कोरोना महामारी से मरने वालों की गिनती के WHO के तरीक़े पर भारत ने उठाए सवाल

कोविड से मौत

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कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं.

चीन में एक ओर जहां बढ़ते मामलों के मद्देनज़र कुछ शहरों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है वहीं, भारत में भी नए मामले सामने आ रहे हैं.

इस बीच भारत ने कोविड संक्रमण से होने वाली मौत की गिनती के तरीक़े को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर सवाल उठाए हैं.

शनिवार को भारत ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों की गणना करने के लिए जो तरीक़ा अपनाया है, वह भारत के संदर्भ में ठीक नहीं है.

भारत की ओर से इस बात के संदर्भ में कहा गया है कि भारत जैसे विशाल देश में, जहां इतनी अधिक आबादी रहती हो, वहां इस फ़ॉर्मूले को नहीं अपनाया जाना चाहिए.

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न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा लेख

देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत ने इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपनी चिंता बता दी है.

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस मामले पर एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें यह आरोप लगाते हुए दावा किया गया था कि भारत कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की सही संख्या जारी करने को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद नहीं कर रहा है.

इस लेख के बाद भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में कोरोना संक्रमण से हुई मौतों की गणना के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को क्रमवार छह पत्र भेजे हैं.

इस संबंध में जिस तरह की चिंता भारत ने ज़ाहिर की है वैसी ही चिंता चीन और बांग्लादेश की ओर से भी ज़ाहिर की गई है.

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भारत की ओर से क्या कहा गया है?

न्यूयॉर्क टाइम्स ने 16 अप्रैल को 'इंडिया इज़ स्टॉलिंग डब्ल्यूएचओज़ इफर्ट टू मेक ग्लोबल कोविड डेथ टोल पब्लिक' (भारत वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के कारण हुई मौतों की संख्या सार्वजनिक करने के डब्ल्यूएचओ के प्रयास को बाधित कर रहा है)" शीर्षक से लेख प्रकाशित किया था.

लेख में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, महामारी की चपेट में आने से तक़रीबन 15 मिलियन लोग मारे गए हैं. ये आकलन, पहले के अनुमान से कहीं अधिक है, लेकिन अभी तक गणना को जारी नहीं किया गया है.

लेख में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस महामारी से हुई वैश्विक मृत्यु की गणना करने के प्रयास के दौरान पाया है कि मरने वालों की संख्या पहले की तुलना में बहुत अधिक है.

लेकिन लेख में दावा किया गया है कि महामारी के इस सबसे घातक परिणाम को भारत की आपत्तियों के कारण महीनों से रिलीज़ नहीं किया जा सका है.

इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बयान दिया गया है. बयान में कहा गया है कि इस मुद्दे पर भारत सीधे तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ नियमित और गहन-तकनीकी आदान-प्रदान कर रहा है.

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भौगोलिक स्थिति

भारत की ओर से कहा गया कि इस विश्लेषण में मौत के आंकड़े टीयर 1 में शामिल देशों के अनुसार लिए गए हैं जबकि हिसाब लगाने वाला मैथमैटिकल फ़ॉर्मूला टीयर 2 देशों पर (जिसमें भारत शामिल है) लगाया गया है. भारत को नतीजे से शिकायत नहीं है बल्कि इस तक पहुंचने के लिए जो तरीक़ा अपनाया गया है उससे शिकायत है.

भारत ने डब्ल्यूएचओ को भेजे छह पत्रों के ज़रिए इस नतीजे पर पहुंचने की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की है. भारत ने चीन, ईरान, बांग्लादेश, सीरिया, इथियोपिया और मिस्र जैसे अन्‍य सदस्‍य देशों के साथ कार्यप्रणाली और अनौपचारिक डेटा के उपयोग के संबंध में भी सवाल खड़े किये हैं.

भारत की मुख्य आपत्ति भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या के घनत्व को लेकर है.

भारत का कहना है कि भारत जैसे विशाल भौगोलिक आकार और जनसंख्या वाले देश के लिए सांख्यिकीय मॉडल परियोजनाओं का अनुमान कैसे लगाया गया है. यह बेशक उन अन्य देशों के लिए सही है जिनकी आबादी कम है.

यह मॉडल टियर-1 देशों के डेटा का उपयोग करते समय और 18 भारतीय राज्यों के गैर-सत्यापित डेटा का उपयोग करते समय अतिरिक्‍त मृत्यु दर अनुमान के लिए दो बिल्‍कुल अलग आंकड़े देता है. भारत ने ज़ोर देकर कहा है कि अगर यह मॉडल विश्वसनीय है तो इसे सभी टियर-1 देशों के लिए उपयोग करते हुए प्रमाणित किया जाना चाहिए और उसके नतीजे को साझा किया जाना चाहिए.

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क्या ख़ामियां हैं, जिनके आधार पर भारत कर रहा है विरोध

इस मॉडल के तहत प्रत्येक महीने के तापमान और औसत मृत्‍यु दर के बीच एक विपरीत संबंध माना गया है और इनके बीच संबंध स्थापित करने के लिए कोई वैज्ञानिक तथ्‍य मौजूद नहीं है.

इस प्रकार, भारत के इन 18 राज्यों के आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर की मृत्यु दर का अनुमान सांख्यिकीय तौर पर प्रमाणित नहीं है.

भारत में कोविड-19 के लिए जांच के दौरान संक्रमण दर किसी भी समय पूरे देश में एक समान नहीं थी.

हालांकि डब्ल्यूएचओ से अभी तक इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

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विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस मसले पर कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है.

राहुल गांधी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए ट्वीट किया है.

उन्होंने लिखा है- "मोदी जी ना सच बोलते हैं, ना बोलने देते हैं. वो तो अब भी झूठ बोलते हैं कि ऑक्सीजन शॉर्टेज से कोई नहीं मरा! मैंने पहले भी कहा था - कोविड में सरकार की लापरवाहियों से 5 लाख नहीं, 40 लाख भारतीयों की मौत हुई. फ़र्ज़ निभाईये, मोदी जी - हर पीड़ित परिवार को ₹4 लाख का मुआवज़ा दीजिए."

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वरिष्ठ पत्रकार हिमानी चंद्रा ने भी सोशल मीडिया पर लिखा भारत सरकार के अनुसार मौतों का आंकड़ा 5.2 लाख है जबकि डब्ल्यूएचओ के अनुसार ये आंकड़ा 40 लाख का है. उन्होंने लिखा, "ये आश्चर्य की बात है कि न्यूयॉर्क टाइम्स को कथित तौर पर भारत में हुई अत्यधिक मौतों का आंकड़ा मिल गया, लेकिन वो दूसरे देशों के आंकड़ो आकलन का नहीं कर सका."

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