मालदीव के मीडिया में मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण में पीएम मोदी के नहीं आने पर चर्चा गर्म

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मालदीव में जब से मोहम्मद मुइज़्ज़ू को राष्ट्रपति चुनाव में जीत मिली है तब से भारत के साथ उसके संबंधों को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं.
मुइज़्ज़ू का चुनावी कैंपेन और चुनाव जीतने के बाद जिस तरह के बयान आए, उनसे स्पष्ट था कि वह भारत से चिढ़े हुए हैं.
मुइज़्ज़ू ने अपने चुनावी अभियान में 'इंडिया आउट' (भारत बाहर जाओ) कैंपेन चलाया था और चुनाव जीतने के बाद कहा कि मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वापस जाना होगा. मुइज़्ज़ू के इन बयानों से उनकी छवि भारत विरोधी और चीन परस्त बनी.
अब मोहम्मद मुइज़्ज़ू 17 नवंबर को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं और इस शपथ ग्रहण समारोह में दुनियाभर के 46 देशों प्रतिनिधि जुट रहे हैं.
श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मालदीव का राजधानी माले पहुँच गए हैं.
2018 में इब्राहिम सोलिह को जब राष्ट्रपति चुनाव में जीत मिली थी तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे. इस बार मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में मोदी कैबिनेट में विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू शामिल होंगे.
इब्राहिम सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी और मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में रिजिजू के जाने को दोनों देशों के बीच ख़राब होते संबंधों के आईने में देखा जा रहा है.
मालदीव के मीडिया में भी मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में रिजिजू के आने की ख़बर और दोनों देशों के बीच संबंधों में आई कड़वाहट को प्रमुखता से जगह मिली है.

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मुइज़्ज़ू ने खुद को बताया मालदीव परस्त
मालदीव के प्रमुख अख़बार द सन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "मुइज़्ज़ू राजधानी माले के रिपब्लिक स्क्वेयर में आयोजित एक समारोह में मालदीव की कमान संभालेंगे. इस समारोह में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया था. लेकिन पीएम मोदी ने निमंत्रण स्वीकार नहीं किया क्योंकि उन्हें ग्लोबल साउथ समिट और जी-20 समिट के इवेंट में शामिल होना था."
"मुइज़्ज़ू ने चुनावी वादा किया था कि वह राष्ट्रपति बनेंगे तो मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटा देंगे. मुइज़्ज़ू के इस चुनावी वादे को चीन परस्त नीति के रूप में देखा गया. हालांकि मुइज़्ज़ू ने चीन परस्त होने के आरोपों पर ख़ुद को मालदीव परस्त बताया है."
द सन ने लिखा है, "मुइज़्ज़ू चाहते हैं कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को जल्द से जल्द वापस भेजा जाए. वह अपने पूर्ववर्ती इब्राहिम सोलिह से अलग भारत के साथ संबंधों को बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध दिख रहे हैं."
मुइज़्ज़ू का कहना है कि मालदीव की स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करने वाले सभी देशों के साथ वह दोस्ती गहरी करेंगे.

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मालदीव में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी
मालदीव की न्यूज़ वेबसाइट avas.mv ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मुइज़्ज़ू सत्ता संभालते ही जिन एजेंडों की घोषणा करेंगे उनमें भारतीय सैनिकों को मालदीव से वापस भेजना प्राथमिकता में है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ मुइज़्ज़ू ने पिछली रात पहले 100 दिनों में अपने ख़ास एजेंडों की घोषणा कर दी है.
मुइज़्ज़ू ने कहा है कि राष्ट्रपति की कमान संभालते ही वह भारतीय सैनिकों को मालदीव से वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे.
चुनाव में जीत के बाद मालदीव में भारत के राजदूत से मुइज़्जू़ की दो बार मुलाक़ात हुई थी. मुइज़्ज़ू ने कहा था कि भारतीय राजदूत से उनकी बात विस्तार से कई मुद्दों पर हुई थी. मुइज़्ज़ू ने कहा था कि बातचीत "बहुत सकारात्मक और रचनात्मक" थी.
मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस भेजने की बात तो ख़ूब हो रही है लेकिन मालदीव की सरकार ये नहीं बता रही है कि भारत के कितने सैनिक मालदीव में मौजूद हैं.
मालदीव के अंग्रेज़ी अख़बार द एडिशन ने अपनी एक रिपोर्ट में मालदीव की पीपल्स कांग्रेस में डायरेक्टर जरनल ऑफ ट्रांजिशन एंड चेयरपर्सन अब्दुल्ला अब्दुल रहीम का बयान छापा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि मालदीव में कितने भारतीय सैनिक हैं, यह स्पष्ट नहीं है.
द एडिशन के मुताबिक़ अब्दुल रहीम ने कहा, "हम ठीक-ठीक संख्या बताने में समर्थ नहीं हैं. यह बात तय है कि भारतीय सैनिक मालदीव में हैं लेकिन सही संख्या पता नहीं है. भारतीय सैनिक मालदीव में अलग-अलग जगहों पर हैं."
द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "हिन्द महासागर में भारत की सैन्य मौजूदगी कोई नई बात नहीं है. अब्दु और लम्मू द्वीप में 2013 से ही भारतीय नौसैनिकों और एयरफ़ोर्स कर्मियों की मौजूदगी रही है."
"नवंबर 2021 में मालदीव नेशनल डिफेंस फ़ोर्स ने संसदीय कमिटी से कहा था कि मालदीव में कुल 75 भारतीय सैन्यकर्मी मौजूद हैं. फ़रवरी 2021 में मालदीव की विपक्षी पार्टियों ने भारत के साथ मैरीटाइम सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट का विरोध किया था."
भारत ने मालदीव को दो हेलिकॉप्टर दिए थे, इसे लेकर भी विवाद हुआ था. अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने 2018 में भारत से उपहार स्वरूप मिले दो नेवी हेलिकॉप्टर को वापस ले जाने के लिए कहा था. भारत ने मालदीव को ये हेलिकॉप्टर राहत और बचाव कार्य के लिए दिए थे.

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भारत बना अहम चुनावी मुद्दा
हाल में संपन्न हुए मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में भारत एक अहम मुद्दा बनकर उभरा था. ख़ासकर विपक्ष ने इसे ज़ोर शोर से उठाया था और उसका कहना था कि भारत मालदीव के आंतरिक मामलों में दखल दे रहा है.
पिछले हफ़्ते मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने पीएसएम यानी पब्लिक सर्विस मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था कि था मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी सड़क पर शोर करने से नहीं होगी बल्कि इसे डिप्लोमैसी के ज़रिए ही संभव बनाना होगा.
मुइज़्ज़ू ने इस इंटरव्यू में कहा था, "भारतीय सैनिकों को शांतिपूर्ण वार्ता और लोकतांत्रिक नियमों के ज़रिए वापस भेजा जाएगा. दोनों देशों के हित में जो होगा हम वहीं करेंगे."
"मालदीव और भारत दोनों क़रीबी देश हैं और दोनों को अलग नहीं किया जा सकता है. हमें अतीत में भारत से कई तरह की मदद मिली है. हमें अब भी वहां से मदद मिल रही है. भारत के साथ भविष्य में भी संबंध अच्छे रहेंगे."
मुइज़्ज़ू ने कहा, "भारत के सैनिक हैं, केवल इसलिए हम वापस भेजना चाहते हैं, ऐसा नहीं है. चाहे भारत हो या कोई और देश मालदीव के लोगों ने फ़ैसला किया है कि वे दूसरे देशों के सैनिक अपनी ज़मीन पर नहीं चाहते हैं. चाहे इसका मक़सद जो भी हो. हम इस दिशा में काम जल्द ही शुरू कर देंगे और हमें कामयाबी मिलेगी."

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अब तक भारत की प्रतिक्रिया
मुइज़्ज़ू ने इन आक्रामक बयानों पर भारत की बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया रही है.
पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, "माले में हमारे उच्चायुक्त ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से मुलाक़ात की थी. दोनों के बीच कई मुद्दों पर अच्छी बातचीत हुई."
"इस बातचीत में आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे. मालदीव के साथ हमारी साझेदारी का फोकस साझी चुनौतियां और प्राथमिकताएं हैं. एक पड़ोसी के तौर पर हमारे लिए ज़रूरी है कि मिलकर काम करें."
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