राजस्थान: मस्जिद के अंदर मौलवी की हत्या, तीन दिन बाद भी कोई गिरफ़्तारी नहीं- ग्राउंड रिपोर्ट

मस्जिद

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इमेज कैप्शन, इसी मस्जिद में मौलाना की हत्या की गई
    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, अजमेर से लौटकर

राजस्थान में अजमेर के रामगंज थाना इलाक़े की एक मस्जिद के अंदर मौलवी की डंडों से पीट-पीट कर हत्या होने के तीन दिन बीतने के बाद भी पुलिस अभियुक्तों का कोई पता नहीं लगा सकी है.

हालांकि पुलिस दावा कर रही है कि इस मामले में जल्द गिरफ़्तारी होगी, लेकिन इस पूरी घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष देखा जा रहा है.

एक बुजुर्ग और कुछ बच्चे अजमेर के रामगंज थाने की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं.

कुर्ता पायजामा पहने इन सभी के चेहरों पर मायूसी है.

बुजुर्ग अपने भतीजे और बच्चे अपने मौलाना माहिर की हत्या के मामले में बयान दर्ज करवाने आए हैं. यह सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं.

मौैलाना मोहम्मद माहिर, जिनकी 27 अप्रैल को हत्या की गई.

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इमेज कैप्शन, मौैलाना मोहम्मद माहिर, जिनकी 27 अप्रैल को हत्या की गई.

मस्जिद में मौलाना की हत्या

रामगंज थाने से क़रीब तीन किलोमीटर की दूरी पर कंचन नगर में मोहम्मदी मस्जिद है. मस्जिद के सामने खाली ज़मीन है और अंदर सादा कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मी बैठे हुए हैं.

क़रीब चार सौ गज ज़मीन पर बनी मस्जिद परिसर में प्रवेश करते ही सीधे हाथ की ओर मस्जिद बनी है और उसके ठीक सामने एक कमरा बना हुआ है. कमरे पर पुलिस ने ताला लगाया हुआ है, किसी का भी कमरे में प्रवेश बंद है.

इसी कमरे में 27 अप्रैल की देर रात करीब ढाई बजे मौलाना मोहम्मद माहिर की डंडों से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई.

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शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन मौलाना का शव उत्तर प्रदेश ले गए, जहां 28 अप्रैल को उन्हें सुपुर्द ए ख़ाक कर दिया गया है.

मौलाना की हत्या के बाद अजमेर कलेक्टर कार्यालय पर मुस्लिम समाज ने प्रदर्शन कर अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की मांग की. जबकि, 28 अप्रैल की सुबह मृतक मौलाना के चाचा और मौलाना के शागिर्द रामगंज थाने अपने बयान दर्ज करवाने पहुंचे.

रामगंज थाना प्रभारी रविंद्र कुमार खींची कहते हैं, "27 की सुबह क़रीब तीन बजे थाने में सूचना मिली कि मोहम्मद माहिर मौलवी की हत्या कर दी गई है. हम मौक़े पर पहुंचे, जानकारी जुटाने पर पता चला कि तीन अज्ञात व्यक्ति आए और उन्होंने लकड़ियों से पीट-पीट कर हत्या कर दी."

मृतक मौलाना के चाचा उत्तर प्रदेश से आए हैं. इनकी उम्र 50 साल है. पुलिस थाने में अपने बयान दर्ज कराने के लिए अजमेर रुके हुए हैं.

उन्होंने बताया, "हम चाहते हैं कि अपराधी पकड़े जाएं और उन्हें सख्त सज़ा दी जानी चाहिए. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि अपराधी पकड़े जाएंगे लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है."

मोहम्मदी मस्जिद के पास ही रहने वाले शोएब और मौलाना से परिचित शोएब कहते हैं, "हमारी मांग है कि जल्द ही हत्यारों की गिरफ्तारी हो. पीड़ित परिवार को दो करोड़ रुपए का मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए."

रामगंज थाना प्रभारी रविंद्र कुमार खींची

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इमेज कैप्शन, थाना रामगंज प्रभारी रामगंज थाना प्रभारी रविंद्र कुमार खींचीरविंद्र

तीसरे दिन भी पुलिस खाली हाथ

मौलाना मोहम्मद माहिर की हत्य़ा के तीसरे दिन 29 अप्रैल तक भी पुलिस के हाथ अभियुक्तों को लेकर कोई साक्ष्य नहीं लगा है.

रामगंज थाना प्रभारी रविंद्र कुमार खींची कहते हैं, "मौक़े पर एफएसएल टीम और डॉग स्कवॉड बुला कर साक्ष्य जुटाए गए हैं."

"थाने पर एफ़आईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. तीनों की गिरफ्तारी होने पर हत्या के कारणों और अन्य लोगों की संलिप्तता की जानकारी मिल पाएगी."

"सीसीटीवी कैमरा और तकनीकी सहयोग से अभियुक्तों के बारे में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं."

क्या इस हत्याकांड में सांप्रदायिकता से जुड़ी जानकारी सामने आई है? इस सवाल पर थाना प्रभारी खींची कहते हैं, "सांप्रदायिक घटना वाली कोई बात सामने नहीं आई है और ना ही अभी तक इस तरह के कोई तथ्य सामने आए हैं."

मस्जिद की देखरेख कर रहे आसिफ़ ख़ान कहते हैं, "यदि पुलिस जल्द गिरफ्तार नहीं करती है तो फिर समाज के लोगों की राय से क़दम उठाएंगे और धरना दिया जाएगा. घटना के बाद से ही पूर्व के मौलाना ज़ाकिर साहब के घर बच्चे रह रहे हैं. अब मस्जिद में कोई नहीं रहता है, लोग सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने आते हैं."

चश्मदीद

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इमेज कैप्शन, मस्जिद परिसर में मौजूद इस कमरे में ही मौलाना अपने छात्रों के साथ सो रहे थे, जब उनकी हत्या की गई.

चश्मदीद ने क्या कहा

मौलाना मोहम्मद माहिर के साथ ही मस्जिद परिसर में बने कमरे में उत्तर प्रदेश के छह नाबालिग़ बच्चे भी साथ रहते थे.

घटना के वक्त भी मौलाना माहिर और सभी बच्चे साथ उसी कमरे में सो रहे थे.

रामगंज पुलिस थाने में अपने बयान दर्ज करवाने के बाद साजिद (बदला हुआ नाम) कहते हैं, "दो साल से मस्जिद में ही पढ़ाई करते हैं और यह मेरा तीसरा साल है."

साजिद बताते हैं कि, "हम सब खाना खा कर मौलाना साहब के साथ ही कमरे में सो रहे थे. अचानक कुछ लोग आए और मौलाना साहब को डंडे मारे तो हम सब बच्चे आवाज़ सुन कर उठ गए."

घटना को याद करते हुए साजिद कहते हैं, "वह तीन लोग थे. तीनों ने काले कपड़े पहने हुए थे और चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था. हाथों में ग्लव्स पहने हुए थे और उनके हाथों में डंडे थे."

घटना की जानकारी देते हुए साजिद कहते हैं, "उन्होंने हम बच्चों को धमकी दे कर कमरे से बाहर निकाल दिया और उन तीन में से एक शख्स हमारे साथ खड़ा रहा. उस शख्स ने हमें धमकी दी कि अगर आवाज़ की और शोर मचाया तो हमें भी जान से मार देंगे."

"उनमें से एक गैलरी में गया और फिर कुछ देर में पीछे की दीवार फांद कर सभी भाग गए. हमसे उम्र में बड़े दो बच्चों ने मौलाना साहब को देखा और हम छोटे बच्चे पड़ोसियों को बुलाने चले गए."

"जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस मौलाना साहब के शव को ले गई."

मृतक मौलाना माहिर के चाचा अकरम

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मौलाना का मिलनसार व्यवहार

मस्जिद के पास ही रहने वाले एक शख़्स मौलाना मोहम्मद माहिर की एक तस्वीर हमें दिखाते हैं. इस तस्वीर में मौलाना सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहने हुए हैं, गले में फूलों की माला, चेहरे पर बड़ी दाढ़ी और शांत मिजाज नजर आता है.

मृतक मौलाना माहिर के चाचा अकरम नम आंखों और हल्की आवाज़ में कहते हैं, "हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. मौलाना साहब ने कभी किसी तरह की धमकी या परेशानी के बारे में कभी नहीं बताया. हमारा गांव गंगा किनारे बसा हुआ है, बहुत थोड़े लोग हैं और बहुत खुशहाल गांव है हमारा."

मौलाना माहिर के परिचित शोएब कहते हैं, "मौलाना साहब अपने काम से काम रखते थे. हिंदू और मुसलमान सभी के साथ उनका अच्छा व्यवहार था और उनका सबसे मिलनसार व्यवहार था."

मोहम्मदी मस्जिद की देखरेख करने वाले आसिफ़ ख़ान बीबीसी से कहते हैं, "मौलाना माहिर का अब तक रहे तीन मौलाना में सबसे अच्छा व्यवहार था. वह सभी के साथ अच्छे से रहते थे और सभी को नेक राह पर चलने की सलाह देते थे."

मृतक मौलाना से पहले शोएब के पिता मस्जिद के मौलाना थे.

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इमेज कैप्शन, मृतक मौलाना से पहले शोएब के पिता मस्जिद के मौलाना थे.

कौन थे मौलाना माहिर

मौलाना मोहम्मद माहिर उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले से क़रीब चालीस किलोमीटर दूर साहबाद तहसील के रायपुर गांव के रहने वाले थे.

ईद पर अपने गांव गए मौलाना माहिर बीते आठ दिन पहले ही अजमेर लौटे थे.

कई साल पहले छात्र जीवन में अजमेर की इसी मस्जिद में स्टूडेंट बन कर उन्होंने धार्मिक शिक्षा ली. वह वापस उत्तर प्रदेश लौट गए थे और बीते क़रीब सात साल पहले फिर अजमेर लौटे थे.

शोएब बताते हैं, "कई साल पहले मौलाना साहब मदरसे के छात्र हुआ करते थे, वह तब से परिचित हैं. छह महीने पहले हमारे पिता ज़ाकिर साहब की मृत्यु हो गई. उनके बाद से मोहम्मद माहिर मौलाना बने और अच्छे से संचालन कर रहे थे."

मौलाना माहिर के चाचा कहते हैं, "मोहम्मद मौलाना तीन भाई और तीन बहन हैं. बड़ी बहन की शादी हो गई है."

वह बताते हैं, "मौलाना साहब की अभी शादी भी नहीं हुई थी और रिश्ते की बातचीत चल रही थी. उनके पिता असलम खेतीबाड़ी करते हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही वह सदमे में हैं और खाट पर हैं."

आसिफ़ ख़ान बताते हैं, "इनसे पहले ज़ाकिर साहब मौलाना थे उन्होंने ही मोहम्मद माहिर को बुलवाया था और यह उन्हीं के शागिर्द थे."

बच्चों को देते थे धार्मिक शिक्षा

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बच्चों को धार्मिक शिक्षा देते थे

मस्जिद में बने कमरे में मौलाना के साथ रह रहे बच्चे बीबीसी से बताते हैं, "मौलाना साहब हमें कुरान शरीफ़ सिखाते थे. जिनका मदरसा है उन्हीं ने मौलाना साहब को पढ़ाया था."

आसिफ़ ख़ान कहते हैं, "मौलाना माहिर बच्चों को इस्लाम के बारे में धार्मिक शिक्षा देते थे. बच्चे सुबह पांच बजे उठते थे फिर नमाज पढ़ते थे. इसके बाद नाश्ता कर फिर सुबह सात से ग्यारह बजे तक पढ़ते थे. दो घंटे रेस्ट के बाद फिर पढ़ाई करते थे. जबकि, जुम्मे रात को छुट्टी रहती थी."

आसिफ़ खान बताते हैं, "मौलाना लोगों को इस्लाम की जानकारी देते और नेक राह पर चलने के लिए प्रेरित करते थे."

क्या कभी किसी तरह की धमकी, परेशानी या विवाद का ज़िक्र मौलाना माहिर ने किया था. इस सवाल के जवाब में उनके साथ रहने वाले बच्चे और उनके चाचा इनकार करते हैं.

लेकिन, आसिफ ख़ान कहते हैं, "एक बार मौलाना साहब ने कहा था कि आसिफ़ भाई मुझे लोग परेशान कर रहे हैं अगर आप कहोगे तो मैं चला जाऊंगा. स्थानीय लोग मुझ पर उंगली उठाते हैं, क्योंकि मैं लोगों को धर्म की बात सिखाता हूं."

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मस्जिद की जमीन से जुड़ा विवाद

सरस दूध प्लांट के नज़दीक कंचन नगर में क़रीब चार सौ गज में बनी मस्जिद की दीवार के पीछे का खाली प्लॉट और बसी कॉलोनी दौराई ग्राम पंचायत में आती है.

शोएब बताते हैं, "मस्जिद जिस ज़मीन पर बनी है यह ज़मीन एक बाबा की हुआ करती है. उनके इंतकाल के बाद आसिफ़ भाई इसकी देखरेख करते हैं."

"कई बार चर्चाओं में रहा है कि इस मस्जिद कि कुछ लोग मस्जिद की इस ज़मीन को बेचने का प्रयास कर रहे हैं."

मस्जिद की देखरेख कर रहे आसिफ़ खान कहते हैं, "यहां एक बाबा मोहम्मद हुसैन थे, यह ज़मीन उन्हीं के नाम से रजिस्टर्ड है. यहां मस्जिद की कोई कमेटी नहीं है. मैं मस्जिद की देखरेख करता हूं."

तीस साल के मौलाना मोहम्मद माहिर की हत्या के बाद से ज़िला कलेक्टर कार्यालय के बाहर कुछ पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. स्थानीय लोगों में रोष है. रामगंज थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है. लेकिन, तीन दिन बाद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में रोष है.

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