मध्य प्रदेश का सीधी रेप मामला: मैजिक वॉयस ऐप के ज़रिए कैसे दिया गया झांसा

मध्य प्रदेश बलात्कार कांड
इमेज कैप्शन, आदिवासी लड़कियों का सरकारी स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर यौन शोषण
    • Author, नीतू सिंह
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, सीधी मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के सीधी ज़िला मुख्यालय से क़रीब 80 किलोमीटर दूर इन दिनों एक मामला सुर्ख़ियों में है. इस मामले में ग़रीब परिवार की आदिवासी लड़कियों को सरकारी स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर सुनसान जगह बुला कर बलात्कार किया गया.

इस मामले में अब तक पांच रेप सर्वाइवर सामने आ चुकी हैं और आशंका जताई जा रही है कि सर्वाइवरों की संख्या अधिक भी हो सकती है.

वहीं, शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मुख्य अभियुक्त सहित चार लोगों को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया है.

लेकिन ये आम अपराध के मामले नहीं हैं, इन मामलों में सबसे चौंकाने वाला पहलू ये है कि अभियुक्त ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया और मैजिक वॉयस ऐप की मदद से महिला की आवाज़ में किशोरियों को फंसाया.

आज के दौर में तकनीक के बढ़ते दख़ल और उसका इस तरह के अपराध में इस्तेमाल ने पुलिस प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों को सकते में डाल दिया है.

रेप सर्वाइवर ने क्या कहा?

इक्कीस साल की आदिवासी लड़की का यौन उत्पीड़न केवल इसलिए हो गया क्योंकि वह आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप चाहती थीं. इसके चलते वह अभियुक्त के झांसे में आ गईं.

अपने घर की आर्थिक मुश्किलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, “मैं एक ग़रीब आदिवासी लड़की हूँ. यह स्कॉलरशिप हमारी आगे की पढ़ाई के लिए बहुत ज़रूरी थी. स्कॉलरशिप के नाम पर जब अर्चना मैडम का फ़ोन आया तो हम ज़्यादा सोच नहीं पाए और चले गए.”

ग़ौर करने वाली बात है कि आदिवासी लड़की अर्चना नाम की किसी मैडम को नहीं जानतीं, लेकिन स्कॉलरशिप मिलने की खुशी में उसे ये पहलू भी ध्यान नहीं रहा.

ज़िला पुलिस के मुताबिक़, 30 साल के मुख्य अभियुक्त बृजेश प्रजापति ने मैजिक वॉयस ऐप की मदद से महिला की आवाज़ में बात करके आर्थिक तौर पर कमज़ोर लड़कियों को स्कॉलरशिप देने का लालच देकर आदिवासी लड़कियों को फंसाया.

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इमेज कैप्शन, रेप सर्वाइवर ने साहस करके एफ़आईआर दर्ज कराई
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ज़िला पुलिस की जांच के अनुसार, अभियुक्त ने अप्रैल की शुरुआत से 13 मई के बीच में पांच आदिवासी लड़कियों के साथ रेप की घटना को अंजाम दिया है. जिस 21 वर्षीय आदिवासी लड़की के साथ अभियुक्त ने आख़िरी बार 13-14 मई की मध्यरात्रि को रेप की घटना को अंजाम दिया. उसी बहादुर लड़की ने साहस करके पुलिस के सामने इस मामले की पहली एफ़आईआर 16 मई को दर्ज कराई.

अगर ये लड़की एफ़आईआर दर्ज नहीं करवाती तो अभियुक्त के शिकार की संख्या निश्चित तौर पर ज़्यादा होती. इस रेप सर्वाइवर ने बताया, “मुझे उसकी हरकतों से ऐसा आभास हुआ कि वह अब तक बहुत लड़कियों के साथ ग़लत काम कर चुका है. अगर मैंने आवाज़ नहीं उठाई तो आगे भी करता रहेगा. मैंने हिम्मत जुटाकर ये बात अपने चाचा को बताई जो पुलिस में हैं. मैं नहीं चाहती थी कि ग़रीब लड़कियां स्कॉलरशिप के लालच में उसके चक्कर में फंसे.”

रेप सर्वाइवर को अभियुक्त ने जिस सरकारी स्कॉलरशिप का हवाला दिया उसका नाम ‘गांव की बेटी योजना’ है. इस योजना के तहत मध्य प्रदेश की ऐसी छात्राएं जिनकी आर्थिक स्थिति ख़राब है और वो आगे पढ़ना चाहती हैं तो 12वीं पास छात्राओं को 5000 रुपये की स्कॉलरशिप दी जाती है. हालांकि अभियुक्त ने इस लड़की को स्कॉलरशिप को लेकर ग़लत जानकारी भी दी.

रेप सर्वाइवर ने बताया, “उसने मुझे ‘गांव की बेटी योजना’ स्कॉलरशिप के बारे में बताया. उसने मुझसे कहा कि इस योजना के तहत मुझे स्नातक की तीन साल की पढ़ाई में हर साल 20,000 रुपये मिलेंगे. मुझे पैसों की ज़रूरत थी इसलिए मैं उसकी बातों में आ गयी.”

इस रेप सर्वाइवर का गांव मध्य प्रदेश के सीधी ज़िला मुख्यालय से क़रीब 80 किलोमीटर दूर सुदूर इलाके में है. यह अपने घर की पहली गोंड आदिवासी लड़की हैं जिसे सीधी में इनके माता-पिता ने स्नातक की पढ़ाई कराने के लिए भेजा है. चार भाई दो बहनों में ये चौथे नंबर की हैं.

इनके माता-पिता खेती किसानी करके गुज़र बसर करते हैं. इनके भाई प्राइवेट फैक्ट्री में दूसरे शहरों में काम करते हैं. जिनकी आमदनी बहुत कम है. जैसे-तैसे घर ख़र्च ही चल पाता है. वो सीधी ज़िले में अपने चाचा के घर स्नातक की पढ़ाई करने के लिए आयी थीं. ये पढ़ लिखकर नौकरी करना चाहती हैं ताकि अपने घर की ग़रीबी दूर कर सके. घटना के वक़्त वो चाचा के घर से ही अभियुक्त के बुलाई जगह पर गयी थीं.

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इमेज कैप्शन, अभियुक्त रेप सर्वाइवर्स को घने जंगल में ले जाता था

अभियुक्त महिला की आवाज़ में लड़कियों को फंसाता था

उस शाम को क़रीब चार बजे इस आदिवासी लड़की के फोन पर घंटी बजी. उधर से आवाज़ एक महिला की थी.

उस महिला ने लड़की का नाम लेते हुए कहा, “मैं तुम्हारे कॉलेज से अर्चना मैडम बात कर रही हूँ. तुम अभी टिकरी आ जाओ. तुम्हारा स्कॉलरशिप का पैसा रुका हुआ है. सिग्नेचर बना दो पैसा तुम्हारे खाते में आ जायेगा.”

लड़की ने जवाब दिया, “मैम शाम हो रही है आज नहीं आ पाऊंगी.” उधर से अर्चना मैडम ने फोन पर कहा, “बेटा आज ही लास्ट डेट है. अगर आज साइन नहीं करोगी तो तुम्हें ‘गाँव की बेटी योजना’ स्कॉलरशिप का लाभ नहीं मिलेगा.”

ग़रीब परिवार में जन्मीं ये लड़की स्कॉलरशिप के लालच में सीधी ज़िला मुख्यालय से क़रीब 35 किलोमीटर दूर शाम पांच-छह बजे के क़रीब 13 मई 2024 को 'अर्चना मैडम' की बुलाई जगह टिकरी बस से पहुंच गईं.

जब वो टिकरी पहुंची तो उसने उसी नम्बर पर फ़ोन किया उधर से अर्चना मैडम ने खुद को किसी काम में फंसे होने का बहाना बनाते हुए कहा, “मैं अपने बेटे को भेज रही हूँ. तुम उसी के साथ आ जाओ. साइन करके फिर तुम्हें छुड़वा देंगे.”

टिकरी चौराहे पर कुछ देर में एक लड़का बाइक से आया. वो पीले रंग की टीशर्ट में था. हाथ में काले रंग के फुल दस्तानें पहने था. उसने ख़ुद को अर्चना मैम का बेटा बताया.

जब लड़की उस लड़के की बाइक पर बैठ गयी तो वो जंगल की तरफ जाने लगा. लड़की के पूछने पर उसने जवाब दिया माँ घर पर हैं वहीं ले चल रहा हूँ. जब हल्का सा अँधेरा होने लगा तो वो उसे चारों तरफ़ जंगल से घिरी एक सुनसान जगह पर ले गया. यहाँ एक मिट्टी की कच्ची झोपड़ी बनी थी.

जब लड़की ने पूछा कि अर्चना मैडम कहाँ हैं तो उसने कहा ज़्यादा सवाल जवाब मत करो नहीं तो जान से मार डालूँगा.

लड़की ने बताया, “मैं बहुत डरी हुई थी. उसके मुंह से शराब की बदबू आ रही थी. उसने कहा अगर आवाज़ करोगी तो मुंह में कपड़ा भर देंगे. हम डर से कुछ नहीं बोले. उसने कई घंटे मेरे साथ ग़लत काम (रेप) किया.”

इस मामले के मुख्य अभियुक्त 30 वर्षीय बृजेश प्रजापति मैजिक वॉयस ऐप से अपनी आवाज़ बदलकर महिला की आवाज़ में लड़कियों को अर्चना मैडम का हवाला देकर इसी टूटी-फूटी झोपड़ी में लेकर आता था. यहाँ नशे में धुत होकर काफ़ी देर तक लड़कियों के साथ रेप करता था फिर उन्हें आधी रात में आधे रास्ते जंगल में छोड़ देता था या फिर कमरे से बाहर निकाल देता था.

क्राइम की जगह
इमेज कैप्शन, रेप सर्वाइवर इस बात से चिंतित हैं कि कहीं उसके घरवाले उसकी पढ़ाई न बंद करा दें.

रात को घने जंगल में रेप सर्वाइवर को छोड़ दिया

रात के 11 से 12 बजे के बीच रेप सर्वाइवर को घटनास्थल से 10-12 किलोमीटर दूर जाकर अभियुक्त ने उसे छोड़ दिया.

रेप सर्वाइवर ने बताया, “आसपास जंगल था. मैं डर रही थी इतनी रात को कहाँ जाऊंगी. मेरा फोन उसने पहले ही लेकर स्विच ऑफ़ कर लिया था.”

जब बहुत देर तक अभियुक्त पानी लेकर वापस नहीं लौटा तो रेप सर्वाइवर उन्हीं जंगलों के रास्ते मदद के लिए इधर-उधर भटकने लगी. उसने रात में जंगल के बीच बसे कई घरों में मदद के लिए आवाज़ लगाई पर कोई बाहर नहीं निकला. उसने हिम्मत नहीं हारी वो लगातार चलती रही.

अंततः उसे एक घर में एक 65 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला ने मदद की. उस बुज़ुर्ग महिला से मिलने हम करीब दो किलोमीटर उबड़-खाबड़ रास्तों से नदी पार करते हुए पहुंचें. जिस दिन हम उस महिला से मिलने गये थे उस दिन बहुत बारिश हो रही थी.

उस महिला ने बताया, “रात में लड़की की ऐसी हालत देखी तो मुझसे रहा नहीं गया. मुझे डर था कि अगर इसे रखेंगे तो कोई पीछे से आकर हमारे ऊपर हमला न कर दे. पर मुझे लगा इसको अभी मदद की ज़रूरत है. उसने पानी पीने को माँगा. पूरी घटना बताई. वो बहुत पीड़ा में थी.”

जिस महिला ने रेप सर्वाइवर को शरण दी थी. उनका घर जंगल के बीचोंबीच था. उन महिला ने बताया, “उसे पीड़ा की वजह से नींद नहीं आ रही थी. वो रो रही थी. हमने उसे एक दवा खोजकर दी. कुछ देर में उसे आराम मिला फिर वो सो गयी. सुबह होते ही उसने अपने चाचा को हमसे फोन मांगकर कॉल किया जो पुलिस में थे.”

अपने चाचा को सारी बात बताने के बाद 16 मई को पहली एफ़आईआर दर्ज हुई. इसके बाद पुलिस ने जल्द ही मुख्य आरोपी को पकड़ लिया. पुलिस की सक्रियता से इस घटना के आलावा चार और मामले सामने आये.

सदमे में रेप सर्वाइवर

इस घटना के बाद से रेप सर्वाइवर इस बात से काफी चिंतित और परेशान हैं कि कहीं उसके घरवाले उसकी पढ़ाई न बंद करा दें. क्योंकि घटना के दिन जब वो आरोपी के बुलाये स्थान पर जा रही थीं उस वक़्त घर पर कोई नहीं था. उसने किसी को फोन इसलिए नहीं किया कि वो जल्दी ही फॉर्म पर साइन करके वापस आ जाएंगी.

घटना को भले ही तीन महीने गुज़र गये हों लेकिन वो अभी भी बहुत डरी हुई हैं. उन्होंने अपना डर ज़ाहिर करते हुए कहा, “घटना के बाद से कहीं आते-जाते नहीं. जब उस दिन की याद आती है तो बहुत डर जाती हूँ, रोने भी लगती हूँ. आदिवासी लड़कियों के लिए पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है. उसमें भी यह घटना हो गयी अब तो और मुश्किल हो जाएगी.”

“लोग यही कहते हैं कि लड़की की ही ग़लती है. क्यों एक फोन पर बिना किसी को बताये चली गयी.”

दूसरी रेप सर्वाइवर के डरावने अनुभव

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सीधी ज़िला मुख्यालय से क़रीब 40 किलोमीटर दूर बैगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाली इस लड़की का झोपड़ीनुमा कच्चा टूटा-फूटा घर है. जब हमलोग पहुंचे तो उस दिन बारिश हो रही थी तो जगह-जगह बर्तन रखे हुए थे जिसमें छत से पानी टपक रहा था. इनके यहाँ चूल्हे पर खाना बनता है. वहां लकड़ी और ज़रूरत के कुछ बर्तन रखे थे.

इस लड़की की पढ़ाई वर्ष 2018 में आठवीं के बाद इसलिए बंद हो गयी थी क्योंकि इनके आसपास कोई स्कूल नहीं था. जिस अनहोनी के डर से पढ़ाई बंद हुई वो अनहोनी हो ही गयी.

रेप सर्वाइवर ने फोन वाली घटना का ज़िक्र किया, “किसी आंटी का 15 अप्रैल को फोन आया था. उन्होंने कहा तुम 18 साल की हो गयी हो तुम्हें पैसा मिलेगा.”

“मुझे कुछ पता नहीं था मैंने सोचा सरकार की कोई योजना आयी होगी जिसमें 18 साल पूरे होने पर पैसे मिल रहे होंगे. मैं उस दिन अपनी बुआ के घर थी. बुआ की बेटी को लेकर उसने जिस चौराहे पर बुलाया था चली गयी,” ये बताते रेप सर्वाइवर खामोश हो गयी. बुआ की बेटी 16 साल की हैं.

आरोपी का वही हुलिया था जिसमें वो बाइक से हेलमेट लगाकर काले ग्लव्स पहने हुए था. जब ये दोनों लड़कियां चौराहे पर पहुंचीं तो आरोपी इन्हें बाइक पर बिठाकर उसी सुनसान झोपड़ी में ले गया जहाँ वो लड़कियों को ले जाता था.

“हमने उसे ग़लत काम (रेप) करने से मना किया तो उसने हमें तीन चार झापड़ मारे. मेरी छोटी बहन ये देखकर और डर गयी. वो चुपचाप बैठी रही. उसने हम दोनों के साथ तीन चार घंटे ग़लत काम किया फिर कमरे से बाहर कर दिया,” ये बताते हुए उसका गला भर आया.

जब इन्हें कमरे से बाहर किया तो इन्हें नहीं पता कि उस वक़्त रात के कितने बजे थे. दोनों लड़कियां वहां से भाग निकलीं. जंगल के रास्ते ये दोनों लड़कियां पूरी रात चलती रहीं.

उसने बताया, “हम थोड़ी दूर चलते फिर अगर कोई गाड़ी निकलती तो पेड़ की आड़ में छिप जाते. हम चलते-चलते सुबह 7 बजे घर पहुंचे. सड़क के किनारे बोर्ड में जो लिखा था उसी को पढ़कर घर पहुंचे.”

इन्हें भी आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी थी. इसलिए घर पर इनसे बहुत पूछा गया पर इन्होंने कुछ नहीं बताया.

गाँव के अभी के माहौल के बारे में उन्होंने बताया, “रोज़-रोज़ दरवाजे़ पुलिस आती है गाँव में सबको पता चल गया है. अब लड़कियां डर गयी हैं. कोई अपनी लड़की को अब अकेले बाज़ार स्कूल दूर नहीं भेजता. उनको लगता है उनकी लड़की के साथ कुछ ग़लत न हो जाए.”

दो बहन तीन भाई में ये सबसे बड़ी हैं. रेप सर्वाइवर और उनका परिवार बाहरी लोगों से ज़्यादा बात नहीं करते. इन्हें बात करने से डर लगता है. इनकी माँ ने सकुचाते हुए कहा, “हम लोग ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं. जंगल में रहते हैं. बाहर के लोग आते हैं तो डर लगता है. अब एक चिंता और हो गयी है, लड़की की शादी कैसे होगी? सबको पता चल गया है.”

चंगुल में फंसाने के लिए स्कॉलरशिप का हवाला क्यों दिया?

मध्य प्रदेश रेप मामला
इमेज कैप्शन, ग़रीब आदिवासी परिवार की लड़कियों को बनाया गया निशाना

अभियुक्त ने पांचों रेप सर्वाइवर को स्कॉलरशिप या किसी दूसरी सरकारी योजना के लाभ का हवाला दिया.

अभियुक्त यह भलीभांति जानता था कि इन लड़कियों की आर्थिक स्थिति काफ़ी दयनीय है. सुदूर इलाके़ में रहने वाली लड़कियां सरकारी योजनाओं को लेकर ज़्यादा जागरूक नहीं हैं या उनतक उन योजनाओं की जानकारी ज़िम्मेदार अधिकारियों द्वारा पहुंचाई ही नहीं गयी है. इसलिए वो पैसे के लालच में आसानी से चंगुल में फस सकती हैं जिसका पूरा फ़ायदा अभियुक्त ने उठाया.

16 वर्षीय नाबालिग रेप सर्वाइवर की माँ ने अपनी ग़रीबी की पीड़ा बताई, “मेरी बेटी छठवीं में पढ़ती है. हम मेहनत-मज़दूरी करके बच्चों को जैसे-तैसे पाल रहे हैं. बहन ने पैसे का लालच दिया होगा इसलिए वो साथ में चली गयी.”

“हम कुछ नहीं बतायेंगे. पुलिस ने हमें मना किया है. वैसे भी बहुत चक्कर थाने के लगा चुके हैं. अब नहीं लगाना चाहते. रोज़ अपना काम करें कि थाने के चक्कर लगायें,” रेप सर्वाइवर की माँ ने नाराज़गी जताते हुए कहा.

इन्होंने अपनी बेटी से बात नहीं कराई क्योंकि ये भी इस बात से चिंतित हैं कि अब इनकी बेटी की शादी कैसे होगी क्योंकि मीडिया में आने के बाद से सबको पता चल गया है. पांच रेप सर्वाइवर में से तीन के परिवार वाले ही मिलने के लिए तैयार हुए.

इन परिवारों से भी बात करना काफ़ी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था. ये बैगा और गोंड समुदाय के आदिवासी हैं जिनका बाहर के लोगों से ज़्यादा सरोकार नहीं है. इन परिवारों को इस बात का भी डर है कि मीडिया के सामने बोलने पर पुलिस इन्हें पकड़ ले जायेगी.

सीधी ज़िले के सरकारी कॉलेज शास्त्रीय कन्या उच्चतर सीएम राइज़ में पढ़ाने वालीं शिक्षिका अजीता द्विवेदी ने इस घटना पर बीबीसी से बात करते हुए कहा, “ये घटना सभी बच्चियों को भयभीत करने वाली घटना है. आदिवासी लड़कियां बहुत सीधी और संकोची होती हैं. वो अपनी बात किसी से ज़ाहिर नहीं कर पातीं. रेप जैसी घटनाओं में आरोपियों से ज़्यादा बच्चियों को घर, परिवार, समाज प्रताड़ित करता है. उनकी जल्दी शादी करा दी जाती है. ऐसी घटनाओं से लड़कियों का पूरा जीवन ख़त्म कर दिया जाता है.”

स्कॉलरशिप की जानकारी कॉलेज में छात्राओं को कितनी दी जाती है? इस पर उन्होंने कहा, “कॉलेज में तो बताया जाता है. जब आरोपी ने शिक्षिका बनकर ही लड़कियों से बात की इसलिए लड़कियां नहीं समझ पायीं. ये बहुत ग़रीब लड़कियां हैं. इनके माता-पिता जंगल की लकड़ी और मज़दूरी से गुज़र करते हैं. इनके लिए ये स्कॉलरशिप बहुत ज़रूरी है तभी ये आगे की पढ़ाई कर सकती हैं इसलिए ये लड़कियां ज़्यादा सोच नहीं पायीं.”

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल कॉलेज सब जगह मोबाइल में जो भी नई तकनीक आये जिससे लगे कि किसी तरह कोई भी झांसे में आ सकता है उसकी जानकारी ज़रूर दी जाये. इस मैजिक वॉयस ऐप को तत्काल प्रभाव से बंद कराना चाहिए.

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पुलिस ने इस कांड पर क्या कहा

सीधी पुलिस के अनुसार जो कॉलेज जाने वालीं छात्राएं थीं आरोपी ने उन्हें स्कॉलरशिप का हवाला दिया वहीं बाक़ी को शासकीय योजनाओं का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया. मुख्य अभियुक्त बृजेश प्रजापति के आलावा तीन और अभियुक्त हैं. राहुल और संदीप प्रजापति दोनों सगे भाई हैं जो रिश्ते में मुख्य अभियुक्त के चचेरे साले लगते हैं.

सीधी पुलिस के मुताबिक़, चौथा अभियुक्त आरोपी लवकुश प्रजापति ने मैजिक ऐप को डाउनलोड किया था. लवकुश ने ही एक कॉलेज के व्हाट्सऐप ग्रुप से लड़कियों के मोबाइल नम्बर उपलब्ध कराए थे.

सीधी ज़िला प्रशासन द्वारा सभी अभियुक्तों के घरों पर बुलडोज़र चलाया गया. मुख्य अभियुक्त बृजेश प्रजापति एक मज़दूर है. वो दूसरी कक्षा तक पढ़ा है. उसने कई राज्यों में में फैक्ट्रियों में काम किया है.

सीधी के पुलिस अधीक्षक डॉ रविन्द्र वर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए बताया, “मुख्य आरोपी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है. आरोपी के पास 18 मोबाइल बरामद हुए हैं जिसमें पांच मोबाइल पीड़िताओं के हैं. बाकी के फोन चोरी के हैं. सूरत में जिस फैक्ट्री में वो काम करता था वहां नाईट शिफ्ट में कर्मचारियों के फोन चुरा लेता था. इसके ऊपर चोरी की एफ़आईआर भी दर्ज है.”

डॉ रविन्द्र वर्मा ने यह भी बताया, “राज्य साइबर सेल को हमारी तरफ से एक पत्र गया है. जिसमें हमने इस ऐप को बंद करने की मांग की है. राज्य सरकार की तरफ से भारत सरकार को भी एक पत्र गया है जिसमें इस ऐप को प्ले स्टोर से हटाने के लिए निवेदन किया गया है. इसके लिए एक मीटिंग भी ऑर्गेनाइज़ की जा रही है जिससे यह ऐप प्ले स्टोर से हटाया जा सके. आरोपी ने पाँचों के साथ एक ही एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया है.”

"आरोपी के पास मिले मोबाइल की कॉल डिटेल के अनुसार उसने अप्रैल महीने से इन घटनाओं को अंजाम दिया है. पुलिस अधीक्षक के अनुसार अभियुक्त के मोबाइल की हिस्ट्री और कॉल डिटेल के अनुसार एक पैटर्न समझ आया कि उसने एक दिन में कई अनजान नम्बरों पर फोन किया. पर पांच छात्राएं ही उसके चंगुल में फंस सकीं. अगर और भी छात्राएँ सामने आती हैं तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे."

पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा ने कहा, “एसआईटी का गठन हो गया है. जल्द ही चालान हो जाएगा. हमारे सुपर विज़न में पूरा मामला चल रहा है. जो आरोपियों पर अभी धाराएँ लगी हैं उसके अनुसार उन्हें उम्र कैद तक की सज़ा का प्रावधान है. हम साइबर अपराध को लेकर पहले भी जागरूक करते आये हैं. अभी भी कर रहे हैं. नई तकनीक निरंतर बढ़ रही है. जिस तरह इसका उपयोग बढ़ रहा है उस तरह से इसके दुष्प्रभाव भी देखे जा रहे हैं. लोगों को जागरूक होने की ज़रूरत है.”

एसआईटी का नेतृत्व कुसमी एसडीपीओ रोशनी सिंह ठाकुर कर रही हैं. रोशनी सिंह ठाकुर ने बीबीसी से बात करते कहा, “अबतक की जांच के अनुसार आरोपी दो दिन से ज़्यादा किसी लड़की को फोन नहीं करता था. जिन नम्बरों पर आरोपी ने फोन किये उनमें 10 से 15 लड़कियों ने हमें बताया कि हमें कॉल आया था लेकिन हमने उसे इंटरटेन नहीं किया. आरोपी लड़कियों के जो फोन लेता था उनके फोन से भी नम्बर निकालकर दूसरी लड़कियों को फोन करता था. उसका कोई सेट पैटर्न नहीं था. किसी का मोबाइल इस्तेमाल करता था तो किसी का नम्बर. आरोपी अक्सर शाम के वक़्त ही फोन करता था ताकि लड़कियों को अँधेरा होने पर घटनास्थल तक ले जाने के दौरान किसी की नज़र नहीं पड़े.”

इस तरह के मामलों में साइबर एक्सपर्ट की क्या है राय

साइबर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों को भी ख़ुद को बदलना होगा

साइबर सिक्युरिटी और डिजिटल एविडेंस एक्सपर्ट एडवोकेट अक्षय वाजपेयी बीबीसी को बताते हैं, “आजकल लोग सोर्स पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जल्दबाज़ी में लोग बिना जांच पड़ताल के किसी भी सोर्स पर भरोसा कर ले रहे हैं जिसका फ़ायदा अपराधी उठाते हैं. अगर ये छात्राएं उस फोन कॉल से स्कॉलरशिप के बारे में सोर्स पता कर लेतीं तो शायद बच सकती थीं.”

उन्होंने यह भी कहा, "वॉयस मैसेज में आवाज़ चेंज करके बहुत ऑनलाइन फ़्रॉड पैसे के लेनदेन को लेकर हो रहे हैं. अभी ये घटनाएँ थोड़ा ज़्यादा बढ़ी हैं. लोगों को टेक्नॉलाजी के साथ खुद को बदलना पड़ेगा. स्कूल कॉलेज में इसके जागरूकता के ज़्यादा से ज़्यादा सेशन कराए जाएँ तभी स्टूडेंट्स इस तरह के धोखाधड़ी से बच सकते हैं."

अक्षय वाजपेयी ऐसे ऐप्स के चलन पर कहते हैं, “इस तरह के ऐप जल्दी बंद नहीं होते हैं. इसका प्रीमियम लेना पड़ता है. इनके सब्स्क्रिप्शन ज़्यादा महंगे नहीं होते हैं. इन्हें चलाना काफी आसान होता है. इसलिए इस तरह की कॉल या फ्राड से बचने के लिए वेरीफ़ाई ज़रूर करें.”

क्या बोले अभियुक्त के परिवार के लोग?

अभियुक्त का टूटा हुआ घर
इमेज कैप्शन, अभियुक्तों के घरों पर बुलडोज़र चलाया गया है

मुख्य अभियुक्त ने जिस जगह घटना को अंजाम दिया था वहां से कुछ दूर पर उनकी ससुराल है. उनके ससुर ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त के साथ कहा, “उनका (आरोपी) स्वभाव अच्छा नहीं था इसलिए मेरी बेटी दो साल से मायके में ही आकर रह रही है. उसकी 5-6 साल की बिटिया भी है. बेटी को ससुराल में ढंग से सोने की चारपाई तक नहीं है. मारता-पीटता था तो बिटिया मायके आ गयी. बहुत बार लेने आये पर बिटिया गयी नहीं तो वो भी कभी यहाँ, कभी अपने घर, तो कभी नौकरी ऐसे ही आता जाता रहता था.”

दूसरे अभियुक्त संदीप और राहुल जो सगे भाई हैं. इनके पिता मिट्टी के घड़े बनाने का काम करते हैं. उनका दावा है कि उनके बेटों को फंसाया गया है. दोनों भाई आठवीं-नौवीं तक पढ़े हैं.

इनके पिता बुलडोज़र से टूटा हुआ घर दिखाते हुए कहते हैं, “मेरे बच्चों को पकड़ने के एक हफ्ते के भीतर बुलडोज़र चला दिया. हम मज़दूर आदमी है एक छोटा ठिकाना बनाया था वो भी गिरा दिया. हमारे लड़कों का बस इतना कुसूर है कि उन्होंने मुख्य अभियुक्त से कम पैसों में दो मोबाइल ख़रीद लिए थे. बस इसलिए पुलिस पकड़ ले गयी. उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं वो ऐसा काम कभी नहीं करेंगे.”

इस घटना के बाद क्या बोले स्थानीय लोग

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घटना के बाद से खासकर लड़कियों में अपनी पढ़ाई छूट जाने का डर है. क्योंकि रेप जैसी घटनाएँ होने के बाद सबसे ज़्यादा बंदिशें लड़कियों पर लग जाती हैं.

गर्वनमेंट कॉलेज जीडीसी से परास्नातक की पढ़ाई कर चुकीं ज्योति पटेल कहती हैं, “इस घटना के बाद से कई लड़कियों के घर में पढ़ाई के लिए रोक लग चुकी है. लड़कियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है. इनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती है इसलिए ये सरकारी योजना के बहकावे में आ जाती हैं.”

“दूसरी लड़कियाँ ऐसी घटनाएं सुनकर डरी हुई हैं. वो खुलेपन से पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं. ऐसी घटना से पढ़ाई में बहुत डिस्टर्ब होता है. जल्दी शादी करने की बात की जाती है. मैं तो यही कहूंगी जिस तरह से आरोपी ने घटना को अंजाम दिया है उसको कठोर से कठोर सज़ा मिले.”

गांधी ग्राम की ज़िला पंचायत सदस्य पूजा सिंह कुशराम खुद गोंड समुदाय से आती हैं.

पूजा ने कहा, “मैं आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हूँ और जानती हूँ इनके यहाँ कितनी ग़रीबी और अशिक्षा होती है. इस घटन में ये दोनों ही पहलू सामने आये. पहला लोगों को तकनीक की समझ नहीं तो फंस गये. दूसरा ग़रीबी इतनी ज़्यादा कि स्कॉलरशिप उनके लिए ज़रूरी हो जाती है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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