बुलडोज़र और गोरखपुर पर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बयानों की चर्चा

अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ ने एक-दूसरे पर टिप्पणियां की हैं

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलडोज़र और एक-दूसरे पर कई बार बयान दिए हैं जिसकी चर्चाएं हैं.

अखिलेश यादव ने राज्य में बुलडोज़र एक्शन को लेकर कहा है कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो बुलडोज़र का रुख़ गोरखपुर की ओर होगा.

इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट किया है कि “अगर आप और आपका बुलडोज़र इतना ही सफल है तो अलग पार्टी बनाकर ‘बुलडोज़र’ चुनाव चिन्ह लेकर चुनाव लड़ जाइए.”

हालांकि उन्होंने इस ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया है

अखिलेश यादव ने पहले क्या कहा था?

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मंगलवार को समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के नाम पर बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि साल ‘2027 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार आएगी तो बुलडोज़र का रुख़ गोरखपुर की तरफ़ होगा.’

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इस पर अखिलेश यादव से पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा है कि ‘इसमें क्या ग़लत कहा?’

इसके बाद पत्रकारों ने उनसे दोबारा सवाल किया कि ‘गोरखपुर में कुछ अवैध है क्या?’ इस सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि ‘वैध या अवैध तय करना संस्थानों का काम है.’

अखिलेश यादव के बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ‘बुलडोज़र पर हर एक व्यक्ति के हाथ फ़िट नहीं हो सकते, इसके लिए दिल और दिमाग़ दोनों चाहिए.’

देश के कई राज्यों में अभियुक्तों की संपत्ति के ख़िलाफ़ कथित तौर पर 'बुलडोज़र एक्शन' की कार्रवाई करने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख़्त टिप्पणी की थी.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ ने कहा कि किसी का घर सिर्फ़ इसलिए कैसे ध्वस्त किया जा सकता है क्योंकि वह अभियुक्त है.

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योगी आदित्यनाथ का आया जवाब

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अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया है.

उन्होंने कहा है कि बुलडोज़र पर हर एक व्यक्ति के हाथ फ़िट नहीं हो सकते, इसके लिए दिल और दिमाग़ दोनों चाहिए.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “बुलडोज़र जैसी क्षमता और दृढ़ प्रतिज्ञा जिसमें हो वही इसे चला सकता है. दंगाइयों के आगे नाक रगड़ने वाले लोग बुलडोज़र के सामने वैसे ही पस्त हो जाएंगे.”

समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव का बयान जारी किया गया था जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘साल 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बुलडोज़र का रुख़ गोरखपुर की तरफ़ होगा.’

वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के महंत हैं और साथ ही वो गोरखपुर सीट से लगातार पांच बार सांसद भी रहे हैं.

पत्रकारों के साथ बातचीत में अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि ‘बुलडोज़र में दिमाग़ नहीं होता है, उसमें स्टीयरिंग होता है जिससे वो चलता है.’

इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश की जनता कब किसका स्टीयरिंग बदल दे या दिल्ली वाले कब किसकी स्टीयरिंग बदल दें.’

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गोरखपुर में भी कुछ अवैध है क्या? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि वैध या अवैध तय करना संस्थानों का काम है, बीजेपी तयशुदा रूप से चुनती है कि क्या वैध या अवैध है.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “आप लखनऊ में चले जाइये और लिस्ट निकालकर देखिए कि जितनी भी एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) की बिल्डिंग हैं, उस पर क्यों नहीं बुलडोज़र चल रहे हैं. अकबरनगर में बुलडोज़र चला रहे हैं लेकिन इसके आगे बुलडोज़र क्यों नहीं चलता.”

अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर भी बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि ‘ये न्यायालय का बुलडोज़र है. क्या मुख्यमंत्री आवास का नक़्शा पास है, अगर नक़्शा ही सवाल है तो मुख्यमंत्री उसके काग़ज़ दिखा दें. इसका मतलब है कि जिनसे आपको बदला लेना था, ताक़त दिखानी थी, तो आपने जान-बूझकर बुलडोज़र चला दिया.’

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अखिलेश यादव ने अब क्या कहा

योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आने के बाद अब अखिलेश यादव ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट करके कहा है कि अगर बुलडोज़र इतना ही सफल है तो पार्टी बना लीजिए.

उन्होंने इसमें किसी का नाम नहीं लिखा है लेकिन माना जा रहा है कि ऐसा उन्होंने सीएम योगी के लिए लिखा है.

अखिलेश यादव ने लिखा, “अगर आप और आपका बुलडोज़र इतना ही सफल है तो अलग पार्टी बनाकर ‘बुलडोज़र’ चुनाव चिन्ह लेकर चुनाव लड़ जाइए. आपका भ्रम भी टूट जाएगा और घमंड भी. वैसे भी आपके जो हालात हैं, उसमें आप भाजपा में होते हुए भी ‘नहीं’ के बराबर ही हैं, अलग पार्टी तो आपको आज नहीं तो कल बनानी ही पड़ेगी.”

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इसके बाद बुधवार को योगी आदित्यनाथ ने फिर एक-बार बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधा है.

उन्होंने प्रयागराज में एक कार्यक्रम में कहा कि 2017 से पहले ‘चाचा भतीजे के द्वारा ऐसी लूट की जाती थी कि एरिया बांट दिए जाते थे.’

“किधर चाचा जाएगा, कहां भतीजा जाएगा. अलग-अलग जनपद और कमीश्नरी बांट दी जाती थी और वसूली करते थे. वसूली में कम और ज़्यादा होता था तो चाचा को धक्का देकर बाहर कर दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.”

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दो सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोज़र एक्शन' पर कड़ी टिप्पणी की थी.

सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, "किसी का घर केवल इसी आधार पर कैसे ढहाया जा सकता है कि वो किसी मामले में अभियुक्त है?”

इसके आगे जस्टिस गवई ने कहा, “कोई व्यक्ति दोषी भी है तो क़ानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसके घर को ध्वस्त नहीं किया जा सकता."

तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी इमारत को ढहाने की कार्रवाई इसलिए नहीं की गई है कि वो शख़्स किसी अपराध में अभियुक्त था.

उन्होंने अदालत को बताया, 'हमने एफिडेविट के माध्यम से दिखाया है कि नोटिस काफ़ी पहले ही भेजा गया था.'

उन्होंने विस्तार से बताया कि ढहाने की प्रक्रिया एक स्वतंत्र मामला है जिसका किसी भी अपराध से कोई संबंध नहीं है.

वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे और सीयू सिंह ने इसके जवाब में कहा कि घर इस कारण ध्वस्त किए गए क्योंकि वो किसी मामले के अभियुक्त हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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