पश्चिमी यूपी में बच्चों के यौन शोषण का मामला, अभियुक्त इतने लंबे समय तक कैसे बचता रहा?

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई बच्चों के कथित यौन शोषण और उसके वीडियो सामने आने के बाद इन दिनों ये मामला सुर्ख़ियों में है.
मेरठ ज़िले के एक गाँव के इस मामले के सामने आने के बाद छह बच्चों (जिनमें से दो अब वयस्क हैं) के यौन शोषण और इस शोषण के वीडियो बनाने के आरोप में 37 साल के व्यक्ति को स्थानीय पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.
अभियुक्त पर यौन उत्पीड़न के अलावा पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं. इस मामले में अब तक शिकायत दर्ज कराने के लिए छह पीड़ित सामने आए हैं, माना जा रहा है कि पीड़ितों की संख्या अधिक हो सकती है.
लेकिन इस पूरे मामले ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के इस गांव को झकझोर दिया है. घटना और उसके बारे में अब जो जानकारियां सामने आ रही हैं उससे यहां लोग हैरान और परेशान हैं.
स्थानीय लोगों के लिए यक़ीन करना मुश्किल हो रहा है कि उनके इतने क़रीब, इतने लंबे समय से ऐसा गंभीर अपराध हो रहा था.
अभियुक्त की गिरफ़्तारी के बाद ये कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है. गांव के लोग इस मामले के सामने आने के बाद बने माहौल से जूझ रहे हैं.

गांव के बाहर एक परचून की दुकान चलाने वाला एक युवक अभियुक्त के घर का पता पूछते ही नाराज़ हो जाता है.
ये युवक कहता है, “इस घटना ने पूरे गांव को शर्मसार कर दिया है. हम सबका सम्मान छिन गया है. ऐसे मामले में सिर्फ़ गिरफ़्तारी काफ़ी नहीं है, ऐसी सज़ा होनी चाहिए कि मिसाल क़ायम हो जाए.”
अभियुक्त पहले भी जा चुका है जेल
जब हम गाँव में पहुँचे तो अभियुक्त की मां उनकी छोटी बच्ची को संभाल रही थीं. हम अनुमति लेकर जब घर में दाख़िल होते हैं, अभियुक्त की पत्नी रसोई के भीतर चली जाती हैं.
घर के एक हिस्से में दर्जनों बीयर के कैन पड़े हैं. इसी घर में वो कमरा है जहां बच्चों का कथित यौन शोषण हुआ और सीसीटीवी कैमरा लगाकर उसके वीडियो रिकॉर्ड किए गए.
इस कमरे की दीवार पर धार्मिक तस्वीरें लगी हैं, और एक तरफ़ दीवार से लगा वो बेड पड़ा है जो वीडियो रिकॉर्डिंग में दिखता है.
अभियुक्त की मां सिर्फ़ इतना ही कहती हैं, “बेटे ने जो किया वो उसे पता होगा, हमें कभी नहीं लगा कि उसने कभी ग़लत किया.”
फ़िलहाल वो बेटे के लिए क़ानूनी पैरवी करने की तैयारी कर रही हैं.

'शर्म और बदनामी की वजह से रहे ख़ामोश'
अभियुक्त के घर के क़रीब ही एक पीड़ित का घर है जो अब वयस्क नहीं हैं, फ़िलहाल उन्हें यहां से बाहर भेज दिया गया है.
इस पीड़ित की मां सिसकते हुए कहती हैं, “हमें पता नहीं था कि हमारे बच्चे के साथ इतना गंदा काम हो रहा है. वो गुमसुम रहता था, बहुत परेशान होता था, लेकिन पूछने पर उसने कभी कुछ बताया नहीं.”
इस परिवार को क़रीब तीन महीने पहले यौन उत्पीड़न का वीडियो मिला था.
परिवार के मुताबिक़, एक दिन, पीड़ित का छोटा भाई पीड़ित के फ़ोन पर बाहर मज़दूरी करने गए अपने पिता से वीडियो कॉल पर बात कर रहा था.
इसी दौरान एक अनजान नंबर से एक वीडियो आया, जिसमें अभियुक्त उसके बड़े भाई के साथ आपत्तिजनक अवस्था में दिख रहा है.
इस वीडियो को देखकर पीड़ित का भाई काफ़ी परेशान हो गया.
परिवार के मुताबिक़, पहले वो ख़ामोश रहा लेकिन फिर उस यातना के बारे में बताया जिससे वो पिछले कई महीनों से गुज़र रहा था.

पीड़ित की मां बताती हैं, “वो बहुत रोया, फिर उसने बताया कि अभियुक्त ने कई महीने पहले उसे अपनी बातों में फंसाकर अपने कमरे के भीतर बुला लिया था और यहां उसे नशीली ड्रिंक पिलाकर उसका ज़बरदस्ती यौन शोषण किया और फिर उसका वीडियो दिखाकर बार-बार उसके साथ ऐसा किया.”
पीड़ित के परिवार का दावा है कि इस दौरान अभियुक्त ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार उसे ब्लैकमेल किया और उसका उत्पीड़न करने के अलावा उससे पैसे भी वसूले.
पीड़ित की मां दावा बताती हैं कि इस घटना का पता चलते ही उनके परिवार ने ग्राम प्रधान (सरपंच के पति) से संपर्क किया और ‘मामला सुलझाने’ की गुहार लगाई.
मुझे बताया गया कि इस मामले में कोई शिकायत पुलिस से नहीं की गई और अभियुक्त के लैपटॉप से वीडियो डिलीट कराके मामला रफ़ा-दफ़ा कर दिया गया.
हालांकि ग्राम प्रधान इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं, “कोई भी पीड़ित कभी मेरे पास नहीं आया, ना ही मैंने कोई वीडियो डिलीट करवाए. अगर वो मेरे पास आए होते तो मैं तुरंत पुलिस से संपर्क करता ना कि इस मामले पर पर्दा डालता.”
वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुआ मुक़दमा
अगस्त के पहले सप्ताह में जब कई और वीडियो वायरल हुए तो स्थानीय पुलिस ने पीड़ित परिवारों से संपर्क किया.
हिचकिचाहट के बाद, बहुत मनाने पर ये परिवार पुलिस को लिखित शिकायत देने के लिए तैयार हो गए.
पुलिस ने 19 अगस्त को एक पीड़ित की मां की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की. इसके बाद कई और पीड़ित सामने आए और बयान दर्ज कराया.
पुलिस ने 26 अगस्त को अभियुक्त को एक आम के बाग़ से गिरफ़्तार कर लिया.
स्थानीय पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, अभियुक्त ने गिरफ़्तारी के बाद किसी तरह का पछतावा नहीं दिखाया बल्कि ये कहा कि उसके साथ भी शोषण हुआ है.
मेरठ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राकेश कुमार मिश्रा के मुताबिक़, अभियुक्त के मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप को और अधिक सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है.
पुलिस के मुताबिक़, अभी यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है, अगर और सबूत सामने आएंगे तो अन्य धाराओं को भी मुक़दमे में जोड़ दिया जाएगा.
पुलिस के सामने नहीं आना चाह रहे थे पीड़ित परिवार

अब तक की जांच में पुलिस को गिरफ़्तार अभियुक्त के अलावा किसी और के शामिल होने के सुबूत नहीं मिले हैं.
लेकिन राकेश कुमार मिश्रा कहते हैं, “जांच अभी शुरुआती स्तर पर ही है, और अधिक तथ्य अभी सामने आ सकते हैं. अगर कोई और शामिल पाया गया तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी.”
इस गांव के ही रहने वाले युवक अभिषेक के मुताबिक़, अगस्त के पहले सप्ताह से ही कुछ वीडियो गांव में और आसपास के गांवों में वायरल हो रहे थे.
अभिषेक कहते हैं, “एक-एक करके कई बच्चों के वीडियो वायरल हुए. गांव के लोग सदमे में थे. कोई परिवार एफ़आईआर दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, वो सभी सदमे में थे और डरे हुए थे.”
हालांकि, गांव के लोगों का कहना है कि वीडियो सामने आने से पहले तक किसी को भी ये अंदाज़ा नहीं था कि ऐसा कुछ हो रहा होगा.
अभिषेक कहते हैं, “बच्चों का अभियुक्त की दुकान पर आना जाना था, लोगों को लगता था कि ये नशा करता है और बच्चों को नशे की लत लगा रहा है, लेकिन ऐसा कुछ हो रहा होगा, ये किसी ने नहीं सोचा था.”
अभी तक छह पीड़ित सामने आए हैं. इनकी उम्र 12 साल से लेकर 23 साल तक है. चार पीड़ित नाबालिग हैं.
इन सभी ने बीबीसी को एक जैसी ही कहानी बताई. पहले अभियुक्त ने बहाने से उन्हें अपने घर में बुलाया, फिर नशीली ड्रिंक देकर यौन संबंध बनाए और फिर वीडियो के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल किया और पैसे भी ऐंठे.
सभी बच्चे ये दावा करते हैं कि उन्हें हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी गई.
कोई भी पीड़ित, शर्म की वजह से, अपने परिवार या किसी क़रीबी को अपने साथ हो रही घटनाओं के बारे में नहीं बता सका.
सभी पीड़ित बताते हैं कि उन्हें पैसे देने के लिए मजबूर किया गया.
एक नाबालिग पीड़ित गुमसुम है. वह ग़रीबी की हालत में अपनी मां और बहन के साथ रहता है, अब वो घर से बाहर निकलने से भी हिचकता है.
ये परिवार सरकारी अनाज पर जीवनयापन कर रहा है. इस घटना ने इस परिवार को और भी मुश्किल हालात में धकेल दिया है.
पीड़ित की मां कहती हैं, “तीन महीने पहले जब इसने दर्द बताया तो मैं डॉक्टर के पास लेकर गई. इसे ख़ून निकल रहा था. डॉक्टर ने बार-बार कहा बच्चे के साथ ग़लत काम हुआ है लेकिन इसने हां नहीं किया. ये ख़ामोश रहा.”
पीड़ित की मां पिछले कई सालों से पाई-पाई जोड़ रही थीं और किसी तरह उन्होंने पच्चीस हज़ार रुपए बेटी की शादी के लिए इकट्ठा किए थे. ब्लैकमेल से परेशान इस बच्चे ने चोरी करके वो पैसे अभियुक्त को दे दिए.
पीड़ित की मां कहती हैं, “हमारे परिवार का चैन-सुकून, पैसा, सम्मान, सब कुछ लुट गया है. कोई हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया है.”
पीड़ितों को घर से पैसा चोरी करने के लिए मजबूर किया गया
एक अन्य पीड़ित परिवार बताता है कि उसने परिवार की ज़मीन बिकने से जो पैसा आया था, उसमें से थोड़े-थोड़े पैसे चुराकर अभियुक्त को दिए.
ये नाबालिग किशोर कहता है, “जब-जब उसने अपने पास बुलाया, मैंने घर से चुराकर कुछ पैसे दे दिए. जब तक पैसे दिए, उसने मेरे साथ फिर ग़लत काम नहीं किया.”
अब बालिग हो चुका एक अन्य पीड़ित अभी तक अपने साथ हुई घटनाओं से नहीं उबर पाया है. बीस साल के इस युवक ने गांव छोड़ दिया है और अब शहर जाकर नौकरी कर रहा है.
ये युवक कहता है, “मैं शायद तेरह या चौदह साल का था, जब मेरी अभियुक्त से दोस्ती हुई और उसके घर आना-जाना हो गया. एक दिन उसने मुझे कुछ नशा दिया और मेरे साथ ग़लत काम किया और मोबाइल से वीडियो बना लिया.”
“वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर वो अगले कई साल तक मेरे साथ सेक्स करता रहा. पिछले छह सालों में मैंने जो कुछ भी कमाया, उसे ही दिया है. मैं तंग आकर गांव छोड़कर चला गया तो मुझे कॉल करके बुलाता था, अलग-अलग नंबरों से फोन करता था.”
युवक दावा करता है, “मैंने अप्रैल में ही अपने मालिक से एडवांस लेकर पचास हज़ार रुपये अभियुक्त को दिए थे. मैं क़र्ज में आ गया था, मेरे पास कुछ नहीं था जिसे बेचकर मैं और पैसा दे पाता. पिछले महीने जब मैंने पैसे नहीं दिए तो अभियुक्त ने देसी कट्टे की बट से मुझे मारा. मेरी आंख सूज गई, लेकिन मैं परिवार को अपने साथ हो रहे अत्याचार के बारे में नहीं बता सका.”
बालिग़ होने पर भी नहीं ख़त्म हुआ ख़ौफ़

वीडियो सामने आने तक, इस युवक ने पिछले छह साल से अपने साथ हो रहे शोषण के बारे में कभी किसी को नहीं बताया. वो अकेले ही घुट-घुट कर जी रहा था.
ये युवक कहता है, “मैं कई लाख रुपए अब तक दे चुका हूं. अभियुक्त ने कभी पैसे अकाउंट में नहीं लिए. हमेशा कैश ही लिए.”
अब इस युवक का परिवार उसका साथ दे रहा है, लेकिन पिछले छह सालों से वो अकेले अवसाद से गुज़रा है.
वीडियो सामने आने से भले ही लोगों को उसके बारे में पता चला है लेकिन उसकी पीड़ा का एक तरह से अंत भी हुआ है.
ये युवक कहता है, “मैं गांव छोड़ने के बाद भी हर वक़्त एक डर में रहता था कि कहीं उसका फ़ोन ना आ जाए. घर वाले पूछते थे जो पैसा तुम कमा रहे हो कहां जा रहा है. मैं बार-बार आत्महत्या के बारे में सोचता था, अपने भीतर ही घुट रहा था. अब कम से कम इस दर्द में मेरा परिवार तो मेरे साथ है.”
अभी तक छह पीड़ित सामने आए हैं. पुलिस और गांववालों को लगता है कि और पीड़ित भी हो सकते हैं.
छह साल तक यौन हिंसा का शिकार रहा ये युवक कहता है, “मैं कभी किसी से ये नहीं कहता, मेरा वीडियो वायरल हुआ तो मुझे बोलना पड़ा, मेरे जैसे और कितने ही होंगे, जो कभी सामने नहीं आएंगे.”
बाक़ी पांच पीड़ितों के साथ पिछले एक-दो साल के भीतर ही शोषण हुआ है. बीस साल का ये युवक कहता है, जो भी बच्चा अभियुक्त के संपर्क में आया, मुझे लगता है उसने शोषण किया ही होगा.
एक नाबालिग अभियुक्त अपनी मां की मौजूदगी में बताता है, “जब पहली बार मेरे साथ घटना हुई, उसने मुझे कट्टा दिखाकर इतना डरा दिया था कि मैंने कई दिन किसी से कोई बात नहीं की.”
पीड़ितों के भीतर बैठ गया था अभियुक्त का ख़ौफ़

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राकेश मिश्रा कहते हैं, “सभी पीड़ित बच्चे बेहद डरे हुए हैं. बहुत समझाने के बाद उन्होंने पुलिस को विस्तृत बयान दिए हैं. अब उनके बयान न्यायालय में दर्ज किए जाने हैं.”
हालांकि, इस घटना के सामने आने के बाद ज़िला प्रशासन की तरफ़ से बच्चों को अभी काउंसलर उपलब्ध नहीं करवाया गया है.
ज़िला प्रोबेशन अधिकारी अतुल सोनी कहते हैं, “मामला न्यायालय में आने के बाद जज बाल मित्र नियुक्त कर सकते हैं, यदि हमें अदालत से निर्देश मिलेगा तो हम बच्चों के लिए काउंसलर नियुक्त करेंगे.”
क्रिमिनोलॉजी में पीएचडी और स्वतंत्र क्रिमिनोलॉजिस्ट साक्षी वैश्य कहती हैं, “अभियुक्त और पीड़ितों के बारे में जो जानकारियां सामने आई हैं और जो वीडियो आए हैं उनसे लगता है कि ये अभियुक्त पीडोफाइल तो नहीं है क्योंकि पीडोफाइल आम तौर पर 6 से 12 साल के बच्चों को ही निशाना बनाते हैं. यहां अधिकतर पीड़ित बारह साल से अधिक उम्र के हैं और किशोर हैं और एक भी पीड़ित लड़की नहीं है, इससे पता चलता है कि अभियुक्त एक ख़ास उम्र के बच्चों का शोषण करके उन पर अपनी पावर स्थापित करना चाहता था.”

साक्षी कहती हैं, “अभियुक्त प्लेज़र के लिए ऐसा नहीं कर रहा था, पैसा भी ले रहा था, इससे आपराधिक मंशा भी साफ़ दिखाई देती है.”
साक्षी कहती हैं, “अभियुक्त इतने समय तक ये सब करता रहा क्योंकि उसने सभी पीड़ितों को अपने गहरे प्रभाव में ले लिया था और उनमें अपना ख़ौफ़ पैदा कर दिया था.”
इस मामले में सभी पीड़ित ग़रीब परिवारों से हैं.
साक्षी कहती हैं, “अभियुक्त ने पीड़ितों का चयन सोच समझकर किया, उसने ऐसे बच्चों को निशाना बनाया जिनसे प्रतिरोध की संभावना कम थी. अभियुक्त ने बहुत सोच-समझकर अपने हर क़दम को प्लान किया और फिर इन घटनाओं को अंजाम दिया.”
साक्षी वैश्य का मानना है कि गांव का सामाजिक परिवेश भी इन घटनाओं के इतने लंबे समय तक सामने ना आने का एक कारण है.
पुलिस अधीक्षक राकेश मिश्रा कहते हैं, “इस प्रकरण के बाद जागरूकता फैलाने की ज़रूरत महसूस हुई है. पुलिस ज़रूर ऐसे क़दम उठायेगी जो इस तरह की और घटनाएं होने से रोक सके.”
गांव में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि कहीं इस मामले में कई और बच्चे भी तो पीड़ित नहीं हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















