जी-20 बैठक से पहले ही क्या भारत को मिली बड़ी कामयाबी? रूस और चीन कैसे माने- प्रेस रिव्यू

जी-20 सम्मेलन

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अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने आज पहले पन्ने पर लीड ख़बर लगाई है कि अफ़्रीकन यूनियन जी-20 में शामिल होंगे और इसे लेकर शेरपाओं के बीच सहमति बन गई है.

शेरपा जी-20 में शामिल सदस्य देशों के नेताओं के प्रतिनिधियों को कहा जाता है.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अगर अफ़्रीकन यूनियन (एयू) जी-20 में शामिल होता है तो इसका मतलब यह हुआ कि 55 सदस्य देशों वाला एयू जी-20 में शामिल होने वाला दूसरा क्षेत्रीय संगठन होगा.

हालांकि अभी तक स्पष्ट नहीं है कि एयू के शामिल होने के बाद जी-20 का नाम बदलकर जी-21 होगा या नहीं.

अख़बार से भारत अधिकारियों ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता में एयू के जी-20 में शामिल होने की घोषणा होती है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि ग्लोबल साउथ के एक बड़े हिस्से को इस आर्थिक फोरम में जगह मिल जाएगी.

भारत ग्लोबल साउथ की अगुआई करने की कोशिश कर रहा है.

अख़बार ने लिखा है कि एयू को जी-20 में शामिल करने को लेकर वार्ता अभी थमी नहीं है क्योंकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी बाक़ी है.

भारत में जी-20 सम्मेलन

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ग्लोबल साउथ क्या है?

'ग्लोबल साउथ' फ्रेज व्यापक रूप से लातिन अमेरिका, एशिया, अफ़्रीका और ओसिआनिया के इलाक़ों के लिए किया जाता है.

थर्ड वर्ल्ड यानी तीसरी दुनिया को भी ग्लोबल साउथ के रूप में ही देखा जाता है. दूसरे शब्दों में यूरोप और उत्तरी अमेरिका को छोड़ बाक़ी इलाक़ों को ग्लोबल साउथ में रखा जाता है.

ग्लोबल साउथ के ज़्यादातर मुल्क कम आय और राजनतिक-सांस्कृतिक रूप से हाशिए के देश हैं.

यह भी कहा जाता है कि ग्लोबल साउथ फ्रेज का इस्तेमाल प्रगति या सांस्कृतिक विषमता से ध्यान हटाकर भू-राजनीतिक संबंधों की ताक़त पर केंद्रित करने के लिए किया जाता है.

वैश्विक विषमता की व्याख्या के लिए समाजविज्ञान की अपनी समझ होती है. ग्लोबल साउथ का बड़ा इलाक़ा यूरोप का उपनिवेश रहा है.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नॉर्थ और साउथ के बीच की खाई हमेशा से रही है.

ग्लोबल साउथ में विकासशील और अतीत में उपनिवेश रहे देश शामिल हैं और इनका टकराव औद्योगिक शक्ति वाले देशों से रहा है.

चीन और जापान को ग्लोबल साउथ में नहीं गिना जाता है.

जिनपिंग और पुतिन

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किस बात पर सहमति बनी?

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कोई भी जी-20 समिट का समापन बिना एक साझे बयान से नहीं हुआ है.

ऐसे में भारत इस स्थिति से बचना चाहता है कि साझा बयान जारी होने की सूरत में उसे भरने के लिए कुछ तो होना चाहिए.

रूस और चीन भारत की ओर से तैयार किए गए साझे बयान का विरोध करते आए हैं.

रूस और चीन साझा बयान में यूक्रेन युद्ध वाले पैरा से सहमत नहीं हैं.

शेरपाओं के बीच ड्राफ्ट डिक्लरेशन पर वार्ता जारी है लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है.

सूत्रों ने अख़बार से कहा है कि जलवायु परिवर्तन में वित्तीय मदद और कर्ज़ भुगतान को लेकर ड्राफ्ट डिक्लरेशन की भाषा से पर अब भी असहमति है. इसके अलावा भारत की ओर से प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर चीन की और भी कई आपत्तियां हैं.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एयू को जी-20 में शामिल करने लेकर सहमति है. इसमें रूस और चीन का भी समर्थन है.

हालांकि दोनों देश एयू को जी-20 में शामिल करने का श्रेय ख़ुद लेना चाहते हैं.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग

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चीन ने क्या कहा?

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चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने पत्रकारों से कहा, ''चीन पहला देश है, जिसने अफ़्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल करने के लिए खुलकर समर्थन किया था. चाइना-अफ़्रीका लीडर्स संवाद में भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि चीन एयू को जी-20 में पूर्णकालिक सदस्यता दिलाने के लिए समर्थन देगा.''

वो बोलीं, ''अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन और एयू अहम साझेदार हैं. ग्लोबल व्यवस्था में चीन एयू की बड़ी भूमिका का समर्थन करता है.''

जी-20 में रूस के शेरपा का भी कहना है कि रूस जी-20 में एयू को शामिल किए जाने का समर्थन पहले से ही करता रहा है.

द हिन्दू ने अपनी एक और रिपोर्ट में जापानी विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि जापान और पश्चिम के देश चाहते हैं कि ग्लोबल साउथ में चीन के बदले भारत की बड़ी भूमिका हो.

द हिन्दू से टोक्यो के स्ट्रैटिजिक अफेयर्स टिप्पणीकार हिरोयुकी अकिता ने कहा है, ''जापान ग्लोबल साउथ में चीन और भारत के बीच प्रतिद्वंद्विता देख रहा है और जापान के सात जी-7 के हित में यह है कि भारत ग्लोबल साउथ में अहम भूमिका अदा करे न कि चीन. जापान के पीएम फुमियो किशिदा ने इसीलिए पीएम मोदी को जी-7 बैठक में आमंत्रित किया था.''

जी-20

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जी-20 सम्मेलन की सुरक्षा में भारतीय वायु सेना

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने जी-20 समिट में सुरक्षा के इंतज़ामों से जुड़ी ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, जी-20 सम्मेलन के दौरान भारतीय वायु सेना आसमान से सुरक्षा का ज़िम्मा संभालेगी.

इस सुरक्षा के तहत लड़ाकू विमानों, सतह से हवा में निशाना लगाने वालीं मिसाइल सिस्टम, ड्रोन को गिराने वाले सिस्टम को तैयार रखा जाएगा.

अखबार को एक अधिकारी ने नाम छिपाए रखने की शर्त पर कहा, ''भारतीय वायुसेना को किसी भी ख़तरे से निपटने के लिए दिल्ली-एनसीआर में तैयार रखा गया है.''

वायुसेना के पास ये क्षमता है कि वो सैकड़ों किलीमीटर दूर से आ रहे ख़तरे का पता कर सके और उसे रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठा सके.

नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को जी-20 समिट हो रहा है.

जी-20 आर्थिक रूप से ताकतवर 20 देशों का समूह है और इन देशों के प्रमुख नेताओं का शुक्रवार से दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है.

जी- 20

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जी-20: राष्ट्रपति के भोज में खड़गे को निमंत्रण नहीं

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर राष्ट्रपति की ओर से दिए जाने वाले रात्रि भोज पर ख़बर को जगह दी है.

इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि जी-10 के मद्देनज़र जो भोज राष्ट्रपति की ओर से आयोजित किया गया है, उसमें राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नहीं बुलाया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी कैबिनेट मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया है. भारत सरकार के सभी सेक्रेटरी और बड़े उद्योगपतियों को भी इस भोज में बुलाया गया है.

इस भोज में शामिल होने की विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की ओर से पुष्टि भी कर दी गई है.

इस भोज में पंजाब के सीएम भगवंत मान, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पश्चिमी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और बिहार के सीएम नीतीश कुमार शामिल होंगे.

यूपीआई से पैसा

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एटीएम में क्यूआर कोड से निकाल सकेंगे पैसे

दैनिक भास्कर ने यूपीआई एटीएम लॉन्च होने से जुड़ी ख़बर को जगह दी है.

इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि भारत का पहला यूपीआई एटीएम लॉन्च हो चुका है.

इस यूपीआई एटीएम के ज़रिए बिना कार्ड के पैसे निकाले जा सकेंगे. फिलहाल इस यूपीआई एटीएम को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में प्रदर्शित किया गया है.

सरकार का इरादा है कि इसे जल्द देश के दूसरे हिस्सों में भी लगाया जाएगा.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस मशीन से क्यूआर कोड के ज़रिए पैसे निकालने का एक वीडियो भी शेयर किया है.

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