माइक्रोसॉफ़्ट के कंप्यूटरों में गड़बड़ी से मची अफ़रा-तफ़री से कैसे बच गया चीन?

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- Author, निक मार्श
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इस शुक्रवार (20 जुलाई, 2024) को सारी दुनिया माइक्रोसॉफ़्ट से चलने वाले कंप्यूटर सिस्टम में आई गड़बड़ी से परेशान थी तो चीन में सबकुछ ठीक चल रहा था.
शुक्रवार को साइबर सिक्योरिटी फ़र्म क्राउडस्ट्राइक के एक अपडेट की वजह से माइक्रोसॉफ़्ट सिस्टम से चलने वाले कंप्यूटरों पर ब्लू स्क्रीन दिखाई देने लगे और दुनिया के कई हिस्सों में विमान सेवाएं और दूसरी बिज़नेस सर्विस बाधित होने लगीं तो चीन इससे बचा हुआ था.
आख़िर इसकी वजह क्या थी? चीन ने ऐसा क्या किया कि उस पर दुनिया भर में फैली इस अफ़रा-तफ़री का असर ना के बराबर हुआ.
इसका जवाब बड़ा आसान है. दरअसल चीन में क्राउडस्ट्राइक का शायद ही इस्तेमाल होता है.
क्राउडस्ट्राइक के एक अपडेट की वजह से ही माइक्रोसॉफ़्ट सिस्टम से चलने वाले कंप्यूटरों ने अचानक काम करना बंद कर दिया था.

चीन में ऐसे बहुत कम बिज़नेस या सर्विस समूह हैं जो किसी अमेरिकी कंपनी से सॉफ्टवेयर ख़रीदना पसंद करना चाहते हैं क्योंकि अमेरिकी कंपनियां चीन को अपनी साइबर सिक्योरिटी के लिए ख़तरा मानती रही हैं.
चीन से पैदा कथित साइबर ख़तरे को लेकर ये कंपनियां काफी मुखर रही हैं.
बाकी दुनिया की तरह चीन माइक्रोसॉफ़्ट पर निर्भर नहीं है. चीन के बाज़ार में अलीबाबा, टेन्सेंट और ख़्वावे जैसी घरेलू तकनीकी कंपनियों का दबदबा है और ज़्यादातर क्लाउड सर्विस इन कंपनियों के कब्जे़ में है.
इसलिए चीन में आउटेज की शुरुआती ख़बरें आईं तो ज़्यादा घबराहट नहीं दिखी. इससे सिर्फ विदेशी कंपनियां या संगठन ही प्रभावित थे.
मसलन चीनी सोशल मीडिया साइटों पर सिर्फ़ कुछ यूज़र ये शिकायत करते दिखे कि वो चीन के शहरों में मौजूद शैरेटन, मैरिएट और हयात जैसी इंटरनेशनल होटल चेन के होटलों में चेक-इन नहीं कर पा रहे हैं.
पश्चिमी आईटी कंपनियों से चीन की दूरी क्यों?

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चीन में पिछले कुछ सालों में सरकारी संगठनों, कंपनियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटरों ने अपने आईटी सिस्टम को विदेशी कंपनियों की जगह घरेलू कंपनियों को सौंप दिया है. कुछ विश्लेषक इस समांतर नेटवर्क को ‘स्पलिंटरनेट’ कहते हैं.
सिंगापुर में रहने वाले साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट जोश केनेडी व्हाइट कहते हैं, "ये विदेशी टेक ऑपरेशनों को लेकर चीन की रणनीति के बारे में बताता है.’’
वो बताते हैं, "माइक्रोसॉफ्ट चीन में एक स्थानीय सहयोगी 21वायानेट के ज़रिये काम करती है, जो अपने ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर से स्वतंत्र होकर सेवा देती है. इस तरह के सेटअप की वजह से किसी ग्लोबल आईटी गड़बड़ी की स्थिति में चीन का बैंकिंग और एविएशन सेक्टर सुरक्षित रहता है."
"चीन की नज़र में विदेशी सिस्टम पर निर्भरता से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है. यही वजह है कि सरकार वहां इस तरह के सिस्टम पर निर्भरता कम करने पर ज़ोर देती है.''
ये ठीक उसी तरह का क़दम है जैसे कुछ पश्चिमी देशों ने 2019 में चीनी टेक कंपनी ख़्वावे की टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगा दिया था.
इसी तरह 2023 में ब्रिटेन की सरकार ने सरकारी डिवाइस में चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था.
इसके बाद से ही अमेरिका ये लगातार कोशिश करता रहा है कि चीन को एडवांस सेमीकंडक्टर चिप न बेचे जा सकें. इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों को चीनी टेक्नोलॉजी में निवेश करने से भी रोका जा रहा है.
अमेरिकी सरकार का कहना है कि ये सारे प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा को देखकर लगाए जा रहे हैं.
चीन के सरकारी अख़बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ में शनिवार को छपे एक संपादकीय में हल्के इशारे में चीनी टेक्नोलॉजी को रोकने के इन क़दमों का ज़िक्र किया गया है.
संपादकीय में लिखा है, "कुछ देश सुरक्षा की लगातार बात करते हैं. उन्होंने इस अवधारणा का सरलीकरण कर दिया है. लेकिन वो असली सुरक्षा की अनदेखी करते हैं. यह विडंबना है.’’
खुले ग्लोबल बाज़ार की पैरवी लेकिन घरेलू बाज़ार पर नियंत्रण

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चीन में ये तर्क दिया जाता है कि अमेरिका यह तय करने की कोशिश करता है कि ग्लोबल टेक्नोलॉजी कौन इस्तेमाल कर सकता है और ये किस तरह इस्तेमाल किया जाए.
लेकिन इसी की एक कंपनी ने सावधानी न बरतते हुए शुक्रवार को ग्लोबल लेवल पर इतनी बड़ी अराजकता फैला दी.
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एकाधिकार की प्रवृत्ति वाली बड़ी इंटरनेट कंपनियों को आड़े हाथ लिया है.
अख़बार ने लिखा है कि कुछ देश नेटवर्क सिक्योरिटी के लिए सिर्फ कुछ शीर्ष कंपनियों पर ही पूरी तरह निर्भर रहने की वकालत करते हैं. लेकिन ये न सिर्फ गवर्नेंस के नतीजों के समान रूप से लाभ लेने से रोकते हैं बल्कि नए सुरक्षा जोख़िम भी पैदा करते हैं.
यहां समान रूप से लाभ लेने का संदर्भ शायद बौद्धिक संपदा अधिकारों पर चल रही बहस की ओर इशारा करते हुए दिया गया है क्योंकि चीन पर अक्सर पश्चिमी टेक्नोलॉजी की नकल करने या चोरी करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं.
चीन बौद्धिक संपदा की चोरी या नकल से इनकार करता रहा है. वो टेक्नोलॉजी के खुले ग्लोबल बाज़ार की मांग करता है. लेकिन अपने घरेलू बाज़ार को बाहरी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए नहीं खोलना चाहता है.
हालांकि शुक्रवार के ग्लोबल आईटी आउटेज से चीन पूरी तरह अछूता भी नहीं रहा है. यहां कुछ कर्मचारियों पर इसका असर पड़ा. इसकी वजह से उनका वीकेंड जल्दी शुरू हो गया है.
सोशल मीडिया साइट पर शुक्रवार को जल्दी छुट्टी मिल जाने की वजह से ‘थैंक्यू माइक्रोसॉफ्ट ट्रेंड’ कर रहा था. कई पोस्ट में आईटी आउटेज की वजह से कंप्यूटरों की ब्लू स्क्रीन पर एरर के चिन्ह के फोटो डाले गए थे.
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