मालदीव से भारतीय सैनिक लौटने को तैयार, चीन का कितना फ़ायदा?

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- Author, अनबरासन एथिराजन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत और मालदीव के संबंधों में एक अहम पड़ाव इस रविवार यानी 10 मार्च को आ रहा है.
भारत मालदीव से अपने सैनिकों को बुलाने की शुरुआत इस रविवार से कर रहा है. पहले से तय डेडलाइन के तहत भारतीय सैनिकों की मालदीव से वापसी होगी.
बीते कुछ महीनों में मालदीव और चीन खुलकर एक-दूसरे के क़रीब दिखे हैं.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने भारत से मई तक अपने 80 सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है. मुइज़्ज़ू के इस कदम को चीन के प्रति झुकाव के तौर पर देखा जा रहा है.
मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी चरणबद्ध तरीके से होनी है.
मुइज़्ज़ू अपने चुनाव अभियान से लेकर बीते कुछ दिनों तक भारतीय सैनिकों को मालदीव से हटाने को लेकर आक्रामक दिखे हैं.
मालदीव के राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा कि भारतीय सेना का एक भी जवान 10 मई के बाद वर्दी में या सादे कपड़ों में मालदीव में नहीं रहेगा.

भारत के सैनिक मालदीव में क्या कर रहे हैं?
भारत का कहना है कि भारतीय सैनिक मालदीव में मदद के लिए भेजे गए हेलीकॉप्टर्स और छोटे एयरक्राफ्ट की देखभाल के लिए हैं.
ये हेलीकॉप्टर्स सालों पहले मालदीव को भारत ने दिए थे.
मालदीव भारत के लिए भौगोलिक और रणनीतिक लिहाज़ से काफी अहम है. भारत इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी से हिंद महासागर में निगरानी रख सकता है.
मगर मुइज़्ज़ू के राष्ट्रपति बनते ही भारत और मालदीव के संबंधों में दूरियां आई हैं. भारत मालदीव के रिश्तों में दिखती दरार में चीन अपने लिए संभावनाएं तलाश रहा है ताकि वो इस क्षेत्र में अपनी पकड़ को मज़बूत कर पाए.
बीते दिनों ये रिपोर्ट्स आई थीं कि भारत और मालदीव के बीच टेक्निकल स्टाफ को सैनिकों के बदले तैनात किए जाने पर सहमति बनी है.
इसी के तहत टेक्निकल स्टाफ की एक टीम मालदीव पहुंच चुकी है. इसी बारे में मुइज़्ज़ू का एक बयान आया था.
मुइज़्ज़ू ने बीते दिनों कहा था, ''भारतीय सैनिक जो जा रहे हैं, वे अपनी वर्दी बदल कर सादे कपड़े में नहीं लौट रहे हैं. हमें ऐसी बातें नहीं सुननी चाहिए जो हमारे अंदर संदेह पैदा करे और झूठ फैलाने वाली हों.''
मुइज़्ज़ू बोले, ''10 मई के बाद देश में कोई भी भारतीय सैनिक नहीं होगा, न तो वर्दी में और न ही सादे कपड़ों में. मैं यह बात विश्वास के साथ कहता हूँ कि भारतीय सेना इस देश में किसी भी तरह से नहीं होगी.''

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चीन के क़रीब आता मालदीव
भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा, ''एयरक्राफ्ट मालदीव में ही रहेगा. भारतीय सिविलियन मालदीव में बने रहेंगे. ऐसे में लगता है कि दोनों पक्ष एक समझौते पर पहुंच गए हैं.''
इस समझौते को मालदीव में कुछ लोग सैनिकों की जगह सिविलियंस यानी सादे लिबास में कर्मचारियों को तैनात किए जाने के तौर पर देख रहे हैं.
बीबीसी ने मुइज़्जू के कार्यालय से इस बारे में संपर्क किया, मगर कोई जवाब नहीं मिल सका.
कुछ जानकारों ने आगाह किया है कि छोटा सा देश मालदीव एशिया की दो ताकतों, भारत और चीन के बीच में फँसने के जोखिम का सामना कर रहा है.
बीते कुछ सालों में चीन ने मालदीव को करोड़ो डॉलर का क़र्ज़ दिया है. इनमें से ज़्यादातर क़र्ज़ आर्थिक विकास और निर्माण क्षेत्र के लिए दिया गया है.
चीन और मालदीव के संबंधों में ज़्यादा क़रीबी तब दिखी थी, जब मुइज़्ज़ू राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग के बुलावे पर चीन गए थे.
अब तक मालदीव के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भारत के दौरे पर आते रहे हैं. मगर मुइज़्ज़ू के मामले में ऐसा नहीं हुआ है.
मुइज़्ज़ू तुर्की, यूएई, चीन के दौरे पर जा चुके हैं, मगर वो अब तक भारत नहीं आए हैं.
चीन से लौटने के बाद मुइज़्ज़ू ने कहा था- 'हम छोटे देश हैं, इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें हमें धौंस दिखाने का अधिकार है'.
मुइज़्ज़ू के इस बयान को भारत से जोड़कर देखा गया था. हालांकि मुइज़्ज़ू ने भारत का नाम नहीं लिया था.


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चीन मालदीव का समझौता
इसी हफ़्ते की शुरुआत में मालदीव सरकार और चीन के बीच सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. इस समझौते ने भारत की भी चिंताएं बढ़ाई हैं.
मालदीव के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ये समझौते बिना किसी भुगतान के हुए हैं. हालांकि इस बारे में मालदीव सरकार और कोई जानकारी नहीं देती है.
हालांकि एक रैली में मंगलवार को मुइज़्ज़ू ने कहा था कि चीन मालदीव को नॉन लीथल हथियार फ्री में मुहैया करवाएगा और साथ ही मालदीव के सुरक्षाबलों को ट्रेनिंग भी देगा.
अतीत में भारत और अमेरिका मालदीव की सेना को ट्रेनिंग देते रहे हैं.
मालदीव में राजनीतिक विशेषज्ञ अज़ीम ज़ाहिर ने कहा, ''ये अभूतपूर्व है. मालदीव ने पहली बार चीन के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि सैन्य सहयोग मुहैया करवाया जा सके.''
वो कहते हैं, ''हम ये जानते थे कि मुइज़्ज़ू निवेश के संदर्भ में चीन के क़रीब जाएंगे. मगर वो इस हद तक चले जाएंगे, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.''
हालांकि चीन मालदीव में लंबे समय तक किसी सैन्य योजना की बात से इनकार करता है.
चेंगडू इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स थिंक टैंक के अध्यक्ष डॉ लॉन्ग शिंगचुन ने कहा, ''दो देशों के बीच ये सामान्य रिश्ते हैं. अगर चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बेहतर करना चाहेगा तो उसके पास मालदीव से बेहतर विकल्प हैं.''

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'इंडिया फर्स्ट' से 'चीन फर्स्ट' की नीति
मोहम्मद मुइज़्ज़ू को 'चीन फर्स्ट' नीति का समर्थक माना जाता है. हालांकि वो खु़द को कई बार 'मालदीव फर्स्ट' नीति का समर्थक बताते रहे हैं.
मालदीव में अतीत की सरकारों को 'इंडिया फर्स्ट' नीति का समर्थक माना जाता रहा.
अपने चुनाव अभियान में मुइज़्ज़ू, तत्कालीन मोहम्मद सोलिह की सरकार को भारत के मुद्दे पर घेर रहे थे.
मुइज़्ज़ू कहते थे कि भारत से समझौतों की जानकारी बताई नहीं जाती. अब ऐसी ही आलोचना मुइज़्ज़ू की भी हो रही है.

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बीते महीने मुइज़्ज़ू प्रशासन ने एक चीनी रिसर्च जहाज़ शियांग यांग हॉन्ह 3 को माले में रुकने की अनुमति दी थी. मालदीव के इस कदम पर भारत की सहमति नहीं थी.
मालदीव ने इस जहाज़ के रुकने की वजह सेना से जुड़ी नहीं बताई थी.
हालांकि भारतीय विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं दिखते हैं. इन विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज के जुटाए डाटा का बाद में चीनी सेना इस्तेमाल कर सकती है.

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मालदीव से बढ़ती दूरियां और भारत का 'जटायू'
मालदीव से बढ़ती दूरियां और हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी को बेहतर करने के लिए बीते दिनों लक्षद्वीप में नौसेना ने नए नेवल बेस की शुरुआत की है.
इस नेवल बेस का नाम आईएनएस जटायू है. इसे लक्षद्वीप के मिनिकॉय आईलैंड में तैनात किया गया है.
भारतीय नौसेना का कहना है कि जटायू की कोशिशें होंगी कि एंटी पायरेसी और एंटी नारकोटिक्स पर काबू पाया जा सके.
हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि भारत ने इसके ज़रिए मालदीव को संदेश देने की कोशिश की है.
कुछ भारतीय विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि इस नई हलचल का मालदीव से जारी तनाव से कोई संबंध नहीं है.
पूर्व भारतीय राजनयिक श्याम सरन ने कहा- मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ नया है, जहां तक मेरी जानकारी है, इस बारे में काफ़ी वक़्त से बात चल रही थी.

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मालदीव की चिंताएं
मुइज़्ज़ू भले ही भारत से दूरियां बढ़ाते हुए दिख रहे हैं. मगर भारत ऐतिहासिक तौर पर मालदीव की मदद करता आया है.
मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम हिस्सेदारी रहती है. मालदीव जाने वालों में भारतीयों की तादाद सबसे ज़्यादा रहती है.
मालदीव भारत पर दवाइयों, खाने की सामग्री और निर्माण से जुड़ी चीजों के लिए निर्भर रहता है.
कोरोना के बाद मालदीव में वैक्सीन सबसे ज़्यादा भारत की ओर से भेजी गई थीं.
इसी साल की शुरुआत में मुइज़्ज़ू के मंत्रियों ने जब पीएम मोदी की लक्षद्वीप की तस्वीरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, तब भारत में इस पर काफ़ी आक्रामक रवैया देखने को मिला था.
कुछ टूरिज्म कंपनियों ने मालदीव का बायकॉट किए जाने की बात कही थी.
इस विवाद के बाद बीते दो महीनों में मालदीव जाने वालों की संख्या क़रीब चार लाख रही है. इन पर्यटकों में 13 फ़ीसदी चीन से रहे. भारत विवाद से पहले नंबर एक पर था, मगर अब वो पांचवें नंबर पर आ गया है.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू के इस रुख़ के कारण उन्हें देश में भी आलोचना का सामना करना पड़ा था.
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