मुइज़्ज़ू के चीन दौरे की हुई पुष्टि, मालदीव के एजेंडे में क्या-क्या है?

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चीन ने कहा है कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू आधिकारिक तौर पर इसी महीने चीन का दौरा करेंगे.
चीनी विदेश मंत्रालय ने पांच दिन के इस दौरे की पुष्टि की है और तारीख़ों का भी एलान कर दिया है.
चीन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति बनने के बाद ये उनका 'पहला विदेशी' दौरा होगा.
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने जानकारी दी है कि "राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मालदीव गणराज्य के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू जनवरी आठ से लेकर 12 के बीच चीन के दौरे पर होंगे."
मालदीव राष्ट्रपति के कार्यालय ने भी इस दौरे की पुष्टि की है.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव पर चीन का काफी असर माना जाता है. राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान उनकी पार्टी ने ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था और कहा था कि वो मालदीव में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी ख़त्म करेंगे.
इसके बाद अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारत सरकार की तरफ से शामिल हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाक़ात में उन्होंने औपचारिक तौर पर इस मुद्दे पर बात की थी.

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मुइज़्ज़ू के दौरे के एजेंडे पर चीन ने क्या कहा?
शुक्रवार यानी पांच जनवरी को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मोहम्मद मुइज़्ज़ू के दौरे को लेकर अधिक जानकारी दी.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के लिए एक स्वागत समारोह का आयोजन करेंगे और उनके स्वागत में भोज भी देंगे."
"दोनों राष्ट्राध्यक्ष सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे और इस दौरान कई अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर होंगे."
"राष्ट्रपति के अलावा चीनी प्रीमियर ली चियांग और नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्टैन्डिंग कमिटी के चेयरमैन ज़ाओ लेजी भी उनसे औपचारिक तौर पर मुलाक़ात करेंगे."
वांग वेनबिन ने चीन और मालदीव के रिश्तों पर भी ज़ोर दिया और कहा कि दोनों के बीच रिश्ते बेहद पुराने हैं.
उन्होंने कहा, "52 साल पहले दोनों के बीच कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत हुई. तब से लेकर अब तक दोनों के रिश्तों में आपसी सम्मान और सहयोग रहा है, ये दो अलग-अलग आकार के मुल्कों के बीच बराबरी और आपसी हितों की एक मिसाल है."
उन्होंने कहा कि 2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मालदीव का दौरा किया था, जिस दौरान दोनों मुल्कों के बीच भविष्य को देखते हुए दोस्ती और सहयोग बढ़ाने को लेकर बात हुई थी.
उन्होंने बताया, "बीते एक दशक में मालदीव में चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में शिरकत की है और दोनों की दोस्ती और भी गहरी हुई है."
चीनी विदेश मंत्रालय का दावा
चीन के दौरे के बारे में वांग वेनबिन ने ये भी कहा- "मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज़्ज़ू का किसी विदेशी देश को ये पहला आधिकारिक दौरा है."
हालांकि इससे पहले मुइज़्जू तुर्की के आधिकारिक दौरे पर गए थे. मालदीव राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार तुर्की के राष्ट्रपति रिचेप तैय्यप अर्दोआन के निमंत्रण पर मुइज़्ज़ू और उनकी पत्नी ने बीते साल नवंबर में तुर्की का दौरा किया था.
दोनों के बीच यहां आपसी हितों के मुद्दों के साथ-साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर बात हुई.

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यहां से होते हुए मुइज़्ज़ू संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में हो रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी 28) पहुंचे थे. ये उनका दूसरा विदेशी दौरा था.
यहां उनकी औपचारिक मुलाक़ात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई थी. इस दौरान दोनों के बीच आपसी रिश्तों और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
इस दौरे से लौटते ही मुइज़्ज़ू ने मालदीव के ही वेलाना हवाईअड्डे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वो मालदीव के लोगों की इच्छा का स्वागत करेंगे और अपने सैनिकों को वापस भारत बुलाएंगे.
बीते साल चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग में 'चाइना-इंडियन ओशन रीजन फ़ोरम ऑन डेवेलपमेन्ट कोऑपरेशन' का आयोजन हुआ था. इसमें मालदीव की तरफ से राष्ट्रपति नहीं बल्कि उप-राष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद लतीफ़ ने हिस्सा लिया था.

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मालदीव के साथ चीन के रिश्ते
चीन और मालदीव के बीच कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत साल 1972 में हुई थी.
इसके बाद मालदीव ने 2009 में चीन में अपना दूतावास खोला और चीन ने 2011 में मालदीव में अपना दूतावास खोला.
साल 2014 में चीन ने मालदीव को 1.6 करोड़ डॉलर की मदद दी. इसी साल मालदीव ने बेल्ट एंड रोड परियोजना में कदम रखा था.
साल 2017 में मालदीव ने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया था.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव पर चीन का काफी असर माना जाता है. राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान उनकी पार्टी ने ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था और कहा था कि वो मालदीव में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी ख़त्म करेंगे.
इससे पहले मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद इब्राहिम सोलिह ने ‘इंडिया फर्स्ट’ का नारा दिया था. उन्हें भारत का क़रीबी माना जाता है.
2018 में जब इब्राहिम सोलिह ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली, समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शरीक हुए थे.
उनकी सरकार के रहते बीते साल 'इंडियन ओशन रीजन फ़ोरम' में मालदीव ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था.

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- 30 सितंबर 2023 - 46 फ़ीसदी वोट के साथ चुनाव जीतकर देश के नए राष्ट्रपति चुने गए.
- 17 नवंबर 2023 -पद की शपथ ली और मालदव के 8वें राष्ट्रपति बने.
- 17 नवंबर 2023 - मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटाने को लेकर किरेन रिजिजू से बात की.
- 26 नवंबर 2023 - अपने पहले आधिकारिक विदेशी दौरे पर तुर्की पहुंचे. इसके कुछ दिन बाद 10 दिसंबर को उन्होंने कहा कि तुर्की के साथ द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने के लिए मालदीव अंकारा में अपना दूतावास खोलेगा.
- 30 नवंबर 2023 - सीओपी 28 में शिरकत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के दुबई पहुंचे.
- 01 दिसंबर 2023 - दुबई में ही मुइज़्ज़ू ने सीओपी के लिए पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की.
- 03 दिसंबर 2023 - यूएई के आधिकारिक दौरे से वापस मालदीव लौटे.
भारत और मालदीव के संबंध
भारत उन पहले देशों में शुमार था जिसने मालदीव की आज़ादी के बाद उसे एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी.
1965 में भारत ने अपना मिशन मालदीव में खोला और ऐसा करने वाला पहला देश बना. लेकिन बाद के सालों में मालदीव में आई सरकारों का झुकाव या तो भारत की तरफ रहा या फिर चीन की तरफ.
इस छोटे से द्वीप समूह की सुरक्षा में भारत की अहम भूमिका रही है. 1988 में राजीव गांधी ने सेना भेजकर मौमून अब्दुल गयूम की सरकार को बचाया था.
2018 में मालदीव के लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने पानी भेजा था. इसके बाद मोदी सरकार ने मालदीव को कई बार आर्थिक संकट से निकालने के लिए क़र्ज़ भी दिया.
भारत ने मालदीव को साल 2010 और 2013 में दो हेलिकॉप्टर और साल 2020 में एक छोटा विमान तोहफ़े में दिया था.
भारत ने कहा था कि ये विमान राहत और बचाव कार्यों और मेडिकल इमर्जेंसी में इस्तेमाल किए जाने थे.
साल 2021 में मालदीव के सुरक्षा बलों ने बताया कि इन हेलिकॉप्टरों और विमान के संचालन के लिए क़रीब 75 भारतीय सैनिक मालदीव में मौजूद हैं.
भारत मालदीव को सैन्य उपकरण भी मुहैया करवाता है. साथ ही नौसेना के लिए डॉकयॉर्ड बनाने में भी भारत मालदीव की मदद कर रहा है.
मालदीव में भारत और चीन दोनों अपना दबदबा बनाने की कोशिश में दिखते हैं. माना जाता है कि मुइज़्ज़ू ने जिस गठबंधन के साथ मिलकर ये चुनाव जीता है, वो चीन की तरफ़ झुकाव रखता है.
भारत और मालदीव के बीच छह दशकों से अधिक पुराने राजनयिक, सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं.

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रिश्तों में कड़वाहट
भारत और मालदीव के रिश्तों में 2018 में सबसे ज़्यादा कड़वाहट आई है. इसकी शुरुआत मालदीव के सुप्रीम कोर्ट के 2018 में एक फ़रवरी के फ़ैसले से हो गई थी.
मालदीप की सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने विपक्ष के नेताओं को क़ैद करवाकर संविधान और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत सभी विपक्षी नेताओं को रिहा करे.
कोर्ट के इस आदेश को राष्ट्रपति यामीन ने मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी.
यह आपातकाल 45 दिनों तक चला था. भारत ने इस आपातकाल का विरोध किया था. भारत ने कहा, "मालदीव में सभी संवैधानिक संस्थाओं को बहाल करना चाहिए और आपातकाल को तत्काल ख़त्म करना चाहिए."
मालदीव में नाटकीय राजनीतिक संकट भारत और चीन दोनों के लिए परेशान करने वाला था. इसी संकट के बीच चीन के क़रीब माने जाने वाले अब्दुल्ला यामीन ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब में अपने दूत भेजे थे.
इसके बाद चीन ने चेतावनी दी कि मालदीव के आंतरिक मामले में किसी भी देश को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और कहा किसी भी सूरत में मालदीव की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.
दूसरी तरफ़ मालदीव के विपक्षी नेता नशीद भारत से सैन्य हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे थे ताकि जजों को हिरासत से मुक्त कराया जा सके. इस बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक चीनी न्यूज़ वेबसाइट के हवाले से ख़बर दी कि चीनी युद्धपोत मालदीव की तरफ़ बढ़ गए हैं.
हालांकि इसी साल चुनाव हुए जिसमें इब्राहिम सोलिह जीते. वो भारत के क़रीबी माने जाते हैं. हालांकि उनकी सरकार ने भारत और चीन दोनों के बीच बैलेंस बनाकर चलने की कोशिश की.

मालदीव
मालदीव हिंद महासागर में क़रीब 1200 द्वीपों वाला एक देश है, जिसकी लगभग 98 फ़ीसदी आबादी सुन्नी मुस्लिम है. अगर किसी को मालदीव की नागरिकता चाहिए तो उसके लिए मुसलमान होना ज़रूरी है.
मालदीव एक गणतंत्र है, जिसकी आबादी पांच लाख से बस थोड़ी सी ही ज़्यादा है.
हिंद महासागर में यह ऐसी भौगोलिक जगह पर है कि यह भारतीय और चीनी रणनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है.
मालदीव को लंबे अरसे से भारत से आर्थिक और सैन्य मदद मिलती रही है. लेकिन रणनीतिक तौर पर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण चीन के लिए भी ये बेहद महत्वपूर्ण है.
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