प्रयागराज हिंसा: जावेद मोहम्मद कौन हैं, जिनके घर पर चला बुलडोज़र

जावेद मोहम्मद

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इमेज कैप्शन, रविवार को जावेद मोहम्मद के घर को बुलडोज़र से ढहाया गया
    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, प्रयागराज से

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जुमे की नमाज़ के बाद भड़की हिंसा और पथराव के मामले में पुलिस ने अब तक 92 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस की एफ़आईआर में 70 लोगों को नामज़द किया गया है और उन पर 29 गंभीर धाराओं में मुक़दमे दर्ज किए गए हैं.

रविवार को पुलिस की मौजूदगी में प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) ने घटना के 'मुख्य अभियुक्त' जावेद मोहम्मद का घर बुलडोज़र से पूरी तरह गिरा दिया.

उसके पहले उनके घर पर नोटिस चिपकाया गया था जिसमें बुलडोज़र चलाए जाने की वजहों के बारे में बताया गया था. इस नोटिस के मुताबिक़ उन्हें अनाधिकृत रूप से घर के निर्माण के मामले में 10 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसमें सुनवाई 24 मई के लिए तय हुई थी.

पीडीए के दावे के मुताबिक़, जावेद मोहम्मद या उनके वकील कोई भी सबूतों और दस्तावेज़ों के साथ पेश नहीं हुए. इसलिए 25 मई को जावेद मोहम्मद को आदेश जारी किया गया कि वो 9 जून तक अपना घर ध्वस्त करें. चूंकि उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए 12 जून को सुबह 11 बजे तक उन्हें घर खाली करने का नोटिस किया गया और इसके बाद रविवार को उस पर पीडीए ने बुलडोज़र चलाया.

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पुलिस ने किया घर से असलहा बरामद होने का दावा

प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार का कहना है कि हिंसा की घटना में तत्परता से कार्रवाई की जा रही है है और सबूत मिलने पर ही आगे एक्शन लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी बेक़सूर पर कार्रवाई नहीं होगी.

अजय कुमार ने बताया, "रविवार को जावेद मोहम्मद उर्फ़ जावेद पंप नाम के अभियुक्त के अवैध निर्माण पर ज़िला प्रशासन और पीडीए द्वारा कार्रवाई की गई है. अभी तक की तफ्तीश में वह पूरी घटना का सूत्रधार बनकर आया है. इस दौरान घर की छानबीन भी की गई, जिसमें अवैध हथियार और आपत्तिजनक पोस्टर शामिल हैं. इसमें एक अवैध 12 बोर की राइफ़ल, एक 315 बोर की राइफ़ल और कई कारतूस बरामद हुए हैं. कुछ कागज़ात भी बरामद हुए हैं."

घर से बरामद हुए दस्तावेज़ों के बारे में एसएसपी अजय कुमार ने कहा, "इनमें जावेद मोहम्मद उर्फ़ जावेद पंप की ओर से न्यायालय पर तल्ख और आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं."

पुलिस का कहना है कि इन सभी चीज़ों को सबूतों में शामिल किया जायेगा ताकि इन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जा सके.

पुलिस ने ये भी कहा कि घर से कुछ क़िताबें, साहित्य, झंडा, पोस्टर, बैनर आदि मिले हैं और इन सभी की पड़ताल की जाएगी कि ये किसने लिखा है, क्यों लिखा है और लिखने वाले की मंशा क्या है.

पुलिस ने कहा कि बच्चों को आगे करके दंगा और पथराव करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा.

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अब तक क्या-क्या हुआ है?

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  • पैग़ंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के विरोध में जुमे की नमाज़ के बाद कई शहरों, रांची, हावड़ा समेत कई शहरों में प्रदर्शन और हिंसा
  • उत्तर प्रदेश के कानपर, सहारनपुर और प्रयागराज में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, अब तक 306 लोग को गिरफ्तार
  • हाल ही में एकटीवी चैनल पर चर्चा के दौरान बीजेपी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की
  • टिप्पणी पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया. वीडियो वायरल होने के बाद क़तर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों ने तल्ख़ शब्दों में अपनी आपत्ति जताई.
  • कई खाड़ी देशों ने भारतीय राजदूतों को भी तलब कर आपत्ति ज़ाहिर की
  • विरोध बढ़ने के बाद बीजेपी ने नूपूर शर्मा को पार्टी से सस्पेंड कर दिया.
  • साथ ही दिल्ली बीजेपी की मीडिया सेल के प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को भी इससे जुड़ा सोशल मीडिया पोस्ट करने पर किए गए निष्कासित
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प्रयागराज हिंसा

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इमेज कैप्शन, एसएसपी प्रयागराज (बीच में) के साथ जावेद मोहम्मद (बाएं)

किसके नाम था ढहाया गया घर?

पीडीए के नोटिस के हिसाब से बुलडोज़र जावेद मोहम्मद के घर पर चलाया गया है. पीडीए ने घर पर जो नोटिस चस्पा की उसमें जावेद मोहम्मद का नाम लिखा है.

लेकिन जावेद के वकीलों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका पत्र दिया है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जिस घर को पीडीए ने गिराया है उस घर के मालिक जावेद मोहम्मद नहीं बल्कि उनकी पत्नी परवीन फ़ातिमा हैं. यह घर परवीन फ़ातिमा को उनके माता-पिता से शादी के पहले तोहफ़े के रूप में मिला था.

वकीलों ने अपनी याचिका में लिखा है, "क्योंकि जावेद मोहम्मद की घर पर कोई मिल्कियत नहीं है तो प्रशासन द्वारा घर गिराने की कोई भी कार्रवाई क़ानून के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है और जावेद मोहम्मद के परिवार के साथ नाइंसाफ़ी है."

जावेद मोहम्मद के वकील केके रॉय का आरोप है, "घर गिराने की कार्रवाई को न्यायोचित ठहराने के लिए 11 जून को घर पर नोटिस चिपकाया गया है और उसमें बैक डेट में दिए गए एक कारण बताओ नोटिस का ज़िक्र है. यह कारण बताओ नोटिस जावेद मोहम्मद या उनकी पत्नी परवीन फ़ातिमा ने कभी रिसीव ही नहीं किया."

केके रॉय इस याचिका के बारे में कहते हैं, "मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी भी महिला को तोहफ़े में मिली संपत्ति की वो मरते दम तक अकेली मालकिन होती है. संपत्ति के मामले में हिन्दू क़ानून अलग है और मुस्लिम क़ानून अलग. उस हिसाब से इस मकान की अकेली मालिक परवीन फ़ातिमा हैं और आपने नोटिस दिया है जावेद मोहम्मद को. आपको बताया जा रहा है कि यह जावेद मोहम्मद का घर नहीं है. लेकिन आपने उसपर ध्यान नहीं दिया."

केके रॉय का कहना कि वो इस मामले के लिए तब तक लड़ेंगे जब तक ध्वस्त किया गया घर फिर से नहीं बनाया जाता है और इसके लिए वो सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं.

बीबीसी ने इन सभी आरोप के बारे में पीडीए और प्रयागराज के डीएम, एसएसपी और प्रयागराज डेवेलपमेंट अथॉरिटी के वीसी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन रिपोर्ट के लिखे जाने तक उनसे बात नहीं हो सकी.

प्रयागराज हिंसा

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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद यूपी के कई ज़िलों में भड़की थी हिंसा

कौन हैं जावेद मोहम्मद?

जावेद मोहम्मद के वकील और उनको करीब से जाने वाले केके रॉय का कहना है कि जावेद छात्र राजनीति में सक्रिय थे. जावेद से उनकी दोस्ती उसी समय से है. उनका कहना है कि एक साल पहले तक जावेद मोहम्मद उन सारी समितियों में थे जो मुसलामानों से जुड़े मुद्दों के लिए बनाई जाती हैं.

उनको एक बेदाग़ आदमी बताते हुए केके रॉय कहते हैं, "वो ज़िला प्रशसन के काफ़ी करीबी सहयोगी रहे हैं. जो आदमी 20 साल से जनसेवा कर रहा है, जिनके ख़िलाफ़ छोटे से अपराध की भी एफ़आईआर नहीं है, जो आपराधिक कृत्यों में लिप्त लोगों के साथ में उठता-बैठता नहीं है, उनके ख़िलाफ़ और मेरे ख़िलाफ़ सिर्फ़ शांति भंग का मुक़दमा हुआ, लेकिन वो भी मजिस्ट्रेट के सामने हुआ. सारे आंदोलनों में वो शांतिपूर्ण ढंग से शामिल हुए हैं. वो कोरोना महामारी से लेकर बाढ़ के दौरान भी लोगों की मदद के काम में लगे रहे हैं."

केके रॉय जावेद मोहम्मद को प्रयागराज प्रशासन का दुलारा और प्यारा बताते हैं. उनके मुताबिक़, "जब भी प्रयागराज प्रशासन को ईद, बकरीद, चाँद रात और जुमे की नमाज़ का संकट होता और ख़ास इंतज़ाम की ज़रूरत होती तो मदद करने वालों में जावेद मोहम्मद सबसे आगे रहते थे. वो अचानक हिंसा के मास्टरमाइंड कैसे हो गए? और अगर आप उन्हें मास्टरमाइंड मानते हैं तो उनका घर गिरा दीजिये. लेकिन आपने जिस घर को गिराया है वो तो उनके नाम पर है ही नहीं."

केके रॉय बताते हैं कि जावेद मोहम्मद दिल्ली की वेलफ़ेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया से जुड़े हुए हैं. इस पार्टी के संस्थापक एसक्यूआर इलियास हैं.

केके रॉय कहते हैं, "वेलफ़ेयर पार्टी से पहले वो जनता दल में थे. साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के पहले एसक्यूआर इलियास और जावेद मोहम्मद के साथ अखिलेश यादव ने भी प्रेस वार्ता की थी और एलान किया था की हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे. वो वेलफ़ेयर पार्टी से टिकट भी चाह रहे थे लेकिन इस बार उन्हें चुनाव लड़ने का मौक़ा नहीं मिला. लेकिन वो गठबंधन की राजनीति के समर्थक थे."

केके रॉय कहते हैं कि पेशे से वो एक दुकानदार हैं और एक और दो हॉर्सपावर वाले मोटर पंप का कारोबार करते थे.

क्या जावेद मोहम्मद ने 10 जून को बंद बुलाया था? इस सवाल के जवाब में केके रॉय कहते हैं, "बिल्कुल नहीं. उन्होंने बंद का खंडन किया था. बंद का जो वॉट्सऐप मेसेज चल रहा है वो फ़र्जी है."

हालांकि प्रयागराज प्रशासन का दावा है कि पूरे मामले में मुख्य अभियुक्त जावेद मोहम्मद ही हैं.

जेएनयू

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इमेज कैप्शन, जावेद मोहम्मद का घर ढहाए जाने के ख़िलाफ़ जेएनयू में छात्र संगठन आईसा का प्रदर्शन

कौन हैं जावेद की बेटी आफ़रीन फ़ातिमा ?

जावेद मोहम्मद की बेटी आफ़रीन फ़ातिमा के बारे में केके रॉय ने बताया, "उनकी बेटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के महिला कॉलेज की छात्रसंघ की अध्यक्ष रही हैं. वो टॉपर स्टूडेंट रही हैं. जेएनयू में छात्रसंघ की निर्वाचित काउंसलर रही हैं और अब वो रिसर्च कर रही हैं."

उनकी बेटी के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर सवाल पर प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने कहा, "जैसा मैंने शनिवार को बताया था, हिंसा के बाद से ही लगातार हमारी जांच टीम का काम कर रही थी. सबूत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी. बिना सबूत के अभी कोई कार्रवाई नहीं होगी."

शनिवार को एसएसपी अजय कुमार का बयान आया था कि जावेद मोहम्मद से पूछताछ में उन्होंने बताया कि उनकी एक बेटी है जो जेएनयू में पढ़ती हैं और अपने पिता को राय-मशविरा देती रहती हैं.

पुलिस इस पहलू पर जांच कर रही है कि जावेद को क्या राय-मशविरा दिया जाता है. जावेद के मोबाइल से कई नंबर मिले हैं जो डिलीट किए गए हैं, वॉट्सऐप मेसेज भी डिलीट किए गए हैं. उन्हें रिकवर करने के लिए मोबाइल को फोरेंसिक लैब."

क्या प्रयागराज पुलिस जावेद मोहम्मद की बेटी से भी पूछताछ करेगी, इस सवाल पर एसएसपी अजय कुमार ने कहा था, "शुरुआती पूछताछ में कुछ बातें सामने आई हैं. अगर ठोस सबूत मिलता तो गिरफ़्तारी करने में गुरेज़ नहीं किया जायेगा. तत्काल गिरफ़्तारी के लिए टीमें दिल्ली जाएंगी और दिल्ली पुलिस से रिक्वेस्ट किया जायेगा."

बीबीसी ने आफ़रीन फ़ातिमा से फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी है.

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