मालदीव के विदेश मंत्री भारत आए, क्या ये रिश्तों को सुधारने की कोशिश है?

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इमेज कैप्शन, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू (बाएं) के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच मालदीव के विदेश मंत्री आज यानी 9 मई को नई दिल्ली में रहेंगे.

मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी की डेडलाइन से एक दिन पहले विदेश मंत्री मूसा ज़मीर के भारत आने को दोनों देशों के मौजूदा रिश्तों में एक नए मोड़ की तरह देखा जा रहा है.

मूसा ज़मीर की भारत यात्रा से पहले मालदीव के पर्यटन मंत्री इब्राहिम फै़सल भारतीय पर्यटकों से मालदीव आने की अपील कर चुके हैं.

उन्होंने कहा है कि भारत और मालदीव के रिश्तों का इतिहास रहा है. भारत ने पहले भी उनके देश की मदद की है और एक बार फिर दोनों देश मिल कर काम करना चाहते हैं.

दरअसल इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर मालदीव के कुछ अधिकारियों की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद भारतीय पर्यटकों के बीच ‘मालदीव बायकॉट’ का अभियान चला था. इसके बाद वहां जाने वाले भारतीयों की संख्या काफी घट गई है.

जनवरी 2023 में मालदीव पहुंचने वाले पर्यटकों में भारतीय रूसियों के बाद दूसरे स्थान पर थे. लेकिन विवाद के बाद जनवरी 2024 में भारतीय पर्यटकों की संख्या घट कर पांचवें नंबर पर आ गई.

मालदीव की जीडीपी में पर्यटन की हिस्सेदारी 30 फ़ीसदी है. साथ ही उसकी 60 फ़ीसदी विदेशी मुद्रा पर्यटन उद्योग से ही आती है.

लिहाज़ा भारतीय पर्यटकों को अपने यहां आने की उसकी अपील को उसकी गिरती अर्थव्यवस्था संभालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

साथ ही मालदीव के विदेश मंत्री की इस यात्रा को भी भारत से रिश्ते सुधारने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

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रिश्ते सुधारने के फौरी कदम या दीर्घकालीन रणनीति

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मालदीव ने भारत के साथ संघर्ष की स्थिति खड़ी कर ली है. अगले एक-दो साल में मालदीव भारत के प्रति नरम रवैया अपनाने वाला नहीं है. उल्टे वो भारत के ख़िलाफ नए-नए पैंतरे अपनाता रहेगा.
अरविंद येलेरी
एसोसिएट प्रोफेसर, चीनी अध्ययन केंद्र-जेएनयू

क्या ये डैमेज कंंट्रोल की मालदीव की फौरी रणनीति है या फिर भारत से रिश्ते बेहतर करने की उसकी दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा है?

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में चीनी अध्ययन केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर अरविंद येलेरी कहते हैं मालदीव इस समय क्या कर रहा है इसके बजाय पिछले कुछ समय से उसके भारत के प्रति रुख को देखा जाना चाहिए.

वह कहते हैं,''राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू़ की पार्टी का रुख भारत विरोधी है. पिछले साल नई सरकार आने के बाद मालदीव ने चीन के साथ अपने रिश्ते और पुख्ता किए हैं और बार-बार यह कहा है कि वो हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अहम ताकत है.''

येलेरी कहते हैं,''मालदीव खुद को अगर हिंद महासागर या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अहम खिलाड़ी मानता है तो उसे रणनीतिक परिपक्वता दिखानी चाहिए थी.लेकिन अपने रवैये से उसने भारत के साथ संघर्ष की स्थिति खड़ी कर ली है. ये उसके लिए ठीक नहीं है.''

वो कहते हैं,''अगले एक-दो साल में मालदीव भारत के प्रति नरम रवैया अपनाने वाला नहीं है. उल्टे वो भारत के ख़िलाफ नए-नए पैंतरे अपनाता रहेगा.''

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इमेज कैप्शन, मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर (फाइल फोटो)

फिर मालदीव के पर्यटन मंत्री के बयान और विदेश मंत्री के दौरे को कैसे देखा जाए?

इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि दो देशों के बीच संबंध कितने भी खराब हों लेकिन कूटनीति में ऐसे औपचारिक चैनल खोले रखने पड़ते हैं. मालदीव की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है, जिसे भारत-मालदीव संबंध को सामान्य बनाने में किसी बड़ी सफलता का संकेत माना जा सकता है.

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मालदीव हिंद महासागर में उसका एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और विदेश मंत्री ज़मीर का दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूती देगा.

इससे पहले भारत ने मालदीव को अंडे,आलू, प्याज़, चीनी, गेहूं, दाल, नदी की रेत और स्टोन एग्रीगेटर जैसी चीज़ों का निर्यात बढ़ाने का एलान किया था.

भारत का रुख नरम क्यों?

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मालदीव के मामले में भारत ने अपनी ओर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिससे उसे एक गैर जिम्मेदार ताकत कहा जाए. इससे भारत और मालदीव के रिश्तों में कड़वाहट को कम करने में मदद मिली है.
प्रेमानंद मिश्रा
नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजॉल्यूशन के फ़ैकल्टी मेंबर,जामिया मिल्लिया इस्लामिया
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आख़िर भारत का ये रुख क्या दिखाता है?

इस सवाल पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजॉल्यूशन के फ़ैकल्टी मेंबर प्रेमानंद मिश्रा कहते हैं कि मालदीव का पर्यटन मंत्रालय अभी नहीं बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार अपने यहां भारतीय पर्यटकों को आने की अपील करता रहा है.

वह कहते हैं,'' हाल के दिनों में मालदीव ने जिस तरह से भारतीय विरोधी रवैया अपनाया उसके बाद भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया की आशंका थी. लेकिन भारतीय प्रतिक्रिया में सोशल मीडिया में दिखने वाली मालदीव विरोध की झलक नहीं थी. भारत का जवाब बड़ा संयत रहा है.''

प्रेमानंद मिश्रा कहते हैं,''भारत ने अपनी ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिससे उसे एक गै़र-ज़िम्मेदार ताक़त करार दिया जाए. इससे भी भारत और मालदीव के रिश्तों में कड़वाहट को कम करने में मदद मिली है.''

वह ये भी कहते हैं,'' भारत ने मुइज़्जू़ के चीन समर्थक रवैये पर ज्यादा आपत्ति दर्ज नहीं की. दूसरे अब संसदीय चुनाव जीतने के बाद मुइज़्ज़ू के पास राजनीतिक स्थिरता भी है. इसलिए भी वो भारत से रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते दिखते हैं. मुझे लगता है कि भारत में अगर दोबारा मोदी सरकार आती है तो मुइज़्ज़ू यहां आएंगे. हालांकि इससे पहले वो भारत आने की कोशिश कर चुके हैं. ये अलग बात है कि भारत ने ही उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी थी.''

भारत के साथ क्यों बिगड़े मालदीव के रिश्ते?

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इमेज कैप्शन, चीनी अधिकारियों के साथ मुइज़्ज़ू (फाइल फोटो)

दरअसल इसकी शुरुआत मुइज़्ज़ू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस की इंडिया आउट के नारे के साथ ही हुई थी.

मुइज़्जू़ चीन समर्थक हैं और वहां पूर्व राष्ट्रपति और मोहम्मद सोलिह की पार्टी की मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीएपी) की भारत समर्थक नीतियों का विरोध करते रहे हैं.

मुइज़्ज़ू ‘इंडिया आउट’ के नारे के दम पर चुनाव जीते थे और उन्होंने राष्ट्रपति बनते ही पहले तुर्की और फिर चीन की यात्रा की थी. जबकि परंपरा के मुताबिक मालदीव का कोई भी राष्ट्रपति पहले भारत की यात्रा करता है.

नवंबर 2023 में राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने वहां तीन विमानों की देखरेख के लिए मौजूद 88 भारतीय सैनिकों को वापस जाने का फ़रमान सुना दिया.

इस बीच दोनों देशों के रिश्तों में उस समय और तनाव देखने को मिला जब जनवरी 2024 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की खूबसूरती की तारीफ़ करते हुए ट्वीट किए और कुछ वीडियो पोस्ट किए. इस पर मालदीव सरकार के तीन जूनियर मंत्रियों ने ‘अपमानजनक टिप्पणियां’ की.

इन टिप्पणियों के बाद भारतीयों ने सोशल मीडिया पर मालदीव बायकॉट का अभियान चलाया. इसके बाद मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या काफी कम हो गई है. यह सिलसिला अभी तक जारी है.

मालदीव की मदद करता आया है भारत

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इमेज कैप्शन, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)

इस साल फरवरी में मुइज़्ज़ू प्रशासन ने एक चीनी रिसर्च जहाज़ शियांग यांग हॉन्ह 3 को माले में रुकने की अनुमति दी थी. मालदीव के इस कदम पर भारत की सहमति नहीं थी.

मालदीव ने कहा था कि ये कोई सैन्य जहाज़ नहीं है.

हालांकि भारतीय विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं दिखते हैं. इन विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज़ के जुटाए डेटा का बाद में चीनी सेना इस्तेमाल कर सकती है.

मुइज़्ज़ू भले ही भारत से दूरियां बढ़ाते हुए दिख रहे हैं. मगर भारत ऐतिहासिक तौर पर मालदीव की मदद करता आया है.

मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम हिस्सेदारी रहती है. मालदीव जाने वालों में भारतीयों की तादाद सबसे ज़्यादा रहती है.

मालदीव भारत पर दवाइयों, खाने की सामग्री और निर्माण से जुड़ी चीजों के लिए निर्भर रहता है.

कोरोना के बाद मालदीव में वैक्सीन सबसे ज़्यादा भारत की ओर से भेजी गई थीं.

पीएम मोदी ने भी 10 अप्रैल को मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू को खास संदेश भेजा था.

पीएम मोदी ने कहा था, ''हम पारंपरिक उत्साह के साथ ईद-उल-फितर मना रहे हैं, ऐसे में दुनिया भर के लोग करुणा, भाईचारे और एकजुटता के उन मूल्यों को याद कर रहे हैं, जो एक शांतिपूर्ण और समावेशी दुनिया के निर्माण के लिए जरूरी हैं और इसकी हम इच्छा रखते हैं.''

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