चीन के सर्वे में मोदी सरकार के बारे में क्या कहा गया

नरेंद्र मोदी

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    • Author, टीम बीबीसी
    • पदनाम, दिल्ली

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने एक सर्वे कराया है. सर्वे में भारत-चीन के रिश्तों पर वहाँ के लोगों की रायशुमारी की गई है. इसमें चीन के दस बड़े शहरों के तक़रीबन 2000 लोगों ने हिस्सा लिया.

सर्वे में भारत की छवि, हाल के दिनों में सीमा पर तनाव, भारत में चीनी सामान के बहिष्कार से लेकर दोनों देशों के रिश्तों में अमरीका के हस्तक्षेप पर सवाल पूछे गए.

सर्वे में दिए गए जवाब का विश्लेषण ग्लोबल टाइम ने अपने पन्ने पर भी छापा है.

ये सर्वे ग्लोबल टाइम्स ने चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंटेम्पर्री इंटरनेश्नल रिलेश्नस ( सीआईसीआईआर) के साथ मिल कर किया है.

17 से 20 अगस्त तक किए गए इस सर्वे में चीन के दस बड़े शहरों की जनता ने हिस्सा लिया जिसमें बीजिंग, वुहान और शांघाई शामिल है.

ग्लोबल टाइम्स का सर्वे

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इसमें पाया गया कि 51 प्रतिशत लोग मोदी सरकार को पसंद करते हैं, जबकि 90 फ़ीसद लोग भारत विरुद्ध सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हैं.

गुरुवार दोपहर तक मोदी सरकार को पंसद करने वाली ख़बर ग्लोबल टाइम्स के पन्ने पर थी. लेकिन दोपहर बाद वो हिस्सा हटा लिया गया था. हालाँकि ग्लोबल टाइम्स ने जो सर्वे का हिस्सा ट्वीट किया है उसमें अब भी मोदी सरकार को पंसद करने वाली बात है.

इतना ही नहीं सर्वे में ये भी पता चला है कि 70 फ़ीसद लोग मानते हैं कि भारत चीन के प्रति ज्यादा शत्रुतापूर्ण व्यवहार रखता है और पिछले दिनों चीन की सरकार ने भारत के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाए हैं, उसका समर्थन करते हैं.

ग्लोबल टाइम्स का सर्वे

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सर्वे में और क्या है?

अगर भारत भविष्य में भी चीन को उकसाता है और सीमा पर तनाव बढ़ते हैं, तो सर्वे में हिस्सा लेने वाले 90 फ़ीसद लोग मानते हैं कि चीन की तरफ़ से जवाबी कार्रवाई सही है. लेकिन तक़रीबन 26 फ़ीसद लोग भारत को अच्छे पड़ोसी के तौर पर देखते हैं. ये लोग भारत को चीन के 'मोस्ट फ़ेवरेवल नेशन' में चौथे नंबर पर देखते हैं. पहले तीन पर रूस, पाकिस्तान और जापान को जगह देते हैं.

हालाँकि अच्छे पड़ोसियों की लिस्ट में चीन के लोगों ने भारत को दक्षिण कोरिया से ऊपर रखा.

इस सर्वे में पाया गया है कि 56 फ़ीसद लोग चीन में भारत के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं.

सर्वे के इस नतीजे ने सीआईसीआईआर के साउथ एशिया स्टडी के डायरेक्टर को भी हैरान कर दिया है. नतीजों के बारे में बात करते हुए उन्होंने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि ये इसलिए भी मुमकिन है क्योंकि दोनों देशों में 'पीपल टू पीपल कॉन्टैक्ट' अच्छे हैं.

लेह में मोदी

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सर्वे करने वालों को लगता है कि इसका मतलब है कि दोनों देशों की सरकारों के बीच जो कुछ चल रहा है, जनता उससे बहुत ज़्यादा प्रभावित नहीं होती और अपने स्तर पर भी रिश्तों का आंकलन करती है.

साथ ही ये भी पता चला की चीन के लोग अमरीका और यूरोप के देशों के बारे में भारत की अपेक्षा ज्यादा जानकारी रखते हैं. भारत के बारे में भी ये बात उतनी ही सच है.

इस सर्वे में लोगों से ये सवाल भी पूछा गया कि भारत के बारे में एक छवि जो उनके ज़ेहन में सबसे पहले उभरती है - तक़रीबन 31 फ़ीसद लोगों का जवाब था, 'भारतीय समाज में महिलाओं का निम्न समाजिक स्तर'. 28 फ़ीसद लोगों को जवाब था, "जनसंख्या में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है." तक़रीबन 22 फ़ीसद लोगों को भारत के बारे में सुनते ही सबसे पहले 'भारतीय योग' का ख्याल आता है.

भारत-चीन संबंध

इस साल मई महीने से ही भारत-चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. 15-16 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी पर हुई इस झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 सैनिकों की मौत हुई थी. इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक बेनतीजा ही रही है.

इस तनाव के बीच ये सर्वे कराया गया और नतीजे दोनों देशों के रिश्तों के बारे में काफ़ी कुछ बयान करते हैं. तनाव के बीच भारत सरकार ने 50 से ज्यादा चीनी एप्स पर पाबंदी लगा दी. और कई सरकारी ठेकों में विदेशी कंपनियों के हिस्सा लेने के लिए नियम सख्त कर दिए. भारत सरकार के दोनों क़दमों को दोनों देशों के रिश्तों पर क़रीब से नज़र रखने वालों ने चीन के साथ बिगड़ते रिश्तों से जोड़ कर ही देखा.

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लेकिन अगस्त महीने में हुए इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले तक़रीबन 25 फ़ीसद लोग मानते हैं कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होंगे. पर 57 फ़ीसद लोगों को लगता है कि भारत सैन्य शक्ति चीन के लिए किसी प्रकार का कोई ख़तरा है.

इतिहास की बात करें तो, दोनों देशों के बीच 1962 में एक बार जंग हो चुकी है जिसमें चीन की जीत हुई और भारत की हार. इसके बाद 1965 और 1975 में भी दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं. जून में चौथा मौक़ा था, जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच बात ख़ूनी संघर्ष तक पहुँच गई.

चीनी सामान का बहिष्कार

भारत में विपक्षी दलों ने सरकार को चीन के साथ हुए इस संघर्ष पर ख़ूब घेरा, लेकिन चीन से इस तरह की कोई भी ख़बर बाहर नहीं आई.

हाल ही में कोरोना के दौर में जब प्रधानमंत्री मोदी ने लोकल के लिए वोकल का नारा दिया तो उसे भी चीनी सामान के बहिष्कार से जोड़ कर देखा गया. भारत में चीनी सामान बॉयकॉट करने को लेकर भी जगह-जगह मुहिम चलाई गई.

इस सर्वे में चीन-भारत व्यापार और इससे जुड़े भी सवाल जवाब पूछे गए. 35 फ़ीसद लोग चीन में इस बात से ख़फ़ा हैं और मानते हैं कि चीन को भी भारत के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए. 50 फ़ीसद लोगों को लगता है कि भारत आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर है.

चीन की जनसंख्या के हिसाब से सर्वे में हिस्सा लेने वालों की तादाद बहुत कम है, लेकिन भारत-चीन सीमा विवाद के मद्देनज़र अहम भी है.

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