ज्ञानवापी मस्जिद ने काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए दी ज़मीन: प्रेस रिव्यू

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद

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वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का संचालन करने वाली समिति ने मस्जिद परिसर के बाहर की ज़मीन का एक टुकड़ा काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को दे दिया है. इसके बदले समिति को पास का ही एक दूसरा प्लॉट दिया गया है.

मस्जिद के अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद समिति ने जो ज़मीन दी है वह पहले प्रशासन को पुलिस कंट्रोल रूम बनाने के लिए स्थायी पट्टे पर दी गई थी.

मस्जिद के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रस्ट ने कुछ साल पहले कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए इसकी मांग की थी.

मस्जिद समिति ने जो भूखंड दिया है वो मस्जिद परिसर से लगभग 15 मीटर की दूरी पर ही है. इसके बदले ज़मीन का जो टुकड़ा समिति को दिया गया है वो इसके मूल्य के बराबर ही है लेकिन आकार में अंतर है.

मस्जिद समिति ने 1700 स्क्वेयर फ़ीट की ज़मीन दी है और इसके बदले उन्हें 1,000 स्क्वेयर फ़ीट की ज़मीन दी गई है.

अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद के संयुक्त सचिव और ज्ञानवापी मस्जिद के कार्यवाहक एसएम यासीन के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि जो प्लॉट दिया गया है वो मस्जिद से जुड़ा हुआ नहीं था, वो अलग है.

ज्ञानवापी मस्जिद

यासीन ने बताया, ''ज्ञानवापी मस्जिद समिति के तहत तीन भूखंड आते हैं. उनमें से एक भूखंड में मस्जिद है. दूसरा भूखंड दो पूजा स्थलों के बीच एक आम रास्ता है और तीसरा हिस्सा कंट्रोल रूम बनाने के लिए ज़िला प्रशासन को दिया गया था.

वो कहते हैं कि बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के एक साल बाद दोनों जगहों की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम बनाने के लिए तीसरा भूखंड ज़िला प्रशासन को सौंप दिया गया था.

इस पुलिस कंट्रोल रूम को प्रोजेक्ट के आगे के काम के लिए अब ढहा दिया गया है.

यासीन बताते हैं कि उत्तर प्रदेश सेंट्रल सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के स्वामित्व वाली इस ज़मीन के टुकड़े को असीमित अवधि के लिए और बिना किसी लेन-देन के पट्टे पर दिया गया था.

उन्होंने बताया, "ट्रस्ट ने हमसे कुछ साल पहले यह ज़मीन देने का अनुरोध किया था. ट्रांसफ़र के नियमों को जांचने के बाद हमने आठ जुलाई को इसे अंतिम रूप दे दिया."

वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ज़फ़र फ़ारूक़ी कहते हैं कि ट्रस्ट को जो ज़मीन का टुकड़ा दिया गया है वो कमर्शियल था और ज़्यादा क़ीमती भी.

ज्ञानवापी मस्जिद

फ़ारूक़ी ने बताया, ''अधिकारियों ने इसके लिए हमसे अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए इसकी आवश्यकता है.''

इंडियन एक्सप्रेस ने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील वर्मा के हवाले से लिखा है कि ट्रस्ट और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के बीच ज़मीन का लेन-देन किया गया है.

सुनील वर्मा के मुताबिक़, "ज़मीन का जो हिस्सा दिया गया है उसका मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं है. यह ज़मीन ख़रीदी जा सकती थी क्योंकि यह वक़्फ़ की संपत्ति है. इसलिए हमने इसके बदले ज़मीन दी जो उतने ही मूल्य की है. मस्जिद समिति को जो ज़मीन सौंपी गई है वो अब तक काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड के तहत थी."

ज़मीन के लेन-देन का यह समझौता वाराणसी की एक स्थानीय अदालत के फ़ैसले के बाद आया है. इस फ़ैसले में विवादित काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के एएसआई सर्वेक्षण का आदेश दिया गया था.

अदालत ने आदेश दिया था कि भारतीय पुरातत्व संस्थान खुदाई करके यह पता लगाए कि ज्ञानवापी परिसर में मंदिर था या मस्जिद थी और देश की आज़ादी के वक़्त परिसर का धार्मिक स्वरूप कैसा था.

महाराष्ट्र में बारिश का कहर

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महाराष्ट्र में बारिश का कहर, कम से कम 60 लोगों की मौत

पश्चिमी महाराष्ट्र और तटीय कोंकण क्षेत्र में तेज़ बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई है. शुक्रवार से ही इस क्षेत्र में तेज़ बारिश का प्रकोप जारी है.

द हिंदू अख़बार के अनुसार, मराठवाड़ा और विदर्भ समेत पूरे राज्य में पिछले 72 घंटों से लगातार बारिश हो रही है.

रायगढ़ में ही तीन अलग-अलग जगहों पर हुए भूस्खलन में 49 लोगों की मौत हो गई.

महाड के तलिये गांव में गुरुवार शाम को गांव के सभी 35 घर भूस्खलन का शिकार हो गए.

हालांकि इस हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि मलबे से अब तक 35 से अधिक शव निकाले जा चुके हैं जबकि 70 से अधिक लोग लापता हैं.

वैक्सीन

फ़ाइज़र की दो ख़ुराक़ डेल्टा वेरिएंट के ख़िलाफ़ कारगर

फ़ाइज़र की दो ख़ुराक़ कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के ख़िलाफ़ भी पूरी तरह से कारगर है.

एक अध्ययन में कहा गया है कि फ़ाइज़र की दो ख़ुराक डेल्टा वेरिएंट के लिए भी उसी तरह प्रभावी है जैसे की वो अल्फ़ा वेरिएंट के लिए है.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि फ़ाइज़र वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के ख़िलाफ़ अत्यधिक प्रभावी है.

डेल्टा वेरिएंट कोरोना वायरस का नवीनतम वेरिएंट है जो दुनियाभर के कई देशों में पाया गया है. हालांकि अध्ययन में इस बात पर विशेष तौर पर ज़ोर दिया गया है कि वैक्सीन का एक शॉट सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है.

किसान

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आंदोलन के दौरान कितने किसान मरे, इसका रिकॉर्ड नहीं

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ छह महीने से अधिक समय से किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस दौरान कई किसानों की मौत भी हुई है. लेकिन केंद्र सरकार के पास इस संबंध में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद की कार्यवाही के दौरान यह बात कही.

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के मन में आशंकाओं को लेकर कोई अध्ययन नहीं कराया है.

संसद में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कृषि क़ानून विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए किसानों की कुल संख्या पता है, तो तोमर ने कहा कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है.

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