मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने पीएम मोदी से मुलाक़ात के बाद किया बड़ा दावा

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मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने रविवार को कहा है कि अपने सैनिकों को वापस बुलाने को लेकर भारत तैयार हो गया है.
मुइज़्ज़ू के इस बयान के बाद भारत की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में मुइज़्ज़ू ने सितंबर में जीत दर्ज की थी. चुनाव प्रचार के दौरान मुइज़्ज़ू ने मालदीव की 'इंडिया फर्स्ट' पॉलिसी का विरोध किया था. इन चुनावों में इंडिया आउट का नारा भी काफ़ी चर्चा में रहा था.
मुइज़्ज़ू ने चुनावों में वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो मालदीव से 75 भारतीय सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करेंगे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, मुइज़्ज़ू ने रविवार को कहा, ''भारत सरकार से जो हमारी बातचीत हुई है, उसमें वो अपने सैनिकों को मालदीव से हटाने के लिए तैयार हो गई है. विकास संबंधी परियोजनाओं के मुद्दों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय समिति बनाने पर भी सहमति बनी है.''
दुबई में हुए जलवायु सम्मेलन में पीएम मोदी और मोहम्मद मुइज़्ज़ू की मुलाक़ात एक दिसंबर को हुई थी. चुनाव जीतने के बाद मुइज़्ज़ू की पीएम मोदी से यह पहली मुलाक़ात थी.
दुबई से लौटने के बाद मुइज़्ज़ू ने मालदीव आकर यह बात कही है.

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मालदीव लौटने के बाद मुइज़्ज़ू ने क्या कहा
मुइज़्ज़ू तुर्की और दुबई के दौरे पर गए थे.
ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि पीएम मोदी से मुलाक़ात के दौरान मुइज़्ज़ू ने भारतीय सैनिकों की वापसी पर कोई बात नहीं की थी.
मालदीव की न्यूज़ वेबसाइट एवीएएस के मुताबिक़, मुइज़्ज़ू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया. मुइज़्ज़ू ने कहा कि उन्होंने मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर की मौजूदगी में निजी स्तर पर भारतीय सैनिकों की वापसी की बात की थी.
मुइज़्ज़ू ने कहा कि भारतीय सैनिकों की वापसी राजनयिक प्रतिक्रियाओं के अनुसार होगी.
दोनों देशों के बीच बनी इस सहमति को मुइज़्ज़ू की जीत के तौर पर देखा जा रहा है.
मुइज़्ज़ू ने सत्ता संभालने के 100 दिन के भीतर जिन लक्ष्यों को हासिल करने की बात की थी, उसमें भारतीय सैनिकों की वापसी भी शामिल थी.
मुइज़्ज़ू ने कहा कि वो ऐसे हर देश के साथ क़रीबी संबंध रखना चाहते हैं, जो मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान करेगा.

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भारतीय सैनिक मालदीव में क्या कर रहे हैं?
भारत ने मालदीव को साल 2010 और 2013 में दो हेलिकॉप्टर और साल 2020 में एक छोटा विमान तोहफ़े में दिया था.
भारत ने कहा था कि ये विमान राहत और बचाव कार्यों और मेडिकल इमर्जेंसी में इस्तेमाल किए जाने थे.
साल 2021 में मालदीव के सुरक्षा बलों ने बताया कि इन हेलिकॉप्टरों और विमान के संचालन के लिए क़रीब 75 भारतीय सैनिक मालदीव में मौजूद हैं.
भारत मालदीव को सैन्य उपकरण भी मुहैया करवाता है. साथ ही नौसेना के लिए डॉकयॉर्ड बनाने में भी भारत मालदीव की मदद कर रहा है.
भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, ''भारत और मालदीव के बीच इस मुद्दे पर बात हो रही है और दोनों देशों ने भारत की मुहैया करवाई जा रही मदद को अहम माना है.''
भारतीय अधिकारी कहते हैं कि मालदीव ने भारत की मदद को अहम माना है और ये बात चल रही है कि कैसे भारत की बनाई जगहों पर काम जारी रखा जा सके. इस बारे में एक समिति भी बना दी गई है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बारे में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.


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मालदीव में भारत और चीन की कोशिशें
मालदीव में भारत और चीन दोनों अपना दबदबा बनाने की कोशिश में दिखते हैं. माना जाता है कि मुइज़्ज़ू ने जिस गठबंधन के साथ मिलकर ये चुनाव जीता है, वो चीन की तरफ़ झुकाव रखता है.
हालांकि अब तक मुइज़्ज़ू ने खुले तौर पर चीन के प्रति झुकाव वाली कोई बात नहीं कही है. कुछ दिन पहले मुइज़्ज़ू ने कहा था कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि मालदीव में कोई विदेशी सेना ना रहे.
जब मालदीव में राष्ट्रपति का शपथग्रहण समारोह होना था, तो भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए थे. मुइज़्ज़ू ने रिजिजू से भारतीय सैनिकों की वापसी को लेकर बात की थी.
मुइज़्ज़ू ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपना पहला दौरा तुर्की का किया था. अब तक ये परंपरा रही है कि मालदीव के किसी राष्ट्रपति का पहला औपचारिक दौरा भारत का होता रहा है.
मुइज़्ज़ू और पीएम मोदी के बीच हाल ही में दुबई में कॉप-28 सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया था कि पीएम मोदी ने मुइज़्ज़ू को जीत की बधाई दी थी. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौतों को बेहतर करने की दिशा में बात हुई और साझेदारी को बेहतर करने के लिए एक कोर ग्रुप बनाने पर सहमति बनी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, भारत और मालदीव के राष्ट्रप्रमुखों के बीच विकास सहयोग, आर्थिक रिश्तों, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने के लिए बातचीत की गई.
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मालदीव अहम क्यों है?
मालदीव हिंद महासागर में क़रीब 1200 द्वीपों वाला एक देश है, जिसकी लगभग 98 फ़ीसदी आबादी सुन्नी मुस्लिम है. अगर किसी को मालदीव की नागरिकता चाहिए तो उसके लिए मुसलमान होना ज़रूरी है.
मालदीव एक गणतंत्र है, जिसकी आबादी पांच लाख से बस थोड़ी सी ही ज़्यादा है.
भारत और मालदीव के बीच छह दशकों से अधिक पुराने राजनयिक, सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं.
हिंद महासागर में यह ऐसे भौगोलिक जगह पर है कि यह भारतीय और चीनी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है. मालदीव को लंबे अरसे से भारत से आर्थिक और सैन्य मदद मिलती रही है.
कहा जा रहा है कि पिछले कई सालों में भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में मालदीव काफ़ी अहम हो गया है और भारत ने वहाँ सिक्यॉरिटी इन्फ़्रास्ट्रक्चर भी विकसित किए हैं. मालदीव क्वॉड देशों के लिए काफ़ी अहम है. क्वॉड गुट में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हैं.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 2022 में भारत ने मालदीव के आसपास 10 रडार स्टेशन का एक नेटवर्क तैयार किया था. इनका संचालन मालदीव कोस्ट गार्ड की ओर से किया जाता है, जो इंडियन कोस्टल कमांड से संपर्क में रहते हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उथुरु थिला फल्हु द्वीप में नौसेना से जुड़े एक कंस्ट्राक्शन का उद्घाटन किया था. यह मालदीव के साथ 2021 में हुए रक्षा समझौते का हिस्सा था.
जिस तरह से मालदीव भारत के लिए महत्वपूर्ण है उसी तरह चीन के लिए भी यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. चीन लगातार मालदीव में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. उसने वहां बड़े निवेश किए हैं.
2016 में मालदीव ने चीन को अपना एक द्वीप महज 40 लाख डॉलर में 50 सालों के लिए लीज़ पर दी थी. मालदीव ने चीन के वन बेल्ट वन रोड योजना का भी खुल कर समर्थन किया है.
चीन की मालदीव में मौजूदगी उसकी हिंद महासागर की रणनीति का हिस्सा है.
मालदीव ने चीन से क़र्ज़ भी लिया हुआ है, जो चीन ने वहां की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में लगाए हैं.
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