नूपुर शर्मा मामले में बीजेपी और भारत के बारे में क्या कह रहे हैं अरब देश

नूपुर शर्मा

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बीजेपी नेताओं की ओर से पैग़म्बर मोहम्मद पर की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर क़तर और कुवैत ने रविवार को उनके देशों में स्थित भारतीय राजदूतों को तलब किया और अपना विरोध प्रकट किया.

रविवार को इस मुद्दे पर अपनी नाराज़गी जताते हुए क़तर के विदेश मंत्रालय ने दोहा में मौजूद भारत के राजदूत दीपक मित्तल को तलब किया.

क़तर के विदेश मंत्री सुल्तान बिन साद अल-मुराइख़ी ने भारतीय राजदूत को इस बाबत क़तर की प्रतिक्रिया का ऑफ़िशियल नोट सौंपा. मंत्रालय ने अपने एक बयान में इसकी जानकारी दी है. इसमें भारत की सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से की गई कार्रवाई का स्वागत किया गया है, जिसमें विवादास्पद बयान देने वाले नेताओं को निलंबित और निष्कासित करने की बात की गई है.

साथ ही यह भी कहा गया है कि क़तर भारत सरकार की ओर से इस पर सार्वजनिक माफ़ी और इन टिप्पणियों की निंदा की उम्मीद करता है.

भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू इस वक़्त क़तर के दौरे पर हैं. रविवार को उन्होंने वहां क़तर के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शेख ख़ालिद बिन ख़लीफ़ा बिन अबदुलअज़ीज अल-थानी से मुलाक़ात की.

क़तर के भारतीय दूतावास के प्रवक्ता ने बताया कि "अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ पहले ही कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है."

पैग़ंबर मोहम्मद पर भारतीय जनता पार्टी की नेता नूपुर शर्मा के विवादित बयान को लेकर क़तर ने जो नाराज़गी जताई है, उस पर दोहा में स्थित भारतीय दूतावास ने प्रतिक्रिया दी है.

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क़तर और कुवैत के बाद इस मुद्दे पर ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओईसी) ने भी आपत्ति जताई और कहा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति के दिए विवादास्पद बयान की वो कड़ी आलोचना करता है.

एक के बाद एक कई ट्वीट कर ओआईसी ने कहा कि भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ सुनियोजित तरीके से हिंसा बढ़ रही है, उनपर पाबंदियां लगाई जा रही हैं. ओआईसी ने अपने ट्वीट में हिजाब बैन और मुसलमानों की संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने जैसी ख़बरों का भी ज़िक्र किया.

ओआईसी ने कहा कि पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बयान देने वालों और मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की जाए.

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क़तर के भारतीय दूतावास ने क्या कहा?

भारतीय दूतावास के प्रवक्ता ने इस सिलसिले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में कहा है, "दोनों देशों के राजदूतों के बीच बैठक हुई जिसमें धार्मिक शख़्सियत पर भारत के व्यक्तियों के ज़रिए आपत्तिजनक ट्वीट के संबंध में चिंता व्यक्त की गई."

भारतीय राजदूत ने ये बताया कि ये ट्वीट किसी भी तरह से भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाते. ये 'शरारती तत्वों' के विचार हैं.

हमारी सांस्कृतिक विरासत और अनेकता में एकता की मजबूत परंपराओं के अनुरूप भारत सरकार सभी धर्मों को अपना सर्वोच्च सम्मान देती है.

अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ पहले ही कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है. इस संबंध में एक बयान भी जारी किया गया है जिसमें किसी भी धार्मिक शख़्सियत के अपमान की निंदा करते हुए सभी धर्मों के सम्मान पर ज़ोर दिया गया है.

भारत-क़तर रिश्ते के ख़िलाफ़ जो निहितस्वार्थ हैं वो इन अपमानजनक टिप्पणियों का उपयोग लोगों को उकसाने में करते हैं.

हमें ऐसे शरारती तत्वों के ख़िलाफ़ मिलकर काम करना चाहिए जिनका लक्ष्य हमारे द्विपक्षीय संबंध की ताक़तों को कम करना है.

नूपुर शर्मा

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कुवैत की प्रतिक्रिया

इस बीच क़ुवैत के विदेश मंत्रालय ने भी नूपुर शर्मा मामले को लेकर रविवार को भारतीय राजदूत को तलब किया और आधिकारिक तौर पर अपना विरोध जताया.

क़ुवैत के विदेश मंत्रालय के एशिया मामलों के सहायक सचिव ने पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ भारत में सत्तारूढ़ पार्टी के एक अधिकारी द्वारा दिए गए बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. हालांकि इसी बयान में नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित किए जाने के बीजेपी के उस फ़ैसले का भी स्वागत किया गया है.

भारत ने कुवैत की नाराज़गी पर भी प्रतिक्रिया में वहीं बात कही जो दोहा स्थित भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया.

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उधर, दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा और दिल्ली बीजेपी के नेता नवीन कुमार जिंदल को पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के कारण कार्रवाई करने का फ़ैसला किया है.

नूपुर शर्मा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है जबकि नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित करने का फ़ैसला किया गया है.

मुस्लिम समूहों की ओर से इन टिप्पणियों पर नाराज़गी जताए जाने के बाद बीजेपी ने एक बयान जारी कर कहा कि वो सभी धर्मों का सम्मान करती है और किसी धार्मिक व्यक्तित्व के अपमान को कड़ी आलोचना करती है.

इस मामले को लेकर अरब जगत के सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली. वहां भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का भी आह्वान किया गया.

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बीजेपी ने दी सफ़ाई

नूपुर शर्मा के बयान पर हुए हंगामे के बाद बीजेपी ने सफाई दी है. पार्टी ने कहा है, "पार्टी हर धर्म का करती है सम्मान बीजेपी ने पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपने एक प्रवक्ता की टिप्पणी से पैदा हुए विवाद के बाद कहा है कि वह सभी धर्मों आदर करती है और किसी भी धार्मिक महापुरुष के किसी अपमान का पुरजोर निंदा करती है."

पैगंबर मोहम्मद पर बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा की टिप्पणी से पैदा विवाद पर पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसी किसी भी विचारधारा के बिल्कुल ख़िलाफ़ है, जो किसी संप्रदाय या धर्म का अपमान करती है.

हालांकि बीजेपी ने नूपुर शर्मा के बयान से पैदा हुए विवाद का सीधा जिक्र नहीं किया है.

मुस्लिम संगठनों ने नूपुर शर्मा के बयान का जबरदस्त विरोध किया है. समाचाार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अरुण सिंह ने कहा, "भारत के हजारों साल के इतिहास में कई धर्म फले-फूले हैं. भारतीय जनता पार्टी हर धर्म का सम्मान करती है. भारतीय संविधान नागरिकों को किसी भी धर्म के पालन की आजादी देता है. साथ ही यह सभी धर्मों के आदर और सम्मान का भी अधिकार देता है."

वीडियो कैप्शन, सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों ने फिर क्यों बढ़ाया क़तर की ओर दोस्ती का हाथ?

क्या कह रहे हैं सऊदी अरब में लोग?

नूपुर शर्मा के उस बयान को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने रविवार को फिर एक ट्वीट साझा किया और बताया कि मध्यपूर्व के देशों क़तर, ओमान, सऊदी अरब और मिस्र में ये सोशल पर ट्रेंड कर रहा है.

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एक ट्वीटर यूज़र मोहम्मद मक्की ने लिखा, "पैग़ंबर मोहम्मद का एक और अपमान, अल्लाह उस पर शांति कायम करें. अगर इतने सारे लोगों की तरफ़ से तीखी प्रतिक्रिया होती तो किसी और की हिम्मत नहीं हुई होती! लेकिन दुर्भाग्य से प्रतिक्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं."

वहीं रेहान ने लिखा, "कुछ घंटों से बीजेपी के प्रवक्ता के ट्वीट और बयान सऊदी अरब में टॉप ट्रेंड हैं. दुनिया को भारतीय मुसलमानों और इस्लाम के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों पर ध्यान देना चाहिए."

वहीं एक अन्य यूज़र जहांज़ेब ने लिखा, "मोदी के भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हिंसा एक ज़रूरी चीज़ है. अब उनकी सरकार की ओर से की गई ईशनिंदा पर कड़ी प्रतिक्रिया की ज़रूरत है. मुस्लिम जगत को इसका तुरंत बहिष्कार करना चाहिए."

ख़ुद को एक डॉक्टर बताने वाले सफ़ीउल्ला सिद्दक़ी ने लिखा, "अरब के मुसलमानों में ताक़त है कि वो उन सभी लोगों पर स्थायी रूप से पूर्ण विराम लगा सकते हैं जो हमारे प्यारे, सम्माननीय, अल्लाह के अंतिम पैग़ंबर का अपमान करते हैं.

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अरब देशों में कैसे शुरू हुआ विरोध?

अरब देशों में नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के ख़िलाफ़ अभियान की शुरुआत ओमान के मुफ़्ती शेख अहमद बिन हमाद अल खलीली ने की थी.

उन्होंने ट्वीट किया था कि भारत की सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता ने इस्लाम के दूत के ख़िलाफ़ अपमानजनक और अश्लील टिप्पणी की है. उन्होंने इस मामले में सभी मुस्लिम देशों से एक साथ उठ खड़े होने की अपील भी की थी.

अल खलीली के बयान के बाद ही अरब देशों में इस मामले को लेकर भारत के ख़िलाफ़ विरोध शुरू हुआ, जिसे लेकर रविवार को बीजेपी ने अपनी सफ़ाई दी.

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