'आप पीएम मोदी का बचाव क्यों कर रहे हैं?' कांग्रेस के इस आरोप पर जगदीप धनखड़ ने दिया ये जवाब

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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस की उस आलोचना का जवाब दिया है जिसमें विपक्षी पार्टी ने उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करने का आरोप लगाया था.
जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को कांग्रेस की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी दुनिया भर में पहचान हो. उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जनादेश हासिल किया है. मुझे उनका बचाव करने की ज़रूरत नहीं है."
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जगदीप धनखड़ ने सत्ता पक्ष के सदस्यों से ये भी कहा कि वे जाकर विपक्षी सदस्यों को सदन की कार्यवाही का बहिष्कार न करने के लिए मनाएं.
दरअसल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये मांग रखी कि सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी जाए लेकिन इसके बावजूद राज्यसभा का कामकाज चलता रहा.
इसके बाद सदन के विपक्षी सदस्यों ने वॉक आउट कर दिया.
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन और राज्यसभा में सत्ता पक्ष के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सुझाव को देखते हुए सभापति ने एक बजे एक मीटिंग बुलाई.
इस मीटिंग में सदन में सभी पार्टियों के नेताओं को आने के लिए कहा गया.

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राज्यसभा में गतिरोध
मीटिंग का मक़सद मणिपुर की ताज़ा स्थिति पर चर्चा करने के लिए तौर-तरीके तय करना था ताकि इस मुद्दे पर चल रहा गतिरोध ख़त्म हो सके.
जब सभापति ने विपक्ष के नेता से उनकी राय जाननी चाही तो मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये ज़ोर देकर कहा कि सदन के कामकाज से जुड़े रूल 267 को किसी भी अन्य नियम पर तरजीह दी जाए.
उन्होंने इस बात पर भी हैरत जताई कि नियम 267 के तहत चर्चा कराने पर सहमत नहीं होकर सरकार इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा क्यों बना रही है.
खड़गे ने कहा, "कल भी मैंने आपसे इस बारे में रिक्वेस्ट किया था लेकिन शायद आप नाराज़ थे."
इस पर धनखड़ ने कहा, "मैं 45 सालों से भी अधिक समय से शादीशुदा इंसान हूं. मैं कभी गुस्सा नहीं करता हूं."
धनखड़ की इस टिप्पणी के बाद सदन में कई सदस्यों की हंसी छूट गई.

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पीएम मोदी का जिक्र और धनखड़ से तकरार
मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये सुझाव दिया कि सदन की कार्यवाही एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी जाए जिसका कुछ सदस्यों ने विरोध किया.
इसके बाद खड़गे ने सभापति से कहा, "आप एक छोटा सा सुझाव भी नहीं मान रहे हैं. आप इस बात के लिए तैयार नहीं हैं कि प्रधानमंत्री को सदन में बुलाया जाए. आप प्रधानमंत्री का इतना बचाव क्यों कर रहे हैं? मैं ये समझ नहीं पा रहा हूं."
सभापति जगदीप धनखड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी. धनखड़ ने कहा कि उन्हें किसी का बचाव करने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री को दुनिया भर में मान सम्मान मिला है और भारत उनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है."
धनखड़ यहीं नहीं रुके. उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को मिली जीत का जिक्र करते हुए कहा, "भारत में तीन दशक तक चली गठबंधन सरकारों के बाद आप के सामने साल 2014 और 2019 के चुनावी नतीजे हैं."

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जगदीप धनखड़ ने पीएम मोदी के लिए क्या कहा
धनखड़ ने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री को किसी के बचाव करने की ज़रूरत नहीं है. उनकी एक वैश्विक पहचान है. भारत अभूतपूर्व रूप से आगे बढ़ रहा है और इस तरक्की को अब रोका नहीं जा सकता है."
"मुझे किसी का बचाव करने की ज़रूरत नहीं है. मुझे सत्ता पक्ष का बचाव करने की ज़रूरत नहीं है. मुझे विपक्ष का बचाव करने की ज़रूरत नहीं है. मेरा काम संविधान और आपके अधिकारों की रक्षा करना है."
उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लेते हुए कहा, "विपक्ष के नेता का ऐसी टिप्पणी करना अच्छी बात नहीं है."
इसके बाद निर्धारित शेड्यूल के अनुसार सदन की कार्यवाही का शून्य काल शुरू हो गया.
जगदीप धनखड़ ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को राजनीतिक स्टैंड लेने का पूरा हक़ है लेकिन ऐसी टिप्पणी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है.
उन्होंने कहा, "मेरा कोई राजनीतिक हित नहीं है. मेरा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है."

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विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' का वॉक आउट
इसके बाद विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' से जुड़ी सभी राजनीतिक पार्टियों के सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए.
विपक्षी सदस्यों के वॉक आउट के बाद जगदीप धनखड़ ने कहा कि इसका मक़सद सियासी है और उन्हें अपने इस फ़ैसले पर चिंतन-मनन करना चाहिए.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता था कि विपक्ष के नेता के पास एक रचनात्मक नीति होगी लेकिन दुर्भाग्य से विपक्ष के नेता ने राजनैतिक होने की कोशिश की."
राज्यसभा के चेयरमैन ने सत्ता पक्ष के सांसदों से विपक्षी सदस्यों के बीच जाने की अपील भी की.
उन्होंने कहा, "मेरी आप लोगों से करबद्ध प्रार्थना है कि अपने मित्रों के बीच जाएं. आप में से कम से कम एक व्यक्ति दूसरे पक्ष के मित्रों से जाकर बात करें."

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मणिपुर का मुद्दा
जगदीप धनखड़ ने ये दोहराया कि मणिपुर के मुद्दे पर कम समय वाली बहसों के लिए कोई समय सीमा नहीं है.
उन्होंने कहा, "सदस्य जितना चाहें मैं उतना समय दूंगा."
सरकार ने मणिपुर के मुद्दे पर रूल 176 के तहत चर्चा पर सहमति दी है.
मणिपुर में क़ानून और व्यवस्था, राज्य में हालात सामान्य करने के लिए उठाए गए कदमों और राज्य से जुड़े अन्य मुद्दों पर कम समय वाली बहस के लिए 31 जुलाई को ही समय आवंटित किया गया था.
लेकिन विपक्षी पार्टियों के विरोध के कारण ये बहस हो नहीं पाई.
इससे पहले टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मणिपुर के मुद्दे पर बिना गहराई में गए चर्चा शुरू करने की पुरजोर वकालत की. हालांकि उन्होंने भी रूल 267 पर जोर देते हुए कहा कि ये नियम अन्य प्रावधानों से ऊपर है.
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "मुद्दा ये है कि देश के लोग मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं, हमें सुनना चाहते हैं. विपक्ष के रूप में हम सभी मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं. हम यहां कोई अहंकार दिखाने के लिए नहीं हैं. मणिपुर को मरहम लगाने की ज़रूरत है."

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डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "हमें मिलजुलकर इसका हल खोजना चाहिए क्योंकि गतिरोध से किसी को कुछ हासिल नहीं होने वाला है. हम आपके माध्यम से ये सुझाव देना चाहते हैं कि मणिपुर के मुद्दे पर छह से आठ घंटों की चर्चा होनी चाहिए. हमें एक राष्ट्र की भावना के तहत इस पर चर्चा करने दें."
सभापति जगदीप धनखड़ ने डेरेक ओ ब्रायन की सराहना करते हुए उनके सुझाव पर पीयूष गोयल के विचार पूछे.
इस पर पीयूष गोयल ने कहा, "इस सदन के सभी लोगों के लिए मणिपुर हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. सरकार इस मुद्दे पर सक्रियता से काम कर रही है. हम पहले से दिन से सभापति से आग्रह कर रहे हैं कि सभी सदस्य इस मुद्दे पर पूर्ण बहस करें."
"हमें शांति का संदेश देना चाहिए. हम शांति और स्थिरता के लिए मिलजुलकर काम करें ताकि मणिपुर के घावों पर मरहम लगाया जा सके... सदन में बहस के लिए तत्परता दिखाने के लिए तृणमूल नेता का आभारी हूं."
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