बूस्टर डोज़: जानिए क्यों जरूरी है कोरोना की प्रिकॉशन डोज़

बूस्टर डोज़

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भारत सरकार 18 साल या इससे अधिक उम्र वाले लोगों को मुफ़्त में प्रिकॉशन डोज़ दे रही है.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया है कि ''आज़ादी के अमृत महोत्सव'' के तहत 15 जुलाई से 75 दिन तक सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर ये अभियान चलाया जा रहा है.

15 जुलाई से 30 सितंबर, 2022 तक 75 दिनों के लिए चलने वाले इस अभियान के लिए वो सभी लोग पात्र हैं, जो 18 साल या इससे अधिक की उम्र के हैं, और जिन्होंने दूसरी ख़ुराक लगाने की तारीख़ के बाद 6 महीने (26 सप्ताह) का समय पूरा कर लिया है.

मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इस वैक्सीनेशन ड्राइव के बावजूद बड़ी संख्या में लोग बूस्टर डोज नहीं लगवा रहे हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, 30 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 18-59 आयुवर्ग के लोगों में क़रीब 12% लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवाई है. वहीं हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलाकर 60 साल से अधिक के 35% लोगों ने बूस्टर डोज लगवाई है.

2 सितंबर तक कोविड के कितने डोज़ दिए गए?

2 सितंबर की सुबह जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अबतक 212.75 करोड़ (2,12,75,23,421) से अधिक डोज़ अलग-अलग आयु वर्गो में दिए जा चुके हैं.

बता दें कि 12-14 आयु वर्ग के लिए कोविड-19 टीकाकरण 16 मार्च, 2022 को शुरू हुआ था. अब तक 4.03 करोड़ से अधिक किशोरों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगाई गई है.

18-59 के बीच के उम्र के लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज़ 10 अप्रैल, 2022 को शुरू की गई थी. अब तक क़रीब 10 करोड़ 3 लाख से अधिक प्रिकॉशन डोज़ लगाए जा चुके हैं.

10 अप्रैल को जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज़ देने का फ़ैसला किया था तो ये शर्त रखी गई थी कि वही लोग बूस्टर डोज़ ले सकते हैं जिन्हें दूसरी डोज़ लिए नौ महीने पूरे हो गए हैं.

साथ ही 60 या उससे अधिक उम्र वाले लोगों, हेल्थवर्कर्स, फ़्रंटलाइव वर्कर्स को सरकारी सेंटर्स पर टीका मिलता रहेगा.

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बूस्टर डोज़ का एलान कब हुआ था?

इससे पहले 25 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेल्थ केयर वर्कर्स और 60 साल की ऊपर की उम्र के लोगों के लिए बूस्टर डोज़ का एलान किया था.

देश के कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने बताया था कि बूस्टर डोज़ या एहतियाती तीसरी डोज़ उसी शख़्स को लगेगी, जिसको पहली दो डोज़ लगी है.

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कोरोना वायरस (कोविड-19) वैक्सीन की बूस्टर डोज़, पहले की दो डोज़ से मिली सुरक्षा को मज़बूत करने में मदद करती है. ये आपको कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होने से लंबे समय तक बचाती है.

केंद्र सरकार ने फ़ैसला किया है कि जिन लोगों को पहले कोविशील्ड का टीका लगा है उन्हें कोविशील्ड की ही बूस्टर खुराक दी जाएगी, जबकि जिन लोगों ने पहले कोवैक्सीन ली है उन्हें कोवैक्सीन की बूस्टर खुराक दी जाएगी.

लेकिन आख़िर बूस्टर खुराक क्या है, ये कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कैसे और कितनी प्रभावी है? और अगर आप इसे लेना चाहते हैं तो आपको क्या करना होगा?

टीके आपके शरीर को बीमारी या वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं.

बूस्टर डोज़: कोरोना वैक्सीन का प्रिकॉशन डोज़ कैसे, कब और कहां मिलेगा?

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बूस्टर डोज़ क्या है?

जब हम किसी बीमारी से बचने के लिए टीका लगवाते हैं, तो हम अपने शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करते हैं. लेकिन कई बार वैक्सीन की एक से ज़्यादा खुराक लेनी पड़ती है.

कोविड बूस्टर डोज़, वैक्सीन की एक अतिरिक्त डोज़ होती है, जिसे तब दिया जाता है, जब वैक्सीन के ओरिजनल शॉट से मिली सुरक्षा वक़्त से साथ कम होने लगती है. आम तौर पर बूस्टर डोज़ तब दिया जाता है जब शुरुआती डोज़ से मिली इम्युनिटी अपने आप धीरे-धीरे कम होने लगती है.

बूस्टर शॉट उस इम्युनिटी के स्तर को लंबे वक़्त तक बनाने रखने में लोगों की मदद करता है. भारत में बूस्टर शॉट को 'प्रिकॉशन डोज़' कहा जा रहा है.

बीबीसी के स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता जेम्स गैलाघेर कहते हैं कि ये कुछ हद तक हमारे स्कूल जैसा है.

जेम्स कहते हैं, "पहली खुराक आपका प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें आप वर्णमाला सीखते हैं, आपको कई विषयों का बुनियादी ज्ञान मिलता है. लेकिन ये पर्याप्त नहीं है. इसलिए आप माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज या विश्वविद्यालय में जाते हैं."

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कोविड-19 बूस्टर डोज़ में कौन सी वैक्सीन लगाई जाएगी?

भारत के कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वी के पॉल ने बताया था कि पात्र लोगों को उसी कंपनी की प्रिकॉशन डोज़ (बूस्टर डोज़) दी जाएगी, जिसकी पहली दो डोज़ दी गई थी.

उन्होंने बताया कि जिन लोगों को पहली दो डोज़ कोवैक्सीन की लगी है, उन्हें एहतियाती खुराक भी कोवैक्सीन की लगेगी और जिन लोगों ने पहले कोविशील्ड की वैक्सीन लगवाई है, उन्हें बूस्टर डोज़ भी कोविशील्ड की लगेगी.

एहतियाती खुराक के लिए कोविड वैक्सीन मिक्सिंग पर उन्होंने कहा कि इस पर आगे चर्चा की जाएगी, क्योंकि इस विषय पर अधिक शोध चल रहा है.

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बूस्टर डोज़ आपको कितनी सुरक्षा देगी?

बूस्टर डोज़ के बाद आपको ऐसी सुरक्षा मिलती है जो काफ़ी विस्तृत होती है. एक जैसे शोधों से इसका प्रभाव साफ़ है कि दो डोज़ ओमिक्रॉन के ख़िलाफ़ कमज़ोर हैं.

बूस्टर डोज़ के बाद किसी भी कोविड लक्षण के ख़िलाफ़ 75% तक की सुरक्षा देखी गई है.

बूस्टर डोज़ हमारे इम्यून सिस्टम को भविष्य के किसी भी वेरिएंट के ख़िलाफ़ शरीर को एक बढ़त ज़रूर देती है.

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जिन लोगों को कोरोना हो चुका है, क्या उन्हें भी बूस्टर डोज़ लेनी होगी?

वायरस से एक बार संक्रमित होने के बाद, शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित होती है.

अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ है, तो उनमें वायरस के प्रति एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं.

बूस्टर डोज़ लेने से शरीर का इम्यून सिस्टम लंबे समय तक मज़बूत रहता है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि कोविड से संक्रमित होने के कुछ दिन बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार बूस्टर डोज़ लेनी चाहिए.

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