मुइज़्ज़ू ने मालदीव का राष्ट्रपति बनते ही भारत से की ये मांग, सऊदी अरब से क्या कहा

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मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के नेतृत्व में आई नई सरकार ने अपने कामकाज के पहले दिन भारत से औपचारिक गुज़ारिश की है कि वो मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाए.
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि मालदीव सरकार ने औपचारिक तौर पर भारत सरकार से गुज़ारिश की है कि मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वहां से हटाया जाए.
बयान के अनुसार राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गए भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाक़ात के दौरान मुइज़्ज़ू ने औपचारिक तौर पर इस मुद्दे पर उनसे बात की.
अपने कार्यकाल के पहले दिन मुइज़्ज़ू ने कई नेताओं से मुलाक़ात की और कई अहम फ़ैसले लिए. एक नज़र उन महत्वपूर्ण फ़ैसलों पर-

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भारत से क्या कहा?
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ़ से जारी एक अन्य बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच इस दौरान द्विपक्षीय रिश्तों को मज़बूत करने को लेकर चर्चा हुई. साथ ही भारत की मदद से मालदीव में चल रही परियोजनाओं पर भी बात हुई.
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने कहा कि सितंबर में मालदीव में हुए चुनावों में जनता ने बहुमत से उनका और उनके उस कैंपेन का समर्थन किया है जिसमें भारत से सेना हटाने की बात करना शामिल था.
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत सरकार मालदीव के लोगों की गणतांत्रिक इच्छा का सम्मान करेगी और वहां तैनात अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाएगी.
हालांकि इस दौरान मुइज़्ज़ू ने कहा कि भारत ने मालदीव को जो दो हेलिकॉप्टर दिए थे उन्हें ज़रूरत के अनुसार राहत कार्य में लगाया जा रहा है और कई अभियानों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
भारत ने साल 2010 में मालदीव को पहला हेलिकॉप्टर दिया था जिसका नाम कुरांगी रखा गया. इसका काम मेडिकल इमर्जेंसी में किया जाना तय था.
इसके बाद इंडो-मालदीव डिफेन्स एक्शन प्लान पर दोनों मुल्कों की सहमति बनने के बाद 2016 में भारत सरकार ने मालदीव को दूसरा हेलिकॉप्टर दिया था. इसके साथ भारत सरकार से मालदीव के काहधू एयरपोर्ट में बेहतर सुविधाएं बनाने के लिए 2.4 लाख डॉलर का अनुदान भी दिया.
पहले के मुकाबले बेहद उन्नत किस्म के इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल भी राहत और बचाव कार्य के लिए और मरीज़ों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाना था.

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मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वो देश से बाहर करेंगे. ऐसे में उनकी जीत के बाद से ही भारत के साथ मालदीव के संबंधों को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही थीं.
हालांकि शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले संबोधन में मुइज़्ज़ू ने कहा कि "मालदीव ये सुनिश्चित करेगा कि मालदीव पर ज़मीन पर विदेशी सेना की किसी तरह की मौजूदगी न हो. मैं आपसे कह सकता हूं कि मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान यही होगा कि मैं अपने देश के प्रति वफ़ादार रहूं."
इससे पहले उन्होंने ये भी कहा था कि वो विकास के पक्षधर हैं और चीन और भारत दोनों के साथ ही बेहतर रिश्ते चाहते हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भारतीय सैनिकों की जगह चीनी सैनिकों को देश में तैनात कर वो क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ना नहीं चाहते.

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चीनी प्रतिनिधि से क्या हुई बात?
इस दौरान मुइज़्ज़ू ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विशेष दूत के रूप में स्टेट काउंसिलर शेन यीचिन से मुलाक़ात की और चीन और मालदीव के बीच संबंध और अधिक मज़बूत करने पर चर्चा की.
मुइज़्ज़ू ने मालदीव के सामाजिक-आर्थिक विकास में चीन की भूमिका की तारीफ़ की और कहा कि शनिवार का दिन दोनों देशों में ऐतिहासिक रिश्तों में नया अध्याय साबित होगा.
इस दौरान उन्होंने दक्षिण कोरिया के बुसान के मेयर पार्क ह्योंग जून से मुलाक़ात की और शिक्षा, पब्लिक हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के मुद्दों पर चर्चा की.
फ़लस्तीन मुद्दे पर सऊदी अरब की तारीफ़
मालदीव के लिए फ़लस्तीन के दूत वालिद एएम अबू अली से मुलाक़ात के दौरान मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने कहा कि मालदीव के लोग पहचान और सम्मान की फ़लस्तीनी लोगों की लड़ाई में उनके साथ हैं.
उन्होंने ग़ज़ा में इसराइल के सैन्य अभियान की कड़ी आलोचना की और तुरंत युद्ध विराम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि इलाक़े में स्थिरता और शांति बहाल करने के लिए 1967 में तय की गई सीमा के अनुसार फ़लस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बसाया जाना चाहिए.
उन्होंने सऊदी अरब के शाह सलमान के विशेष दूत और सऊदी अरब के अर्थव्यवस्था और योजना मंत्री फ़ैसल बिन फदहील अल-इब्राहिम से भी मुलाक़ात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि मालदीव के विकास में सऊदी अरब की अहम भूमिका है और दोनों मुल्क अपने आपसी संबंध और मज़बूत करने की दिशा में काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से लड़ने में मालदीव मदद करता रहेगा. साथ ही उन्होंने मध्य-पूर्व और ख़ासकर फ़लस्तीन में शांति और स्थिरता लाने की सऊदी अरब की कोशिशों की तारीफ़ की.

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सरकारी संस्थानों पर 24 घंटों फहराएगा झंडा
राष्ट्रपति मुइज्जू ने अपने कार्यकाल के पहले दिन सभी सरकारी संस्थानों में 24 घंटे राष्ट्रीय झंडा फहराना अनिवार्य कर दिया है. ये आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
मालदीव में परंपरागत रूप से राष्ट्रीय झंडा रोज़ सवेरे 6 बजे से शाम के 6 बजे तक फहराया जाता था.
राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने अपने पहले संबोधन में कहा कि उनका ये फ़ैसला देश के सम्मानित झंडे के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है.
उन्होंने कहा कि ये झंडा मालदीव के हर द्वीप पर लहराएगा और देश के इस प्रतीक पर सूरज कभी अस्त नहीं होगा.

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फुशी ढिगारू लैगून का पुनरुद्धार
मुइज़्ज़ू ने राजधानी माले में घरों की कमी का ज़िक्र किया और कहा कि उनकी सरकार 30 दिनों के भीतर फुशी ढिगारू लैगून के पुनरुद्धार का काम शुरू करेगी.
उन्होंने कहा कि 8 महीनों में फुशी ढिगारू लैगून में खाली ज़मीन को इस तरह तैयार किया जाएगा जिससे 12 हेक्टेयर की अतिरिक्त ज़मीन इस्तेमाल के लिए मिल सके. इसका इस्तेमाल घरों के लिए किया जा सकेगा.
सरकार की योजना इस लैगून को समुद्रतल से कम से कम तीन मीटर ऊपर उठाकर एक 'सुरक्षित द्वीप' बनाने की है जिससे इस लैगून पर जलवायु परिवर्तन के ख़तरों का कम असर पड़ सके.
इस दौरान उन्होंने नए क्लॉक टावर का अनावरण किया और इस मौक़े पर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नया क्लॉक टावर पांच वक्त की नमाज़ के लिए अज़ान का वक्त सही-सही बता सकेगा.

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अन्य नेताओं से क्या हुई चर्चा?
अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी यूएसएड की प्रबंधक सैमंथा पावर से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने जलवायु परिवर्तन और भविष्य की चुनौतियों को लेकर विस्तृत चर्चा की.
उन्होंने अपनी सरकार की योजनाओं के बारे में बात की, साथ ही जलवायु परिवर्तन को देखते हुए तैयारी, आपदा प्रबंधन के लिए ज़रूरी क्षमता बनाने और प्राकृतिक आपदा को लेकर चेतावनी व्यवस्था को मज़बूत करने पर चर्चा की.
उन्होंने खाद्य संकट से निपटने के लिए खेती के क्षेत्र में विकास और मालदीव के मछली व्यापार पर लगने वाले कर को कम करने की भी बात की.
सेशल्ज़ के उप-राष्ट्रपति अहमद अफ़ीफ़ से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने जलवायु परिवर्तन का ज़िक्र किया और कहा कि आने वाले वक्त में दोनों मुल्क के आगे एक ही तरह की चुनौतियों हैं इसलिए दोनों को साथ मिलकर काम करना चाहिए.
जापान के प्रतिनिधि के साथ उन्होंने जापान के सहयोग से हो रही परियोजनाओं के साथ-साथ संभावित परियोजनाओं और रिश्ते मज़बूत करने पर चर्चा की.
तुर्की की तरफ से आए संस्कृति और पर्टयन मंत्री महमूद नूरी अरसोय के साथ उन्होंने मालदीव और तुर्की के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा की.
इस दौरान महमूद नूरी ने राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन की तरफ से उन्हें तुर्की दौरे का न्योता भी दिया.

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कौन हैं मुइज़्ज़ू?
45 साल के मुइज़्ज़ू ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वो राजधानी माले के मेयर रह चुके हैं. वो सात साल तक देश के कंस्ट्रक्शन मंत्री थे.
साल भर पहले उन्होंने कहा था कि अगर 2023 में उनकी सरकार बनी तो वो चीन के साथ "रिश्ते मज़बूत" करेंगे. मालदीव में चीन बड़े पैमाने पर निवेश करता है.
उस वक्त उन्होंने कहा था, "हम उम्मीद करते हैं कि हम पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के मार्गदर्शन में 2023 में सत्ता में लौटेंगे और हम घरेलू स्तर पर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के साथ मज़बूत रिश्ते का एक और अध्याय लिखेंगे."
मुइज़्ज़ू देश के आठवें राष्ट्रपति हैं. वो पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के क़रीबी माने जाते हैं, जिनके शासनकाल के दौरान मालदीव और चीन के रिश्ते बेहद गहरे हो गए थे.
बीते साल दिसंबर में अब्दुल्ला यामीन को कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप में 11 साल की जेल की सज़ा सुनाई. उन पर 50 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया.
यामीन खुद 2023 के चुनाव में बतौर उम्मीदवार शामिल होना चाहते थे लेकिन आपराधिक मामले के कारण उन पर रोक थी. ऐसे में उन्होंने अपने प्रॉक्सी के तौर पर मुइज़्ज़ू को चुनावी मैदान में उतारा.
राष्ट्रपति चुनाव में मुइज़्ज़ू की जीत के एक दिन बाद ये ख़बर आई कि यामीन को जेल से ट्रांसफर कर उनके घर पर ही नज़रबंद रखा गया है.
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