प्यू रिसर्च में दावा- 80 फ़ीसदी भारतीयों की अब भी पहली पसंद पीएम मोदी

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- Author, प्रेरणा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अगले हफ़्ते दिल्ली में होने जा रही जी-20 की अहम बैठक से पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और विश्व में भारत के प्रभाव से जुड़ी एक रिसर्च सामने आई है.
अमेरिकी थिंक टैंक 'प्यू रिसर्च सेंटर' के इस सर्वे में दावा किया गया है कि देश में रहने वाले तकरीबन 80 फीसदी भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के प्रति सकारात्मक रवैया रखते हैं.
सीधे शब्दों में कहा जाए तो हर 10 में से 8 भारतीयों की पसंद प्रधानमंत्री मोदी हैं.
इनमें 55 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी पहली पसंद बताया है, वो उन्हें काफ़ी पसंद करते हैं.
जबकि 20% आबादी पीएम मोदी को पसंद नहीं करती या वो उनकी पहली पसंद नहीं हैं.

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पीएम मोदी पर दूसरे देश के नागरिकों को कितना भरोसा?
भारत के बाहर लोग प्रधानमंत्री मोदी के प्रति कैसी राय रखते हैं? वो उन पर भरोसा करते हैं या नहीं? सर्वे में इस सवाल का जवाब भी विस्तार से मिलता है.
दुनिया के 12 देशों के वयस्क नागरिकों से प्रधानमंत्री मोदी के संबंध में उनकी राय पूछी गई. रिपोर्ट के मुताबिक़ नागरिकों की राय मिली जुली आई.
वैश्विक मामलों में पीएम मोदी की कुशलता पर औसतन 40 प्रतिशत लोग भरोसा नहीं करते. वहीं 37 फीसदी का कहना है कि उन्हें थोड़ा बहुत भरोसा है.
ख़ासकर मेक्सिको और ब्राज़ील के नागरिक प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखते हैं.
सर्वे में शामिल आधा से ज़्यादा नागरिकों का कहना है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर भरोसा नहीं है.
सर्वे के अनुसार अमेरिका के 37 फीसदी लोगों को पीएम मोदी पर भरोसा नहीं है. वहीं 21 प्रतिशत लोग उन पर भरोसा करते हैं.

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अमेरिकियों की राय
अमेरिका की 42 फीसदी आबादी ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में नहीं सुना या सर्वे में हिस्सा लेने से मना कर दिया. वहीं जापान, कीनिया और नाइजीरिया के लोगों को मोदी की क्षमताओं पर अधिक भरोसा है.
कीनिया के लोग विशेष रूप से पीएम मोदी की कुशलताओं को लेकर आश्वस्त हैं. यहां की 60 फीसदी आबादी का कहना है कि उन्हें वैश्विक मामलों में पीएम मोदी की कार्य कुशलता और फैसला लेने की क्षमता पर कम से कम कुछ भरोसा तो है.
जापान के 45 प्रतिशत नागरिकों को पीएम मोदी पर भरोसा है कि वो सही चीज़ें करेंगे. जबकि 37 प्रतिशत लोगों को ऐसा नहीं लगता.
इसराइल और ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो यहां की 41 फीसदी आबादी ने जहां पीएम मोदी पर भरोसा जताया है, वहीं 42 प्रतिशत आबादी को भरोसा नहीं है.
इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया में प्रधानमंत्री मोदी पर लोगों का भरोसा बरकरार है.

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सर्वे पर इतनी चुप्पी क्यों?
सर्वे के ज़्यादातर परिणाम प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी के पक्ष में खड़ी नज़र आती हैं.
इसके बावजूद बीजेपी के नेता इस रिपोर्ट की चर्चा करते नज़र नहीं आ रहे हैं. बीजेपी के किसी भी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस रिपोर्ट का ज़िक्र नहीं है.
ऐसे में जब हमने बीजेपी के प्रवक्ता अमिताभ सिन्हा से संपर्क किया और उनसे इसके पीछे का कारण पूछा तो उन्होंने जवाब में कहा, "प्रधानमंत्री की लोकप्रियता देश ही नहीं विदेशों में भी है. ये तो देश का जनरल मूड है. उनकी तुलना का कोई दूसरा विपक्षी नेता नहीं है. विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन का गठन किया है लेकिन उनमें कई मतभेद हैं. प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर एक राय नहीं है."
"जब विपक्ष के पास प्रधानमंत्री मोदी के समकक्ष का कोई चेहरा ही नहीं होगा तो लोकप्रियता कम होने का सवाल ही नहीं उठता. सारे विपक्षी नेता पीएम मोदी के सामने बौने हैं. रही बात इस सर्वे रिपोर्ट की तो चुनाव के व़क्त ऐसी कई सर्वे-रिपोर्ट आती हैं, ये बहुत ही संजीदा चीज़ है."
"लेकिन इन सर्वे की विश्वसनीयता हमेशा सवालों के घेरे में रहती है. पीएम मोदी का डंका वैसे भी बज रहा है. ऐसे में हम अलग से जाकर एक सर्वे के हवाले से इसे पुष्ट करें, इसकी ज़रूरत नहीं लगती. पार्टी काम करने और डिलीवर करने में विश्वास रखती है."

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राहुल गांधी का भी ज़िक्र
प्यू रिसर्च सेंटर की तरफ़ से जारी किए गए इस सर्वे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी ज़िक्र है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ नेताओं में भारतीयों की दूसरी पसंद कांग्रेस नेता राहुल गांधी हैं.
लगभग दस में से छह भारतीय राहुल गांधी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं.
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर 46 प्रतिशत लोगों की राय पॉजिटिव है.

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सर्वे में और क्या-क्या?
सर्वे में वैश्विक मंच पर भारत के प्रभाव से जुड़े कई निष्कर्ष हैं. सर्वे के मुताबिक़ 68 प्रतिशत भारतीयों को लगता है कि वैश्विक स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ रहा है. लगभग दस में से सात भारतीयों का मानना है कि उनका देश हाल ही में अधिक प्रभावशाली हो गया है.
वहीं सर्वे में शामिल दूसरे देशों की बात करें तो भारत के प्रति सबसे सकारात्मक रवैया इसराइल का है. यहां के 71 प्रतिशत नागरिकों का कहना है कि भारत के बारे में उनका नज़रिया पॉजिटिव है.
भारत के बारे में ऐसी ही राय ख़ासकर कीनिया, नाइजीरिया और ब्रिटेन के नागरिक भी रखते हैं. कम से कम दस में छह लोग तो भारत को लेकर अच्छी राय रखते हैं.
इसके उलट दक्षिण अफ्रीका के ज़्यादातर लोग भारत की तरफ़ आलोचनात्मक रवैया रखते हैं. मात्र 28 प्रतिशत आबादी ही भारत के प्रति पॉजिटिव हैं.
नीदरलैंड और स्पेन की आधी आबादी का भी रुख़ आलोचनात्मक है. ब्रिटेन के 66 प्रतिशत लोग भारत को पसंद करते हैं. वहीं, साल 2008 की तुलना में यूरोपीय देश भारत की छवि को लेकर नकारात्मक हुए हैं.

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इन देशों के लिए भारतीयों की राय
सर्वे में भारतीय नागरिकों से छह अन्य देशों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए भी कहा गया.
इन छह देशों में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस शामिल हैं.
जो नतीजे सामने आए, उसके मुताबिक़ लगभग आधे भारतीयों ने कहा है कि हाल के वर्षों में वैश्विक मंच पर अमेरिका का प्रभुत्व बढ़ा है.
केवल 14 प्रतिशत भारतीय ये मानते हैं कि पिछले कुछ सालों में अमेरिका का प्रभुत्व घटा है.
रूस की बात की जाए तो भारतीयों की एक बड़ी आबादी ये भी मानती है कि रूस का वैश्विक प्रभाव मज़बूत हुआ है.
वहीं चीन के प्रति ज़्यादातर भारतीयों का रुख आलोचनात्मक है. 67 प्रतिशत भारतीय चीन को लेकर नकारात्मक भाव रखते हैं. 48 प्रतिशत भारतीयों को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर बिल्कुल भरोसा नहीं है.

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भारतीयों में पाकिस्तान के प्रति बढ़ी नफ़रत
दस में से सात भारतीयों का नज़रियां पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक है.
मात्र 19 प्रतिशत भारतीयों का रुख ही सकारात्मक है.
महिलाओं की तुलना में पुरुष भारतीयों की पाकिस्तान के प्रति नफ़रत ज़्यादा है.
पाकिस्तान से नफ़रत करने वाले ज़्यादातर भारतीय एनडीए के वोटर हैं.
सर्वे में बताया गया है कि साल 2013, जब पहली बार भारतीयों ने पाकिस्तान के संदर्भ में ये सवाल किया गया, उसकी तुलना में पिछले दस सालों में नफ़रत बढ़ी है.
सर्वे कैसे किए गए?
प्यू रिसर्च सेंटर ने भारत और भारतीय प्रधानमंत्री के प्रति लोगों की राय जानने के लिए उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्यपूर्व, एशिया-प्रशांत क्षेत्र, सब-सहारा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 23 देशों के नागरिकों से संपर्क किया.
रिपोर्ट में भारतीयों के नज़रिए को भी दर्शाया गया है. जैसे- वो अपने प्रधानमंत्री के बारे में क्या सोचते हैं? भारत की वैश्विक पोजिशन और दूसरे अन्य देशों के प्रभावों को कैसे मूल्यांकित करते हैं? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब आपको सर्वे रिपोर्ट में मिलती हैं.
साल 2019 के बाद ये पहला साल है ग्लोबल एटीट्यूड सर्वे में अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को शामिल किया गया है.
सर्वे के लिए भारत में 25 मार्च से लेकर 11 मई के बीच 2,611 व्यस्क लोगों से संपर्क किया गया. सभी लोगों से सीधा यानी फेस-टू-फेस बात की गई.
अमेरिका में प्यू रिसर्च सेंटर ने 20 मार्च से 26 मार्च के बीच 3,576 एडल्ट लोगों का सर्वे किया.
वहीं भारत और अमेरिका से बाहर 11 देशों के नागरिकों से फ़ोन पर और 10 देशों में फेस टू फेस और ऑस्ट्रेलिया में ऑनलाइन पोर्टल और फेस-टू-फेस दोनों ही माध्यमों से संपर्क किए गए.
प्यू रिसर्च सेंटर एक अमेरिकी थिंकटैंक है जो सामाजिक मुद्दों से लेकर डिमोग्रैफिक ट्रेंड्स पर जानकारी सामने रखता है. पहले भी संस्था के सर्वे और रिपोर्ट चर्चा में रहे हैं.
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