‘इंडिया फ़र्स्ट’ कहने वाले मालदीव के विपक्षी नेता भारत से विवाद पर क्या कह रहे हैं?

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भारत और मालदीव के रिश्तों में दिनों दिन खटास बढ़ती जा रही है. मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के पद संभालने के बाद दोनों देशों के बीच में नया विवाद खड़ा हो गया है.
मुइज़्ज़ू के मंत्रिमंडल में शामिल रहीं मरियम शिउना की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद लगातार मालदीव के नेताओं के बयान आ रहे हैं.
हालांकि, मरियम शिउना समेत तीन मंत्रियों को कथित तौर पर निलंबित कर दिया गया है. वहीं, आज भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव के उच्चायुक्त इब्राहिम शहीब को तलब किया था.
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत और मालदीव से बयान आ रहे हैं. टिप्पणी करने वालों में मालदीव के विपक्षी नेता भी शामिल हैं और ऐसे नेता भी हैं जो भारत समर्थित रहे हैं.
ताज़ा बयान मालदीव की पहली विदेश मंत्री दुनया मौमून का आया है.
दुनया मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गय्यूम की बड़ी बेटी हैं और साल 1988 में गय्यूम की सरकार को भारतीय सेना ने तख़्तापलट से बचाया था.
साल 2013-16 तक अब्दुल्ला यामीन की सरकार के दौरान दुनया गय्यूम ने विदेश मंत्रालय का पद संभाला था. साथ ही दुनया को भारत से रिश्ते बेहतर करने के लिए भी जाना जाता है.
दुनया मौमून ने क्या कहा

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मालदीव के कई बड़े विपक्षी नेताओं के बयान के बीच दुनया मौमून ने मुइज़्ज़ू के पूर्व मंत्री के बयान की निंदा की है.
उन्होंने कहा है कि ‘हमारे पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना अस्वीकार्य है.’
इसके साथ ही दुनया मौमून ने कहा कि ‘व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि नस्लवाद एक ऐसी चीज़ है जिसकी मैं कड़ी निंदा करती हूं.’
पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर मालदीव के मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियां सोशल मीडिया पर की थीं जिसके बाद मालदीव सरकार ने उनके बयानों से दूरी बना ली.
मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कुछ घंटे बाद एक बयान जारी कर इस पर सफ़ाई दी.
“विदेशी नेताओं और शीर्ष व्यक्तियों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपमानजनक टिप्पणी के बारे में मालदीव सरकार को जानकारी है. ये विचार निजी हैं और मालदीव सरकार के नज़रिए का प्रतिनिधित्व नहीं करते.”
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दुनया मौमून ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि ‘मैं ये कहूंगी कि भारत हमारा सबसे क़रीबी दोस्त और समर्थक है. इसने यहां के विकास में मदद की है. मुझे इंदिरा गांधी मेमोरियल अस्पताल जैसी परियोजनाएं याद हैं और रक्षा क्षेत्र में कई ऐसी ही ऐतिहासिक परियोजनाएं हैं, जिसमें कई सहयोग हुए.’
“हमारे लिए ये संबंध बेहद ख़ास हैं और मुझे उम्मीद है कि ये वर्तमान संकट जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा. इसमें हमारी सरकार और भारत के साथ-साथ मीडिया भी इसमें अहम भूमिका निभाते हुए मामले को सुलझाने में मदद करे और हम वापस दोस्ती की ओर जाएं.”
भारत-मालदीव के संबंधों पर चीन से भी आई टिप्पणी

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भारत और मालदीव के बीच ताज़ा तनाव के बीच चीन की ओर से भी टिप्पणी आई है.
इस समय मालदीव के राष्ट्रपति चीन के दौरे पर हैं. चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि चीन हमेशा मालदीव को बराबरी के साझेदार के तौर पर व्यवहार करता है और उसकी संप्रभुता का सम्मान करता है.
लेख में भारत के साथ संबंधों पर भी लिखा गया है. इसमें लिखा है, “(हम) मालदीव और भारत के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों का भी सम्मान करते हैं, माले के लिए नई दिल्ली के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के महत्व से भी पूरी तरह वाकिफ़ हैं.”
“भारत और चीन के बीच संघर्ष की वजह से बीजिंग ने कभी भी माले से नहीं कहा कि वो नई दिल्ली को ख़ारिज करे, न ही वो मालदीव और भारत के बीच सहयोग को ग़ैर-दोस्ताना या ख़तरे के रूप में देखता है.”
लेख में आगे भारत, चीन और मालदीव के बीच सहयोग बनाने पर भी ज़ोर दिया गया है.
इसमें लिखा गया है, “चीन, भारत और मालदीव के बीच त्रिपक्षीय सहयोग करने का भी वो (चीन) इच्छुक है. नई दिल्ली को अधिक खुले विचारों वाला रहना चाहिए, क्योंकि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन का सहयोग कोई मामूली खेल नहीं है.”
विपक्षी नेता और क्या बोले

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मालदीव की पूर्व डिप्टी स्पीकर और सांसद इवा अब्दुल्लाह ने मंत्रियों को निलंबित करने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मालदीव सरकार को भारत के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ उन्होंने कहा, “ये अहम है कि मालदीव की सरकार ने ख़ुद को मंत्री के बयान से अलग कर लिया. मुझे पता है कि सरकार ने मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया है लेकिन मुझे लगता है कि ये अहम होगा कि मालदीव सरकार भारत के लोगों से माफी मांगे.”
उनके अलावा देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी मंत्री के बयान की निंदा की थी.
मुइज़्ज़ू के पहले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति थे और उनकी सरकार ने 'इंडिया फर्स्ट' की नीति लागू की थी. वहीं मुइज़्ज़ू ने चुनाव प्रचार में 'इंडिया आउट' का नारा दिया था.
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने ऐसे बयानों को संवेदनहीन और संबंध ख़राब करने वाला बताया था.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, “भारत के ख़िलाफ़ मालदीव के सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया पर नफ़रती भाषा इस्तेमाल किए जाने की मैं निंदा करता हूं. भारत मालदीव का हमेशा से अच्छा दोस्त रहा है और हमारे दोनों देशों के बीच सालों पुरानी दोस्ती पर नकारात्मक असर डालने वाले इस तरह के संवेदनहीन बयान देने की हमें इजाज़त नहीं देनी चाहिए.”
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