एवरग्रांड: चीन की कंपनी के ख़िलाफ़ हॉन्गकॉन्ग के कोर्ट का आदेश, 'संपत्ति बेचकर हो कर्ज़ वसूली'

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    • Author, मारिको ओई
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर

हॉन्गकॉन्ग की एक अदालत ने चीन की बड़ी प्रॉपर्टी कंपनी एवरग्रांड को लिक्विडेट करने का आदेश दिया है. यानी संपत्ति की बिक्री के जरिए कर्ज़ चुकाया जाए.

ये आदेश सुनाने वाली जज लिंडा चान ने कहा, ‘बस बहुत हुआ’.

अदालत की ओर से ये आदेश तब आया है जब चीनी कंपनी लगातार अपने कर्ज़ को पुनर्गठित करने के लिए किसी तरह की योजना पेश करने में विफल रही है.

इस कंपनी को चीन के रियल इस्टेट संकट के 'पोस्टर चाइल्ड' के रूप में देखा जाता है. इस कंपनी पर तीन सौ अरब डॉलर से ज़्यादा का क़र्ज़ है.

अब से दो साल पहले जब एवरग्रांड के डिफॉल्ट से जुड़ी ख़बर आई थी तो दुनिया भर के वैश्विक बाज़ारों पर इसका नकारात्मक असर देखा गया था.

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कंपनी ने कोर्ट के आदेश पर क्या कहा?

एवरग्रांड के कार्यकारी निदेशक शॉन सिउ ने इस आदेश को खेदजनक बताया है. लेकिन उन्होंने कहा है कि कंपनी चीन (मेनलैंड) में काम करना जारी रखेगी.

एवरग्रांड समूह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हॉन्गकॉन्ग वाली फर्म उसके चीन में फैले व्यवसाय से स्वतंत्र थी.

हालांकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि अदालत की ओर से आए इस आदेश की वजह से एवरग्रांड का घर निर्माण व्यवसाय कैसे प्रभावित होगा. लेकिन कंपनी पर छाए इस संकट की वजह से कई लोगों का अपने घरों के लिए इंतज़ार बढ़ता ही जा रही है.

इसकी एक झलक चीनी सोशल मीडिया वेबसाइट वीबो पर आम लोगों की ओर से एवरग्रांड जैसी कंपनियों के ख़िलाफ़ जताई गई नाराज़गी के रूप में भी नज़र आई थी.

इसके बाद चीनी सरकार ने इन चिंताओं का निदान करने की कोशिश भी थी.

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हॉन्गकॉन्ग की अदालत के इस आदेश की वजह से चीन के वित्तीय बाज़ार में भी हलचल होने की संभावनाएं हैं. और ऐसा उस वक़्त हो सकता है जब चीन की सरकारी एजेंसियां अपने वित्तीय बाज़ारों में बिकवाली थामने की कोशिश कर रही हैं.

चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसमें चीन के संपत्ति बाज़ार की हिस्सेदारी लगभग एक चौथाई है.

सोमवार को इस आदेश की ख़बर आने के बाद हॉन्गकॉन्ग में एवरग्रांड के शेयर मूल्यों में बीस फीसद की कमी दर्ज की गई. इसके बाद इसके शेयरों की ख़रीद-फरोख़्त रोक दी गयी.

लिक्विडेशन एक प्रक्रिया है जिसके तहत कंपनियों की संपत्ति को जब्त करके उन्हें बेच दिया जाता है. इससे जो रकम हासिल होती है, उससे कंपनी पर चढ़े क़र्ज़ को उतारने की कोशिश की जाती है.

हालांकि, इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा या नहीं, ये चीनी सरकार के रुख पर निर्भर कर सकता है. और लिक्विडेशन प्रक्रिया का मतलब ये नहीं होगा कि इसके बाद एवरग्रांड कंपनी ख़त्म हो जाएगी.

सोमवार को आए आदेश से पहले चीन के सुप्रीम कोर्ट और हॉन्गकॉन्ग के न्याय विभाग के बीच एक दूसरे की ओर से जारी सिविल और कमर्शियल फ़ैसलों को स्वीकार करके अमल में लाने पर सहमति बनी है.

जज चान ने नयी योजना को परिभाषित करते हुए कहा है, “यह पुनर्गठन प्रस्ताव तो नहीं ही है, बल्कि एक औपचारिक प्रस्ताव से भी कम है.”

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किसने दर्ज कराया मुकदमा

एवरग्रांड के ख़िलाफ़ ये मुकदमा कंपनी के हॉन्गकॉन्ग स्थित निवेशक टॉप शाइन ग्लोबल की ओर से दायर कराया गया था.

टॉप शाइन ग्लोबल का कहना है कि एवरग्रांड ने शेयरों को वापस ख़रीदने के अपने अनुबंध को पूरा नहीं किया है.

लेकिन टॉप शाइन ग्लोबल का जितना पैसा एवरग्रांड पर बकाया है, वो उसके कुल क़र्ज़ का एक अंश मात्र है.

एवरग्रांड के ज़्यादातर क़र्ज़दाता चीन में रहते हैं जिनके पास अपना पैसा वापस मांगने के लिए क़ानूनी विकल्प सीमित हैं.

हालांकि, एवरग्रांड के विदेशी क़र्ज़दाता चीन के बाहर उसके ख़िलाफ़ केस दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं.

ऐसे में कुछ क़र्ज़दाताओं ने एवरग्रांड के ख़िलाफ़ केस दायर करने के लिए हॉन्गकॉन्ग को चुना है जहां ये और ऐसी दूसरी प्रॉपर्टी कंपनियां सूचीबद्ध हैं.

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लिक्विडेशन कैसे होता है?

इस कंपनी का लिक्विडेशन होने के बाद कंपनी के निदेशकों का नियंत्रण ख़त्म हो जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय कंसल्टिंग फर्म डेलोइट में ग्लोबल इंसॉल्वेंसी लीडर डेरेक लाइ के मुताबिक़, इस प्रक्रिया को एक प्रोविज़नल लिक्विडेटर अंजाम देगा जो एक सरकारी कर्मचारी या किसी प्रोफेशनल फर्म से जुड़ा पेशेवर होगा.

क़र्ज़दाताओं के साथ बैठक के बाद कुछ महीनों के अंदर एक औपचारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया जाएगा.

लेकिन एवरग्रांड की ज़्यादातर संपत्तियां चीन में हैं. और एक देश-दो तंत्र वाले नारे के बावजूद, दोनों के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों पर खींचतान जारी है.

चीन और हॉन्गकॉन्ग की अदालतों के बीच लिक्विडेटर की नियुक्ति और उसे स्वीकार्यता देने से जुड़े समझौते हुए हैं.

लाई कहते हैं कि उनकी जानकारी के मुताबिक़, मेनलैंड चीन के तीन पायलट क्षेत्रों की अदालतों ने छह में से सिर्फ दो निवेदनों को स्वीकार्यता दी है.

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कितनी चुनौतीपूर्ण है ये प्रक्रिया

ऐसा लगता है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी भी चाहती है कि प्रॉपर्टी कंपनियों का व्यवसाय ठीक से चलता रहे ताकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही घर ख़रीदने वालों को उनके घर मिल सकें.

इसका मतलब ये है कि चीन हॉन्गकॉन्ग की अदालत से आए आदेश को नज़रअंदाज़ कर सकता है.

लाई कहते हैं, “चाहे लिक्विडेटर को हॉन्गकॉन्ग और चीन में स्वीकार्यता हासिल हो. उसे चीन में लिक्विडेशन से जुड़े कामकाज निपटाने के लिए चीनी नियम-क़ानूनों का पालन करना होगा.”

इसके साथ ही मूल कंपनी के ख़िलाफ़ लिक्विडेशन के आदेश का मतलब ये नहीं है कि एवरग्रांड की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर तत्काल रूप से विराम लग जाएगा.

बिज़नेस एडवायज़री फर्म ग्रांट थॉर्नटन के एक शीर्ष अधिकारी नाइजल ट्रेयर्स कहते हैं , ‘इस आदेश में सभी शाखाओं का लिक्विडेशन शामिल नहीं है.”

हालांकि, उनका कहना है कि लिक्विडेटर्स जांच करने के बाद कुछ शाख़ाओं पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करेंगे.

वह कहते हैं, “लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें कंपनी की सब्सिडरीज़ को लिक्विडेशन में शामिल करने के लिए अनुरोध करना होगा या खुद को उन सब्सिडियरी कंपनी का निदेशक बनाना होगा.”

“ऐसा करते हुए उन्हें एक कॉरपोरेट संरचना की तमाम परतों से होकर गुज़रना होगा जो कि असल में करना काफ़ी चुनौतीपूर्ण होगा.”

लाई के मुताबिक़, अगर कंपनी दिवालिया है तो कोर्ट की ओर से लिक्विडेशन का आदेश आने के बाद भी इस बात की संभावनाएं कम हैं कि अनसिक्योर्ड क़र्ज़दाता कंपनी से अपनी रकम वसूल पाएं.

अनसिक्योर्ड लोन या क़र्ज़ से आशय उस क़र्ज़ से है जिसे देने के बदले में क़र्ज़दाता किसी तरह की चीज़ गिरवी नहीं रखता है.

वहीं, विदेशी क़र्ज़दाताओं को भी चीनी क़र्ज़दाताओं से पहले पैसे मिलने की संभावना नहीं है.

जज चान का आदेश अगर चीन में लागू नहीं भी होता है फिर भी ये आदेश एक कड़ा संदेश देता है कि दूसरी प्रॉपर्टी कंपनियां और क़र्ज़दाता किन हालात का सामना कर सकते हैं.

जज चान सिर्फ़ एवरग्रांड ही नहीं दूसरे डिफॉल्टेड डेवलपर्स जैसे सुनाक चाइना, जियायुआन और काइसा जैसे मामलों में भी सुनवाई कर चुकी है.

पिछले साल मई महीने में उन्होंने जियायुआन को लिक्विडेट करने का आदेश दिया था जब उसके वकील ये समझाने में सफल नहीं हुए थे कि उसे अपने कर्ज़ के पुनर्गठन की योजना को व्यवस्थित करने के लिए ज़्यादा समय क्यों चाहिए.

एशिया में पुनर्गठन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली हॉन्गकॉन्ग स्थित वैश्विक लॉ फर्म डेकर्ट के पार्टनर डेनियल मार्गुलीज़ कहते हैं, “ये देखना अहम होगा कि स्थानीय शेयर धारकों की ओर से एक विदेशी लिक्विडेटर के साथ कैसा बर्ताव किया जाएगा जब स्थानीय क़र्ज़दाताओं की अच्छी ख़ासी संख्या हैं.”

एवरग्रांड कंपनी पिछले कुछ समय से क़र्ज़ चुकाने की दिशा में एक नयी योजना बनाने पर काम कर रही थी. लेकिन पिछले साल अगस्त में उसने अमेरिका में दिवालिया होने के लिए आवेदन दिया ताकि वह अमेरिकी संपत्तियों को बचा सके. क्योंकि वह एक डील पर काम कर रहा थी.

इसके बाद कंपनी के चेयरमैन हुई का यान को पुलिस की निगरानी में रखा गया.

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