पैग़ंबर मामले पर पाकिस्तानी पीएम लाना चाहते हैं प्रस्ताव, बिलावल ने की यूएन अधिकारी से बात

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि भारत में बीजेपी नेताओं की पैग़ंबर पर की गई टिप्पणियों के ख़िलाफ़ देश की संसद में बहस कर एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए.
वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने भारत में पैग़ंबर मोहम्मद के बारे में सत्ताधारी बीजेपी के दो पूर्व प्रवक्ताओं की टिप्पणियों के मामले को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद के सामने उठाया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के कार्यालय की ओर से शनिवार को ट्विटर पर लिखा गया कि प्रधानमंत्री ने स्पीकर राजा परवेज़ अशरफ़ से पैग़ंबर के मामले पर चर्चा के लिए सोमवार को नेशनल एसेंबली का सत्र बुलाने का आग्रह किया है.
एक अन्य ट्वीट में लिखा गया है, "हमारी आस्था और प्यार से जुड़े इस अहम और नाज़ुक मसले पर सदन में चर्चा होनी चाहिए. सदन को भारत की इस घृणास्पद घटना के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करना चाहिए. हम इस प्रस्ताव के ज़रिए भारत समेत पूरी दुनिया को ये बताना चाहते हैं कि हम पैग़ंबर की पवित्रता के लिए कोई भी क़ुर्बानी दे सकते हैं."

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बिलावल भुट्टो ने की यूएन महासभा अध्यक्ष से चर्चा
इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने "पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बीजेपी के अधिकारियों की अपमानजमक टिप्पणी पर यूएन जनरल असेंबली (पीजीए) के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद के साथ चर्चा की."
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस बारे में और जानकारी देते हुए बताया कि बिलावल भुट्टो ने यूएन महासभा अध्यक्ष से ये कहते हुए कि ऐसी भड़काऊ हरकतों से दुनिया भर में अरबों मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं, उनसे आग्रह किया कि वो भारत में बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया के बीच ऐसी "घृणित" घटना का संज्ञान लें.
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अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफ़िंग में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ़्तिख़ार ने बताया कि विदेश मंत्री ने अब्दुल्ला शाहिद के सामने इस घटना को लेकर भारतीय नेतृत्व की चुप्पी का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'चुप्पी का मतलब स्वीकृति हो सकता है, और इससे हिंसा, सांप्रदायिक वैमनस्य और नफ़रत भरी घटनाएँ बढ़ सकती हैं'.

हालांकि बिलावल के इस ट्वीट पर कई लोग ये भी पूछ रहे हैं कि कराची में दो दिन पहले मंदिर तोड़ा गया, उस पर उनका क्या कहना है.
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पाकिस्तानी मीडिया में ज़िक्र
भारत में शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों की ख़बर पाकिस्तान के कई बड़े मीडिया समूहों में है. पाकिस्तान के अख़बार डॉन ने शनिवार को लिखा है कि भारत के रांची शहर में पैग़ंबर पर टिप्पणियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई.
अख़बार लिखता है कि एक टीवी शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी की एक प्रवक्ता की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पिछले सप्ताह से मुस्लिम जगत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
डॉन की एक अन्य ख़बर के अनुसार, शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद पूरे एशिया में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किये. हालांकि बीजेपी के दो पूर्व कार्यकर्ताओं की टिप्पणी पर पूरी दुनिया से प्रतिक्रिया आई है और 20 से अधिक देशों ने अपना विरोध दर्ज कराया है लेकिन शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का एक अलग ही रूप देखने को मिला.
रिपोर्ट में बताया गया है कि वहीं पाकिस्तान में टीएलपी (पहले प्रतिबंधित संगठन) के पांच हज़ार समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और पाकिस्तान सरकार से भारत से आयी इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की.
इस प्रदर्शन में शामिल एक शिक्षक इरफ़ान रिज़वी ने कहा कि पैग़ंबर को लेकर कही गई कोई भी आपत्तिजनक बात स्वीकर नहीं की जाएगी. वो चाहे भारत हो या कोई भी और... उन्हें पता होना चाहिए इस्लाम के रक्षक इस पर ख़ामोश नहीं बैठेंगे.
रेडियो पाकिस्तान ने लिखा है कि "भारत के अवैध कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर में, भारतीय जनता पार्टी की हिंदुत्ववादी सरकार ने भद्रवाह, किश्तवाड़ और रामबन इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया है."
रेडियो पाकिस्तान लिखता है कि "जम्मू और कश्मीर में मुसलमानों ने पैग़ंबर मुहम्मद के ख़िलाफ़ बीजेपी नेताओं की ईशनिंदा और अपमानजनक टिप्पणियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद इलाक़े में हिंदुत्ववादी संगठनों आरएसएस, बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद, डोगरा और बजरंग दल के नेतृत्व में सांप्रदायिक हिंसा हुई. इस हिंसा के बाद ही इलाक़े में कर्फ़्यू की घोषणा कर दी गई."
मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए रेडियो पाकिस्तान ने लिखा है कि मोदी शासन ने भारतीय सेना को फ़्लैग मार्च के लिए बुलाया. इसके साथ ही इलाक़े में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है.
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जम्मू और कश्मीर का जिक्र
रेडियो पाकिस्तान लिखता है कि शुक्रवार को "भारत के कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर में पूरी तरह से बंदी लागू रही."
रेडियो पाकिस्तान का यह दावा है कि इलाक़े में बंदी विरोध दर्ज कराने का एक ज़रिया था. यह विरोध नुपूर शर्मा की विवादित टिप्पणी के ख़िलाफ़ था, जिसमें उन्होंने पैग़ंबर के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था.
रेडियो पाकिस्तान का दावा है कि भारतीय सेना और पुलिस ने व्यापारियों को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने बंद का पालन किया तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे लेकिन धमकी के बावजूद व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और विरोध जताया.
कश्मीरी मीडिया के हवाले से रेडियो पाकिस्तान ने लिखा है कि "भारतीय अधिकारियों ने श्रीनगर की जामिया मस्जिद और क्षेत्र की दूसरी कई महत्वपूर्ण मस्जिदों को भी बंद कर दिया और लोगों को जुमे की नमाज़ अदा करने से रोक दिया गया. लेकिन सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद इलाक़े में ईशनिंदा करने वालों के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज हुआ."
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है कि भारत में सत्तारूढ़ दल के दो पूर्व सदस्यों की अपमानजनक टिप्पणी के बाद भारत के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कम-से-कम दो शहरों में पुलिस पर पत्थर भी बरसाए गए.
ट्रिब्यून लिखता है कि 'इस्लामोफ़ोबिक' टिप्पणी के बाद भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार देश और विदेश में मुसलमानों की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है.
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ट्रिब्यून के मुताबिक़, हाल के दिनों में प्रार्थना के अधिकार से लेकर हिजाब पहनने तक को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद हिंदुत्ववादी बीजेपी सरकार में आया यह एक और मामला है. मौजूदा सरकार में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव की यह प्रतिक्रिया है.
ट्रिब्यून के मुताबिक़, भारत के पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद में भी प्रदर्शन हुए हैं. यहां बच्चों समेत दर्जनों की संख्या में लोगों ने नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की मांग करते हुए रैली निकाली.
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पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर ने ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के जनरल सेक्रेटरी मौल्वी बशीर अहमद इरफ़ानी के बयान को प्रकाशित किया है.
पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर लिखता है कि इरफ़ानी ने पैग़ंबर मोहम्मद के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने वाले बीजेपी के पूर्व नेताओं की निंदा की है और कहा है कि कोई भी मुसलमान इस तरह के कृत्य को स्वीकार नहीं करेगा.
उन्होंने कहा कि मुस्लिम जगत और संयुक्त राष्ट्र को ऐसे 'उपद्रवियों' के ख़िलाफ़ ठोस क़दम उठाने चाहिए ताकि वे भविष्य में इस तरह के बयान देने की हिम्मत भी ना करें.

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पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ टिप्पणी मामले में अब तक क्या हुआ?
- बीजेपी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने 26 मई को एक टीवी कार्यक्रम में पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की.
- सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया, उन्हें धमकियां दी गयीं.
- कानपुर में दो पक्षों के बीच सांप्रदायिक हिंसा हुई जिसमें कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
- एक दर्जन से अधिक मुस्लिम देशों ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया, क़तर और ईरान ने भारतीय राजदूत को तलब किया.
- क़तर ने इस मुद्दे पर भारत से माफ़ी मांगने की मांग की.
- बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित किया और नवीन जिंदल को पार्टी से निष्कासित किया.
- दिल्ली पुलिस ने नूपुर शर्मा को मिलती धमकियों के तहत उन्हें सुरक्षा व्यवस्था दी.
- दिल्ली पुलिस ने नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धाराओं 153, 295, 505 के तहत मामला दर्ज किया.
- 10 जून शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद भारत में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए. कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक भी हो गए. अभी तक दो लोगों के मारे जाने की पुष्टि, दर्जनों घायल.
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