मालदीव में योग दिवस के कार्यक्रम में हमला क्यों हुआ?

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मालदीव की राजधानी माले के नेशनल फुटबॉल स्टेडियम में आक्रोशित भीड़ ने मंगलवार को धावा बोल और यहाँ भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित 'योग दिवस' के कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों पर हमला किया था.
इस दौरान भीड़ ने तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार हमला करने से पहले भीड़ हाथों तख्तियां लिए घूम रही थी, जिस पर लिखा था कि योग इस्लाम के उसूलों के ख़िलाफ़ है. योग को कई मौक़ों पर हिंदू धर्म से जोड़ा जाता रहा है.
मालदीव के न्यूज़ पोर्टल द एडिशन की ख़बर के अनुसार, देश में कई गुट योग दिवस मनाने के फ़ैसले के विरुद्ध थे और इसकी आलोचना जारी थी.
प्रदर्शनकारियों ने योग दिवस में शामिल होने वालों से तुरंत स्टेडियम से बाहर जाने को कहा. द एडिशन के अनुसार भीड़ ने योग दिवस में आए कई लोगों को धमकाया भी.
मालदीव एक इस्लामिक देश है. यहाँ की आबादी करीब 5 से 6 लाख़ के बीच मानी जाती है.
नाम न बताने की शर्त पर कार्यक्रम के आयोजकों में से एक शख्स ने रॉयटर्स को बताया कि भीड़ ने यहाँ लोगों पर हमला किया, तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुक़सान पहुँचाया.
इस कार्यक्रम में 150 से अधिक लोग शामिल थे जिनमें राजनयिक और सरकारी अधिकारी भी थे.
हमले की सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई की और बाद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेपर स्प्रे, आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल करना पड़ा.
पुलिस अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस मामले में अभी तक छह लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है.

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मालदीव सरकार ने क्या कहा
हमले के बाद सरकार ने बयान जारी कर कहा, "लोक सुरक्षा को बाधित करने और व्यक्तियों और राजनयिकों की सुरक्षा की अवहेलना के उद्देश्य से हिंसा के ऐसे दुर्भावनापूर्ण कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अधिकारियों ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि अपराधियों पर जल्द कार्रवाई की जाए."
एक अलग बयान में, मालदीव सरकार ने 8वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित समारोह में भाग लेने वाले राजनयिकों समेत प्रतिभागियों को निशाना बनाकर "एक समूह के किए गए हिंसक कृत्यों" की कड़ी निंदा की.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह ने ट्वीट किया, "मालदीव पुलिस ने गलोहू स्टेडियम में हुए हमले को लेकर जाँच शुरू कर दी है. इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जो इसके ज़िम्मेदार हैं, उन्हें जल्द सज़ा दी जाएगी."
मालदीव पुलिस सेवा ने नेशनल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम पर हमले के इस मामले को उच्च प्राथमिकता देते हुए जाँच शुरू कर दी है. बयान में कहा गया, "अपराधियों ने ज़बरदस्ती घुस के, संपत्ति को नुक़सान पहुँचाकर और कार्यक्रम के प्रतिभागियों पर हमला करने का प्रयास करके डर पैदा करने की कोशिश की."
मालदीव पुलिस ने सोशल मीडिया पर जनता से अपील की है कि अगर उन्हें नेशनल स्टेडियम में हुई वारदात से जुड़ी कोई भी जानकारी मिलती है तो वो इस बारे में पुलिस को सूचित करें. पुलिस ऐसे लोगों की पहचान ज़ाहिर नहीं करेगी और पूरी तरह सुरक्षा भी देगी.
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इस्लामी स्कॉलरों के बीच योग एक विवादित विषय रहा है. कुछ लोगों का मत है कि योग सूर्य-पूजा के समानांतर है.
कौन थे हमलावर?
मालदीव पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच के निष्कर्षों से पता चला है कि हमला करने वालों की तरफ़ से इस्तेमाल की गई कुछ सामग्री प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव (पीपीएम) कार्यालय से आई थी. पुलिस ने कहा, "अभी तक मिले सबूत से लगता है कि प्रदर्शनकारियों ने पीपीएम के कार्यालय से लाई गई सामग्री का इस्तेमाल किया."
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन पीपीएम पार्टी के ही नेता थे.
हालाँकि पीपीएम ने ट्विटर एक बयान जारी कर पुलिस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित और आधारहीन बताया है.
आरोप हैं कि उपद्रवियों की ओर से इस्तेमाल किए गए झंडे वही थे जो हाल में पीपीएम की आयोजित "नबियाज धिफौगाई" रैली में इस्तेमाल किए गए थे.
पीपीएम की प्रवक्ता हीना वलीद की ओर से आए इस बयान में कहा गया है कि योग दिवस पर हुई हिंसा में पार्टी का कोई हाथ नहीं है. पार्टी कड़े शब्दों में सभी तरह की हिंसा की निंदा करती थी.
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पार्टी ने कहा है कि राष्ट्रपति के रिश्तेदार की अगुआई में पुलिस कार्यक्रम में शामिल होने वाले राजनयिकों और अन्य शीर्ष सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा करने में असफल रही.

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संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने का एलान किया था. ख़ास बात ये है कि मालदीव उन 177 देशों में शामिल है जिसने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने संबंधी प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया था.
इससे पहले बीजेपी के दो प्रवक्ताओं की पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर भी मालदीव में काफ़ी गतिरोध देखने को मिला था.
मालदीव की वर्तमान इब्राहिम मोहम्मद सोलिह सरकार को भारत समर्थक माना जाता है लेकिन उसने भी पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर बयान जारी कर कहा था कि यह बेहद चिंताजनक है. सोलिह सरकार ने बीजेपी से दोनों प्रवक्ताओं को निकाले जाने का स्वागत भी किया था.
छह जून को इब्राहिम सोलिह की अगुआई वाली मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के दो प्रवक्ताओं की विवादित टिप्पणी की निंदा में जो बयान जारी किया था, उसे पता चलता है कि भारत की घरेलू राजनीति का असर पड़ोसी देशों पर किस हद तक पड़ता है.
मालदीव एक इस्लामिक देश है. सोलिह के नेतृत्व में हिन्द महासागर के इस छोटे लेकिन अहम देश ने आधिकारिक रूप से अपनी विदेश नीति में 'इंडिया फर्स्ट' का रुख़ रखा है जबकि वहाँ का विपक्ष 'इंडिया आउट' कैंपेन चला रहा है.
इंडिया आउट कैंपेन मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चला रहे हैं. यामीन जब राष्ट्रपति थे तो उनका झुकाव चीन की ओर था. इसी साल अप्रैल में सोलिह सरकार ने सरकारी आदेश के ज़रिए विपक्ष के 'इंडिया आउट' कैंपेन पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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सोलिह सरकार ने नहीं पास होने दिया था प्रस्ताव
छह जून को वहाँ के विपक्ष ने पीपल्स मजलिस में एक आपातकालीन प्रस्ताव लाया था. यह प्रस्ताव पीपल्स नेशनल कांग्रेस के सांसद अदम शरीफ़ उमर ने रखा था. प्रस्ताव में कहा गया था कि सरकार भारत की निंदा करे.
प्रस्ताव पेश करते हुए शरीफ़ ने कहा था कि यह बहुत दुखद है कि इस्लामिक देश होते हुए भी मालदीव ने भारत में पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर अपमानजनक टिप्पणी पर एक शब्द नहीं कहा. दूसरी तरफ़ भारतीय मुसलमान और बाक़ी के इस्लामिक देश इसका विरोध कर रहे हैं और भारत के राजदूतों को समन भेज रहे हैं.
मालदीव की संसद में कुल 87 सदस्य हैं और इस प्रस्ताव के वक़्त 43 सांसद मौजूद थे. सत्ताधारी एमडीपी के 65 सांसद हैं. जिन 33 सांसदों ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज करने के पक्ष में मतदान किया, वे सभी एमडीपी के थे. वहाँ के एक अख़बार ने इन सभी 33 सांसदों को सार्वजनिक रूप से लानतें भेजी थीं. उसी दिन प्रोग्रेसिव कांग्रेस कोअलिशन (पीसीसी) और प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव ने नुपूर शर्मा की टिप्पणी की निंदा करते हुए बयान जारी किया था. इस बयान में कहा गया कि नूपुर शर्मा के बयान से साफ़ है कि भारत में इस्लामोफ़ोबिया बढ़ रहा है.
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