मालदीव को लेकर भारत का अहम फ़ैसला, मुइज़्ज़ू ने भी दिया ख़ास संकेत- प्रेस रिव्यू

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मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत नहीं करेंगे.
इस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे.
हिंदुस्तान टाइम्स अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि चीन के समर्थक माने जाने वाले मोहम्मद मुइज़्ज़ू के शपथग्रहण समारोह में भारतीय पीएम का न होना मालदीव के साथ रिश्तों को निचले स्तर पर ले जाने का संकेत है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा है कि मुइज़्ज़ू के शपथग्रहण समारोह के लिए रिजिजू इसी महीने 16 से 18 तारीख मालदीव का दौरा करेंगे.
इस दौरान 17 नवंबर को होने वाले शपथग्रहण समारोह में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
अख़बार के अनुसार, विदेश मंत्रालय मालदीव को हिन्द महासागर में भारत का अहम सहयोगी बताता है और मानता है कि 'इलाक़े में सभी की सुरक्षा और विकास के लिए' देश के विज़न और देश की 'नेबरहुड फर्स्ट की नीति' के तहत मालदीव की ख़ास जगह है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, "मंत्रालय की तरफ़ से शपथग्रहण समारोह में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का शामिल होना, दोनों मुल्कों के बीच सहयोग और आम लोगों के बीच रिश्तों को और मज़बूत होने की भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है."
मालदीव ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के शपथग्रहण समारोह के लिए पड़ोसी मुल्कों के राष्ट्राध्यक्षों, देश की क़रीबी सहयोगियों और बहुपक्षीय संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया है. माना जा रहा है कि मुइज़्ज़ू जिस गठबंधन के नेता के तौर पर चुने गए हैं उसकी विचारधारा चीन के क़रीब है.
किरेन रिजिजू भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश से हैं, जिसकी सीमा चीन से सटती है. चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है. किसी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय बैठक में अरुणाचल प्रदेश के अधिकारियों या नेताओं के शामिल होना चीन को परेशान करता है.

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इससे पहले के समारोह में मोदी हुए थे शामिल
मालदीव में सितंबर में राष्ट्रपति चुनावों में मुइज़्ज़ू ने राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को हराया था.
सोलिह ने सितंबर 2018 में शपथ ली थी. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे.
सोलिह के शपथग्रहण समारोह में 46 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, हालांकि इनमें केवल मोदी ही थे जिन्हें बतौर राष्ट्राध्यक्ष समारोह में आमंत्रित किया गया था.
सत्ता में आने के बाद सोलिह ने "इंडिया फर्स्ट" की नीति अपनाई, जिसके बाद भारत ने आगे बढ़कर इसका स्वागत किया. भारत ने मालदीव के लिए आर्थिक मदद बढ़ाई और वहाँ के इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर के कर्ज़ की व्यवस्था की.
लेकिन इसकी तुलना में मुइज़्ज़ू के उभार को भारत चिंता की नज़र से देखता है. मुइज़्ज़ू पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के क़रीबी माने जाते हैं, जिनके शासनकाल के दौरान मालदीव और चीन के रिश्ते बेहद गहरे हो गए थे.

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भारतीय सेना की जगह नहीं लेंगे चीनी सैनिक
अख़बार लाइव मिंट में छपी एक ख़बर के अनुसार, मुइज़्ज़ू ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा है कि भारतीय सैनिकों को जगह चीनी सैनिकों को देश में तैनात कर वो क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ना नहीं चाहते.
उन्होंने एएफ़पी से कहा, "किसी तरह की भू-राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बनने के लिए मालदीव बेहद छोटा देश है. मैं इस दिशा में मालदीव की विदेश नीति में बदलाव के पक्ष में नहीं हूँ."
अपने चुनाव प्रचार के दौरान मुइज़्ज़ू ने "इंडिया आउट" (भारत बाहर जाओ) का नारा दिया था. उन्होंने शपथ ली थी कि वो मालदीव में मौजूद भारत के सभी सुरक्षाकर्मियों को देश से बाहर निकालेंगे.
मुइज़्ज़ू ने चीन के साथ नज़दीकी की बात को ख़ारिज करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों की जगह वो चीन या फिर किसी और देश की सेना को देश में नहीं लाएंगे.
उन्होंने कहा कि वो पूरी तरह के केवल "मालदीव के समर्थक" है. उन्होंने कहा, "हम भारत, चीन और दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करेंगे."
मुइज़्ज़ू ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वो मालदीव में मौजूद 50 से 75 भारतीय नागरिकों को वहां से निकालने को लेकर बात शुरू करेंगे.
उन्होंने कहा, "मालदीव के लोगों ने मुझे इसलिए वोट नहीं दिया कि मैं देश में दूसरे देश के सैनिकों की मौजूदगी को बरकरार रखूं. इसलिए हम इस बारे में भारत सरकार से चर्चा करेंगे और मुझे उम्मीद है कि शांतिपूर्ण और गणतांत्रिक तरीक़े से ऐसा हो सकता है."
मुइज़्ज़ू ने कहा कि उनका मैन्डेट भारती सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी को हटाना है. भारत ने मालदीव की समुद्री सीमा पर निगरानी करने के लिए मालदीव को तीन विमान तोहफ़े में दिए थे, ये टुकड़ी इसी का काम देखती है.
उन्होंने कहा, "मैं भारतीय सैनिकों को इसलिए जाने के लिए नहीं रहा हूं क्योंकि उनकी जगह किसी और देश के सैनिक लेंगे. ये ज़रूरी है कि मालदीव अपने हितों को आगे रखे. हम सभी देशों के साथ अच्छे और दोस्ताना संबंध चाहते हैं."

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25 हज़ार करोड़ के सहारा फंड का क्या होगा?
सहारा कंपनी के मालिक सुब्रत रॉय सहारा की मौत के बाद अब ये सवाल खड़ा हो गया है कि सहारा के 25 हज़ार करोड़ रुपये के सहारा फंड का अब क्या होगा.
अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय प्रतिभूति विनियामक बोर्ड, सेबी, 25 हज़ार करोड़ रुपये के इस फंड को निवेशकों को लौटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक इस पैसे के बड़े हिस्से पर किसी ने दावा नहीं किया है.
क़ानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहारा ग्रुप ने अलग-अलग स्कीमों के तहत लोगों से सहारा ने जो पैसा इकट्ठा किया था उसे एक ख़ास अकाउंट में सेबी के पास जमा करे.
2011 में सेबी ने सहारा ग्रुप से कहा था कि वो नियमों का उल्लंघन कर जमाकर्ताओं से लिए पैसों को फुली कन्वर्टिबल बॉन्ड्स के ज़रिए लौटाएं. सेबी के फै़सले को सुप्रीम कोर्ट की सहमति मिलने के बाद जमाकर्ताओं के दावों का निपटारा करने के लिए एक सेल बनाया गया.
सेबी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार अब तक सेबी को रिफंड के 20,000 दावे मिले हैं जिनमें से 17,000 दावों को मंज़ूरी दे दी गई है. इन दावों के तहत अब तक मात्र 138 करोड़ रुपयों को निवेशकों को लौटाया गया है. बचे आवेदनों को या तो दस्तावेज़ मेल न खाने या फिर पूरे दस्तावेज़ न होने के कारण खारिज कर दिया गया.
पूर्व नियामकों का कहना है कि इस अनक्लेम्ड फंड को सरकार को दे दिया जाना चाहिए न कि इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड को. लेकिन रकम बड़ी होने के कारण इसे लेकर चिंता जताई जा रही है.
माना जा रहा है कि सरकार इस पैसे का इस्तेमाल तो कर सकती है लेकिन इसके लिए ज़रूरी क़ानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए.

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अश्लील कॉन्टेंट हटाने के लिए तीन ओटीटी को नोटिस जारी
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, भारतीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने तीन ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म से कहा है कि वो प्लेटफ़ॉर्म से अश्लील कंटेन्ट हटाए.
सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि मंत्रालय ने हंटर्स, बेशरम्स और प्राइम प्ले से कहा है कि वो अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अश्लील कॉन्टेट को हटाए, ऐसा न करने पर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
अख़बार लिखता है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद वेब सीरिज़ की जांच की गई जिसके बाद प्राथमिक तौर पर कुछ कंटेट को अश्लील, लगभग पॉर्नोग्राफ़ी के क़रीब पाया गया.
इसके बाद अक्तूबर के आख़िरी सप्ताह में आईटी क़ानून की धारा 67 और 67ए के तहत तीनों ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स को नोटिस जारी किया गया है. आदेश का पालन करने के लिए उन्हें पांच दिनों का वक्त दिया गया है.
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