मालदीव में 'भारत विरोधी' प्रदर्शनों पर बैन, क्या बोले राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह - प्रेस रिव्यू

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मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने देश में महीनों से चल रहे 'भारत विरोधी' प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है. गुरुवार को उन्होंने इससे संबंधित एक आदेश जारी किया और कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर ख़तरा पैदा हो रहा है.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार राष्ट्रपति सोलिह ने "स्टॉपिंग कैंपेन दैट इनसाइट हेट्रेड अगेन्स्ट वेरियस कंट्रीज़ अंडर डिफरेंट स्लोगन्स"(अलग-अलग तरह के स्लोगन के ज़रिए दूसरे मुल्कों के ख़िलाफ़ नफ़रत पैदा करने वाले अभियानों पर रोक) नाम का आदेश जारी किया है जिसमें 'भारत बाहर जाओ' प्रदर्शनों का ज़िक्र किया गया है.
अख़बार के अनुसार इसे एक सुनियोजित अभियान कहा गया है जिसका उद्देश्य अशांति फैलाकर इलाक़े की शांति और सुरक्षा की कोशिशों को बिगाड़ना और दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब करना है.
राष्ट्रपति सोलिह ने प्रशासन से कहा है कि वो मौजूदा क़ानून के तहत सभी कदम उठाएं और गुरुवार को जारी आदेश को लागू करें.
धीवेही भाषा में जारी इस आदेश में लिखा गया है कि ये सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो देश में मौजूद, दूसरे देशों के राजदूतों और उनके दूतावासों की सुरक्षा करें.
अख़बार लिखता है कि कुछ महीने पहले मालदीव में सोशल मीडिया में भारत के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा गया और वहां मौजूद भारतीय राजदूत और दूतावास को धमकियां दी गईं. इसके बाद वहां मौजूद भारतीय दूतावास ने अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की थी, जिसे सोलिह सरकार ने स्वीकार कर लिया था.
मलदीव में भारत विरोधी अभियान को पहले सोशल मीडिया कार्यकर्ता चला रहे थे जिसके बाद इस विरोध का चेहरा पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन बन गए. बीते साल दिसंबर में वो जेल से बाहर आए हैं.
बुधवार को माले में उनके घर के बाहर एक बड़ा बैनर देखा गया था जिस पर लिखा था 'भारत बाहर जाओ'. कोर्ट के आदेश से गुरुवार को इसे उतार लिया गया.

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अख़बार के अनुसार साल 2013 से लेकर 2018 तक राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान यामीन की विदेश नीति में चीन की तरफ झुकाव देखा गया था. ये वो वक्त था जब चीन हिंद महासागर में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा था और महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड प्रजेक्ट को आगे बढ़ा रहा था.
माना जा रहा है कि यामीन अगले चुनाव में खुद की स्थिति मज़बूत करने के लिए इस अभियान का इस्तेमाल हथियार के रूप में कर रहे हैं. मालदीव में सितंबर 2023 में अगले राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.
प्रशांत किशोर का प्रस्ताव: एक पद पर गांधी, तो दूसरे पर कोई और

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चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस पार्टी को एक नया पार्टी उपाध्याक्ष का पद बनाने का प्रस्ताव दिया है. इस पद पर रहने वाले व्यक्ति की ज़िम्मेदारी देश में चुनाव प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्था करना होगा. ये पार्टी के 'इलेक्शन टास्क फोर्स' के प्रमुख भी होंगे.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष में से एक पद पर गांधी परिवार से जुड़े एक व्यक्ति हों तो दूसरे पर किसी और को जगह दी जाए.
पार्टी में ऑर्गेनाइज़ेशन और कम्यूनिकेशन के जनरल सेक्रेटरी के अलावा समन्वय के लिए भी एक अलग जनरल सेक्रेटरी के पद का प्रस्ताव है. अख़बार लिखता है कि संभवत: इस पद के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम सुझाया गया है. प्रस्ताव के अनुसार इन्हें 'इलेक्शन टास्क फोर्स' के प्रमुख को रिपोर्ट करना होगा.
अख़बार कहता है कि प्रशांत किशोर ने अपने प्रस्ताव में चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के लिए 'कांग्रेस संसदीय बोर्ड' बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. इससे पहले कांग्रेस से नाराज़ वरिष्ठ नेताओं के समूह जी-23 ने भी इसकी सलाह दी थी.
प्रशांत किशोर ने ये भी प्रस्ताव दिया है कि पार्टी अध्यक्षता को लेकर जारी भ्रम को ख़त्म करने के लिए पार्टी नेतृत्व पर भी जल्द फ़ैसला ले लिया जाना चाहिए.
अख़बार लिखता है कि बीते चार दिनों में प्रशांत किशोर ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को पार्टी को पुनर्जीवित करने से जुड़ा प्रस्ताव का प्रेज़ेन्टेशन दिया है. हालांकि सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि मीडिया के सामने जो जानकारी आई है वो प्रशांत किशोर के प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है.
काम के लिहाज़ से कांग्रेस अध्यक्ष के दफ्तर के अलावा पार्टी में दो विंग बनाने का भी प्रस्ताव है. पहली विंग चुनावों की ज़िम्मेदारी लेगी और चुनाव क्षेत्र तक के सभी कामों पर नज़र रखेगी, वहीं दूसरी विंग पार्टी के संगठनात्मक काम का लेखाजोखा देखेगी.
साथ ही उन्होंने पार्टी को डिजिटल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. कहा गया है कि पार्टी को व्हाट्सऐप बनाना चाहिए और डिजिटल नेटवर्क पर पांच लाख समर्थक और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स बनाने चाहिए.
अख़बार लिखता है कि अब तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार ये स्पष्ट नहीं है कि प्रशांत किशोर पार्टी में शामिल होंगे या नहीं.

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5 साल से अधिक उम्र के बच्चों को कोर्बेवैक्स देने की कमिटी की सलाह
भारतीय दवा नियामक को सलाह देने वाली एक एक्सपर्ट कमिटी ने पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों में इमर्जेंसी इस्तेमाल के लिए बायोलॉजिकल ई की बनाई कोर्बेवैक्स कोरोना वैक्सीन को अनुमति देने की सलाह दी है.
अगर नियामक इस वैक्सीन को इजाज़त दे देते हैं तो बारह साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाने वाली ये कोरोना की दूसरी वैक्सीन होगी. हालांकि इसके लिए नियामक के बाद सरकार की मंज़ूरी मिलना भी ज़रूरी है.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार गुरुवार को कमिटी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया को पांच साल से छोटे बच्चों में कोर्बेवैक्स के अलावा दो डोज़ में ज़ायडस कैडिला की वैक्सीन ज़ायकोव-डी की भी इजाज़त देने की सलाह दी.
फिलहाल कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बारह साल से अधिक की उम्र के बच्चों को कोर्बेवैक्स दी जा रही है.
अख़बार लिखता है कि बीते साल 12 साल से अधिक की उम्र के बच्चों में इमर्जेंसी इस्तेमाल के लिए ज़ायडस की वैक्सीन को इजाज़त दे दी गई थी, लेकिन उत्पादन में समस्या होने के कारण टीकाकरण कार्यक्रम में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका. ये दुनिया की पहली प्लाज़्मिड डीएनए वैक्सीन है.
भारत में बच्चों को फिलहाल भारत बायोटिक की कोवैक्सीन और ज़ायकोव-डी लगाने की अनुमति गई है. भारत सरकार ने बारह साल से अधिक की उम्र के बच्चों को वैक्सीन देने की इजाज़त तो दे दी है लेकिन इससे छोटी उम्र के बच्चों को वैक्सीन दी जाए या नहीं इसे लेकर जानकारों की राय अलग-अलग है. कुछ जानकारों का कहना है कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में रोग प्रतिरोधक शक्ति अधिक होती है इसलिए वो कोरोना वायरस से बेहतर निपट सकते हैं.
मार्च में बायोलॉजिकल ई ने कहा था कि उसकी वैक्सीन की कीमत प्राइवेट बाज़ार में 800 रूपये प्रति डोज़ होगी और ये कोरोना वायरस के अब तक आए हर वैरिएंट से मुक़ाबला कर सकती है. हालांकि कंपनी ने अब तक वैक्सीन की क्लिनिकल ट्रायल का डेटा जारी नहीं किया है.
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