सुप्रीम कोर्ट की बुलडोज़र चलाने पर सख़्त टिप्पणी: एक नज़र उन विवादित मामलों पर

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ ने राज्य सरकारों के ‘बुलडोज़र एक्शन’ पर सवाल खड़े किए थे.
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जस्टिस बीआर गवई ने पूछा, "किसी का घर केवल इस आधार पर कैसे ढहाया जा सकता है कि वो किसी मामले में अभियुक्त है?”
जस्टिस गवई ने यह भी कहा, “कोई व्यक्ति दोषी भी है तो क़ानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसके घर को ध्वस्त नहीं किया जा सकता."

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी इमारत को ढहाने की कार्रवाई इसलिए नहीं की गई है कि वो शख़्स किसी मामले में अभियुक्त था.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमने एफिडेविट के माध्यम से दिखाया है कि नोटिस काफ़ी पहले ही भेजा गया था.''
हालाँकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय का एक ट्वीट कहता है कि राज्य में बुलडोज़र की कार्रवाई कथित पेशेवर अपराधियों और माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ है. यह ट्वीट जून 2022 का है.
उत्तर प्रदेश का 'बुलडोज़र एक्शन'

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उत्तर प्रदेश में कई ऐसी संपत्तियों पर बुलडोज़र चलाया गया है, जब संपत्ति के मालिक का नाम किसी विवाद या किसी आपराधिक मामले से जुड़ा था.
जावेद मोहम्मद- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जून 2022 में मुस्लिम समुदाय ने एक प्रदर्शन किया था. इसमें जावेद नाम के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को गिरफ़्तार भी किया गया था.
यह प्रदर्शन बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ था. नूपुर शर्मा पर एक टीवी चैनल पर डिबेट के दौरान पैग़म्बर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था.
उस वक़्त प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने जावेद मोहम्मद का घर बुलडोज़र से ढहा दिया था. प्राधिकरण का कहना था कि ये घर अवैध तरीक़े से बनाया गया था.
हालांकि जावेद मोहम्मद के वकीलों का कहना है कि जिस घर को पीडीए ने गिराया था, उसके मालिक जावेद मोहम्मद नहीं बल्कि उनकी पत्नी परवीन फ़ातिमा हैं और यह घर उन्हें उनके माता-पिता से शादी के पहले तोहफ़े के रूप में मिला था.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने योगी सरकार के इस क़दम पर सवाल उठाते हुए सर्वोच्च अदालत से मामले पर स्वत: संज्ञान लेने की अपील भी की थी.
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया था कि 'अपराधियों/माफ़ियाओं के विरुद्ध बुलडोज़र की कार्रवाई सतत जारी रहेगी.'
हाजी रज़ा - उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एसपी नेता हाजी रज़ा के चार मंज़िला शॉपिंग कॉम्पलेक्स पर कुछ ही दिन पहले बुलडोज़र एक्शन हुआ था. हाजी रज़ा पर आरोप था कि उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान कथित तौर पर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
अतीक़ अहमद- उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता अतीक़ अहमद के कई क़रीबियों के घर पर साल 2023 के मार्च महीने में बुलडोज़र चलाए गए थे. इससे पहले 24 फ़रवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे.
उमेश पाल की हत्या के बाद राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वो राज्य में माफ़ियाओं को मिट्टी में मिला देंगे.
साल 2004 में बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या के बाद जब साल 2007 में मायावती सत्ता में लौटी थीं तो उनकी सरकार ने भी अतीक़ अहमद और उनके क़रीबियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की थी.

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विकास दुबे- साल 2020 के जून महीने में गैंगस्टर विकास दुबे के घर पर बुलडोज़र चला था.
विकास दुबे के ख़िलाफ़ कई आपराधिक मामले दर्ज थे.
इसके पहले गैंगस्टर विकास दुबे और उनके साथियों को पकड़ने के लिए पुलिस कानपुर देहात ज़िले के बिकरु गांव पहुंची थी. इसमें दोनों तरफ़ से गोलीबारी हुई थी, जिसमें 8 पुलिसवालों की मौत हो गई थी. उसके बाद विकास दुबे फ़रार हो गए थे.
बाद में उनके घर के एक हिस्से को बुलडोज़र चलाकर ढहा दिया गया था.
उत्तर प्रदेश के रिटायर आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे के मुताबिक़, "बाक़ी राज्यों का मुझे नहीं पता, लेकिन मैंने देखा है कि यूपी की योगी सरकार ने सबसे पहले सारे माफ़ियाओं की सूची बनवाई और उनकी संपत्ति के ख़िलाफ़ कुछ पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ औपचारिक कार्रवाई शुरू की थी."
"यूपी सरकार ने माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तैयारी पहले से कर रखी थी. इसलिए सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की तरफ़ से तुषार मेहता ने कहा कि बुलडोज़र एक्शन का किसी शख़्स का अपराध में शामिल होने से कोई लेना देना नहीं है."
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यूपी ही नहीं देश के कई राज्यों में हाल के वर्षों में कई बुलडोजर एक्शन विवादों में रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2022 में अप्रैल से जून के बीच भारत के पाँच राज्यों में सज़ा के तौर पर घरों पर बुलडोज़र चलाए गए.
ये राज्य हैं- असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली. एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ इनमें से कई मामलों में निर्धारित क़ानूनी प्रक्रिया का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया.

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अन्य राज्यों में भी 'बुलडोज़र एक्शन'
बुलडोज़र चलाने की कार्रवाई बाद में मध्य प्रदेश में भी हुई और उसके बाद राज्य के उस वक़्त के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कुछ लोग सोशल मीडिया पर 'बुलडोज़र मामा' कहकर संबोधित करने लगे थे.
साल 2022 में मार्च के महीने में एमपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक तौर पर कहा था, "कलेक्टर, एसपी, आईजी सुन लें ये बुलडोज़र कब काम आएंगे, तोड़ दो ऐसे गुंडे बदमाशों को जो बहन और बेटी की तरफ ग़लत नज़र उठाकर देखते हैं."
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौर में शुरू हुई ऐसी कार्रवाई आगे भी चलती रही है.
हाजी शहजाद अली- मध्य प्रदेश के छतरपुर में पिछले महीने यानी अगस्त में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक विवादित टिप्पणी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था. इस दौरान पुलिस को ज्ञापन देने पहुँची भीड़ ने कोतवाली पर पत्थरबाज़ी कर दी थी.
इस मामले में कांग्रेस के स्थानीय नेता हाजी शहज़ाद अली पर भी आरोप लगा था. इसी मामले के बाद हाजी शहज़ाद के मकान पर बुलडोजर चला दिया गया था.
इस मामले पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था.
"क्या ये न्याय है ? छतरपुर, मध्य प्रदेश में प्रशासन ने हाजी शहज़ाद का सिर्फ घर नहीं तोड़ा बल्कि घर में खड़ी गाड़ियाँ भी बुलडोज़ कर दीं."
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इसी तरह से मध्य प्रदेश के रीवा में साल 2022 के दिसंबर में पंकज त्रिपाठी नाम के शख़्स का घर बुलडोज़र से गिरा दिया गया था.
पंकज त्रिपाठी के उपर एक युवती के ख़िलाफ़ अपराध का आरोप लगा था और उसे गिरफ़्तार भी कर लिया गया था.
इसपर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया था, “मध्य प्रदेश की धरती पर महिलाओं पर अत्याचार करने वाला कोई बख्शा नहीं जाएगा.”
इस ट्वीट में कहीं ऐसा ज़िक्र नहीं था कि पंकज त्रिपाठी के घर के निर्माण में किसी क़ानून का उल्लंघन हुआ था या नहीं.
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जहांगीरपुरी- राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में दो साल पहले हनुमान जयंती के मौक़े पर हिंसा हुई थी. उसके कुछ दिनों बाद दिल्ली नगर निगम ने हिंसा वाली जगह पर बुलडोज़र से कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले ही दिन रोक लगा दी थी.
पूरे घर को सज़ा देना कितना सही

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अग्रेज़ी पत्रिका फ़्रंटलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ देश भर में पिछले दो साल में डेढ़ लाख़ से ज़्यादा घरों को गिरा दिया गया, जिससे 7 लाख़ से ज़्यादा लोग बेघर हो गए.
राज्य सरकारों के बुलडोज़र एक्शन पर यह आरोप भी लगा है कि इस तरह की कार्रवाई ज़्यादातर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ की गई है. एक सवाल यह भी उठाया जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी अपराध का अभियुक्त है तो उसकी सज़ा पूरे परिवार को क्यों दी जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार को ऐसे मामलों पर भी टिप्पणी की है और कहा है कि लड़के की ग़लती के कारण पिता का घर गिराना सही नहीं है.
राजेश पांडे कहते हैं, "यह सही है कि बुलडोज़र एक्शन हाल के सालों में ज़्यादा बढ़े हैं. इससे पहले पुलिस कुर्की की कार्रवाई करती थी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















