मालदीव में पीएम मोदी से माफ़ी मांगने की अपील और जयशंकर की पड़ोसी देशों पर यह टिप्पणी

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मालदीव की राजनीति इन दिनों दो देशों के बीच बँटकर रह गई है.
देश का सत्ता पक्ष राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के नेतृत्व में चीन की तरफ़ नज़र आता है. वहीं विपक्षी दल भारत समर्थक बताया जा रहा है.
भारत और चीन इस कदर मालदीव की राजनीति में शामिल हो गए हैं कि सड़क से संसद तक चर्चाओं और हंगामे की वजह बने हुए हैं.
मालदीव की संसद में इन दिनों मोहम्मद मुइज़्ज़ू को विपक्ष की ओर से चुनौती मिल रही है.
मालदीव का विपक्ष मोहम्मद मुइज़्ज़ू के भारत को लेकर रवैये से ख़फ़ा है और महाभियोग लाने की तैयारी हो रही है.
विपक्षी दल के नेता ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू से पीएम मोदी और भारत से माफ़ी मांगने के लिए भी कहा है.
मालदीव के विपक्षी दल जम्हूरी पार्टी के नेता गासिम इब्राहिम ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू से अपील की है कि वो औपचारिक तौर पर भारत और पीएम मोदी से माफ़ी मांगें.
इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत और चीन को लेकर अपनी राय रखी है.
जयशंकर ने कहा है कि सब पड़ोसियों के बीच परेशानियां आती हैं, मगर आख़िरकार पड़ोसियों को पड़ोसियों की ज़रूरत होती है.

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जयशंकर ने और क्या कहा
आठ जनवरी 2024 को मोहम्मद मुइज़्ज़ू पांच दिन के चीन दौरे पर गए थे.
अब तक मालदीव के किसी भी राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक दौरा भारत का होता था. मगर मोहम्मद मुइज़्ज़ू पहले तुर्की, सऊदी अरब गए और फिर अपने पहले आधिकारिक दौरे पर चीन गए.
चीन से लौटते ही मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने कहा था- हम छोटे देश हैं इसलिए उन्हें हमें धौंस दिखाने का कोई अधिकार नहीं है.
इसके बाद मालदीव ने भारतीय सैनिकों को देश छोड़ने के लिए 15 मार्च की डेडलाइन भी दी.
ये सब तब हो रहा था, जब जनवरी में मुइज़्ज़ू सरकार के मंत्रियों ने पीएम मोदी की लक्षद्वीप की तस्वीरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
इसके बावजूद चीन से लौटे मुइज़्ज़ू का रवैया भारत पर नरम नहीं दिखा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़- विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ''चीन भारत के पड़ोसियों को प्रभावित करेगा, लेकिन भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति से डरना नहीं चाहिए. सब पड़ोसियों के बीच दिक़्क़तें आती हैं लेकिन आख़िरकार पड़ोसियों को पड़ोसियों की ज़रूरत होती है.''
जयशंकर ने कहा कि चीन के प्रभाव को लेकर प्रतिद्वंद्विता बढ़ी है लेकिन इसे भारतीय कूटनीति का फेल होना कहना ग़लत है.
जयशंकर बोले, ''हमें समझना होगा कि चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में प्रतिस्पर्धी राजनीति के रूप में इन देशों को प्रभावित करेगा. मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए. मुझे लगता है कि हमें कहना चाहिए- ठीक है, वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है. आप अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करें, हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे.''
जयशंकर बोले, ''आज के समय में हमें प्रतिस्पर्धा से घबराना नहीं चाहिए. हमें इसका स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए कि हमारे पास प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है.''
जयशंकर जहां अपने बयान में चीन की ओर निशाना साध रहे थे. वहीं चीन को लेकर ऐसी ही आक्रामकता मालदीव के अंदर भी सुनाई दे रही हैं.

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मालदीव में भारत के पक्ष में विपक्ष
मालदीव के विपक्षी दल जम्हूरी पार्टी के नेता गासिम इब्राहिम ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू से अपील की है कि वो औपचारिक तौर पर भारत और पीएम मोदी से माफ़ी मांगें.
इब्राहिम ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने के लिए राजनयिक सुलह करने के लिए भी मुइज़्ज़ू से अपील की है.
इब्राहिम के बयान को मुइज़्ज़ू की उस प्रतिक्रिया से जोड़कर देख रहा है, जिसमें उन्होंने भारत को निशाने पर लिया था.
पीएम मोदी से माफ़ी मांगने की ये मांग तब उठी है, जब मोहम्मद मुइज़्ज़ू को देश की संसद में विरोध का सामना करना पड़ा है.
इब्राहिम ने कहा, ''पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने इंडिया आउट अभियान की शुरुआत की थी, जिसके कारण भारत और मालदीव के बीच तनाव बढ़ा. पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने भी इस अभियान का विरोध करने में देर की.''
चीन से लौटने के बाद मुइज़्ज़ू ने दवाओं के मामले में भारत पर निर्भरता कम करने की बात कही.
भारत मालदीव को दवाओं की सप्लाई करता रहा है. कोरोना के दौर में भारत ने मालदीव को वैक्सीन पहुंचाई थीं.
इब्राहिम ने कहा- मुइज़्ज़ू भारत से दवाएं लेना बंद करने पर विचार कर रहे हैं और अमेरिका-यूरोप से दवाएं लेने की सोच रहे हैं.
इब्राहिम कहते हैं- भारत इस मामले में काफी आगे है और वो यूरोप को भी दवाएं भेजता है. ऐसे में हम ऐसा नहीं कर सकते.

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भारत को लेकर विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?
मालदीव का विपक्ष बीते दिनों भी चर्चा रहा है.
मालदीव में अभी जो विपक्ष में हैं, वो ज़्यादातर नेता भारत के समर्थक माने जाते रहे हैं जबकि राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू भारत के विरोधी और चीन के समर्थक माने जाते हैं.
कुछ दिन पहले एमडीपी ने मुइज़्ज़ू सरकार के भारत विरोधी रुख़ पर चिंता ज़ाहिर की थी.
दरअसल मालदीव सरकार ने चीन के एक जहाज को माले के बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी.
तब एमडीपी और डेमोक्रेट्स ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि लंबे समय से हमारे सहयोगी रहे भारत को अलग-थलग करना सही नहीं है.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार ने 28 जनवरी को देश की संसद में बड़ा विरोध देखा. सत्ता और विपक्ष के सांसदों के बीच हाथापाई भी हुई. विपक्ष कैबिनेट में चार नए सदस्यों को जोड़ने का विरोध कर रहा है.
मामला बढ़ता देख विपक्ष ने मुइज़्ज़ू के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की तैयारी तक कर ली है.

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पीएम मोदी पर टिप्पणी का मालदीव के विपक्ष ने किया था विरोध
जनवरी 2024 में मालदीव सरकार के मंत्रियों ने जब पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, तब मालदीव के विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था.
मुइज़्ज़ू सरकार ने टिप्पणी करने वाले मंत्रियों, नेताओं को सस्पेंड किया था.
तब विपक्षी दलों ने कहा था कि मंत्रियों को निलंबित करना काफ़ी नहीं है और मालदीव सरकार को भारत से इस विषय पर आधिकारिक तौर पर खेद प्रकट करना चाहिए.
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी मंत्री के बयान की निंदा की थी.
मुइज़्ज़ू के पहले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति थे और उनकी सरकार ने 'इंडिया फर्स्ट' की नीति लागू की थी. वहीं मुइज़्ज़ू ने चुनाव प्रचार में 'इंडिया आउट' का नारा दिया था.
सोलिह ने ऐसे बयानों को संवेदनहीन और संबंध ख़राब करने वाला बताया था.
सोलिह ने तब सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, ''भारत के ख़िलाफ़ मालदीव के सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया पर नफ़रती भाषा इस्तेमाल किए जाने की मैं निंदा करता हूं. भारत मालदीव का हमेशा से अच्छा दोस्त रहा है और हमारे दोनों देशों के बीच सालों पुरानी दोस्ती पर नकारात्मक असर डालने वाले इस तरह के संवेदनहीन बयान देने की हमें इजाज़त नहीं देनी चाहिए.''
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