भारत में प्रतिबंधित चीन के इस ऐप से पश्चिमी देशों को कितना ख़तरा?

टिकटॉक बैन

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    • Author, जो टाइडी
    • पदनाम, साइबर संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

चीन ने अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए गए एक विधेयक पर हमलावर रुख अपनाया है.

ये बिल अमेरिका में टिकटॉक ऐप के प्रतिबंध का रास्ता साफ़ करेगा. चीन ने इसे गलत बताया है.

ताज़ा घटनाक्रम टिकटॉक ऐप से जुड़ी सुरक्षा आशंकाओं पर वर्षों से चली आ रही बहस का हिस्सा है. टिकटॉक चीनी कंपनी का ऐप है. भारत में ये ऐप प्रतिबंधित है.

कई पश्चिमी देशों में सरकारी अधिकारियों, नेताओं और सुरक्षा कर्मियों को इस ऐप को फ़ोन में इंस्टॉल करने की मनाही है.

टिकटॉक को लेकर तीन सबसे बड़ी चिंताएं कौन सी हैं और कंपनी का इस पर क्या रुख है?

टिकटॉक 'सीमा से अधिका' डेटा इकट्ठा करता है

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टिकटॉक का कहना है कि ऐप में डेटा कलेक्शन पूरे 'उद्योग जगत के चलन' के अनुरूप है.

आलोचक अक्सर टिकटॉक पर हद से अधिक डेटा जमा करने का आरोप लगाते हैं. ऑस्ट्रेलियाई साइबर कंपनी इंटरनेट 2.0 के शोधकर्ताओं ने जुलाई 2022 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे अमूमन टिकटॉक पर डेटा कलेक्शन के आरोपों के सबूत के तौर पर पेश किया जाता है.

शोधकर्ताओं ने ऐप के सोर्स कोड का अध्ययन किया और फिर शोध में बताया कि टिकटॉक अत्याधिक डेटा स्टोर करता है. विश्लेषकों ने कहा कि टिकटॉक लोकेशन, कौन से डिवाइस में ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, उस डिवाइस में और कौन से ऐप हैं जैसी कई जानकारियां संग्रहित करता है.

हालांकि, इसी तरह का परीक्षण सिटिज़न लैब ने भी किया, जिसने अपने निष्कर्ष में बताया कि "अन्य प्रचलित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में, टिकटॉक भी उन्हीं की तरह यूज़र बिहेवियर को ट्रैक करने के लिए डेटा इकट्ठा करता है."

जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की पिछले साल आई रिपोर्ट कहती है, "अहम बात ये है कि अधिकतर सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप भी यही करते हैं."

टिकटॉक से चीन की सरकार यूज़र्स की जासूसी कर सकती है

टिकटॉक

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इमेज कैप्शन, बाइटडांस है टिकटॉक की पेरेंट कंपनी

टिकटॉक का कहना है कि कंपनी पूरी तरह स्वतंत्र है और उसने 'कोई यूज़र डेटा चीन की सरकार को नहीं दिया है, न तो मांगने पर देंगे.'

हालांकि, ये दलील प्राइवेसी एक्सपर्ट्स को रास नहीं आती. हम में से अधिकांश लोग सोशल नेटवर्किंग साइटों को अत्याधिक डेटा देने को स्वीकार करते हैं.

हमें मुफ़्त की सुविधा देने के बदले में वे हमारे बारे में जानकारियां जुटाते हैं और फिर उसे अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन लाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. या फिर ये डेटा ऐसी दूसरी कंपनियों को बेच दिया जाता है जो इंटरनेट पर कहीं भी प्रचार करने की कोशिश कर रही है.

आलोचकों को टिकटॉक से जो समस्या है वो ये कि इसका मालिकाना हक बीजिंग स्थित टेक जगत की बड़ी कंपनी बाइटडांस के पास है. यही तथ्य इसे ऐसा अनोखा मुख्य ऐप बनाता है, जो अमेरिकी नहीं है. उदाहरण के लिए फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और यूट्यूब भी इसी तरह का डेटा इकट्ठा करते हैं, लेकिन ये सभी कंपनियां अमेरिका की हैं.

वीडियो कैप्शन, टिकटॉक कंपनी के सीईओ शाउ ज़ी च्यू से पूछे गए कैसे-कैसे सवाल

सालों से अमेरिकी प्रशासन और बाकी दुनिया ने खुद ही ये भरोसा कर लिया है कि इन प्लेटफॉर्म ने जो डेटा इकट्ठा किया है, उसका ऐसा कोई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़े.

डोनाल्ड ट्रंप के साल 2020 में दिए एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर में आरोप लगाया गया था कि टिकटॉक का डेटा कलेक्शन संभवतः चीन को 'सरकारी कर्मचारियों और कॉन्टैक्टरों के लोकेशन ट्रैक करने, उनकी निजी जानकारियों को ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल करने और जासूसी करने में मदद कर सकता है.'

अभी तक ऐसे जोखिम की बातों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है लेकिन साल 2017 में चीन ने एक कानून पारित किया, जिससे इस जासूसी के डर को बल मिला.

चीन के नेशनल इंटेलिजेंस कानून का अनुच्छेद सात कहता है कि चीन के सभी संस्थान और नागरिकों को देश के ख़ुफ़िया विभाग के प्रयासों में 'सहयोग' और 'समर्थन' देना चाहिए.

जो लोग टिकटॉक सहित चीन की सभी कंपनियों के प्रति संदेह रखते हैं, उन्हें अक्सर इसी अनुच्छेद का हवाला देते सुना जाता है.

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हालांकि, जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता दलील देते हैं कि चीन के कानून का ये अनुच्छेद बगैर संदर्भ के इस्तेमाल किया जा रहा है. वो कहते हैं कि कानून में यूज़र्स और निजी कंपनियों को भी अपने बात रखने देने का अधिकार है.

वर्ष 2020 से टिकटॉक से जुड़े अधिकारी लगातार ये आश्वस्त करने की कोशिश में लगे हैं कि चीनी स्टाफ़ किसी गैर-चीन कर्मी के डेटा को एक्सेस नहीं कर सकते.

लेकिन साल 2022 में बाइटडांस ने ये स्वीकार किया था कि बीजिंग में उसके कुछ कर्मचारियों ने अमेरिका और ब्रिटेन के कम से कम दो पत्रकारों का डेटा एक्सेस किया था ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक कर सकें, और ये पता लगाया जा सके कि क्या ये पत्रकार टिकटॉक के उन कर्मचारियों से मिल रहे हैं, जो मीडिया में जानकारी लीक करने को लेकर संदिग्ध हैं.

टिकटॉक की प्रवक्ता कहती हैं कि डेटा एक्सेस करने वाले इन कर्मचारियों को कंपनी ने बाहर कर दिया था.

कंपनी इस बात पर ज़ोर देती है कि डेटा कभी भी चीन में स्टोर नहीं किया गया और वह अमेरिकी यूज़र्स के डेटा के लिए टेक्सास में डेटा सेंटर बना रही है, वहीं यूरोप के नागरिकों के लिए भी वहीं साइट बन रही है.

यूरोपीय संघ में तो टिकटॉक ने अपनी यूरोपियन साइटों पर डेटा के इस्तेमाल की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनी को ही काम सौंप दिया है. टिकटॉक का कहना है कि 'हमारे यूरोपीय यूज़र्स का डेटा खासतौर पर बनाई गई सुरक्षा प्रणाली में सुरक्षित है. इन्हें सिर्फ़ सत्यापन के लिए कुछ मंज़ूरी प्राप्त कर्मचारी ही एक्सेस कर सकते हैं.'

टिकटॉक का इस्तेमाल 'ब्रेनवॉशिंग' टूल के तौर पर हो सकता है

टिकटॉक पर बैन

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इमेज कैप्शन, टिकटॉक का चाइनीज़ वर्ज़न डॉयिन है, जिस पर कई तरह की पाबंदियां लागू हैं

टिकटॉक की दलील है कि उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस के तहत 'ऐसी कोई भ्रामक जानकारी प्रतिबंधित है जो हमारे समुदाय को या बड़ी संख्या में लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है.'

साल 2022 में फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन के डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने अमेरिकी सांसदों से कहा, "चीन की सरकार रेकमेंडेशन एलोगोरिदम को नियंत्रित कर सकती है, जिसका इस्तेमाल संचालन को प्रभावित करने के लिए हो सकता है." ये दावा इसके बाद कई बार दोहराया जा चुका है.

इम चिंताओं को इस तथ्य से और बल मिला कि टिकटॉक की सहयोगी ऐप, डॉयिन- जो सिर्फ़ चीन में उपलब्ध है, को भारी तौर पर सेंसर किया गया है. साथ ही इसे युवा युज़र्स को ध्यान में रखते हुए ऐसे बनाया गया है कि इसपर मौजूद कंटेंट वायरल हो.

चीन में सभी सोशल नेटवर्कों को अत्याधिक सेंसर किया जाता है. यहां इंटरनेट पुलिस की एक फौज ऐसे कंटेंट को डिलीट करने में लगी हुई है, जिनमें सरकार की आलोचना हो या फिर जिससे राजनीतिक संकट पैदा हो सकता हो.

वीडियो कैप्शन, अमरीका में टिकटॉक बैन को लेकर क्या चल रहा है?

टिकटॉक जब प्रचलित होना शुरू हुआ, तभी ऐप पर सेंसरशिप के हाई प्रोफ़ाइल मामले सामने आए थे. अमेरिका में एक यूज़र का अकाउंट इसलिए सस्पेंड कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के साथ चीन के बर्ताव पर चर्चा की थी. हालांकि, इस पर भारी विवाद और विरोध झेलने के बाद टिकटॉक ने माफ़ी मांगी और अकाउंट बहाल कर दिया.

इसके बाद से सेंसरशिप से जुड़े कम ही मामले देखने को मिले हैं. हालांकि, कुछ कंटेंट मॉडरेशन के निर्णय विवादास्पद रहे, लेकिन इनसे सभी प्लेटफॉर्मों को निपटना पड़ता है.

सिटिज़न लैब के शोधकर्ताओं ने टिकटॉक और डॉयिन की तुलना की. उन्होंने पाया कि टिकटॉक उस तरह के सेंसरशिप का पालन नहीं करता जैसा, डॉयिन पर है.

साल 2021 में शोधकर्ताओं ने कहा था, "इस प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट तौर पर किसी पोस्ट को लेकर पाबंदी नहीं है."

जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के विश्लेषकों ने ताइवान की आज़ादी या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का मज़ाक उड़ाने से जुड़े विषयों को भी ढूंढा और पाया, "इससे जुड़े वीडियो टिकटॉक पर आसानी से मिलते हैं. बहुत से वीडियो इतने लोकप्रिय हैं कि उन्हें व्यापक स्तर पर शेयर किया जाता है."

क्या हैं जोखिम?

हुवावे

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पूरा मामला सैद्धांतिक भय और जोखिम का है.

आलोचक दलील देते हैं कि टिकटॉक देखने में हानिकारक है लेकिन ये किसी संघर्ष के समय ताकतवर हथियार साबित हो सकता है.

ये ऐप भारत में पहले से ही बैन है. भारत ने साल 2020 में टिकटॉक सहित दर्जनों चीनी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की थी.

लेकिन अमेरिका के टिकटॉक पर बैन लगाने से इस प्लेटफॉर्म पर बड़ा असर हो सकता है. क्योंकि अमूमन अमेरिका के सहयोगी देश भी उसके लिए फ़ैसलों को लागू कर देते हैं.

इसका स्पष्ट उदाहरण उस समय दिखा जब अमेरिका ने सैद्धांतिक जोखिम के आधार पर चीन की टेलीकॉम कंपनी हुवावे को 5जी सर्विस के बाज़ार में आने से रोका था.

हालांकि, ये ध्यान देने लायक बात है कि ये जोखिम एकतरफा हैं. चीन को अमेरिकी ऐप्स से चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि सालों से चीन नागरिकों के इनका इस्तेमाल करने पर रोक है.

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