क्या पुतिन के नक़्श-ए-क़दम पर चलकर तुर्की को रूस जैसा बनाना चाहते हैं अर्दोआन?

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- Author, जेरार्डो लिसारडी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
तुर्की में राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इकरम इमामोअलू को पिछले दिनों गिरफ़्तार कर लिया गया. इस गिरफ़्तारी का वहां काफी विरोध हो रहा है.
अमेरिकी थिंक टैंक 'मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट' के टर्किश प्रोग्राम की डायरेक्टर गोनुल तोल इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि पिछले दिनों हुई इमामोअलू की गिरफ़्तारी इस्तांबुल के बदले परिदृश्य से अलग भी बहुत कुछ बताती है.
उन्होंने इसे तुर्की की पूरी राजनीतिक व्यवस्था में एक 'टर्निंग प्वाइंट' करार दिया है.
गोनुल तोल कहती हैं कि अर्दोआन 22 साल बाद भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इस गिरफ़्तारी के लिए सत्ता में बने रहने की उनकी ख्वाहिश ज़िम्मेदार है.

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तोल ने बीबीसी मुंडो को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अर्दोआन तुर्की को रूसी शैली का अधिनायकवादी देश बना देना चाहते हैं. जहां वो अपनी सुविधा से अपना दुश्मन चुन सकें और चुनाव के नतीजे भी उनकी मर्ज़ी के मुताबिक़ हों.
उन्होंने कहा कि इस्तांबुल के मेयर इकरम इमामोअलू अर्दोआन के लिए राजनीतिक चुनौती हैं क्योंकि वो विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार हो सकते हैं.
उन्हें तुर्की के सभी वर्गों के मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है.
'अर्दोआन ने तुर्की के लोकतंत्र को नुक़सान पहुंचाया है'

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गोनुल तोल का मानना है कि तुर्की के प्रमुख विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के पास अब एक ही चारा है कि वो इमामोअलू की गिरफ़्तारी पर अपना प्रदर्शन जारी रखे. हालांकि उन्हें उनके दमन की आशंका भी दिख रही है.
गोनुल तोल ने बीबीसी मुंडो से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि अर्दोआन तुर्की के लोकतंत्र को नुक़सान पहुंचाने के कई कदम उठा चुके हैं.
उन्होंने कहा राजनीति विज्ञानियों के मुताबिक़ हाल के कुछ वर्षों के दौरान तुर्की में प्रतिस्पर्द्धी अधिनायकवादी शासन रहा है.
इसका मतलब ये है कि यहां चुनाव हो रहे हैं. राजनीतिक दलों का अस्तित्व है और समय-समय पर सत्ता में रहे लोगों को सत्ता गंवाना भी पड़ी है. लेकिन अधिनायकवाद के लक्षण हैं.
तोल ने कहा, '' हमने 2024 में तुर्की में आयोजित नगरनिगम चुनावों में हर शहर में मुख्य विपक्षी दल को जीतते देखा. ये अर्दोआन की सरकार को गंभीर झटका था. इसलिए तुर्की में अभी भी बैलेट बॉक्स की अहमियत बनी हुई है.''

23 मार्च को अर्दोआन सरकार ने इमामोअलू के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और चरमपंथी समूह को मदद करने का आरोप दाखिल किया.
प्रदर्शनकारियों ने इमामोअलू की हिरासत को गैरक़ानूनी और राजनीति से प्रेरित बताया है.
इमामोअलू ने अपनी गिरफ़्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, '' ये लोगों की इच्छा पर की गई चोट है. मुझे गिरफ़्तार करने सैकड़ों पुलिसकर्मी मेरे दरवाजे पर पहुंच गए. लेकिन मुझे लोगों पर भरोसा है.''
हालांकि अदालत ने कुर्दिश राष्ट्रवादी संगठन पीकेके को समर्थन करने के आरोप में उनके ख़िलाफ़ दूसरा गिरफ़्तारी वारंट जारी करने से इनकार कर दिया था. पीकेके 1980 से ही तुर्की सरकार से लड़ रहा है.
तुर्की, अमेरिका और ब्रिटेन ने पीकेके को आतंकवादी संगठन घोषित करने के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया है.
इमामोअलू कैसे बने अर्दोआन के मजबूत प्रतिद्वंद्वी

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गोनुल तोल ने कहा, '' ये साफ है कि इमामोअलू पर लगाए गए राजनीति से प्रेरित हैं. उनके वकीलों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. अर्दोआन ऐसे समय में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर हमला कर रहे हैं जब राष्ट्रपति के तौर पर वो चुनावों में कमजोर हो रहे हैं. तुर्की की अर्थव्यवस्था को जूझना पड़ रहा है और 2028 में राष्ट्रपति चुनाव हैं.''
वो कहती हैं कि तुर्की में अब कानून का शासन नहीं है. अदालतों पर राजनीतिक असर है. उन पर पूरी तरह अर्दोआन का नियंत्रण है. किसी को एक्स पर कुछ लाइक करने के आरोप में जेल भेजा जा सकता है.
गोनुल तोल का कहना है कि तुर्की में निर्णायक मोड़ तब आया जब अर्दोआन के ख़िलाफ़ तख़्तापलट की कोशिश नाकाम हो गई. उस दौरान अदालतों को उन्होंने अपने हिसाब से वफादारों से भर दिया.
उन्होंने कहा, '' इमामोअलू काफी लोकप्रिय राजनेता हैं. उन्हें सिर्फ मुख्य विपक्षी दल से नहीं बल्कि तुर्की के समाज के अलग-अलग वर्गों का समर्थन भी हासिल है. उन्हें कंजर्वेटिव से लेकर राष्ट्रवादियों तक का समर्थन हासिल है. तुर्क और कुर्द दोनों उनका समर्थन कर रहे हैं. ये अर्दोआन के लिए ख़तरा बन सकता है.''
तोल कहती हैं. ''इमामोअलू अर्दोआन की तरह ही वोटरों से कनेक्ट कायम कर सकते हैं. वो कम उम्र के हैं और करिश्माई हैं. यही बातें उन्हें अर्दोआन के मुक़ाबले एक मजबूत उम्मीदवार बनाती हैं. चुनावों में वो अर्दोआन से आगे रहे हैं.''
'पुतिन के नक़्श-ए-क़दम पर चल रहे हैं अर्दोआन'

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तोल ने अर्दोआन की तुलना रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से की है. वो लोकतंत्र को बहुसंख्यकों के शासन के तौर पर देखते हैं.
वो कहती हैं, '' निश्चित तौर पर वो लिबरल नहींं हैं. दोनों रूढ़िवादी मूल्यों की वक़ालत करते हैं. वो अपने-अपने देश के इतिहास को लेकर मोहित हैं. अर्दोआन सोचते हैं कि ऑटोमन साम्राज्य का पतन एक त्रासदी थी. वहीं पुतिन सोवियत संघ के बिखरने को त्रासदी मानते हैं. देखा जाए तो एक तरह से दोनों एक जैसा सोचते हैं.''
''लेकिन रूस और तुर्की एक जैसे नहीं हैं. रूस के पास ऊर्जा का विशाल स्रोत है जो उसे आर्थिक तौर पर टूटने से बचाए हुए है. जबकि तुर्की अपनी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बनाए रखने के लिए दूसरों पर निर्भर है.''
क्या संविधान बदल सकते हैं अर्दोआन

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कुछ विश्लेषकों का कहना है कि गिरफ़्तारी इमामोअलू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से नहीं रोक सकती. लेकिन अगर उन पर कोई आरोप साबित हो जाता है तो वो राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
18 मार्च को इस्तांबुल यूनिवर्सिटी ने उनकी डिग्री रद्द कर दी थी. अगर अदालत ने इस्तांबुल यूनिवर्सिटी का ये फै़सला रद्द नहीं किया तो वो राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
तुर्की के संविधान के मुताबिक़ राष्ट्रपति बनने के लिए उम्मीदवार की उच्च शिक्षा जरूरी है.
तुर्की की सर्वोच्च चुनाव परिषद ये फ़ैसला करेगी कि इमामोअलू राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं.
अर्दोआन ने 2023 में तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था.
संविधान के मुताबिक़ वो 2028 के बाद राष्ट्रपति नहीं बन सकते. लेकिन उनके आलोचकों का कहना है कि वो एक और बार राष्ट्रपति बनने के लिए संविधान बदल सकते हैं.
अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में निर्धारित है. लेकिन इससे पहले भी चुनाव हो सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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