मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू संसद के पहले संबोधन में भारत पर क्या बोले

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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने सोमवार को देश की संसद को पहली बार संबोधित किया है.
इस संबोधन में मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने कहा- हमारी सरकार ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जिससे देश की संप्रभुता के साथ किसी तरह का समझौता हो.
मुइज़्ज़ू ने ज़ोर देते हुए कहा कि वो ऐसे किसी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे, जो मालदीव की आज़ादी और संप्रभुता को ख़तरे में डाले.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने दिसंबर 1932 में मालदीव की संसद में राष्ट्रपति सुल्तान मोहम्मद शमसुद्दीन के भाषण का हवाला भी दिया.
उन्होंने कहा, ''हम सुल्तान मोहम्मद जैसा रुख़ ही अपना रहे हैं, जिनका भरोसा था कि इस्लाम देश को मिला आशीर्वाद है.''
मुइज़्ज़ू ने अपने भाषण में भारत का भी ज़िक्र किया और भारत की दी डेडलाइन के बारे में बताया.

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मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने और क्या कहा?
मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने राष्ट्रपति चुनाव अभियान में 'इंडिया आउट' का नारा दिया था.
राष्ट्रपति बनने के बाद मालदीव सरकार ने औपचारिक तौर पर भारतीय सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा था और मार्च की डेडलाइन भी दी थी.
इस बारे में मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने देश की संसद से कहा, ''मेरा मानना है कि देश की बड़ी आबादी ने हमें इसलिए वोट दिया था कि हम विदेशी सेना को देश से हटाएंगे और कोई ऐसा समझौता नहीं करेंगे जिससे देश की संप्रभुता को ख़तरा हो.''
वो बोले, ''जो बातचीत राष्ट्रपति दूसरे देशों के साथ कर सकता है, वो जारी हैं. हमने भारत से आधिकारिक तौर पर मालदीव से सेना हटाने को कहा है. इस मुद्दे पर बातचीत जारी है. अभी तक हुई बातचीत के मुताबिक़, तीन में से एक एविएशन प्लेटफॉर्म में से सैनिकों को 10 मार्च 2024 तक बुला लिया जाएगा. बाकी के दो एविएशन प्लेटफॉर्म पर मौजूद सैनिकों को 10 मई 2024 तक बुला लिया जाएगा.''

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मोहम्मद मुइज़्ज़ू के भाषण का विपक्ष ने किया विरोध
मोहम्मद मुइज़्ज़ू का राष्ट्रपति बनने के बाद देश की संसद को ये पहला संबोधन था.
जब मुइज़्ज़ू बोल रहे थे, तब संसद में विपक्ष की मौजूदगी कम ही रही.
मालदीव के मुख्य विपक्षी दल एमपीडी और द डेमोक्रेट्स ने सोमवार को संसद सत्र का बॉयकॉट किया.
एमडीपी ने रविवार रात बयान जारी कर कहा था कि संसद का बॉयकॉट करेंगे और इसके कई कारण हैं.
बयान में कहा गया कि विरोध की एक वजह ये भी है कि राष्ट्रपति के भाषण के दिन छुट्टी रहा करती थी मगर मुइज़्ज़ू ने ये परंपरा ख़त्म कर दी है. इस फ़ैसले से संसद को मिले सम्मान की अनदेखी हुई है.
विपक्षी दलों का आरोप है कि संसद में जो बीते दिनों हुआ, उसकी सही से जांच करने में सरकार नाकाम साबित हुई है.
बीते दिनों संसद में मुइज़्ज़ू कैबिनेट के चार सदस्यों को मंज़ूरी देने के दौरान विरोध हुआ था. इस दौरान सांसदों के बीच हाथापाई हुई थी.
वहीं डेमोक्रेट्स का कहना है कि वो संसद सत्र का बॉयकॉट करेंगे क्योंकि तीन सदस्यों को संसद की मंज़ूरी नहीं मिली थी और ये लोग सत्र में बुलाए गए हैं.

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विपक्ष मुइज़्ज़ू सरकार को घेरता रहा है
इस साल की शुरुआत से मालदीव और भारत के बीच दूरियां आई हैं.
मुइज़्ज़ू के 'इंडिया आउट' अभियान के अलावा भी दोनों देशों के बीच कई दूसरी वजहों से दूरियां आई हैं.
पीएम मोदी ने जनवरी के पहले हफ्ते में लक्षद्वीप का दौरा किया था. इस दौरे की तस्वीरों पर मुइज़्ज़ू सरकार के मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं.
इन टिप्पणियों का भारतीयों और कुछ कंपनियों ने विरोध किया था. साथ ही मालदीव का बॉयकॉट करने की बात भी कही थी.
मालदीव की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा पर्यटन क्षेत्र से आता है. मालदीव जाने वालों में भारतीयों की अच्छी ख़ासी संख्या रहती है.
भारत की ओर से हुए विरोध के बाद मालदीव के विपक्षी दलों के नेताओं और पूर्व राष्ट्रपतियों ने मुइज़्ज़ू सरकार की आलोचना की थी.
विपक्ष का कहना था कि भारत मालदीव का पुराना सहयोगी रहा है और मुइज़्ज़ू सरकार के रवैये से दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ेंगी.
इन नेताओं ने तब कहा था कि आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्रियों को सस्पेंड करना काफ़ी नहीं होगा. सरकार को भारत से औपचारिक तौर पर माफ़ी मांगनी चाहिए.
इसके अलावा मोहम्मद मुइज़्ज़ू जब चीन से मालदीव लौटे थे तो बोले थे- हम छोटे देश हैं इसलिए किसी को हमें धौंस दिखाने का हक नहीं मिल जाता है.
मुइज़्ज़ू को 'चीन फर्स्ट' नीति का समर्थक माना जाता है. वहीं अतीत में मालदीव की सरकारें 'इंडिया फर्स्ट' नीति पर चलती रही हैं.

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जयशंकर ने क्या कहा था
कुछ दिन पहले ही मालदीव में विपक्षी दल जम्हूरी पार्टी के नेता गासिम इब्राहिम ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू से अपील की थी कि वो औपचारिक तौर पर भारत और पीएम मोदी से माफ़ी मांगें.
तब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत और चीन को लेकर अपनी राय रखी थी.
जयशंकर ने कहा है कि सब पड़ोसियों के बीच परेशानियां आती हैं, मगर आख़िरकार पड़ोसियों को पड़ोसियों की ज़रूरत होती है.
जयशंकर ने कहा, ''चीन भारत के पड़ोसियों को प्रभावित करेगा, लेकिन भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति से डरना नहीं चाहिए. सब पड़ोसियों के बीच दिक़्क़तें आती हैं लेकिन आख़िरकार पड़ोसियों को पड़ोसियों की ज़रूरत होती है.''
जयशंकर बोले थे, ''हमें समझना होगा कि चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में प्रतिस्पर्धी राजनीति के रूप में इन देशों को प्रभावित करेगा. मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए. मुझे लगता है कि हमें कहना चाहिए- ठीक है, वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है. आप अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करें, हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे.''

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मुइज़्ज़ू के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की तैयारी
मोहम्मद मुइज़्ज़ू के ख़िलाफ़ विपक्षी दलों का विरोध इस कदर बढ़ा है कि संसद में महाभियोग लाने की तैयारी है.
मुइज़्ज़ू के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने का वक़्त कई मायनों में अहम है. मालदीव और भारत के बीच बीता कुछ वक़्त तनाव भरा रहा है. मोहम्मद मुइज़्ज़ू के हाथ में मालदीव की कमान आने के बाद से भारत से दूरी बढ़ी है.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तीन महीने के भीतर महाभियोग प्रस्ताव लाने की मुख्य तौर पर दो वजहें देखी जा रही हैं.
एमडीपी के संसदीय दल के उपनेता हुसैन ने एक इंटरव्यू में कहा था, ''राष्ट्रपति हिंद महासागर क्षेत्र को अपनी नीतियों के कारण ख़तरे में डाल रहे हैं. वो सेना की मदद और पैसे का इस्तेमाल कर देश की संसद को सही से चलने नहीं दे रहे हैं.''
80 सदस्यों वाली मालदीव की पीपल्स मजलिस यानी संसद में एमडीपी के पास 42 सीटें हैं.
एमडीपी को 13 सीटों वाले डेमोक्रेट्स भी समर्थन दे रहे हैं.
ये मिलन ऐसे दो नेताओं के दलों के बीच हो रहा है, जो एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी हैं.
मगर दो विरोधी एक लक्ष्य को पाने के लिए साथ हो गए हैं. ये लक्ष्य है मोहम्मद मुइज़्ज़ू के ख़िलाफ़ महाभियोग.
अब 17 मार्च को संसदीय चुनाव होने हैं.
इस दिन मुइज़्ज़ू के लिए एक मुश्किल परीक्षा होगी. नीतियों को लागू करने के लिए क़ानून को पास करवाना होगा और इसके लिए संसद का समर्थन ज़रूरी होगा.
एमडीपी के संसदीय उपचुनाव तीन फरवरी को होने हैं.
हुसैन ने द हिंदू अखबार से कहा था, ''महाभियोग कब पेश करना है, इसे लेकर हम चुनाव के बाद फ़ैसला करेंगे. हम भूगोल को नहीं बदल सकते. हम चीन को क़रीब नहीं ला सकते. भारत हमारा सबसे पड़ोसी देश, दोस्त, परिवार है. फिर चाहे दवा हो या ख़ाना. हम भारत के बिना नहीं कर सकते. हम शांति से इसलिए रह पाते हैं क्योंकि भारत पड़ोसियों को पहले रखने की नीति पर चलता है.''

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भारत मालदीव विवाद की टाइमलाइन
- नवंबर 2023 में मालदीव में मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सरकार बनाई
- मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने कामकाज के पहले दिन भारतीय सैनिकों को लौटाने की बात भारत से कही
- नवंबर के आख़िर में मोहम्मद मुइज़्ज़ू तुर्की और सऊदी अरब के दौरे पर गए
- एक दिसंबर 2023 को दुबई में मुइज़्ज़ू ने पीएम मोदी से मुलाक़ात की
- जनवरी 2024 की पहले हफ्ते में पीएम मोदी लक्षद्वीप के दौरे पर गए, मुइज़्ज़ू के मंत्रियों ने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की
- भारतीय कंपनियों और सोशल मीडिया पर मालदीव के बॉयकॉट की मांग उठी
- मुइज़्ज़ू सरकार ने मंत्रियों को सस्पेंड किया, विपक्षी दल बोले- इतना काफी नहीं
- आठ जनवरी मोहम्मद मुइज़्ज़ू चीन के दौरे पर निकले, लौटकर बोले- हम छोटे देश हैं तो किसी को धौंस दिखाने का हक़ नहीं
- 14 जनवरी को मालदीव ने भारत को दी डेडलाइन- 15 मार्च तक भारतीय सैनिक मालदीव छोड़ें
- 28 जनवरी को मालदीव की संसद में मोहम्मद मुइज़्ज़ू समर्थक सांसदों और विपक्षी सांसदों की हाथापाई
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