भूटान फिर बुला रहा सैलानियों को, पर विदेशियों से रोज़ लेगा इतनी फ़ीस

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भूटान की सरकार ने कोरोना महामारी शुरू होने के लगभग ढाई साल बाद एक बार फिर अपने दरवाज़े अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए खोलने का फ़ैसला किया है.
भूटान सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, भूटान आगामी 23 सितंबर से अपनी सीमाओं को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए खोल देगा.
पर्वतीय देश भूटान की जीडीपी में पर्यटन एक अहम भूमिका निभाता है. साल 2019 में भूटान ने पर्यटन से 225 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई की थी.
लेकिन इसके बाद कोविड की वजह से भूटान को ढाई सालों तक अपने दरवाज़े बंद रखने पड़े.
भूटान के विदेश मंत्री डॉ तंद्री दोरजी ने कहा है, "कोविड-19 ने हमें रुककर ये सोचने का मौक़ा दिया है कि इस क्षेत्र को कैसे संगठित करके चलाया जा सकता है ताकि ये न सिर्फ़ भूटान को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाए, बल्कि सामाजिक रूप से भी फायदा पहुँचाए. हमारा उद्देश्य है कि ऐसा करते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम रखा जाए. इस दिशा में दीर्घकालिक लक्ष्य ये है कि हम पर्यटकों को बेहतरीन अनुभव देने के साथ-साथ अपने नागरिकों को पेशेवर एवं अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरियाँ दे सकें."
भारतीयों के लिए भूटान जाना सस्ता

अपनी शानदार संस्कृति, ऊँचे पहाड़ और सुंदर घाटियों के लिए दुनिया भर में चर्चित भूटान में हर साल लाखों अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं.
लेकिन विदेशी पर्यटकों के लिए भूटान जाना अब पहले की तुलना में थोड़ा महंगा हो जाएगा. क्योंकि भूटान सरकार ने पर्यटकों की ओर से दी जाने वाली 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस' को बढ़ा दिया है.
भारत से आने वाले यात्रियों को पहले की तरह ही प्रति दिन के हिसाब से 1200 रुपए चुकाने होंगे. लेकिन भूटान सरकार इसकी समीक्षा करेगी.
भूटान जाने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय पर्यटकों की है.
भूटान सरकार के आँकड़ों के मुताबिक़, साल 2019 में 2.30 लाख से ज़्यादा भारतीय पर्यटकों ने भूटान की यात्रा की थी.
इनमें से लगभग 16 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने तीन से चार दिनों की यात्रा की थी और 4,496 लोगों ने 15 दिनों से ज़्यादा दिन भूटान में गुज़ारे थे.
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विदेशी पर्यटकों के लिए महंगा हुआ भूटान

लेकिन भारत छोड़कर अन्य देशों से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रति दिन के हिसाब से दिए जाने वाले इस शुल्क को 65 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 200 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है.
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भूटान जाना पहले की तुलना में काफ़ी ज़्यादा महंगा हो गया है.
पहले विदेशी पर्यटकों को भूटान में एक दिन गुज़ारने में लगभग 200 से 250 अमेरिकी डॉलर ख़र्च करने होते थे, जिसमें 65 डॉलर का विकास शुल्क शामिल था.
अब भूटान सरकार को दी जाने वाला विकास शुल्क ही 200 अमेरिकी डॉलर हो गई है, ऐसे में उनके लिए भूटान जाना महंगा हो गया है.
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भूटान सरकार ने फ़ीस क्यों बढ़ाई

भूटान सरकार ने बताया है कि उसने जलवायु परिवर्तन के ख़तरों को ध्यान में रखते हुए इस फ़ीस को बढ़ाया है.
टूरिज़्म परिषद की ओर से जारी की गई जानकारी में बताया गया है कि इस फ़ीस को भूटान को कार्बन निगेटिव बनाए रखने की दिशा में ख़र्च किया जाएगा.

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इस राशि की मदद से पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को बेहतर ट्रेनिंग दी जाएगी.
भूटान के पर्यटन परिषद के महानिदेशक दोरजी धारधुल ने कहा है, "हमारे पर्यटन क्षेत्र को बदलने की रणनीति हमें हमारी जड़ों की ओर ले जाती है. हम पर्यटकों की एक उचित संख्या को उच्चतम स्तर की सेवाएँ देना चाहते हैं. और ऐसा करते हुए हम अपने लोगों, संस्कृति, मूल्यों और पर्यावरण को सुरक्षित रखना चाहते हैं. पर्यटन एक रणनीतिक और अहम राष्ट्रीय संपत्ति है जो न सिर्फ इस सेक्टर में काम करने वालों को प्रभावित करता है. बल्कि सभी भूटानी लोगों को प्रभावित करता है. आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए ये ज़रूरी है कि पर्यटन सेक्टर जारी रहे."
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नई रणनीति के तहत होटल, गाइड, टूर ऑपरेटर और ड्राइवर आदि सेवा प्रदाताओं के लिए नए मानक बनाए जाएँगे.
इसके साथ ही इन सेवा प्रदाताओं को पर्यटकों को सेवाएँ देने से पहले सरकार से प्रमाणपत्र हासिल करने होंगे. यही नहीं, इन सेवाओं को देने वाले कर्मचारियों को सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई स्किल्स हासिल करनी होंगी.
वीज़ा नियमों की बात करें तो भारतीय पर्यटकों को भूटान जाने के लिए वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं है. भारतीय पर्यटकों को भूटान जाने के लिए परमिट लेने की ज़रूरत होगी.
हालांकि, विदेशी पर्यटकों को भूटान जाने से पहले वीज़ा लेना होगा. बांग्लादेश और मालदीव से आने वाले पर्यटकों को वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है.
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