कानपुर में सांप्रदायिक हिंसा कैसे शुरू हुई, 18 लोगों की गिरफ़्तारी तक बात क्यों पहुंची?

कानपुर सांप्रदायिक हिंसा

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    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददता

उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद शहर के बेकनगंज थाना क्षेत्र के नई सड़क इलाके में सांप्रदायिक हिंसा देखने को मिली.

उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार के मुताबिक़, "नमाज़ के बाद कुछ लोगों ने वहां की दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया जिसका विरोध दूसरे पक्ष के लोगों ने किया. इस बात को लेकर आपस में टकराव हुआ और पत्थरबाज़ी की घटना हुई."

दोपहर बाद मौके से पथराव के वीडियो वायरल होने लगे. पुलिस ने पथराव करने वाली भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.

वीडियो में दोनों पक्षों की तरफ़ से पथराव होते साफ़ नज़र आ रहा है. और कुछ वायरल वीडियो में पुलिस लोगों को समझाते और मनाते भी नज़र आ रही है.

हालांकि तनाव की स्थिति की देखते हुए इलाक़े में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई और पूरे एरिया को एक तरह से पुलिस ने अपने नियंत्रण में ले लिया.

घटना की जगह पर कानपुर की ज़िलाधिकारी नेहा शर्मा और पुलिस कमिश्नर विजय शंकर मीणा खुद मुस्तैद भी दिखे, इसकी एक वजह शुक्रवार को कानपुर देहात में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का होना भी रहा.

कानपुर के कमिश्नर विजय शंकर मीणा ने बताया है, "खुफ़िया जानकारी के आधार पर घटना के मुख्य आरोपी एमएम जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी को 12 घंटे के भीतर गिरफ़्तार कर लिया गया है. इसके अलावा इसी एसोसिएशन के तीन और लोगों को गिरफ़्तार किया है."

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एफ़आईआर में हिंसा का घटनाक्रम

हिंसा से जुड़े मामले में कानपुर पुलिस ने तीन एफ़आईआर दर्ज की हैं जिसमें एक ही समुदाय के 36 लोग नामजद हैं और इसके अलावा कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं. एफ़आईआर में घटना का समय दोपहर साढ़े तीन बजे बताया गया है.

एक पुलिस कर्मी द्वारा दर्ज कराई गई एफ़आईआर में लिखा है, "कुछ अराज़क तत्वों द्वारा नूपुर शर्मा के कथित बयान, मोहम्मद साहब पर की गई टिप्पणी को लेकर बाज़ार बंद का आह्वान किया गया था."

एफ़आईआर में यह भी लिखा है कि, "जुमे की नमाज़ के बाद जुलूस के रूप में शहर के बाबा चौराहे पर ज़बरदस्ती बाज़ार बंद कराया और आपत्तिजनक नारे लगाए गए."

आरोप है कि शहर के पेंचबाग़ चौराहे पर, "एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे."

पुलिस का कहना है कि उन्होंने जुलूस को आगे ना बढ़ने की अपील की लेकिन उसके बावजूद 500 लोगों की भीड़ ने लाठी, डंडा, असलहों, पत्थर, से लैस होकर जान से मारे की नियत से हमला और फायर कर दिया.

कानपुर पुलिस के प्रभारी निरीक्षक नवाब अहमद के द्वारा दर्ज कराई गई एफ़आईआर में ये भी लिखा है कि पुलिस पर पेट्रोल बम और पत्थरों से भी हमला किया गया.

इसी समय कानपुर के चंद्रेश्वर इलाक़े में भी पथराव और हिंसा की ख़बरें आने लगीं.

उपनिरीक्षक आरिफ़ रज़ा की तहरीर पर दर्ज हुई एफ़आईआर में कहा गया है कि शहर के दादमिया चौराहे पर भी नई सड़क पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी के विरोध में हिंसा हुई और भीड़ ने मारपीट की, पत्थरबाज़ी और गोला बारी की. इस एफ़आईआर में भी हयात ज़फ़र हाशमी और 18 लोगों को नामज़द किया गया है और 250 अन्य लोगों को हिंसा का अभियुक्त माना गया है.

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क्यों कर रहे हैं कानपुर में मुस्लिम संगठन विरोध?

दरअसल, कानपुर के संगठन एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन ने भाजपा की प्रवक्ता के पैगम्बर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध करने के लिए मुसलमानों से कारोबार को तीन जून को बंद रखने की अपील जारी की थी. इस अपील से जुड़े वायरल पोस्टर में यह भी लिखा गया था कि गैर मज़हबी भाइयों पर बंद के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाएगा.

एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी ने भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ उनके करवाई करने के लिए स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा था और उनकी गिरफ़्तारी की मांग भी की थी.

लेकिन शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कानपुर ज़िले में कार्यक्रम था. एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी के एक बयान का वीडियो भी वायरल है जिसमें वो कह रहे हैं कि पांच जून को सुबह 11 बजे कानपुर में सपा विधायक इरफ़ान सोलंकी के कार्यालय के पास से जेल भरो आंदोलन करेंगे और लोगों से अपील कर रहे हैं की वो बड़ी तादाद में जेल भरो आंदोलन का हिस्सा बनें.

इसी वीडियो में वो कहते हैं, "तीन तारीख़ को हमारा आह्वान दुकानों की बंदी का था. तीन तारीख को हमारे यहां कानपुर में प्रधानमंत्री हैं, देश के राष्ट्रपति हैं. प्रशासन ने कहा कि तीन तारीख़ को आप रद्द कर दें और 5 तारीख़ के कार्यक्रम का प्रशासन पूर्ण रूप से सहयोग करेगा. हमने प्रशासन की बातों पर यक़ीन करते हुए पांच तारीख़ का कार्यक्रम रखा है."

यह बयान देने वाले और जेल भरो और बाज़ार बंद का आह्वान करने वाले हयात ज़फ़र हाशमी पुलिस की दो एफ़आईआर में आरोपी नंबर एक के तौर पर नामज़द हैं.

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इमेज कैप्शन, कानपुर में सांप्रदायिक हिंसा के समय प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्य के मुख्यमंत्री वहीं पर मौजूद थे.

हिंसा के बाद 18 गिरफ़्तार, गैंगस्टर एक्ट में मुक़दमे

एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि, "इस घटने को पुलिस ने बहुत गंभीरता से लिया है, और अतिरिक्त पुलिस बल भी भेजे हैं. कुल बारह कंपनी एक प्लाटून पीएसी को कानपुर के लिए रवाना किया गया है."

एडीजी प्रशांत कुमार के मुताबिक़, "अब तक 18 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और मौके से पर्याप्त मात्रा में वीडियो मिले हैं जिसके आधार पर आगे की करवाई करेंगे और उपद्रवियों के साथ-साथ षड्यंत्रकारियों के विरुद्ध गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी."

कानपुर पर हुई सियासत गर्म

शहर में हिंसा की घटना और तनाव के बाद इस मुद्दे पर यूपी में सियासत भी गर्म हो गई है.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में ट्वीट कर कहा कि, "महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नगर में रहते हुए भी पुलिस और खुफिया-तंत्र की विफलता से भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान से, कानपुर में जो अशांति हुई है, उसके लिए भाजपा नेता को गिरफ़्तार किया जाए. हमारी सभी से शांति बनाए रखने की अपील है."

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बसपा प्रमुख मायावती ने भी घटना के बारे में ट्वीट किया, "राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जी के यूपी दौरे के दौरान ही कानपुर में दंगा व हिंसा भड़कना अति-दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक तथा पुलिस खुफिया तंत्र की भी विफलता का द्योतक. सरकार को समझना होगा कि शांति व्यवस्था के अभाव में प्रदेश में निवेश व यहाँ का विकास कैसे संभव? सरकार इस घटना की धर्म, जाति और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरूद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे ताकि ऐसी घटना आगे न हो. साथ ही, लोगों से शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तेजक भाषणों आदि से बचने की भी अपील."

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उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

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