श्रीलंकाः मालदीव में गोटाबाया के पहुँचने पर घिरी सरकार, नशीद निशाने पर

इमेज स्रोत, Getty Images
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के मालदीव पहुँचने पर वहाँ की सियासत गर्मा गई है. विपक्षी दलों ने जहाँ सरकार से इस बारे में सवाल पूछे हैं वहीं मालदीव की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
गोटाबाया राजपक्षे को बुधवार 13 जुलाई को इस्तीफ़ा देना था मगर एक दिन पहले वो देश छोड़कर मालदीव भाग गए.
इस बीच मीडिया में ऐसी ख़बरें भी चल रही हैं कि गोटाबाया मालदीव से सिंगापुर जा सकते हैं.
बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार गोटाबाया राजपक्षे बुधवार को स्थानीय समयानुसार रात 03:00 बजे मालदीव की राजधानी माले पहुँचे. उनकी पत्नी भी उनके साथ थीं.
कई रिपोर्टों में कहा गया है कि गोटाबाया मालदीव के वेलाना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे और उसके बाद उन्हें किसी सुरक्षित और गुप्त जगह ले जाया गया.
मालदीव में विरोध

इमेज स्रोत, Getty Images
मालदीव की मीडिया में गोटाबाया को लेकर लगातार ख़बरें आ रही हैं.
मालदीव सरकार ने इसे लेकर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. मगर मालदीव के द एडिशन अख़बार ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति एक फ़ाइव स्टार रिसॉर्ट में रह रहे हैं.
ऐसी भी रिपोर्टें आईं कि मालदीव में रह रहे बहुत सारे श्रीलंकाई लोगों ने एक रैली निकाली. वो मालदीव सरकार से अपील कर रहे थे कि वो ऐसे नेताओं को पनाह ना दें जिन्होंने अपराध किए हैं. पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया.
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो मौजूद हैं जिसमें मालदीव में रहने वाले श्रीलंकाई नागरिक देश में उनकी मौजूदगी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
माले में "श्रीलंकाई मूल के जो लोग काम करते हैं वे बैनर लेकर खड़े थे, जिन पर लिखा था- मालदीव के प्यारे दोस्तों अपनी सरकार से कहिए कि वह किसी अपराधी को सुरक्षित पनाह ना दें."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
मालदीव के विपक्षी दल नाराज़
मालदीव की मीडिया में कहा जा रहा है कि गोटाबाया राजपक्षे को देश में आने देने को लेकर वहाँ ख़ास तौर से पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की आलोचना हो रही है. नशीद अभी मालदीव की संसद के स्पीकर हैं.
मालदीव के एक अख़बार द अवास ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "आलोचकों का कहना है कि नशीद जैसे किसी भी नेता के लिए जो लोकतंत्र को पसंद करने का दावा करता है, उनका गोटाबाया जैसे नेता की मदद करना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसपर भ्रष्टाचार और धाँधली के आरोप लगे हैं."
मालदीव के एक और अख़बार सन ने लिखा है कि मुख्य विपक्षी पार्टी प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव्स (पीपीएम) ने कहा है कि "मालदीव की सेना की मंज़ूरी के बाद गोटाबाया के देश में आने ने श्रीलंका के लोगों का जीवन ख़तरे में डाल दिया है".
पार्टी ने गोटाबाया को देश में फ्री-पैसेज देने पर नाराज़गी जताई है. पीपीएम ने न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी से कहा, "गोटाबाया को अपने यहां शरण देकर हम अपने श्रीलंकाई दोस्तों के साथ धोखा कर रहे हैं. एक ऐसे शख़्स को जिससे उनके देश के लोग नफ़रत करते हैं."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
अल्पसंख्यकों के नेतृत्व वाली द मालदीव नेशनल पार्टी ने भी सरकार के इस क़दम पर एतराज़ जताया है. पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि आख़िर उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को शरण दी कैसे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में एमएनपी के नेता ने दुन्या माउमून ने कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि मालदीव की सरकार ने श्रीलंका के लोगों की भावनाओं की क़द्र नहीं की.

इमेज स्रोत, Getty Images
स्पीकर नशीद के आदेश पर लैंड हुआ गोटाबाया का विमान
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति के मालदीव पहुंचने की इस पूरी प्रक्रिया में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और स्पीकर मोहम्मद नशीद का सहयोग है.
मोहम्मद नशीद मालदीव के पहले लोकतांत्रिक तौर पर निर्वाचित राष्ट्रपति थे. 2008 में चुनाव जीत वो राष्ट्रपति बने थे मगर चार साल बाद विद्रोह में उनकी सत्ता पलट दी गई.
नशीद अभी मालदीव में राष्ट्रपति इब्राहीम सोलेह की सरकार में संसद के स्पीकर हैं.
गोटाबाया एक सैन्य-विमान से मालदीव पहुंचे थे. पीटीआई की रिपोर्ट में श्रीलंकाई एयर-फ़ोर्स के हवाले से लिखा गया है कि संवैधानिक तौर पर एक कार्यकारी राष्ट्रपति को सैन्य-विमान सुलभ है और इसीलिए वह एक सैन्य विमान से बुधवार तड़के सुबह मालदीव के लिए रवाना हुआ.
एजेंसी ने लिखा है कि मालदीव सरकार का तर्क है कि राजपक्षे अभी भी श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं और जैसा कि उन्होंने पद से अभी तक इस्तीफ़ा नहीं दिया है, तो ऐसे में अगर वह मालदीव आना चाहते हैं तो उन्हें मना नहीं किया जा सकता है.
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पहले तो सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गोटाबाया के विमान को मालदीव में लैंड करने की अनुमति नहीं दी थी लेकिन बाद में स्पीकर नशीद के कहने पर उन्हें लैंड करने दिया गया.
अल-जज़ीरा ने अपुष्ट स्थानीय मीडिया के हवाले से दावा किया है कि राजपक्षे और उनकी पत्नी साउथ माले अटॉल के वॉलडोलर्फ़ एस्टोरिया इथाफ़ुसी रिज़ॉर्ट में हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
माले से सिंगापुर जाने की ख़बरें
एक ओर जहां गोटाबाया के मालदीव पहुंचने को लेकर वहां रह रहे श्रीलंकाई मूल के लोगों में नाराज़गी है वहीं इस बीच ख़बर ये भी है गोटाबाया सिंगापुर रवाना हो सकते हैं.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि वे सिंगापुर रवाना हो सकते हैं.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की ख़बर के अनुसार, ऐसी संभावना है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे मालदीव से सिंगापुर के लिए रवाना हो जाएं.
रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस बात की भी संभावना है कि गोटाबाया सिंगापुर पहुंचने के बाद ही अपना इस्तीफ़ा दें.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई की ख़बर के मुताबिक़, राजपक्षे सिंगापुर या फिर दुबई जा सकते हैं.
भारत ने जारी किया था स्पष्टीकरण
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़ने पर श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने ट्विटर पर एक बयान जारी किया था.
बयान में उच्चायोग ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया था जिसमें कहा गया कि गोटाबाया राजपक्षे और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे को श्रीलंका से बाहर भेजने में भारत ने मदद की है.
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














