ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे फिर शुरू, आज क्या-क्या हुआ?

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वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में शनिवार को सर्वे का काम पूरा हो गया. 12 मई को वाराणसी कोर्ट की एक बेंच ने वहां वीडियोग्राफ़ी जारी कराने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर स्टे लगाने से यह कह कर इनकार कर दिया था कि वह फाइलों को पढ़ने के बाद ही इस पर कोई फैसला लेगा.
वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने बीबीसी संवाददाता अनंत झणाणें से कहा, "बनारस में सिविल कोर्ट द्वारा एक आदेश दिया गया था, जिसके मद्देनज़र ज्ञानवापी क्षेत्र और उसके आस-पास के इलाक़े में एक कोर्ट कमीशन की कार्यवाही की जानी थी. कमीशन की कार्यवाही सुबह आठ बजे से बारह बजे तक की गई."
कौशल शर्मा ने बताया कि इसमें सभी पक्षकार और उनके एडवोकेट और ज़िला प्रशासन के लोग मौजूद थे और ये कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई.
डीएम कौशल राज शर्मा ने ये भी जानकारी दी, "लगभग 50 फीसदी से अधिक सर्वे हो चुका है."
उन्होंने कहा कि सर्वे गोपनीय कार्यवाही है और कोर्ट की निगरानी में हो रही है. यह जानकारी नहीं दी जा सकती है कि कौन कौन से स्थानों का सर्वे हुआ और क्या क्या मिला. उनके मुताबिक़ पक्षकार कार्यवाही से संतुष्ट हैं.
'क्या-क्या मिला, अभी नहीं बताएंगे'
सर्वे में हिस्सा लेने पहुँची महिला याचिकाकर्ता सीता साहू ने कहा, "प्रशासन ने पूरा सहयोग किया और विपक्ष ने भी पूरा सहियोग किया."
मौके पर दूसरी महिला याचिकाकर्ता मंजू व्यास और रेखा पाठक भी थीं.
महिला याचिकाकर्ता के वकील सुधीर त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया, "आज कार्यवाही में शांतिपूर्ण ढंग से वादी प्रतिवादी दोनों के सहयोग से और शासन प्रशासन के भरपूर सहयोग से सर्वे का काम लगभग चार घंटे चला. रविवार को फिर सर्वे होगा. चाबी आराम से मिल गयी. चाबी ही नहीं, किसी भी काम में कोई बाधा नहीं हुई."
मीडिया के "क्या मिला मिला है?" के सवाल पर वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा, "यह सब मत पूछिए, क्या मिला है वो रिपोर्ट में आएगा. पिछली बार जो अड़चन हुई थी, इस बार ऐसा कुछ नहीं था."
ग़ौरतलब है कि अंजुमन इंतेज़ामियां मस्जिद ने एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. शुक्रवार को कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने से इनकार के दिया था. कोर्ट का कहना था कि वो मामले से जुड़ी फ़ाइल देखे बिना कोई आदेश नहीं पारित करेगा
सर्वे के दौरान मस्जिद के आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात थी. साथ ही गेट नंबर चार को जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे. सर्वे के मद्देनज़र बाज़ार भी बंद थे.

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ओवैसी बोले, बाबरी मस्जिद खोई है दूसरी मस्जिद हरगिज नहीं खोएंगे
इस बीच, शनिवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर कहा कि मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद को खोया है और दूसरी मस्जिद हरगिज नहीं खोएंगे.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, ओवैसी ने अहमदाबाद में कहा, "बाबरी मस्जिद पर कोर्ट का फैसला आ गया और अब ज्ञानवापी का मसला शुरू हो गया. हुकूमत को ये बात बता रहा हूं कि हमने एक बाबरी मस्जिद को खोया है दूसरी मस्जिद को हरगिज नहीं खोएंगे."
उन्होंने कहा, "इस देश में कभी कोई मुस्लिम वोट बैंक नहीं था, न है और न ही कभी रहेगा. आपको इन बातों में उलझाकर धोखा दिया जाता है. हुकूमत को हम नहीं बदल सकते. अगर बदल सकते तो भारत के संसद में इतने कम मुसलमान क्यों हैं? अगर हम हुकूमत को बदल सकते तो बाबरी मस्जिद पर कोर्ट का फैसला भी आ गया और अब ज्ञानवापी का मसला शुरू हो गया.

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क्या है मामला?
पांच महिलाओं ने कोर्ट में याचिका दायर कर ज्ञानवापी मस्जिद के पीछे वाले हिस्से में मां शृंगार गौरी की पूजा और दर्शन करने की मांग की थी.
साथ ही उन्होंने प्लॉट नंबर 9130 के निरीक्षण और वीडियोग्राफी की मांग भी की थी जिसे मंज़ूर करते हुए कोर्ट ने निरीक्षण और उसकी वीडियोग्राफी के आदेश दिए थे.
लेकिन, ज्ञानवापी मस्जिद में पिछले शुक्रवार को निरीक्षण और वीडियोग्राफी का काम किया जा रहा था, जिसे लेकर विवाद पैदा हो गया था.
मस्जिद के पीछे चबूतरे में मां शृंगार गौरी और दूसरे देवी-देवताओं के सत्यापन और उनके अस्तित्व को स्थापित करने के लिए शुक्रवार दोपहर को कोर्ट से नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर ने निरीक्षण शुरू किया था.
लेकिन शनिवार को एडवोकेट कमिश्नर की निष्पक्षता को लेकर अंजुमन इन्तिज़ामिया मसाजिद के वकीलों ने अदालत में अर्ज़ी दाखिल की थी.

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उनकी मांग थी कि अजय कुमार को हटाकर कोर्ट या तो ख़ुद निरीक्षण करे या फिर किसी दूसरे वरिष्ठ वकील से करवाए.
इसके बाद पाँच याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने भी कोर्ट में अर्ज़ी दी थी कि अंजुमन इन्तिज़ामिया मसाजिद के आरोप पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं.
अपने जवाबी आवेदन में उन्होंने कहा कि ये मस्जिद की तरफ़ से एडवोकेट कमिश्नर की कार्रवाई को बाधित करने की कोशिश है.
कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी मस्जिद में 6 मई को वीडियोग्राफी शुरू हुई थी. लेकिन मस्जिद के अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के विरोध की वजह से 7 मई को सर्वे रोक दिया था.
कमेटी ने एक याचिका दायर कर एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को बदलने की मांग की थी.
लेकिन कोर्ट के आदेश को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने कमेटी के साथ बैठक की, जिसमें सिक्योरिटी प्लान के साथ सर्वे को जारी रखने का फैसला किया गया.
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