चीन के नए नक़्शे पर जयशंकर का जवाब, राहुल का तंज़ और पूर्व सेना प्रमुख की यह सलाह

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अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन और भारत के कई इलाक़ों को नए नक़्शे में अपनी सीमा के अंदर दिखाने पर भारत ने चीन के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज की है.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया है कि भारत ने नक़्शे को लेकर चीन के ‘बेतुके दावे’ पर ‘कड़ा विरोध’ जताया है.
ये नक़्शा उस समय जारी हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दक्षिण अफ़्रीका में सीमा विवाद को सुलझाने को लेकर चर्चा हुई थी. चीन पहले भी इन भारतीय इलाक़ों पर अपना दावा रहा है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मीडिया के सवाल के जवाब में एक बयान जारी किया है.
इस बयान में कहा गया है, “चीन के तथाकथित 2023 के ‘स्टैंडर्ड मैप’ जिसमें भारत के इलाक़ों पर दावा किया गया है, उस पर हमने कूटनीतिक चैनलों के ज़रिए कड़ा विरोध जताया है.”
बयान में आगे कहा गया है, “हम इस तरह के बेबुनियाद दावों को ख़ारिज करते हैं. चीनी पक्ष की ओर से इस तरह के क़दम सीमा के सवाल को सुलझाने की जगह इसे सिर्फ़ उलझाएंगे.”
चीन के सरकारी मीडिया ने बताया है कि चीन ने ‘राष्ट्रीय मानचित्र जागरूकता प्रचार सप्ताह’ के तहत इस नक़्शे को जारी किया है. इसको दूसरे डिज़िटल और नेविगेशनल मैप्स भी अपनाएंगे.

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राहुल गांधी और पूर्व सेना प्रमुख क्या बोले
इस मैप के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस हो रही है. विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य अफ़सर ने इसकी आलोचना की है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बेंगलुरु जाते समय दिल्ली में हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात की.
इस दौरान राहुल गांधी ने कहा, ''मैं तो सालों से कह रहा हूं कि जो प्रधानमंत्री ने कहा कि एक इंच ज़मीन नहीं गई, ये झूठ है. मैं लद्दाख से आया हूं. पीएम मोदी ने कहा था कि लद्दाख में एक इंच ज़मीन नहीं गई. ये सरासर झूठ है.''
राहुल गांधी ने कहा, ''पूरा लद्दाख जानता है कि चीन ने हमारी ज़मीन हड़प ली. ये मैप की बात तो बड़ी गंभीर है. मगर इन्होंने ज़मीन तो ले ली है. उसके बारे में भी प्रधानमंत्री को कुछ कहना चाहिए.''
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राहुल गांधी कुछ दिनों पहले लद्दाख के दौरे पर गए थे.
कारगिल में हुई जनसभा में राहुल गांधी ने कहा था- ''चीन ने भारत की ज़मीन छीन ली है और इस मामले में पीएम मोदी सच नहीं बोल रहे हैं.''
नए मैप को लेकर पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने भी टिप्पणी की है.
उन्होंने गलवार को ट्वीट किया कि नक़्शे को जारी करना दिखाता है कि बीजिंग का सेना विवाद सुलझाने का कोई इरादा नहीं है.
साल 1999 में कारगिल युद्ध के समय सेना प्रमुख रहे जनरल मलिक ने सवाल किया कि ‘क्या भारत को तिब्बत की पुरानी स्थिति को घोषित नहीं करना चाहिए और वन चाइना पॉलिसी को त्यागना चाहिए?’
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जयशंकर का जवाब
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के नए मैप को जारी करने को उसकी ‘पुरानी आदत’ बताया है.
जयशंकर 2009 से लेकर 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे हैं. उन्होंने न्यूज़ टीवी चैनल एनडीटीवी से इस मुद्दे पर बात की है.
उन्होंने मंगलवार को कहा, “भारत के हिस्सों के साथ सिर्फ़ मैप जारी कर देने से कुछ भी नहीं बदलता है. हमारा क्षेत्र क्या है, इसको लेकर हमारी सरकार बिल्कुल स्पष्ट है. बेतुके दावे कर देने से दूसरे लोगों का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता है.”
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चीन के नए नक़्शे में भारत के इलाक़ों के अलावा पूरे दक्षिण चीन सागर और ताइवान को भी चीन का हिस्सा दिखाया गया है. चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में उसके पड़ोसियों के बीच विवाद है.
चीन के मैप छापने को एक सालाना अभ्यास बताया जा रहा है लेकिन इसकी टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं. 9 से 10 सितंबर को दिल्ली में जी-20 सम्मेलन होने जा रहा है, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हो सकते हैं.

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जी-20 देशों के नेता भी इसमें शामिल होंगे हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नहीं आएंगे.
इंडोनेशिया में होने वाले ईस्ट एशिया सम्मेलन और आसियान बैठक में भी शी जिनपिंग जाने वाले हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं.
बीते सप्ताह दक्षिण अफ़्रीका में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के नेताओं की मुलाक़ात हुई थी. इस अनौपचारिक मुलाक़ात के बाद दिल्ली और बीजिंग ने परस्पर विरोधी बयान जारी किए थे.
इन बयानों में दोनों देशों ने एलएसी पर सेना के बीच गतिरोध बातचीत के ज़रिए सुलझाने पर ज़ोर दिया था हालांकि दोनों की स्थितियों में अभी भी व्यापक मतभेद हैं.
एक ओर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो तेज़ी से डिसएंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन के ज़रिए एलएसी की स्थिति को सुधारें.
वहीं चीनी विदेश मंत्रालय ने सिर्फ़ यही कहा था कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रिश्तों को बेहतर करने के महत्व पर बल दिया.

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अक्साई चिन में चीन का बढ़ता दबदबा
सैटेलाइट डेटा से ये पता चला है कि अक्साई चिन क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को और मज़बूत कर रहा है.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ अख़बार ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. अख़बार लिखता है कि उसको मैक्सर टेक्नोलॉजीज़ से मिले डाटा से साफ़ है कि चीनी सेना अक्साई चिन के 15 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े की छह जगहों पर सैन्य निर्माण कर रहा है.
अख़बार के मुताबिक़, चीन यहां पर सैन्य बंकर और अंडरग्राउंड फ़ैसिलिटीज़ बना रहा है.
यह इलाक़ा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 70 किलोमीटर दूर है और मई 2020 में सैन्य गतिरोध के बाद यहां पर जवानों की तैनाती की गई थी.
अगस्त 2023 की ताज़ा तस्वीरों से पता चलता है कि इस इलाक़े में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज़ ज़ोरों पर है. यहां पर एर्थ मूविंग मशीनरी के अलावा, नई सड़कें, अंडरग्राउंड फ़ैसिलिटी के लिए कई एंट्रेंस भी मौजूद हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि अंडरग्राउंड फैसिलिटी संवेदनशील साज़ो-सामान, हथियारों और कमांड पोस्ट को हवाई या मिसाइल स्ट्राइक से बचाने के लिए हो सकती हैं.
अख़बार लिखता है कि भारतीय अधिकारियों ने उसकी इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
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