मोहम्मद मुइज़्ज़ू मालदीव के राष्ट्रपति बनते ही विदेशी सेना पर बोले

मोहम्मद मुइज़्ज़ू

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मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने कहा है कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि उनके देश की ज़मीन में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी न रहे.

शुक्रवार शाम को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए मालदीव कूटनीति का इस्तेमाल करेगा.

मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वो देश से बाहर करेंगे. ऐसे में उनकी जीत के बाद से ही भारत के साथ मालदीव के संबंधों को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही थीं. उनके चुनावी कैंपेन को देखते हुए कहा जा रहा था कि वह भारत से चिढ़े हुए हैं.

मुइज़्ज़ू ने शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में भारत का नाम तो नहीं लिया लेकिन कहा कि वो चुनावी अभियान के दौरान किया गया अपना वादा पूरा करेंगे.

मालदीव

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मालदीव क्यों हैं महत्वपूर्ण?

मालदीव 1,192 द्वीपों का समूह है जो हिंद महासागर में भूमध्य रेखा के पास 800 किलोमीटर के दायरे में फैला है.

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज़ से महत्वपूर्ण ग्लोबल ईस्ट-वेस्ट शिपिंग लेन मालदीव के पास से होकर ही गुज़रती है. अपनी इसी स्थिति के कारण भारत और चीन दोनों के लिए ये रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है और दोनों मुल्कों ने अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए यहां लाखों डॉलर का निवेश किया है.

अपने खूबसूरत समुद्री तटों और पर्यटकों के लिए लग्ज़री रिसॉर्ट के लिए पहचाने जाने वाले मालदीव की कुल आबादी क़रीब 5 लाख 21 हज़ार है.

यहां की आबादी में सुन्नी मुसलमानों की संख्या तीन लाख 80 हज़ार है और भारत पारंपरिक तौर पर इसे अपना क़रीबी मानता है.

मालदीव ब्रिटेन का उपनिवेश हुआ करता था, साल 1965 में उसे आज़ादी मिली. भारत उन देशों में शुमार है जिन्होंने सबसे पहले मालदीव के साथ कूटनीतिक रिश्ते बहाल किए.

वक्त वक्त पर भारत ने मालदीव को आर्थिक और सैन्य मदद दी है.

1988 में तख्तापलट की एक कोशिश से निपटने के लिए भारत ने वहां अपने सैनिक भेजे थे. 2004 में सुनामी के दौरान और फिर 2014 में माले में आए जल संकट के दौरन भारत ने मालदीव को मदद भेजी थी.

मोहम्मद मुइज़्ज़ू

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मुइज़्ज़ू ने क्या कहा?

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शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले संबोधन में मुइज़्ज़ू ने कहा कि जहां तक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं हिंद महासागर में मौजूद द्वीपों का देश मालदीव अपनी "लाल रेखा" परिभाषित करेगा और "दूसरे मुल्कों की रेखाओं यानी उनकी सीमाओं का पूरा सम्मान करेगा."

"मालदीव एक हथियार के रूप में कूटनीति का इस्तेमाल करेगा और ये सुनिश्चित करेगा कि मालदीव पर ज़मीन पर विदेशी सेना की किसी तरह की मौजूदगी न हो. मैं आपसे कह सकता हूं कि मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान यही होगा कि मैं अपने देश के प्रति वफ़ादार रहूं."

बीते महीने उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी हो सकेगा भारतीय सैनिकों को वहां से वापस भेजने के काम करेंगे. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि वो विकास के पक्षधर हैं और चीन और भारत दोनों के साथ ही बेहतर रिश्ते चाहते हैं.

कुछ दिन पहले मुइज़्ज़ू ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय सैनिकों की जगह चीनी सैनिकों को देश में तैनात कर वो क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ना नहीं चाहते.

उन्होंने एएफ़पी से कहा, "किसी तरह की भू-राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बनने के लिए मालदीव बेहद छोटा देश है. मैं इस दिशा में मालदीव की विदेश नीति में बदलाव के पक्ष में नहीं हूँ."

मुइज़्ज़ू ने कहा था कि उनका मैन्डेट भारतीय सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी को हटाना है. भारत ने मालदीव की समुद्री सीमा पर निगरानी करने के लिए मालदीव को तीन विमान तोहफ़े में दिए थे, ये टुकड़ी इसी का काम देखती है.

उन्होंने कहा, "मालदीव के लोगों ने मुझे इसलिए वोट नहीं दिया कि मैं देश में दूसरे देश के सैनिकों की मौजूदगी को बरकरार रखूं. मैं भारतीय सैनिकों को इसलिए जाने के लिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि उनकी जगह किसी और देश के सैनिक लेंगे. ये ज़रूरी है कि मालदीव अपने हितों को आगे रखे. हम सभी देशों के साथ अच्छे और दोस्ताना संबंध चाहते हैं."

मुइज़्ज़ू ने देश पर बढ़ रहे कर्ज़ के भार को "ख़तरा" बताया और कहा कि वो "जल्द और कठोर" कदम उठाएंगे ताकि देश इस मुश्किल से निपट सके.

मालदीव की आर्थिक स्थिति की बात की जाए तो बजट घाटा और इंफ्रास्ट्रक्टर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए देश ने बार-बार कर्ज़ लिया है और उसका कर्ज़ काफी बढ़ गया है.

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में ये कर्ज़ 5.9 अरब डॉलर यानी उसके घरेलू सकल उत्पाद का 112.1 फ़ीसदी था. साल 2022 के आख़िर में ये कर्ज़ बढ़कर 7 अरब डॉलर यानी उसके घरेलू सकल उत्पाद का 113.5 फ़ीसदी हो गया.

किरेन रिजिजू

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शपथ ग्रहण में किरेन रिजिजू

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू का शपथ ग्रहण समारोह राजधानी माले में खुली जगह पर हुआ. देश के चीफ़ जस्टिस अहमद अदनान में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए.

उन्होंने सोशल मीडिया पर मुइज़्ज़ू के साथ और समारोह के दौरान की कई तस्वीरें पोस्ट कीं और लिखा, "मालदीव के माले के जाने-माने रिपब्लिक स्क्वायर पर राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़्ज़ू और उप-राष्ट्रपति एच.ई. हुसैन मोहम्मद लतीफ़ के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है."

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मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी की प्रबंधक सैमंथा पावर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विशेष दूत के रूप में स्टेट काउंसिलर शेन यीचिन शामिल हुए.

इससे पहले शेन यीचिन ने 2014 में उस वक्त मालदीव का दौरा किया था जब अब्दुल्ला यामीन यहां के राष्ट्रपति थे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार मालदीव की मीडिया में कई दिनों से ये ख़बरें चल रही थीं कि मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रह सकते हैं, हालांकि बाद में भारत सरकार ने कहा कि किरेन रिजिजू इस मौक़े पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे, बांग्लादेश और सेशेल्स के प्रनितिधि भी मुइज़्ज़ू के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए.

मोहम्मद मुइज़्ज़ू

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कौन हैं मुइज़्ज़ू?

45 साल के मुइज़्ज़ू ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वो राजधानी माले के मेयर रह चुके हैं. वो सात साल तक देश के कंस्ट्रक्शन मंत्री थे.

साल भर पहले उन्होंने कहा था कि अगर 2023 में उनकी सरकार बनी तो वो चीन के साथ "रिश्ते मज़बूत" करेंगे. मालदीव में चीन बड़े पैमाने पर निवेश करता है.

उस वक्त उन्होंने कहा था, "हम उम्मीद करते हैं कि हम पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के मार्गदर्शन में 2023 में सत्ता में लौटेंगे और हम घरेलू स्तर पर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के साथ मज़बूत रिश्ते का एक और अध्याय लिखेंगे."

मुइज़्ज़ू देश के आठवें राष्ट्रपति हैं. वो पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के क़रीबी माने जाते हैं, जिनके शासनकाल के दौरान मालदीव और चीन के रिश्ते बेहद गहरे हो गए थे.

बीते साल दिसंबर में अब्दुल्ला यामीन को कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप में 11 साल की जेल की सज़ा सुनाई. उन पर 50 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया.

यामीन खुद 2023 के चुनाव में बतौर उम्मीदवार शामिल होना चाहते थे लेकिन आपराधिक मामले के कारण उन पर रोक थी. ऐसे में उन्होंने अपने प्रॉक्सी के तौर पर मुइज़्ज़ू को चुनावी मैदान में उतारा.

राष्ट्रपति चुनाव में मुइज़्ज़ू की जीत के एक दिन बाद ये ख़बर आई कि यामीन को जेल से ट्रांसफर कर उनके घर पर ही नज़रबंद रखा गया है.

इब्राहिम सोलिह के साथ मोहम्मद मुइज़्ज़ू

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इमेज कैप्शन, इब्राहिम सोलिह के साथ मोहम्मद मुइज़्ज़ू

पूर्व-राष्ट्रपति सोलिह से अलग रणनीति

इसी साल सितंबर में मुइज़्ज़ू ने दूसरे राउंड ऑफ़ में राष्ट्रपति रहे इब्राहिम सोलिह को हरा कर राष्ट्रपति चुनाव जीता था.

सोलिह ने सितंबर 2018 में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे.

सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में 46 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, हालांकि इनमें केवल मोदी ही थे जिन्हें बतौर राष्ट्राध्यक्ष समारोह में आमंत्रित किया गया था.

सोलिह भारत के क़रीबी माने जाते हैं. सत्ता में आने के बाद सोलिह ने "इंडिया फर्स्ट" की नीति अपनाई, जिसके बाद भारत ने आगे बढ़कर इसका स्वागत किया.

लेकिन मुइज़्ज़ू ने अपने चुनावी अभियान में "इंडिया आउट" (भारत बाहर जाओ) का नारा दिया था. उन्होंने शपथ ली थी कि वो मालदीव में मौजूद भारत के लगभग 75 सुरक्षाकर्मियों को देश से बाहर निकालेंगे.

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