अगर टिकटॉक भारत में वापस आता है तो क्या?

टिकटॉक

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टिकटॉक ऐप भारत में बहुत हिट है. भारत में इसके क़रीब 20 करोड़ ऐक्टिव यूज़र बताए जाते हैं. लेकिन हाल ही में भारत सरकार ने टिकटॉक समेत भारत के 59 ऐप्स को बैन कर दिया है.

ऐसा करने के पीछे भारत सरकार की ओर से जो दलील दी गई है उसके मुताबिक़, उन्हें कई स्रोतों से इन ऐप्स को लेकर शिकायत मिली थी और इन पर पाबंदी से भारत के मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ता सुरक्षित होंगे.

चीन की आधिकारिक मीडिया, जैसे कि शिन्हुआ समाचार एजेंसी, पीपल्स डेली और चाइना सेंट्रल टेलिविज़न की ओर से इस प्रतिबंध पर कोईप्रतिक्रिया नज़र नहीं आई है. वे सीमा तनाव को लेकर आमतौर पर चीनी विदेश मंत्रालय के रवैये को ही अपनाते हैं.

हालांकि, सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने फिर से सीमा तनाव के लिए भारत को ज़िम्मेदार बताया है और कहा है कि ऐप्स परलगाया गया प्रतिबंध "अल्ट्रा-नेशनलिज़्म" की लहर का हिस्सा है.

इस अंग्रेज़ी अख़बार ने लिखा है, "अचानक उठाया गया यह क़दम भारतीय सैनिकों द्वारा सीमा पार करके चीन के साथ अवैध गतिविधियां शुरू करने और चीनी सैनिकों पर हमला करने के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद आया है. उसके बाद से हीभारत पर अल्ट्रा-नैशनलिज़्म हावी हो गया है."

चिंगारी

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ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, इस बैन से टिकटॉक की 'मदर कंपनी' बाइटडांस को क़रीब 45 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है.

इन आंकड़ों से ही हम भारतीय ऐप बाज़ार में टिकटॉक की स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं.

ऐसे में कुछ देसी ऐप्स जैसे कि चिंगारी और रोपोसो कोशिश कर रहे हैं कि वे टिकटॉक का विकल्प बन सकें.

मौजूदा समय में चीन के प्रति भारत में व्यापक विरोध है और ऐसे में यह उनका सबसे बेहतरीन क़दम हो सकता है. और ये भी हो सकता है कि भविष्य में उन्हें ऐसा कोई अवसर ना मिले.

क्या है चिंगारी

चिंगारी ऐप टिकटॉक की जगह को भरने की पूरी कोशिश कर रहा है.

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कुछ दिन पहले कहा था कि उन्होंने कभी भी टिकटॉक का इस्तेमाल नहीं किया लेकिन अब उन्होंने चिंगारी ऐप ज़रूर डाउनलोड किया है.

आनंद महिंद्रा की ही तरह कई भारतीय स्वदेशी भावना रखते हुए इस ऐप को आज़मा रहे हैं.

चिंगारी के को-फ़ाउंडर सुमित घोष ने बताया कि अब उनके ऐप को हर घंटे तीन लाख नए यूज़र डाउनलोड कर रहे हैं.

चिंगारी गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और अभी से नहीं बल्कि नवंबर साल 2018 से. वहीं एप्पल के ऐप स्टोर पर यह साल 2019 जनवरी में आया.

चिंगारी ऐप को अभी तक 80 लाख नए यूज़र्स मिल चुके हैं.

इस ऐप का इंटरफ़ेस काफी हद तक टिकटॉक जैसा ही नज़र आता है.

स्क्रीन स्वाइप करने के साथ ही यूज़र्स आसानी से नए वीडियो देख सकते हैं.

कमेंट करने और ख़ुद का वीडियो डाउनलोड करने के लिए ज़रूरी है कि यूज़र का ऐप पर अपना अकाउंट हो. ये ऐप डिवाइस के कैमरा, लोकेशन और माइक्रोफ़ोन एक्सेस की अनुमति भी मांगता है.

पिछली पोस्ट के आधार पर यूज़र्स ऐप पर प्वाइंट्स हासिल कर सकते हैं. वे चाहें तो इन प्वाइंट्स को कैश में तब्दील भी कर सकते हैं. यह ऐप अंग्रेज़ी, हिंदी, तेलुगू, तमिल, गुजराती, मराठी और दूसरी कई भाषाओं में उपलब्ध है.

रोपोसो, मोटरोन, शेयर चैट... ये लिस्ट काफी लंबी है.

गूगल प्ले स्टोर की फ्री ऐप लिस्ट में रोपोसो सबसे ऊपर है. रोपोसो का कहना है कि उनके ऐप को सरकार के बैन लगाने से पहले क़रीब 65 मिलियन लोगों ने डाउनलोड कर रखा था. लेकिन इस बैन के बाद से ऐप के 100 मिलियन डाउनलोड पूरे होने वाले हैं. उन्होंने बताया कि हर घंटे क़रीब छह लाख नए यूज़र्स उनसे जुड़ रहे हैं.

रोपोसो

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चिंगारी और रोपोसो की ही तरह और भी कई ढेरों ऐप्स हैं जो टिकटॉक की तर्ज पर शॉर्ट वीडियो स्टाइल वाले हैं.

इस लिस्ट में मितरों, शेयर चैट, ट्रेल आदि का भी नाम शामिल है.

चीनी ऐप्स पर बैन लगने से पहले ही मितरों ऐप ने एक करोड़ डाउनलोड्स के साथ सबको हैरानी में डाल दिया था.

लेकिन ऐसी ख़बरें और रिपोर्ट हैं कि यह ऐप एक दूसरे ऐप का सिर्फ़ क्लोन है और इसका सोर्स कोड पाकिस्तान के ऐप डेवलेपर्स से सिर्फ़ ढाई हज़ार रुपये में ख़रीदा गया था.

शेयर चैट भी एक भातीय ऐप है जो टिकटॉक का विक्लप बनने की ओर देख रहा है. ग्रामीण इलाकों में यह काफी प्रचलित ऐप है.

सोशल मीडिया

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मौक़ा भी और चुनौती भी

इतनी बड़ी संख्या में यूज़र्स को संभालना इन ऐप्स के लिए सबसे प्रमख चुनौती है.

इतने ज़्यादा ट्रैफ़िक के कारण कई बार सर्वर क्रैश कर जाता है.

चिंगारी के मुताबिक़, उन्हें इस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है. कई बार यूजर्स परेशान होकर नेगेटिव रिव्यू दे देते हैं. चिंगारी और रोपोसो ऐप को कई निगेटिव रिव्यू मिले हैं.

अगर ऐसा ही जारी रहा तो यूज़र्स की दिलचस्पी भी खो जाती है.

टेक एक्सपर्ट और ऑथर नल्लामोथु श्रीधर सलाह देते हैं कि जितनी जल्दी हो सके इन ऐप्स को अपने रीसोर्स बढ़ाने चाहिए. वे कहते हैं, "अगर ऐसा नहीं होता है तो जितनी तेज़ी से इन ऐप्स को यूज़र्स मिले हैं उतनी ही तेज़ी से वो खो भी जाएंगे."

वे कहते हैं, "इस तरह के छोटे ऐप्स बड़े ही सीमित रीसोर्स वाले होते हैं. जैसा कि ये सभी वीडियो शेयरिंग ऐप्स हैं उन्हें और अधिक होस्टिंग की कैपेसिटी की ज़रूरत है. जब एख ही वक़्त में बहुत से यूज़र ऐप को इस्तेमाल करते हैं तो सर्वर यह भार ले नहीं पाता है.ऐसे में उन्हें जितनी जल्दी हो सके अपने रीसोर्स बढ़ाने की ज़रूरत है. उन्हें ज़रूरत है कि वो जितनी जल्दी हो सके इंवेस्टर्स से फंडिंग भी लें. मेरा ख़याल है कि सरकार को भी इस तरह की ऐप्स कंपनियों को लोन देना चाहिए."

डेटा सिक्योरिटी को लेकर संदेह

श्रीधर का मानना है कि ये ऐप्स बहुत अधिक डेटा सिक्योरिटी तो मुहैया नहीं कराएंगे.

वे कहते हैं, "आमतौर पर इस तरह के छोटे स्केल के ऐप्स दो या तीन लोगों द्वारा मिलकर तैयार किये जाते हैं और उन्हें भी ऐप्स डिज़ाइन और वर्किंग कीबहुत बेसिक जानकारी ही होती है. वे बस फ्रंट एंड, बैक एंड और डेटाबेस के लिए ही कोड कर सकते हैं. वे डेटा सिक्योरिटी को लेकर बहुत अधिक ध्यान और रीसोर्स नहीं लगाते हैं क्योंकि उन्हें इसकी बहुत सीमित जानकारी होती है. फिर भी ऐप्स ठीक ही लगते हैं, है ना? लेकिन अगर लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसके लिए आपको डेटा सिक्योरिटी की ज़रूरत तो है ही."

एक फ्रेंच हैकर जो कि ट्विटर पर एलियट एंडरसन के नाम से हैं उनका दावा है कि चिंगारी को बनाने वाली ग्लोबससॉफ़्ट वेबसाइट मालफ़ेयर इंफेक्टेड है.

चिंगारी के को-फ़ाउंडर सुमित घोष इस बात पर स्पष्टीकरण देते हुए कहते हैं कि ग्लोबससॉफ़्ट वेबसाइट और चिंगारी ऐप के बीच कोई संबंध नहीं है.

वो कहते हैं "ग्लोबससॉफ्ट वेबसाइट और चिंगारी ऐप की अलग-अलग सिक्योरिटी और इंजीनियरिंग टीम है और दोनों का ही एक-दूसरे से कोई लेना देना नहीं है. जल्दी ही चिंगारी एक अलग कंपनी होगी."

टिकटॉक

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अगर टिकटॉक वापस लौटा तो...

टिकटॉक पूरी तरह से कोशिश कर रहा है कि वो भारत में वापस आ सके.

अब वो ऐसा करने के लिए लीगल तरीक़ों को भी देख रहा है. इससे पहले टिकटॉक को मद्रास हाई कोर्ट ने यह कहते हुए बैन कर दिया था कि यह चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी को बढ़ावा देता है.

लेकिन बाद में इस बैन को कुछ शर्तों के साथ हटा लिया गया था.

इस बार भी टिकटॉक भारतीय सरकार को सतर्कता बरतने का वादा करते हुए संतुष्ट कर सकती है. संभावनाओं से हम इनक़ार नहीं कर सकते हैं.

श्रीधर कहते हैं कि अगर ऐसा होता है तो टिकटॉक को दोबारा से वही लोकप्रियता हासिल करने में वक़्त नहीं लगेगा.

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