"यहां ज़्यादा बीजेपी सपोर्टर लोग रहते हैं जो काफ़ी आक्रोशित थे. उनके विरोध का भी असर हुआ है. सरकार दबाव में आ गई, उन्हें 2027 का चुनाव जीतना है तो इतना करना ही पड़ेगा."

कुकरैल रीवर बेल्ट

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इमेज कैप्शन, कुकरैल रीवर बेल्ट को 35 मीटर चौड़ा रखना है. एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार नदी से 50 मीटर की दूरी का एरिया फ्लड प्लेन एरिया यानी डूब प्रभावित क्षेत्र माना जाता है

क्या है कुकरैल रिवर फ्रंट सुंदरीकरण योजना?

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार- लखनऊ के बख्शी का तालाब के पास अस्ती गांव है जहां से कुकरैल नदी का उदगम होता है.

यहां से 28 किलोमीटर दूरी गोमती में मिलने तक इसका सौंदर्यीकरण किया जाना है. इस 28 किलोमीटर की दूरी पर 20 पानी के स्रोत हैं. उनको भी पुनर्जीवित और प्रदूषण मुक्त किया जाना है.

कुकरैल रीवर बेल्ट को 35 मीटर चौड़ा रखना है.

एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार, नदी से 50 मीटर की दूरी का एरिया डूब प्रभावित क्षेत्र माना जाता है.

पंतनगर, इंद्रप्रस्थ, अबरार नगर और रहीम नगर में जो लाल निशान लगे उसमें एलडीए की क्या भूमिका थी?

इस पर एलडीए कार्यालय से बताया गया कि ज़िलाधिकारी की ओर से एक टीम गठित की गई थी, जिसमें राजस्व विभाग, नगर निगम, डूडा, सिंचाई विभाग और एलडीए शामिल था. सिंचाई विभाग का काम एरिया की निशानदेही करना था जबकि एलडीए का काम केवल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करना था.

लखनऊ

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इमेज कैप्शन, कुकरैल नदी से साढ़े चार किलोमीटर की दूरी तक करीब सवा लाख पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट की तैयारी की जा रही है.

अकबरनगर तोड़ने के बाद 20 जुलाई से शुरू हो गया सौंदर्यीकरण

कुकरैल नदी से साढ़े चार किलोमीटर की दूरी तक क़रीब सवा लाख पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट की तैयारी की जा रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 जुलाई को पौधे लगाने की पहली ड्राइव अकबरनगर प्रथम से शुरू कर दी है. यहां करीब 25 एकड़ जमीन को खाली कराया गया था.

अकबरनगर प्रथम में सौमित्र वन और सेकेंड में शक्ति वन तैयार किया जाएगा. यहां देसी प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं.

एलडीए के अनुसार एक जंगल को तैयार होने में क़रीब 20 साल का समय लगता है लेकिन इस इलाक़े को जिस तकनीक से विकसित किया जा रहा है, उससे यहां दो साल में जंगल तैयार हो जाएगा.

नदी के किनारे ऐसे पौधे भी लगाए जा रहे हैं जो जलभराव में भी पनप सकें.

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