क्या लक्षद्वीप पर्यटकों की भीड़ के लिए तैयार है?

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- Author, मेरिल सेबेस्टियन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कोच्चि
इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे से एक ऐसा विवाद छिड़ा जिसकी उम्मीद नहीं थी. इससे भारत और उसके पड़ोसी देश मालदीव के रिश्तों में खटास आई. साथ ही, इसने भारत के छोटे से द्वीपसमूह पर पर्यटकों की रुचि को भी बढ़ाया. हालांकि, इससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बैठी.
मालदीव के उत्तर में अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की थी. पीएम मोदी ने स्नॉर्कलिंग तथा लक्षद्वीप के समुद्री तटों का आनंद लेते हुए अपनी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं.
मालदीव के तीन डिप्टी मंत्रियों ने पीएम मोदी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की, जिसने विवाद को जन्म दिया और भारत में सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध हुआ. कई लोगों ने इस पर ज़ोर दिया कि मालदीव के विकल्प के तौर पर लक्षद्वीप बेहतर पर्यटन स्थल हो सकता है.
नतीजतन गूगल पर कभी भी बड़ी संख्या में सर्च न किए जाने वाले लक्षद्वीप के बारे में लोगों ने इतनी जानकारी जुटानी चाही कि ये पिछले सप्ताह सबसे अधिक सर्च किए जाने वाली जगहों में आ गया. भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी मेकमाईट्रिप ने कहा कि मोदी के दौरे के बाद उसके प्लेटफॉर्म पर लक्षद्वीप को सर्च करने वालों में 3400 फ़ीसदी बढ़ोतरी हुई.
अपनी विवादास्पद नीतियों की वजह से कुछ साल पहले स्थानीय लोगों का विरोध झेल चुके लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने लोगों की इस इलाके में बढ़ती रुचि का स्वागत किया है.
उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "लक्षद्वीप की प्राकृतिक ख़ूबसूरती में पर्यटन क्षेत्र के लिहाज़ से भरपूर संभावनाएं हैं. प्रशासन ने कई नई पहले की हैं, जिनमें लोगों के रहने के लिए कमरों की संख्या बढ़ाना शामिल हैं."
लक्षद्वीप के लिए मालदीव को टक्कर देना कितना संभव?

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टाटा समूह ने घोषणा की है कि वह लक्षद्वीप के दो द्वीपों पर वर्ष 2026 तक दो 'विश्व स्तरीय' रिज़ॉर्ट बनाने जा रहा है. इस द्वीपसमूह में कुल 36 द्वीप हैं लेकिन 10 ही ऐसे हैं जहां लोग बसते हैं. लक्षद्वीप जाने वाली एकमात्र एयरलाइन कंपनी ने भी अतिरिक्त उड़ानें शुरू कर दी हैं और निकट भविष्य में अन्य एयरलाइन कंपनियां भी यहां सेवाएं शुरू करने जा रही हैं.
लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अपने मनोहर समुद्री तटों और द्वीपों, साफ़ नीले पानी के लिए प्रचलित लक्षद्वीप को मालदीव की तरह बड़े पर्यटक क्षेत्र में नहीं बदला जा सकता है, क्योंकि ये आकार में छोटा है और यहां की इकोलॉजी भी नाज़ुक है. बहुत से स्थानीय लोगों का भी कहना है कि वे यहां एक ज़िम्मेदार पर्यटन व्यवस्था चाहते हैं, जिसका वे भी हिस्सा हों. उनकी इच्छा है कि यहां बड़े पैमाने पर विकास योजनाएं न आएं, जो आम लोगों की ज़िंदगी को पलट दे.
एक सरकारी वेबसाइट के अनुसार, "यहां लोगों का मुख्य रोज़गार मछलीपालन, नारियल की खेती और नारियल के रेशेदार छिलके (कॉइर) के सामान बनाना है." ये वेबसाइट पर्यटन को यहां की उभरता उद्योग बताती है.
अतिरिक्त उड़ानों की शुरुआत से पहले लक्षद्वीप पहुंचने के सिर्फ़ दो रास्ते थे. एलायंस एयर की ओर से संचालित 72 सीटों वाला विमान, जो रोज़ाना केरल के कोच्चि से लक्षद्वीप के अगाट्टी आइलैंड के एयरपोर्ट तक जाने वाली एकमात्र उड़ान है, और कोच्चि से जहाज़ के ज़रिए, जिसकी यात्रा पूरी होने में चार दिन लगते हैं.
लक्षद्वीप में एंट्री के लिए प्रशासन से परमिट भी लेना पड़ता है.
लक्षद्वीप की 70 हज़ार लोगों की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र एनसीपी सांसद पीपी मोहम्मद फ़ैज़ल कहते हैं, "परिवहन, रहने की व्यवस्था और ज़मीन पर मौजूद आधारभूत ढांचा सबसे बड़ी रुकावटें हैं."
वह कहते हैं, "पीएम मोदी जिस बंगाराम द्वीप पर ठहरे थे, वहां पर्यटकों के रहने के लिए केवल 36 कमरे हैं."
मौजूदा समय में इस द्वीप का अधिकांश पर्यटन क्रूज़ जहाज़ों के ज़रिए संचालित होता है. पर्यटक दिन में जहाज़ों से द्वीप पर जाकर घूमते हैं और रात बिताने के लिए अपने-अपने क्रूज़ शिप पर लौट जाते हैं.
इसके उलट मालदीव में पर्यटकों के रहने के लिए रिज़ॉर्ट, होटलों और गेस्टहाउस सहित सैकड़ों विकल्प हैं.
फ़ैज़ल कहते हैं, "जो मालदीव के पास है, वह लक्षद्वीप में समुद्री तटों, अंडर वॉटर स्पोर्ट्स के ज़रिए तो हासिल किया जा सकता है लेकिन बुनियादी ढांचे के मामले में, अभी हमें मीलों दूर का सफ़र तय करना है."
उनका कहना है कि किसी भी तरह का विकास करने से पहले प्रशासन और यहां रहने वाले आम लोगों के बीच मतभेदों को दूर करना ज़रूरी है.
लक्षद्वीप के प्रशासक से वहां की जनता नाराज़ क्यों?

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लक्षद्वीप की 96 फ़ीसदी आबादी मुसलमान है और भारतीय जनता पार्टी के नेता रह चुके प्रफ़ुल्ल पटेल को साल 2021 में यहां का प्रशासक बनाए जाने के बाद से यहां तनाव की स्थिति बनी.
प्रफ़ु्ल्ल पटेल ने यहां स्कूलों के मेन्यू से मीट को हटाने और द्वीप पर प्रशासन के नियंत्रण को मज़बूती देने वाले क़ानून का प्रस्ताव लाने जैसे कई विवादित निर्णय किए.
बीबीसी ने प्रफ़ुल्ल पटेल के कार्यालय, लक्षद्वीप के कलेक्टर और वहां के पर्यटन और सूचना विभाग को कई प्रश्न ईमेल के ज़रिए पूछे, लेकिन हमें अभी तक जवाब नहीं मिला.
कुछ साक्षात्कारों में प्रफ़ुल्ल पटेल ने अपने प्रशासन की नीतियों को ये कहते हुए बचाव किया उनका एकमात्र मकसद 'लक्षद्वीप का विकास' था.
अगाट्टी द्वीप पर ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले अल्ताफ़ हुसैन कहते हैं कि पीएम मोदी के दौरे के बाद भावी पर्यटकों की ओर से की जाने वाली पूछताछ 30 से 40 फ़ीसदी बढ़ गई है.
भविष्य में अगाट्टी पर अपना रिज़ॉर्ट बनाने की इच्छा रखने वाले हुसैन कहते हैं कि यहां के स्थानीय लोगों को मौके मिलने चाहिए न कि इसे बड़े-बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में जाना चाहिए.
वह कहते हैं, "इन परियोजनाओं के आने से शायद हमें छोटी-मोटी नौकरी मिल जाए लेकिन हम ये नहीं चाहते. हम इन परियोजनाओं में मालिकाना हक़ चाहते हैं न कि सिर्फ़ अपना योगदान देने वाले श्रमिक बने रहना चाहते हैं."
कैसे हासिल होगा लक्ष्य

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विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षद्वीप में किसी भी तरह के विकास के लिए आजीविका से जुड़ी चिंताओं और जलवायु परिवर्तन की आशंकओं के बीच संतुलन बैठाना होगा.
वर्ष 1996 से इन द्वीपों पर शोध कर रहे मरीन बायोलॉजिस्ट और कोरल रीफ़ इकोलॉजिस्ट रोहन आर्थर कहते हैं, "लक्षद्वीप के द्वीपों लंबे समय तक टिके रहना इस पर निर्भर है कि यहां के कोरल रीफ़, लैगून और तट वैसे ही रहें, जैसे वे हैं."
ये चीज़ें उस इकोलॉजिकल बुनियादी ढांचे के लिए अहम है जो इन नन्हें टापुओं को मज़बूती देती हैं
लेकिन वह कहते हैं कि पिछले कुछ दशकों में, हिंद महासागर का ये हिस्सा विनाशकारी हीटवेव से जूझ रहा है. इसका संबंध अल-नीनो से है जिससे कोरल रीफ़ की सेहत पर ज़रूर असर हुआ है.
इस साल अल-नीनो का असर और बढ़ने की आशंका है. इस पर वह कहते हैं कि पता नहीं इसका लक्षद्वीप के कोरल रीफ़ पर क्या प्रभाव देखने को मिलेगा.
उन्होंने कहा कि अनियोजित या टुकड़ों में किया गया विकास, जो जलवायु को ध्यान में रखकर न किया जा रहो, केवल लक्षद्वीप में रहने लायक स्थितियों को मुश्किल बनाएगा.
तो फिर यहां टिकाऊ पर्यटन किस तरह से संभव हो सकता है?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि लग्ज़री पर्यटन की बजाय, जिससे कार्बन फुटप्रिंट असमान रूप से बढ़ेगा, इस द्वीपसमूह को ऐसे मॉडल की ज़रूरत है जो इसकी नाज़ुक इकोलॉजी और इसके लोगों की ज़रूरतों को केंद्र में रखता हो.
एनसीपी सांसद फ़ैज़ल कहते हैं कि साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट के नियुक्त किए जस्टिस रविंद्रन आयोग की ओर से दिए गए प्लान के रूप में लक्षद्वीप के पास पहले से ही 'विकास का ग्रंथ' मौजूद है.
प्रफुल्ल पटेल कहते हैं कि ये प्लान लागू हो चुका है लेकिन फ़ैज़ल इससे इनकार करते हुए कहते हैं कि प्रशासन ने बमुश्किल ही कोर्ट की ओर से दिए गए दिशानिर्देशों का कभी पालन किया होगा.
पुराने प्रबंधन योजना के तहत किसी भी विकास परियोजना को स्थानीय निर्वाचित सरकारी इकाइयों के साथ सलाह-मशविरा से लागू करने, लैगून, कोरल और अन्य इकोसिस्टम के संरक्षण के लिए रेत खनन पर प्रतिबंध और ऐसे इलाकों में पर्यटन परियोजनाओं का सुझाव देती है जहां लोग न बसते हों.
पर्यटकों को भी अधिक ज़िम्मेदाराना माइंडसेट के साथ यहां आने की ज़रूरत बताई गई.
आर्थर एक विज़न बताते हैं जहां लक्षद्वीप के दौरे में पर्यटकों के लिए यहां के गहरे सांस्कृतिक इतिहास को समझने, ऐसा खाना जो स्थानीय विधियों से बना हो और टिकाऊ स्रोत से मिला हो, स्थानीय गाइडों और गोताखोरों के ज़रिए रीफ़ के बारे में समझना शामिल है.
वह कहते हैं, "ऐसे पर्यटन की कल्पना करना शायद संभव हो सकता है जो स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को न सिर्फ़ आगे बढ़ाए बल्कि इसका ध्यान भी रखे और पर्यटकों को गांव का जीवन जीने का मौका मिले."
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