डेटिंग ऐप डिलीट क्यों करना चाहते हैं आज के नौजवान?

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- Author, मैडी सेवेज
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
दुनिया भर में डेटिंग ऐप्स ने करोड़ों लोगों को मिलवाया, उनकी जोड़ियाँ बनवाईं, शादियाँ करवाईं और फिर बच्चे हुए.
अमरीका समेत कई देशों में पार्टनर ढूंढ़ने के लिए डेटिंग ऐप्स बहुत लोकप्रिय हुए लेकिन ऐप के सहारे सच्चा साथी ढूंढने में नाकाम रहे लोगों के लिए ये ऐप अब बेमानी हो गए हैं.
मेलबर्न की 30 साल की लेखिका मेडेलिन डोर ने न्यूयॉर्क और कॉपनहेगन तक जाकर डेट किया. वो कई लोगों से मिलीं, उनसे दोस्ती हुई, लेकिन लंबे वक़्त तक चलने वाला रिश्ता नहीं बन सका.
मेडेलिन ने पिछले पाँच साल में 'टिंडर', 'बंबल' और 'ओकेक्यूपिड' जैसे ऐप्स इस्तेमाल किए. डेट पर उनको अच्छे-बुरे कई तरह के अनुभव हुए लेकिन मेडेलिन ने अब अपने ऐप्स कुछ महीनों के लिए डिलीट कर दिए हैं.
लोग मानते हैं कि इन ऐप्स पर कभी पसंद के साथी नहीं मिलते और कभी ढेर सारे साथी मिल जाते हैं. वहाँ के प्रोफ़ाइल धोखा देने वाले होते हैं, सुरक्षा चिंताएं होती हैं, नस्लीय टिप्पणियाँ होती हैं और गैर-ज़रूरी विवरण होते हैं.
भ्रमित करने वाले डिजिटल व्यवहार के कारण ही घोस्टिंग, कैटफ़िशिंग, पिंगिंग और ऑर्बिटिंग जैसे नये शब्द बने हैं.
अमरीका और ब्रिटेन में 35 साल के कम उम्र के क़रीब आधे लोगों ने डिजिटल डेटिंग के किसी न किसी रूप का इस्तेमाल किया है.
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अरबों डॉलर की इंडस्ट्री
डेटिंग इंडस्ट्री 2014 से 2019 की शुरुआत तक 11 फ़ीसदी बढ़ी और अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कई लोग इसे नापसंद कर रहे हैं.
साल 2018 में बीबीसी के एक सर्वे में पाया गया था कि ब्रिटेन में 16 से 34 साल के लोगों के लिए डेटिंग ऐप आख़िरी पसंद हैं.
'सोशल एंड पर्सनल रिलेशनशिप्स' जर्नल का निष्कर्ष है कि डिजिटल रोमांस के ऐप यूज़र आख़िर में अकेलापन महसूस कर सकते हैं.
'मैनेजमेंट साइंस' ने 2017 में ऑनलाइन डेटिंग पर एक रिसर्च छापी थी जिसमें कहा गया था कि संभावित साथी की संख्या बढ़ने से पसंद पर सकारात्मक असर होता है लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ने का नकारात्मक असर भी होता है.
'ग्लोबल डेटिंग इनसाइट्स' के संपादक स्कॉट हार्वी का कहना है कि एक साथी तलाशने के लिए ढेरों स्वाइप करने पड़ते हैं. नंबर तलाशना, मैसेज करना और सही पार्टनर ढूंढ़ना बड़ी मेहनत का काम है और इसमें खीझ हो सकती है.
'द अटलांटिक' की जूली बेक ने तीन साल पहले डेटिंग ऐप्स से थकान विषय पर एक आर्टिकल लिखा था. 2019 में मीडिया ने खुलकर इसकी चर्चा की.
अमरीकी डेटिंग कोच कैमिली वर्जीनिया ने ऑफ़लाइन डेटिंग के तरीक़ों की सलाह देने वाली एक क़िताब लिखी है.
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर वेरिटी गीर आठ साल तक ऑनलाइन डेटिंग करने के बाद भी जीवनसाथी नहीं बना पाईं. अब वो सेक्स और रिलेशनशिप से पूरी तरह किनारा कर रही हैं.
ई-मार्केटर का अनुमान है कि डेटिंग ऐप्स से नये यूज़र्स कम जुड़ेंगे और पुराने यूज़र्स ऐप्स बदलते रहेंगे.
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ऑनलाइन या ऑफ़लाइन?
पोलैंड के वारसा में रहने वाली 30 साल की डॉक्टर कमिला सारमक ने ऑनलाइन की जगह ऑफ़लाइन डेटिंग का फ़ैसला किया है.
दो साल के पार्टनर से अलग होने के बाद वह हर सुबह टिंडर पर प्रोफ़ाइल चेक करतीं और नाश्ता करते हुए संभावित साथी को मैसेज करती थीं.
छह महीने बाद उनको अहसास हुआ कि इससे उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है. कई संभावित साथी शुरुआती परिचय के बाद गायब हो गए और सारमक अकेली रह गईं.
ज़रूरी नहीं कि बाकी लोगों को भी ऐसे ही दर्दनाक तजुर्बे हुए हों. उनके लिए ऐप्स डिलीट करने का मतलब है दूसरी गतिविधियों के लिए ज़्यादा वक़्त निकालना.
बर्लिन में रहने वाले 28 साल के फ़्रेंच पत्रकार लियो पिरार्ड डेटिंग ऐप्स पर कोई साथी नहीं तलाश पाए. 18 महीने पहले पेरिस यात्रा पर उनकी मुलाक़ात मौजूदा पार्टनर से हुई.
स्टॉकहोम में रहने वाली 27 साल की जिम इंस्ट्रक्टर लिंडा जॉनसन मानती हैं कि लोग इन ऐप्स से उकता गए हैं.
लिंडा ने दो साल तक टिंडर का इस्तेमाल किया और एक व्यक्ति के साथ नौ महीने तक उनके सम्बन्ध भी रहे लेकिन आगे की सोचकर उन्होंने ऐप डिलीट कर दिया और अब वह सिंगल हैं.
लिंडा की कई दोस्तों को भी यह समय की बर्बादी लगता है क्योंकि अक्सर पहली डेट से बात आगे नहीं बढ़ पाती. अब वो साथी ढूंढने के पुराने तरीक़े आजमा रही हैं.
डेटिंग ऐप कभी इस्तेमाल नहीं करने वाले सिंगल युवा से मुलाक़ात भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा है, लेकिन उनका वजूद है.
तीस साल के मैट फ्रान्ज़ेटी मूल रूप से मिलान के हैं और रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया में एक एनजीओ के लिए काम करते हैं. उनको अपनी तस्वीरों और प्रोफ़ाइल टेक्स्ट के ज़रिये ख़ुद को बेचने का विचार पसंद नहीं आता.
फ्रान्ज़ेटी पार्टियों में या रॉक म्यूजिक और कला क्षेत्र में अपनी दिलचस्पी के बारे में ब्लॉगिंग के ज़रिये कुछ महिलाओं से मिले, उनमें बातचीत हुई. लेकिन डेटिंग का उनका इतिहास सीमित है और वह मोटे तौर पर सिंगल हैं.
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सब कुछ के बावजूद...
एनालॉग दुनिया में जीवनसाथी तलाशने की संभावना कितनी है, ख़ासकर उन युवाओं के लिए जो स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं और जिनकी अजनबियों से कम मुलाकातें होती हैं?
हम खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, कहीं आने-जाने का टिकट ऑनलाइन खरीदते हैं, खाना ऑनलाइन खरीदते हैं और दोस्तों से ऑनलाइन चैट करते हैं.
क्या हममें से ज़्यादातर लोग यह जानते भी हैं कि हम जैसे पार्टनर का ख़्वाब देखते हैं उनसे कैसे मिला जाए?
न्यूयॉर्क के रिलेशनशिप थैरेपिस्ट मैट लुंडक़्विस्ट का कहना है कि उनके बहुत से सिंगल मरीज़ ऑनलाइन दोस्त ढूंढ़ने के इतने आदी हैं कि वे दूसरी जगहों पर संभावित साथियों की तलाश को नज़रअंदाज़ करते हैं.
लोग जब बाहर पार्टी या बार में जाते हैं तो भी असल में वे डेटिंग के बारे में नहीं सोच रहे होते हैं.
अगर वहाँ किसी से दिलचस्प मुलाक़ात होती है जिनके प्रोफ़ाइल को उन्होंने राइट स्वाइप किया होता तो भी ज़रूरी नहीं कि उनके दिमाग में डेटिंग का ख़याल चल रहा हो.
मेलबर्न की मेडेलिन डोर का कहना है कि ऑनलाइन साथी ढूंढ़ने की स्पष्टता ने शायद असल ज़िंदगी की मुलाकातों में हमें डरपोक बना दिया है.
स्वाइप यस या स्वाइप नो के बिना ख़तरा रहता है कि हमारी भावनाओं को सबके सामने ख़ारिज न कर दिया जाए. इसलिए अच्छा है कि ऐप खोलिए, स्वाइप करते जाइए और यह मत देखिए कि वहाँ कौन आपको ख़ारिज कर रहा है.
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रिश्ते बनें तो कैसे?
लुंडक़्विस्ट मानते हैं कि ऐप-आधारित डेटिंग बढ़ने से संभावित साथियों के साथ मुलाक़ात की जगह कम हो गए हैं.
लंदन, स्टॉकहोम और अमरीकी शहरों सहित दुनिया भर में गे बार तेज़ी से बंद हो रहे हैं. बीबीसी न्यूज़बीट प्रोग्राम की रिसर्च के मुताबिक 2005 से 2015 के बीच ब्रिटेन के आधे नाइटक्लब बंद हो गए.
दफ़्तरों में यौन उत्पीड़न और #MeToo आंदोलन के बाद सहकर्मियों के बीच ऑफ़िस रोमांस की संभावना नहीं बचती. 10 साल पहले के मुक़ाबले आज बहुत कम सहकर्मी एक-दूसरे के साथ डेट करते हैं.
लुंडक़्विस्ट को लगता है कि डेटिंग ऐप्स को ख़ारिज करने लोग संभावित साथी से मुलाक़ात की संभावनाओं को कम कर लेते हैं क्योंकि अब भी ये ऐप्स ही लोगों से मिलने का सबसे सामान्य तरीक़ा हैं.
रोमांटिक साथी से मुलाक़ात हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहे हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बाजार में आए ही इसीलिए कि वे इसमें लोगों की मदद कर सकें.
लुंडक़्विस्ट को डेटिंग ऐप्स बंद करने, नाक़ामी के लिए उनको दोष देने या इसके उलट बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने में मानव व्यवहार और भावनाओं पर आधारित रिश्तों को लेकर भ्रम दिखता है.
वह डेटिंग ऐप्स को ज़्यादा सामाजिक तरीक़े से इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. लुंडक़्विस्ट को लगता है कि लोग सबसे कटकर इस रास्ते पर चलते हैं इसलिए भटक जाते हैं.
लॉस एंजेल्स की डेटिंग कोच और "दि डेट्स एंड मेट्स" पॉडकास्ट की होस्ट डेमोना हॉफ़मैन मानती हैं कि डेटिंग ऐप्स आपके डेटिंग टूलबॉक्स के सबसे ताक़तवर टूल हैं, फिर भी वह एनालॉग विकल्पों को लेकर आशावादी हैं.
वो कहती हैं, "मैं यह कतई नहीं मानती कि यदि आप ऑनलाइन नहीं हैं तो आपकी किसी से मुलाक़ात नहीं हो सकती. लेकिन डेटिंग की चाहत का एक स्तर होना चाहिए जो बहुत से युवाओं में नहीं दिखता."

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उनकी सलाह में शामिल है- हफ़्ते में करीब 5 घंटे तक संभावित साथियों से बातें करना या असल ज़िंदगी के लोगों से मिलना; संभावित साथी कैसा हो इस बारे में सजग रहना और उन जगहों को सक्रियता से तलाशना जहाँ आप संभावित साथी से सीधे मिल सकें.
यदि आप किसी पेशेवर करियर वाले साथी की तलाश कर रहे हैं तो हो सकता है कि आप हैप्पी आवर्स में उपनगर में जाएं और ऑफ़िस बिल्डिंग के लोगों से बातें करें.
अगर आप किसी बड़े दिल वाले की तलाश में हैं तो आप चैरिटी कार्यक्रमों में या ऐसी जगहों पर जाएंगे जहाँ आपकी मुलाक़ात उदार लोगों से हो.
जिनके पास पैसे हों वे डेटिंग कोच की सेवा भी ले सकते हैं (उनकी फीस कम से कम 1,000 डॉलर प्रति महीना है) या फिर जोड़ी बनाने वालों को काम पर लगा सकते हैं.
यह विचार पुराना लगता है लेकिन अमरीका के कुछ शहरों में अमीर और समय की कमी वाले पेशेवरों के बीच यह चलन में है.
स्वीडन की पहली पर्सनल मैचमेकिंग एजेंसी 3 साल पहले शुरू हुई थी और अब पूरे यूरोप में उसके ग्राहक हैं. डेटिंग से थकान होने पर हॉफ़मैन एक छोटा ब्रेक लेने की सलाह देती हैं.
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डेटिंग का भविष्य क्या?
ग्लोबल डेटिंग इनसाइट्स के एडिटर स्कॉट हार्वी का कहना है कि फिलहाल इंडस्ट्री में सबसे ज़्यादा चर्चा कृत्रिम बुद्धि और वीडियो की है.
फ़ेसबुक का नया डेटिंग प्रोडक्ट अमरीका और 20 अन्य देशों में लॉन्च हो चुका है और 2020 में यूरोप में भी शुरू हो जाएगा.
इसमें यूज़र्स अपने संभावित साथी को वीडियो या फोटो आधारित कहानियां भेज सकते हैं. यह डेटिंग प्लेटफॉर्म पर अलग से कंटेंट लिखने में लगने वाला समय बचाता है.
चूंकि फ़ेसबुक पहले से ही आपके बारे में बहुत कुछ जानता है, इसलिए हार्वी का मानना है कि वह आपके लिए सही साथी के चुनाव में मददगार हो सकता है और उसकी जानकारियों का इस्तेमाल भविष्य के मैचिंग एल्गोरिद्म में भी हो सकता है.
चैटिंग ऐप कंपनियां यह भी परीक्षण कर रही हैं कि क्या असल ज़िंदगी की मुलाक़ात से पहले यूज़र्स को एक-दूसरे से वीडियो चैट करने की सुविधा दी जाए. कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि लोग छोटा वीडियो चैट करके असल मुलाक़ात से कन्नी काट लेंगे?
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स्कॉट हार्वी और डेमोना हॉफ़मैन समेत इंडस्ट्री विश्लेषक और डेटिंग कोच मेल-मुलाकातों के कार्यक्रम बढ़ने पर ध्यान दे रहे हैं.
बड़ी ऑनलाइन डेटिंग कंपनियां भी स्वाइप से उकता चुके लोगों को मिलने-जुलने के नये रास्ते देने के लिए इनका आयोजन करती हैं.
कुछ नई कंपनियां भी इसमें शामिल हैं जो डिजिटल युग में डेटिंग पर चल रही बहस को भुनाना चाहती हैं.
स्कैंडिवियाई डेटिंग और रिलेशनशिप स्टार्ट-अप "रिलेट" कुंवारों के लिए पार्टियां आयोजित करती है जिनमें ज़्यादा भीड़ नहीं बढ़ाई जाती.
रिलेट के सह-संस्थापक फिलिप जॉन्ज़ोन जार्ल का कहना है कि उनकी पार्टियों की मांग बढ़ रही है. जॉन्ज़ॉन को इसके लिए भी एक ऐप की जरूरत होती है, जिसे वह गंभीर बातचीत के टूल के रूप में देखते हैं.
वह जोड़ियों को रिश्ते प्रगाढ़ करने में मददगार बनना चाहते हैं और यह कतई नहीं चाहते कि अगर बात न बने तो वे तुरंत ऑनलाइन डेटिंग पूल में लौट जाएं.
थैरेपिस्ट मैट लुंडक़्विस्ट को लगता है कि डेटिंग में घोस्टिंग और पारदर्शिता की कमी को ख़त्म करने के लिए अगर कोई तरीक़ा निकले तो बहुत अच्छा होगा.
कुछ आयोजक वास्तविक संबंधों के लिए अवसर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वाकई सकारात्मक है. "मुझे लगता है कि दुनिया को वास्तव में इसकी ज़रूरत है."
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